Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

PCOS क्यों होता है? जानें इसके पीछे का साइंस और डॉक्टर की राय

महिलाओं में PCOS की समस्या बहुत कॉमन है और हैरानी की बात यह है कि उन्हें इस बात का पता ही नहीं होता। इसकी वजह है PCOS के कारणों और लक्षणों की जानकारी न होना। इस लेख में डॉक्टर ने महिलाओं में PCOS होने के कारणों के बारे में विस्तार से बताया है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में हार्मोनल कंडीशन है, जिसमें महिलाओं की ओवरीज नॉर्मल से ज्यादा एंड्रोजन हार्मोन बनाने लगती हैं। PCOS को स्टीन-लेवेंथल सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह पुराना नाम है जो अब इस्तेमाल नहीं होता। साल 2022 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित लेख के अनुसार, PCOS की समस्या महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। Cleveland Clinic के अनुसार, PCOS में महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, चेहरे, पेट या छाती पर बाल उगने लगते हैं। चेहरे या पीठ पर मुंहासे आने लगते हैं। कई महिलाओं को वजन बढ़ने की दिक्कत होने लगती है। PCOS की समस्या महिलाओं में ही ज्यादा क्यों होती है? इस बारे में जानने के लिए  गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन (Dr. Chetna Jain, Director, Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon) से बात की।

PCOS के आंकड़े

PCOS के कारणों को जानने से पहले दुनिया और भारत के आंकड़ों पर एक नजर डालनी चाहिए। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में PCOS से पीड़ित 70% महिलाओं को यह ही नहीं पता कि वे PCOS से पीड़ित हैं। Cureus Journal of Medical Science ने भारत में PCOS की बीमारी को समझने के लिए 2010 से लेकर 2021 के बीच कई अध्ययन किए। इसके अनुसार, भारत में PCOS की कुल व्यापकता 11.33% पाई गई। इसके अलावा, साल 2025 में Reproductive Health स्टडी में बताया गया कि भारत के दिल्ली-एनसीआर में युवा महिलाओं पर स्टडी की गई। इस स्टडी में 1,164 कॉलेज जाने वाली 18 से 25 साल की लड़कियों का इंटरव्यू लेकर PCOS की जानकारी ली गई। स्टडी में बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर में PCOS 17.40% पाई गई। यह भारत में की गई पिछली रिपोर्ट की तुलना में काफी ज्यादा थी। इस स्टडी में दिलचस्प बात यह है कि 29.70% PCOS मामलों का पता स्टडी के दौरान लगा। इस स्टडी से पता चलता है कि महानगरों में PCOS ज्यादा होने का कारण खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी और स्ट्रेस हो सकता है।

PCOS causes in hindi

PCOS होने के कारण

डॉ. चेतना कहती हैं कि जैसा कि स्टडी में बताया गया है कि शहरों में PCOS के मामले आमतौर पर खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड ज्यादा खाना, स्ट्रेस और नींद की कमी के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा भी कई कारण होते हैं, जिन्हें महिलाओं को जानना बहुत जरूरी है।

हार्मोनल असंतुलन

डॉ. चेतना जैन कहती हैं, "PCOS से पीड़ित महिलाओं की ओवरीज में एंड्रोजन का प्रोडक्शन बहुत ज्यादा होने लगता है। एंड्रोजन हार्मोन को पुरुषों का हार्मोन कहा जाता है। बहुत ज्यादा मात्रा में एंड्रोजन बनने से महिलाओं के ओवुलेशन के प्रोसेस में दिक्कत होने लगती है। इससे महिलाओं की ओवरीज में बनने वाले अंडों की रेगुलर ग्रोथ नहीं हो पाती और वे फॉलिकल्स से बाहर नहीं निकल पाते। इसी वजह से महिलाओं के शरीर पर अनचाहे बाल आने लगते हैं।"

डॉ. चेतना आगे कहती हैं, “ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) ओवुलेशन को एक्टिव करता है और अगर इसका लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो यह ओवरीज को प्रभावित करने लगता है। एक और हार्मोन PCOS को प्रभावित करता है, जिसे सेक्स हार्मोन-बाइंडिंग ग्लोब्युलिन (SHBG) कहते हैं। यह ब्लड में मौजूद प्रोटीन होता है, जो टेस्टोस्टेरोन से जुड़कर उसके प्रभाव को कम करता है। PCOS में जब SHBG का लेवल कम होता है, तो टेस्टोस्टेरोन बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। इसके अलावा, कुछ महिलाओं में प्रोलैक्टिन का लेवल भी बढ़ा हुआ पाया जाता है। इससे भी PCOS की समस्या हो सकती है।”

PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस

NHS की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस PCOS होने का कारण है। इंसुलिन हार्मोन को पैंक्रियास बनाता है, जो शरीर के सेल्स को एनर्जी के लिए ग्लूकोज इस्तेमाल करने देता है। अगर सेल्स इंसुलिन के लिए रेजिस्टेंस हो जाएं, तो शरीर में ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। इस वजह से शरीर में इंसुलिन बढ़ने लगता है और ज्यादा इंसुलिन एंड्रोजन हार्मोन बनाने लगता है। इससे ओवुलेशन में दिक्कत होने लगती है। इस वजह से महिलाओं में वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।

