Cleveland Clinic के अनुसार, जब हार्ट के विभिन्न हिस्सों में सूजन होने लगती है, तो इसे कार्डिटिस कहते हैं। इसमें हार्ट की मांसपेशियां, हार्ट की झिल्ली या हार्ट के चैंबर्स की परत को प्रभावित कर सकती हैं। कार्डिटिस में कुछ लोगों को लक्षण दिखाई देते हैं, तो कुछ लोगों को हार्ट की सूजन अचानक पता चलती है। यह मरीज की कंडीशन पर निर्भर करती है। अगर कार्डिटिस की समस्या का समय पर इलाज न किया जाए, तो इससे शरीर में कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं। कार्डिटिस के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने Dr Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की। उन्होंने बताया कि कार्डिटिस के लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराना बहुत महत्वपूर्ण है।
कार्डिटिस कितने तरह का होता है?
कार्डिटिस को आमतौर पर तीन भागों में बांटा गया है। तीनों ही तरह के कार्डिटिस में हार्ट की विभिन्न परतों पर असर पड़ता है।
- एंडोकार्डिटिस - इसमें हार्ट के चैंबर्स और वाल्व के अंदर की परत में सूजन आ जाती है। इस केस में बैक्टीरिया ब्लड के जरिए हार्ट तक पहुंचकर वाल्व को इंफेक्ट कर देते हैं।
- मायोकार्डिटिस - इसमें हार्ट की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। सूजन के कारण हार्ट की मांसपेशियों को ब्लड पंप करने में दिक्कत आने लगती है।
- पेरिकार्डिटिस - इसमें हार्ट के चारों तरफ बनी हुई सेफ्टी झिल्ली में सूजन आ जाती है। इससे झिल्ली की दो परतें मोटी हो जाती हैं, जिससे सीने में तेज दर्द हो सकता है।

कार्डिटिस के लक्षण क्या हैं?
डॉ. दिबांशु गुप्ता कहते हैं कि कार्डिटिस के सभी टाइप में सीने में दर्द, सांस फूलना और बुखार आ सकते हैं। कार्डिटिस की पहचान और समय पर इलाज के लिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है।
- सीने में दर्द - मरीज को तेज या चुभने वाला दर्द हो सकता है। यह कार्डिटिस में बहुत ही आम लक्षण है।
- थकान - कार्डिटिस के मरीजों को पूरा दिन थकावट महसूस होती है। हार्ट के फंक्शन कम होने की वजह से थकावट हो सकती है।
- सांस फूलना - मरीज को काम न करने पर भी सांस फूलने की दिक्कत महसूस हो सकती है। इसकी वजह भी हार्ट की कार्यक्षमता का कम होना है।
- हार्टबीट का अनियमित होना - हार्ट में सूजन होने पर हार्टबीट रेगुलर महसूस नहीं होती और कई बार मरीज को हार्टबीट बहुत ज्यादा तेज महसूस होती है।
- पैरों और टखनों में सूजन - पैरों, टखनों और पंजों में तरल पदार्थ जमा होने के कारण सूजन आने लगती है।
- चक्कर आना - सिर हल्का महसूस होना और ऐसा लगना कि कभी भी बेहोशी हो सकती है।
- नियमित हार्टबीट - हार्टबीट बहुत ज्यादा तेज होना या असामान्य रूप से धड़कना
- फ्लू जैसे लक्षण महसूस होना - बुखार, गले में खराश, रात में पसीना आना, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसा महसूस हो सकता है।
- जोड़ों में दर्द - मरीज को जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है।घबराहट होने लगती है।
हार्ट में सूजन आने के क्या कारण हैं?
