Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

टेस्टिकुलर कैंसर सबसे ज्यादा युवाओं को ही क्यों करता है प्रभावित? जानें डॉक्टर की राय

आजकल टेस्टिकुलर कैंसर से युवा ज्यादा प्रभावित होने लगे हैं और इसकी वजह जेनेटिक कारणों के अलावा लाइफस्टाइल में बदलाव भी हो सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने युवाओं में टेस्टिकुलर कैंसर होने के कारणों को विस्तार से बताया है।

टेस्टिकुलर कैंसर अंडकोष में होता है, जो पुरुषों में रिप्रोडक्टिव सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी हिस्से में स्पर्म और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनते हैं और यह कैंसर आमतौर पर एक अंडकोष में शुरू होता है और शुरुआती स्टेज में पुरुषों को अक्सर दर्द महसूस नहीं होता, जिससे बीमारी का पता लगाने और इलाज में देरी हो सकती है। इसलिए Mayo Clinic ने टेस्टिकुलर (अंडकोष) कैंसर को युवाओं की बीमारी कहा है, क्योंकि इस कैंसर का रिस्क 45 साल से कम उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है। युवाओं में टेस्टिकुलर कैंसर होने के कारणों को जानने के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology at VNA Hospital, Delhi से बात की।

टेस्टिकुलर कैंसर से जुड़ी स्टडी क्या कहती है?

Global Burden of Disease (GBD) 2021 के अनुसार 1990 से 2021 तक 15 से 49 साल के युवाओं पर अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि पिछले तीन दशकों में टेस्टिकुलर कैंसर में लगातार और महत्वपूर्ण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुनियाभर में 15 से 49 साल के युवा पुरुषों में प्रजनन प्रणाली के जितने भी कैंसर (कुल 94,229 मामले) पाए गए, उनमें प्रोस्टेट कैंसर के मुकाबले टेस्टिकुलर कैंसर का अनुपात काफी ज्यादा था। इसके अलावा, NHS में बताया गया है कि टेस्टिकुलर कैंसर से प्रभावित पुरुषों में ज्यादातर 15 से 49 आयुवर्ग के हैं।

टेस्टिकुलर कैंसर बढ़ने के कारण

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “पुरुषों में टेस्टिकुलर कैंसर के मामलों का देर से पता चलने का एक प्रमुख कारण जागरूकता की कमी है। पुरुष सेक्शुअल और फर्टिलिटी से जुड़े विषयों पर बात करने से हिचकते हैं और इस वजह से बीमारी का देरी से पता चलता है। इसलिए लोगों को टेस्टिकुलर कैंसर के कारणों के प्रति जागरुक कराना बहुत जरूरी है।”

testicular cancer risks in men

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जेनेटिक कारण

Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “अगर परिवार में किसी करीबी रिश्तेदार, जैसे पिता या भाई को टेस्टिकुलर कैंसर हो चुका है, तो अन्य पुरुषों में इसका खतरा बढ़ सकता है। कुछ जेनेटिक बदलाव भी इस बीमारी के रिस्क को बढ़ा सकते हैं।”

जन्म से अंडकोष का नीचे न उतरना

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि क्रिप्टॉर्किडिज्म कंडीशन में जन्म के समय एक या दोनों अंडकोष पूरी तरह नीचे नहीं उतरते। यह टेस्टिकुलर कैंसर का एक प्रमुख रिस्क फैक्टर माना जाता है। भले ही बाद में सर्जरी के जरिए इस समस्या को ठीक कर दिया जाए, फिर भी कैंसर का खतरा आम लोगों की तुलना में ज्यादा हो सकता है।

प्रदूषण और केमिकल्स का असर

Dr. Vineet Malhotra का कहना है, “जो लोग केमिकल्स से जुड़े कामों जैसे प्लास्टिक का सामान बनाना, कीटनाशकों या अन्य केमिकल फैक्ट्री में होते हैं, उन्हें टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि कुछ केमिकल्स हार्मोन्स को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इससे जुड़े कई रिसर्च अभी भी चल रहे हैं, लेकिन इसे रिस्क फैक्टर माना जा सकता है।”

खराब लाइफस्टाइल होना

Dr. Vineet Malhotra मानते हैं कि जो लड़के या पुरुष मोटापे से ग्रस्त होते हैं और कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, उनमें कैंसर का रिस्क बढ़ सकता है। टेस्टिकुलर कैंसर के साथ इसका सीधा संबंध अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और हेल्दी वजन रखने से कई बीमारियों का रिस्क कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से समग्र स्वास्थ्य बेहतर रहता है और कई बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।

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HIV होना

Mayo Clinic के अनुसार, जिन लोगों को AIDS या HIV संक्रमण होता है, उन्हें टेस्टिकुलर कैंसर होने का रिस्क बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि कैंसर के खतरे को कम किया जा सके।

निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra पुरुषों को सलाह देते हैं कि अगर किसी को अंडकोष में गांठ या सूजन महसूस हो, आकार या बनावट में बदलाव हो, अंडकोष में भारीपन महसूस हो या पेट के निचले हिस्से में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। हालांकि, इस कैंसर को पूरी तरह से रोकने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान करके इलाज सफल तरीके से किया जा सकता है। युवा लड़कों और पुरुषों को महीने में एक बार खुद ही अंडकोष की जांच जरूर करनी चाहिए।

FAQ

  • क्या अंडकोष में होने वाला हर दर्द या सूजन कैंसर ही होती है?

    अंडकोष में सूजन या दर्द के ज्यादातर मामले इंफेक्शन या नसों में सूजन के कारण हो सकते हैं। हालांकि, डॉक्टर से चेकअप कराने के बाद ही बताया जा सकता है कि सूजन का असल कारण क्या है।
  • क्या इस कैंसर के इलाज से पुरुष हमेशा के लिए बांझ (Infertile) हो जाता है?

    कैंसर के इलाज के लिए अक्सर प्रभावित अंडकोष को सर्जरी द्वारा निकाला जाता है और कीमोथेरेपी दी जाती है, जिससे स्पर्म काउंट कम हो सकते हैं। हालांकि, अगर दूसरा अंडकोष स्वस्थ हो, तो पुरुष पिता बन सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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