Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

एंडोकार्डिटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, पहचान और इलाज के तरीके डॉक्टर से

एंडोकार्डिटिस एक बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन है, जिसमें हार्ट के वाल्व और अंदरूनी परत में सूजन आने लगती है। हालांकि यह बीमारी कम सामान्य हैलेकिन जो मरीज इससे संक्रमित हैं, उसके लिए गंभीर हो सकती है। अगर समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह जानलेवा भी हो सकती है। एंडोकार्डिटिस की बीमारी का रिस्क दांतों और मुंह की साफ-सफाई न रखने से बढ़ सकता है।

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Cleveland Clinic के अनुसार, हार्ट में वाल्व और चैंबर्स के अंदर की परत को एंडोकार्डियम कहते हैं, जिसमें अगर बैक्टीरिया के कारण इंफेक्शन होने लगे, तो इसकी अंदर की परत में सूजन आने लगती है। अक्सर शरीर में बैक्टीरिया ब्लड के साथ मिलकर हार्ट के कमजोर हिस्सों में चिपकने लगते हैं, इसे एंडोकार्डिटिस कहा जाता है। इसमें हार्ट की अंदरूनी परत में कुछ उभार या गुच्छे बनने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में वेजिटेशन कहा जाता है। जैसे-जैसे हार्ट की अंदरूनी परत में सूजन बढ़ने लगती है, तो वेजिटेशन आसपास के हार्ट के टिश्यू को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। धीरे-धीरे हार्ट के वाल्व को गंभीर नुकसान पहुंचने लगता है और वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाते। यह कंडीशन काफी गंभीर होती है, जिसके बारे में जागरूकता जरूरी है। एंडोकार्डिटिस के लक्षणों, कारणों, पहचान के तरीकों और इलाज की पूरी जानकारी लेने के लिए हमने Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist at Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।

एंडोकार्डिटिस के आंकड़ों पर एक नजर

BMC Cardiovascular Disorders में प्रकाशित लेख के अनुसार, एंडोकार्डिटिस पर ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों का इस्तेमाल करके 1990 से लेकर 2021 तक स्टडी की गई है। इस स्टडी में 204 देशों में एंडोकार्डिटिस के नए मामले और मृत्यु दर पर रिसर्च की गई थी। इस रिसर्च में पाया गया कि एंडोकार्डिटिस के कुल मामलों में करीब 14 फीसदी बढ़ोतरी हुई है और नए मामलों में 34 फीसदी तक वृद्धि हुई थी और मृत्यु के मामलों में 29% तक बढ़ोतरी हुई थी। अगर महिलाओं की बात करें, तो उनमें नए मामलों की अधिकता थी, जबकि पुरुषों में दिव्यांगता ज्यादा पाई गई। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि विकसित देशों में एंडोकार्डिटिस की दर में गिरावट आई जबकि विकासशील देशों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई थी।

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एंडोकार्डिटिस के लक्षण क्या हैं?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “एंडोकार्डिटिस के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं क्योंकि हार्ट के अंदरूनी भाग में बैक्टीरिया का हमला उसके प्रकार पर निर्भर करता है। कई बार लक्षण ऐसे होते हैं, जो कम ही देखने को मिलते हैं, इसलिए इसके गंभीर और कम दिखने वाले लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है।"

कम दिखने वाले लक्षण

  1. बिना वजह तेजी से वजन कम होना
  2. पेशाब में ब्लड आने का मतलब है कि बैक्टीरिया इंफेक्शन किडनी तक पहुंच चुका है।
  3. बाईं ओर की पसलियों के नीचे हल्का दर्द रहना
  4. पैरों के तलवों या हथेलियों पर लाल, बैंगनी या भूरे रंग के बिना दर्द वाले धब्बे दिखना
  5. स्किन, आंखों के सफेद हिस्से या मुंह के अंदर बैंगनी, लाल या भूरे रंग के दाने या धब्बे दिखना

सामान्य दिखने वाले लक्षण

  1. जोड़ों और मांसपेशियों में लगातार जकड़न या दर्द महसूस होना
  2. सांस लेते समय सीने में दर्द या छाती में दर्द महसूस होना
  3. तेज बुखार और कंपकंपी के साथ ठंड लगना
  4. सोते हुए शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आना
  5. थोड़ा सा काम करते हुए भी सांस फूलना
  6. पैरों और टखनों पर सूजन आना
  7. हार्टबीट में मर्मर (murmur) की आवाज सुनाई देना, जिसे डॉक्टर स्टेथोस्कोप के जरिए पहचान सकते हैं।

किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है?