NIH के National Heart, Lung and Blood Institute में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हार्ट में सूजन होने के कई कारण हैं, जिसमें सबसे मुख्य वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन शामिल है। इसके अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियों में भी हार्ट में सूजन आ सकती है। ऑटोइम्यून बीमारियों में मरीज का इम्यून सिस्टम हेल्दी टिश्यू को नुकसान पहुंचाने लगता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "अगर किसी मरीज को सीने में इंजरी या डिप्रेशन, मिर्गी और कैंसर की दवाइयां लेने पर भी हार्ट में सूजन आ सकती है। जो लोग लीड (lead) जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में काम करते हैं या रहते हैं, उन्हें भी हार्ट में सूजन का रिस्क बढ़ सकता है। ये कारण कार्डिटिस के रिस्क को बढ़ा सकते हैं।"
रुमैटिक कार्डिटिस होने का कारण
WHO के अनुसार, रूमैटिक हार्ट डिजीज आमतौर पर बच्चों और युवाओं पर ज्यादा असर डालती है। दुनिया भर में करीब 5.5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं और हर साल लगभग 3.6 लाख लोगों की मौत होती है। रूमैटिक कार्डिटिस होने की वजह रूमैटिक फीवर होता है, जो गले में इंफेक्शन या स्किन इंफेक्शन से शुरू होती है। अगर इंफेक्शन का समय पर इलाज न हो, तो शरीर का इम्यून सिस्टम खासतौर पर हार्ट के वाल्व पर हमला कर देता है। इससे हार्ट के वाल्व क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। अगर किसी को बुखार और जोड़ों में दर्द हो या स्किन में दर्द रहित गांठें हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। रूमैटिक कार्डिटिस आमतौर पर भीड़भाड़ के इलाकों में ज्यादा होती है। जिन इलाकों में यह बीमारी बहुत ज्यादा होती है, वहां प्रेग्नेंट महिलाओं में यह हार्ट की बीमारी का प्रमुख कारण हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में ब्लड ज्यादा बढ़ने से हार्ट के वाल्व पर प्रेशर पड़ता है, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
किन लोगों को कार्डिटिस होने का सबसे ज्यादा रिस्क है?
Cleveland Clinic के अनुसार, हार्ट में सूजन किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन पुरुषों में यह रिस्क ज्यादा देखा गया है। इन कंडीशन्स में रोगियों को कार्डिटिस का खतरा बढ़ सकता है।
- डायबिटीज के रोगी
- एचआईवी मरीज
- कैंसर के लिए रेडिएशन थेरेपी लेना
- खाने-पीने से जुड़ी बीमारियां होने पर
- पेसमेकर या वाल्व के रिप्लेसमेंट के बाद
- ओपन हार्ट सर्जरी के मरीज
प्रेग्नेंसी में कार्डिटिस का रिस्क
Journal of Clinical Medicine 2025 के अनुसार, प्रेग्नेंसी में संक्रामक एंडोकार्डिटिस (Infectious Endocarditis) हार्ट के वाल्व या अंदरूनी परत का इंफेक्शन होता है, जो बहुत ही रेयर कंडीशन है। इसमें मां और भ्रूण दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। अगर किसी प्रेग्नेंट महिला के शरीर में बदलाव और इम्यून सिस्टम में बदलाव होते हैं, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। प्रेग्नेंसी में भी कार्डिटिस की पहचान के लिए ब्लड कल्चर और इकोकार्डियोग्राफी की जा सकती है।

कार्डिटिस की जांच के क्या तरीके हैं?
हर मरीज में हार्ट की सूजन के लक्षण अलग-अलग होते हैं, इसलिए कई बार डॉक्टर के लिए भी बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "आमतौर पर मरीज के शारीरिक लक्षणों की पहचान करके हार्ट में सूजन की पहचान की जा सकती है। इसमें हम आमतौर पर मरीज से हार्ट से जुड़ी फैमिली हिस्ट्री, कुछ समय पहले सीने में चोट या दर्द, सांस फूलने की शिकायत और बुखार जैसी समस्या के बारे में पूछते हैं। मरीज का फिजिकल चेकअप भी किया जाता है, जिसमें इन लक्षणों को चेक किया जाता है।"
- पैरों में सूजन
- स्किन पर किसी खास तरह के निशान
- बार-बार बुखार आना
- स्टेथोस्कोप से मर्मर की आवाज सुनना या अनियमित हार्टबीट चेक करना
- फेफड़ों में पानी भरने की समस्या चेक करना
डॉ. दिबांशु कहते हैं कि फिजिकल चेकअप के अलावा, मरीज की ईसीजी (ECG) और इकोकार्डियोग्राम कराए जाते हैं
चेस्ट का एक्सरे और कार्डियक एमआरआई कराए जा सकते हैं। ब्लड टेस्ट के जरिए भी शरीर में सूजन की जांच की जाती है। मरीज के टेस्ट उसकी मेडिकल कंडीशन देखकर ही किए जाते हैं।
कार्डिटिस का इलाज क्या है?