फैमिली हिस्ट्री

Cleveland Clinic में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी महिला की फैमिली में पहले से PCOS की समस्या है, तो PCOS होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है। स्टडीज में पाया गया है कि कुछ जीन PCOS से जुड़े हो सकते हैं, इसलिए महिलाओं की फैमिली हिस्ट्री भी चेक की जाती है।

शरीर की सूजन

डॉ. चेतना कहती हैं, "जब किसी महिला को इंफेक्शन या चोट लग जाती है, तो व्हाइट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) कुछ ऐसे तरल पदार्थ बनाने लगते हैं, जो शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं। अगर महिलाओं में यह सूजन लंबे समय तक रहती है, तो सूजन की वजह से ओवरीज को एंड्रोजन बनाने के लिए एक्टिव करती है। इससे महिलाओं को PCOS की समस्या हो सकती है। कई महिलाओं में PCOS का यह भी कारण रहता है।"

लाइफस्टाइल में बदलाव

डॉ. चेतना जैन कहती हैं, “PCOS की समस्या का कारण महिलाओं का खराब लाइफस्टाइल भी हो सकता है, इसलिए इस बीमारी को लाइफस्टाइल की बीमारी भी कहा जाता है। जो महिलाएं बहुत ज्यादा फ्राइड, प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड फूड और जंक फूड खाती हैं, उनके हार्मोनल बैलेंस में समस्या हो सकती है। इसके अलावा, जो महिलाएं बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं या उनकी नींद पूरी नहीं होती, उन्हें भी PCOS की समस्या होने का रिस्क हो सकता है। फिजिकल एक्टिविटी न करना भी PCOS का एक कारण हो सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर खास ध्यान देना चाहिए।

PCOS causes by dr chetna

PCOS का इलाज

डॉ. चेतना जैन कहती हैं कि PCOS के इलाज में यह ध्यान रखा जाता है कि अगर महिला को जल्द प्रेग्नेंट नहीं होना है, तो उनका गर्भनिरोधक दवाइयां, इंजेक्शन या IUD से इलाज किया जाता है। हार्मोनल बैलेंस करके पीरियड्स को रेगुलर करने में मदद मिलती है। इससे शरीर पर अनचाहे बालों का आना कंट्रोल होता है।

  1. हरी सब्जियां, टमाटर, मशरूम, ब्रोकली और फूलगोभी PCOS के लिए अच्छी हैं।
  2. मौसमी फलों में फाइबर होता है, जो शुगर के अब्जॉर्प्शन को धीमा करता है। इससे PCOS को मैनेज करने में मदद मिलती है।
  3. प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए।
  4. प्रोटीन से भरपूर फूड खाना अच्छा विकल्प है।
  5. महिलाओं को फ्राइड फूड, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, शुगर, सफेद चीजों से परहेज करना चाहिए।
  6. सोडा, अल्कोहलिक पेय और दूध की चाय जैसे ड्रिंक्स से परहेज करना चाहिए।
  7. महिलाओं को फिजिकली एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए रोजाना आधा घंटा तेज वॉक या एक्सरसाइज जरूर करें।
  8. स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और योग जरूर करें।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर किसी महिला को पीरियड्स रेगुलर न हों, प्रेग्नेंसी में दिक्कत हो या वजन लगातार बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

डॉ. चेतना जोर देते हुए कहती हैं कि महिलाओं को यह समझना चाहिए कि PCOS लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है, जिसमें महिलाओं को इससे जुड़े लक्षणों और कारणों पर खास ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, PCOS से पीड़ित महिलाओं को अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए। अगर महिला की फैमिली हिस्ट्री में PCOS है, तो उन्हें डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

FAQ

  • PCOS में दर्द कहां होता है?

    PCOS में पेट के निचले हिस्से, कमर और पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है। पीरियड्स के दौरान पेट में तेज ऐंठन और भारीपन महसूस होता है।
  • पीसीओएस के लक्षण कब शुरू होते हैं?

    PCOS के लक्षण आमतौर पर प्यूबर्टी के समय दिखने लगते हैं। अगर युवावस्था में महिलाओं को पीरियड्स रेगुलर नहीं रहते और पेट में भारीपन के साथ तेज दर्द होता है, तो उन्हें डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
  • क्या दुबली महिलाओं को PCOS हो सकता है?

    PCOS की समस्या आमतौर पर मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को होती है, लेकिन कई दुबली महिलाओं में भी PCOS की समस्या देखी गई है।
  • क्या वजन घटाने के बाद पीसीओएस ठीक हो जाता है?

    वजन घटाने से PCOS पूरी तरह से ठीक नहीं होता, लेकिन वजन कम करके थोड़ा मैनेज किया जा सकता है। वजन कम होने से इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल असंतुलन और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षणों को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।
  • क्या PCOS से कैंसर हो सकता है?

    PCOS का सीधा संबंध कैंसर से नहीं होता, लेकिन हार्मोनल असंतुलन के कारण एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। हालांकि, स्टडीज में ओवरी कैंसर के साथ PCOS का संबंध अभी उतना स्पष्ट नहीं है।

Read Next

क्या पानी जैसा पतला ब्रेस्ट मिल्क भी बच्चे को पोषण दे सकता है? डॉक्टर से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Apr 03, 2026 11:13 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 03, 2026 11:13 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 03, 2026 11:13 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 03, 2026 11:13 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Chetna Jain

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content