Mayo Clinic के अनुसार, एंडोकार्डिटिस होने का खतरा उन लोगों को भी हो सकता है, जिन्हें वाल्व खराबी की कोई समस्या नहीं है। इसके मुख्य रिस्क फैक्टर्स कुछ इस तरह हैं।

  1. एंडोकार्डिटिस का रिस्क 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है।
  2. जिन लोगों को प्रोस्थेटिक हार्ट वाल्व लगा है, उनमें बैक्टीरिया चिपकने की संभावना ज्यादा होती है।
  3. रुमैटिक फीवर या किसी पुराने इंफेक्शन का हार्ट की वाल्व को नुकसान पहुंचाने पर एंडोकार्डिटिस का रिस्क बढ़ सकता है।
  4. जिन लोगों को जन्म से हार्ट की समस्या होती है, उनमें एंडोकार्डिटिस का रिस्क बढ़ सकता है।
  5. जिन मरीजों को पेसमेकर लगा है, उनमें बैक्टीरिया चिपकने का खतरा काफी ज्यादा हो सकता है।
  6. जो दांतों को साफ करने के लिए ब्रश और फ्लॉस का इस्तेमाल नहीं करते, उनके मुंह में बैक्टीरिया पनप सकते हैं और मसूड़ों में कट लगने पर ब्लड में जा सकते हैं। कई मामलों में डेंटल प्रोसेस में भी बैक्टीरिया ब्लड में मिल सकते हैं।
  7. जिन मरीजों पर लंबे समय तक कैथेटर का इस्तेमाल किया जाता है, उनमें भी एंडोकार्डिटिस होने का रिस्क बढ़ सकता है।
  8. जो लोग ड्रग्स जैसी नशीली चीजों का इस्तेमाल करने के लिए इंजेक्शन लगाते हैं, उनमें एंडोकार्डिटिस का खतरा बढ़ सकता है।

एंडोकार्डिटिस होने के क्या कारण हैं?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "आमतौर पर एंडोकार्डिटिस बैक्टीरिया या फंगस इंफेक्शन के कारण हो सकता है। वैसे तो शरीर का इम्यून सिस्टम ब्लड में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, लेकिन कई बार स्किन, मुंह, गले या आंतों में मौजूद बैक्टीरिया ब्लड के जरिए हार्ट में पहुंच जाते हैं और वहां जाकर हार्ट के किसी भी कमजोर हिस्से में जम जाते हैं। इस वजह से एंडोकार्डिटिस होने का रिस्क बढ़ जाता है। कई मामलों में देखा गया है कि जो लोग मुंह की साफ-सफाई नहीं रखते, उनमें एंडोकार्डिटिस का खतरा ज्यादा हो सकता है।"

एंडोकार्डिटिस से होने वाली जटिलताएं

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "अगर एंडोकार्डिटिस का समय पर इलाज न किया जाए, तो हार्ट ब्लॉक, हार्ट फेलियर, लीकी हार्ट वाल्व, सेप्सिस, स्ट्रोक और जान जाने तक भी खतरा हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों की समय पर पहचान करके इलाज कराना बहुत जरूरी है।"

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एंडोकार्डिटिस की पहचान कैसे कर सकते हैं?

Cleveland Clinic के अनुसार, एंडोकार्डिटिस की पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

  1. बैक्टीरियल कल्चर टेस्ट में ब्लड लेकर यह चेक किया जाता है कि ब्लड में कौन-सा बैक्टीरिया या फंगस मौजूद है, ताकि सही एंटीबायोटिक चुनी जा सके।
  2. कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट के जरिए सफेद ब्लड सेल्स की संख्या चेक की जाती है। अगर संख्या बढ़ी है, तो इंफेक्शन होने का रिस्क बना हो सकता है।
  3. सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट में सूजन के लेवल को मापा जाता है।
  4. इकोकार्डियोग्राम में वाल्व की तस्वीरें ली जाती हैं और वाल्व के आसपास की सूजन चेक की जाती है।
  5. अगर इकोकार्डियोग्राम में तस्वीरें साफ नहीं होतीं, तो ट्रांसएसोफेगल इकोकार्डियोग्राम में मरीज के गले में पतली नली डालकर हार्ट को देखा जाता है।
  6. हार्ट एमआरआई (MRI) में हार्ट की मांसपेशियों और वाल्व की विस्तार से तस्वीरें ली जाती है ताकि सूजन की गंभीरता का पता चल सके।

इलाज के तरीके क्या हैं?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "एंडोकार्डिटिस के मरीजों का इलाज एंटीबायोटिक्स के साथ किया जाता है। एंटीबायोटिक देते हुए यह चेक किया जाता है कि एंडोकार्डिटिस किस बैक्टीरिया की वजह से हुआ है। कुछ मरीजों के इलाज में नसों के जरिए एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। आमतौर पर मरीजों को एक हफ्ते या इससे ज्यादा समय हॉस्पिटल में बिताना पड़ता है ताकि डॉक्टर यह देख सकें कि दवाई कितना असर कर रही है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज को कई हफ्तों तक IV एंटीबायोटिक्स दिए जा सकते हैं। इसके अलावा, अगर इंफेक्शन फंगस की वजह से हुआ है, तो एंटीफंगल दवाइयां देकर मरीज को ठीक किया जाता है। कुछ मरीजों को फंगल इंफेक्शन को रोकने के लिए जीवनभर दवाइयां भी लेनी पड़ सकती हैं। जिन मरीजों का इंफेक्शन के कारण वाल्व खराब हो जाता है, उन्हें हार्ट वाल्व सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। फंगल एंडोकार्डिटिस के मामले में भी सर्जरी हो सकती है।"

एंडोकार्डिटिस से बचाव के क्या उपाय हैं?

डॉ. दिबांशु कहते हैं कि एंडोकार्डिटिस से बचाव के लिए लोगों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. रोजाना अपने दांतों और मसूड़ों की देखभाल करनी चाहिए।
  2. समय-समय पर डेंटिस्ट से दांतों का चेकअप कराना चाहिए।
  3. टैटू या बॉडी पियर्सिंग बनवाते समय सुई का ध्यान जरूर रखें।
  4. हाथों को सही तरीके से धोएं।
  5. कट्स या खरोंच लगने पर इंफेक्शन से बचाव करें।
  6. अगर एंडोकार्डिटिस के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर किसी को सीने में दर्द, तेज चुभने वाला दर्द महसूस हो, लगातार बुखार बना रहे और साथ ही जोड़ों में दर्द हो, स्किन जैसे हथेलियों, पैरों पर बैंगनी रंग के धब्बे दिखने लगें, बिना वजह थकान महसूस हो और सांस फूलने लगे, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

निष्कर्ष

एंडोकार्डिटिस गंभीर बीमारी है, जिसकी जल्दी पहचान होना बहुत जरूरी है। अगर शुरुआती लक्षणों की पहचान करके समय पर इकोकार्डियोग्राम और ब्लड टेस्ट करा लिया जाए, तो दवाइयों के जरिए बचाव हो सकता है। इसके अलावा, एंडोकार्डिटिस से बचने के लिए दांतों की देखभाल और साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि इंफेक्शन से बचा जा सके। अगर शरीर में बदलाव महसूस हो रहे हों, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।

FAQ

  • क्या एंडोकार्डिटिस केवल बुजुर्गों को होता है?

    ऐसा नहीं है, एंडोकार्डिटिस किसी भी उम्र में हो सकता है। आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद रिस्क बढ़ सकता है, लेकिन जिन बच्चों को जन्मजात हार्ट की समस्या होती है या फिर जो लोग नशीली चीजों के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें भी एंडोकार्डिटिस हो सकता है।
  • क्या यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है?

    नहीं, एंडोकार्डिटिस इंफेक्शन किसी को छूने या खांसने से नहीं फैलता। यह तब होता है जब अपने ही शरीर के बैक्टीरिया ब्लडफ्लो के जरिए हार्ट तक पहुंच जाते हैं।
  • क्या एंडोकार्डिटिस के लिए सर्जरी हमेशा जरूरी होती है?

    एंडोकार्डिटिस का इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाइयों से किया जाता है। अगर मरीज का हार्ट वाल्व खराब हो जाता है या एंटीबायोटिक दवाइयां काम नहीं करतीं, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
  • क्या एंडोकार्डिटिस दोबारा हो सकता है?

    एंडोकार्डिटिस दोबारा होने का रिस्क हो सकता है। ऐसे लोगों को किसी भी छोटी सर्जरी या दांतों के इलाज से पहले डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक दवाइयां लेने की जरूरत हो सकती है।
  • एंडोकार्डिटिस से ठीक होने में कितना समय लगता है?

    एंडोकार्डिटिस बीमारी का इलाज लंबा चल सकता है। आमतौर पर मरीज को हफ्ते से लेकर महीना भर तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है। इसके इलाज में नसों के जरिए एंटीबायोटिक दिए जाते हैं। पूरी तरह रिकवर होने और कमजोरी दूर होने में कुछ महीने लग सकते हैं।

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Aneesh Rawat

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Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 16, 2026 17:59 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 16, 2026 17:59 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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