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हार्ट में सूजन का इलाज करने से पहले मरीज की कंडीशन देखी जाती है। कई मामलों में मरीज को इंफेक्शन से लड़ने के लिए दवाइयां दी जाती हैं, ताकि मरीज का आसानी से इलाज हो सके। इसमें कोर्टिकोस्टेरॉयड, एंटीबायोटिक, सूजन कम करने की दवाइयां, ब्लड को पतला करने की दवाई दी जा सकती हैं। अगर मरीज के हार्ट या फेफड़ों में पानी भर गया है, तो उसे निकाला जाता है। सर्जरी के जरिए किसी भी संक्रमित टिश्यू को निकाला जाता है। अगर मरीज की हार्टबीट को नियंत्रित करने के लिए पेसमेकर लगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में हार्ट ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता है।”
कार्डिटिस कितने समय में ठीक हो सकती है?
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "कार्डिटिस की बीमारी आमतौर पर मरीज की बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। कई मामलों में दवाई और आराम करने से मरीज में तीन से छह महीने में सुधार दिखने लगता है, तो कई बार मरीज को ठीक होने में इससे ज्यादा समय लग सकता है।
कार्डिटिस के इलाज के बाद रिकवरी में रोगी क्या करें?
NIH के National Heart, Lung and Blood Institute में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मरीज को हार्ट की सूजन का इलाज कराने के बाद रेगुलर फॉलो-अप लेना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि डॉक्टर मरीज को समय-समय पर कई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि चेक किया जा सके कि हार्ट में सूजन दोबारा तो नहीं उभर रही है। अगर मरीज रेगुलर फॉलो-अप नहीं लेता, तो बीमारी होने के चांस बढ़ सकते हैं। डॉक्टर मरीज को कुछ टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं।
- ब्लड टेस्ट के जरिए ब्लड में बैक्टीरिया का चेकअप करना
- कार्डियक एमआरआई या इकोकार्डियोग्राम कराना ताकि हार्ट में किसी भी तरह के बदलाव देखे जा सकें क्योंकि एंडोकार्डिटिस मरीजों में जीवनभर रिस्क रह सकता है, पेरिकार्डिटिस मरीजों में इलाज के 18 महीने के अंदर यह बीमारी दोबारा हो सकती है और मायोकार्डिटिस मरीजों में कई साल भी यह बीमारी दोबारा हो सकती है।
- दवाइयां रेगुलर लेना ताकि हार्ट फेलियर की समस्या न आए।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करनी चाहिए। गंभीर कंडीशन में एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए।
- लाइफस्टाइल हेल्दी रखना
- रेगुलर दांतों की साफ-सफाई जरूर करें।

हार्ट की सूजन से कैसे बचें?
डॉ. दिबांशु कहते हैं कि लोगों को हार्ट की सूजन से बचने के लिए अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने चाहिए।
- इसमें सबसे जरूरी है कि लोगों को इंफेक्शन से बचाव के लिए हाथ धोने की प्रैक्टिस जरूर अपनानी चाहिए।
- अगर किसी भी तरह की दिक्कत है, तो डॉक्टर से जरूर चेकअप कराना चाहिए।
- किसी भी तरह के इंफेक्शन को रोकने के लिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लें क्योंकि देरी होने पर इंफेक्शन हार्ट में भी फैल सकता है।
- खाने में नमक की मात्रा को कम से कम रखना चाहिए।
- कार्डिटिस के मरीजों को दांतों की साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए।
- डॉक्टर की सलाह पर फ्लू के वैक्सीनेशन भी लिया जा सकता है।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट ही लेनी चाहिए।
हार्ट अटैक और कार्डिटिस में अंतर
कार्डिटस और हार्ट अटैक दोनों ही हार्ट से जुड़ी बीमारियां है, लेकिन दोनों में काफी अंतर है। कार्डिटिस में हार्ट के टिश्यू में सूजन आ जाती है, जबकि हार्ट अटैक में हार्ट की मांसपेशियों में स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है, जो ब्लड के फ्लो में रुकावट के कारण होती है। कार्डिटिस में तेज और चुभने वाला दर्द होता है, लेकिन हार्ट अटैक में भारीपन महसूस होता है। कार्डिटिस में बैठने या आगे झुकने पर दर्द में सुधार होता है, जबकि हार्ट अटैक में इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। हार्ट से जुड़ी दोनों कंडीशन्स बिल्कुल अलग-अलग है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर सीने के आसपास दर्द महसूस हो, पैरों में सूजन बढ़ रही हो, काम न करने के बावजूद सांस फूलने लगे, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए। कार्डिटिस के मरीजों को रिकवरी के दौरान नए लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। आमतौर पर जो मरीज रिकवरी कर रहे होते हैं, उन्हें खासतौर पर अपने लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
आमतौर पर कार्डिटिस के मरीजों को हार्ट में सूजन के लक्षण जल्दी नजर नहीं आते, जिस वजह से बीमारी का देर से पता चलता है। इस वजह से कई मामलों में जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं। पूरे दिन थकान महसूस होना, सांस फूलना और सीने में दर्द जैसे लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। हार्ट में सूजन बैक्टीरियल या ऑटोइम्यून बीमारियों की वजह से हो सकती है, इसलिए लक्षणों की पहचान होने पर डॉक्टर को दिखाने में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर इलाज कराने पर कई तरह की गंभीरताओं से बचा जा सकता है।
FAQ
क्या कार्डिटिस जानलेवा हो सकती है?
हां, अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, जिस वजह से हार्ट फेलियर से लेकर कार्डियक अरेस्ट का रिस्क बढ़ सकता है।क्या सीने में दर्द होने का मतलब कार्डिटिस ही हो सकता है?
नहीं, हमेशा सीने में दर्द कार्डिटिस की समस्या नहीं हो सकता। कई मामलों में सीने में दर्द की वजह मांसपेशियों में खिंचाव भी हो सकता है क्योंकि कार्डिटिस का दर्द तेज और चुभने वाला हो सकता है।क्या कार्डिटिस के मरीजों को स्ट्रोक का खतरा हो सकता है?
अगर एंडोकार्डिटिस होता है, तो हार्ट के अंदर की परत में सूजन आ सकती है और वाल्व पर जमा बैक्टीरिया टूटकर ब्लड के साथ दिमाग में पहुंच सकते हैं। इससे स्ट्रोक का रिस्क बढ़ सकता है।क्या बच्चों को भी हार्ट में सूजन आ सकती है?
हां, बच्चों के भी हार्ट में सूजन हो सकती है। अगर बच्चों को रुमैटिक फीवर हो जाए और इलाज ठीक न हो, तो बच्चों के हार्ट में सूजन का रिस्क बढ़ सकता है।क्या दांतों की सफाई न करने पर हार्ट में सूजन आ सकती है?
दांतों की साफ-सफाई न होने से एंडोकार्डिटिस का रिस्क बढ़ सकता है। मुंह के बैक्टीरिया ब्लड में मिलकर हार्ट तक पहुंचकर वाल्व को संक्रमित कर सकते हैं और गंभीर सूजन का रिस्क बढ़ा सकते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Apr 16, 2026 12:50 IST
Modified By : Aneesh Rawat Apr 16, 2026 12:50 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta