आजकल प्रोसेस्ड और जंक फूड जैसे खराब खानपान, फिजिकली एक्टिव न रहने और स्ट्रेस के कारण मोटापा अब एक आम समस्या बन चुकी है। मोटापा केवल शरीर की बनावट को प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। फैटी लिवर भी इन्हीं बीमारियों में से एक है। जब शरीर में ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो उसका असर लिवर पर भी पड़ता है और धीरे-धीरे लिवर में फैट जमा होने लगता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या मोटापा फैटी लिवर का कारण है? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और चिकित्सीय एंडोस्कोपी के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक, डॉ. शरद मल्होत्रा से बात की।
क्या मोटापा फैटी लिवर का कारण है?
डॉ. शरद मल्होत्रा कहते हैं, ''जब शरीर में ज्यादा कैलोरी और फैट जमा होता है तो उसका एक हिस्सा लिवर में भी जमा होने लगता है। धीरे-धीरे यह स्थिति लिवर में सूजन और क्षति का कारण बन सकती है। मोटापा केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है। जब शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होती है तो वह मेटाबॉलिक असंतुलन पैदा करती है, जिससे लिवर में फैट जमा होने लगता है और फैटी लिवर की स्थिति बन जाती है।''
American Asociation for the Study of Liver Diseases के Hepatology जर्नल में साल 2010 में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार, मोटापा फैटी लिवर का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD/MASLD) होने का खतरा सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। Obesity Reviews में साल 2016 में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में यह पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में फैटी लिवर होने का जोखिम लगभग 3.5 गुना तक बढ़ सकता है।
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''आजकल फैटी लिवर केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि 25-40 साल के युवाओं में भी यह तेजी से दिखाई दे रही है, जिसका मुख्य कारण मोटापा, जंक फूड और फिजिकल एक्टिविटी की कमी है।''
मोटापे का लिवर पर असर
1. शरीर में फैटी एसिड बढ़ना
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''जब शरीर में ज्यादा फैट जमा होता है तो फैटी एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। ये फैटी एसिड लिवर तक पहुंचकर वहां जमा होने लगते हैं।'' Progress in Lipid Research में साल 2013 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ''नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD/MASLD) को बढ़ाने में सैचुरेटेड फैट की सबसे बड़ी भूमिका होती है। इस स्टडी के अनुसार, जब लिवर में ट्राइग्लिसराइड के रूप में फैट जमा होता है, तो वह असल में लिवर का खुद को बचाने का एक सुरक्षा तंत्र है ताकि अन्य जहरीले तत्व नुकसान न पहुंचा सकें। असली समस्या सैचुरेटेड फैटी एसिड से होती है, जो लिवर की कोशिकाओं में सीधी सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं। सरल शब्दों में, सिर्फ फैट का जमा होना उतना घातक नहीं है जितना सैचुरेटेड फैट के कारण कोशिकाओं में होने वाली जलन और नुकसान।''
2. इंसुलिन रेजिस्टेंस
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं कि मोटापे के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पैदा हो सकती है। इससे शरीर की शुगर और फैट मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया प्रभावित होती है और लिवर में फैट जमा होने लगता है। जब शरीर में बहुत ज्यादा फैट जमा हो जाता है, तो शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन पर रिस्पॉन्ड देना बंद कर देती हैं। इससे खून में शुगर का लेवल बढ़ जाता है, जो आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

क्या वजन कम करने से फैटी लिवर ठीक हो सकता है?
डॉ. शरद मल्होत्रा बताते हैं, ''हेल्दी लाइफस्टाइल फैटी लिवर को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है। रोजाना एक्सरसाइज के साथ योग, वजन कंट्रोल और बैलेंस डाइट से कई मरीजों में लिवर की स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा गया है।'' डॉ. शरद मल्होत्रा का मानना है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। यदि व्यक्ति वजन 5-10 प्रतिशत तक कम कर ले, जंक फूड और शुगर कम करे, एक्सरसाइज करे, बैलेंस डाइट ले, तो लिवर में जमा फैट धीरे-धीरे कम हो सकता है।
डॉ. शरद मल्होत्रा कहते हैं, ''फैटी लिवर को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है। शुरुआती स्टेज में यह केवल फैट जमा होने तक सीमित रहता है, लेकिन समय के साथ यह सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस तक पहुंच सकता है।''
क्या कहती है रिपोर्ट?
Current Obesity Reports में साल 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शरीर के वजन में 7-10% की कमी लाने से लिवर की चर्बी, सूजन और फाइब्रोसिस में सुधार होता है। इसके लिए कम कैलोरी वाली डाइट (जैसे मेडिटेरेनियन डाइट) और नियमित एक्सरसाइज (एरोबिक या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग) जरूरी हैं। वजन कम करना न केवल लिवर के स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि हार्ट डिजीज के जोखिम को भी कम करता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर किसी व्यक्ति को पेट के दाहिने हिस्से में अचानक दर्द उठता है या किसी तरह का भारीपन महसूस होता है तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, डॉ. शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि आजकल की लाइफस्टाइल में व्यक्ति को 25 की उम्र के बाद साल में 1 बार लिवर फंक्शन का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए, इससे लिवर की स्थिति का सही पता चलता है।

निष्कर्ष
मोटापा और खराब लाइफस्टाइल फैटी लिवर के मुख्य कारण हैं, जो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी एसिड बढ़ाकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। डॉ. शरद मल्होत्रा और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, वजन में 7-10% की कमी, बैलेंस डाइट और नियमित एक्सरसाइज से इस स्थिति को शुरुआती स्टेज में पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। समय पर जांच और वजन कंट्रोल न केवल लिवर बल्कि हार्ट डिजीज से बचने के लिए भी जरूरी है।
FAQ
कैसे पता करें कि फैटी लिवर हो गया है?
किसी भी व्यक्ति में फैटी लिवर हो गया है, यह जानने के लिए ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड या कभी-कभी सीटी स्कैन करवाने की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर आपके लक्षणों को जानने के बाद उचित टेस्ट की सलाह देते हैं।क्या हर मोटे व्यक्ति को फैटी लिवर होता है?
हर मोटे व्यक्ति को फैटी लिवर नहीं होता, लेकिन मोटापे वाले लोगों में इसका जोखिम सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। हालांकि, समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
फैटी लिवर के अधिकतर मामलों में शुरुआत में कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। कुछ लोगों में थकान, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है।फैटी लिवर की जांच कैसे की जाती है?
फैटी लिवर का पता अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट (लिवर फंक्शन टेस्ट) या स्कैन से लगता है। डॉक्टर आपके लक्षणों को जानने के बाद उचित टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।क्या पतले लोगों को फैटी लिवर हो सकता है?
पतले लोगों को भी फैटी लिवर हो सकता है, यह जरूरी नहीं है कि सिर्फ मोटा दिखने वाला व्यक्ति ही फैटी लिवर का शिकार हो। फैटी लिवर होने का संबंध व्यक्ति के मोटे या पतले होने से नहीं होता है।
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Apr 02, 2026 18:10 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 02, 2026 18:10 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 02, 2026 18:10 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra