Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

UTI (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) क्या है? डॉक्टर से जानें कारण, लक्षण और इलाज के तरीके

UTI यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या बहुत आम है। हालांकि, यह समस्या महिलाओं में ज्यादा होती है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं। अगर इस समस्या का इलाज समय पर न हो, तो यह कंडीशन गंभीर हो सकती है। इस लेख में डॉक्टर ने UTI से जुड़े लक्षणों, कारणों, रिस्क और इलाज के तरीकों के बारे में बताया है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (urinary tract infection) यूरिनरी सिस्टम में इंफेक्शन की वजह से होता है। किडनी ब्लड में से वेस्ट प्रोडक्ट्स और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है, जो पेशाब के रूप में बाहर निकलता है। पेशाब बिना संक्रमित किए पेशाब की नली से होकर गुजरता है। जब बैक्टीरिया यूरिनरी सिस्टम में चले जाते हैं, तो UTI की समस्या हो सकती है।

Global Burden of Disease 2021 के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में UTI के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साल 1990 में 269 करोड़ थे, जो साल 2021 में बढ़कर 449 करोड़ हो गए। इसका मतलब है कि मामलों में करीब 66.45% की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा मृत्यु के आंकड़ों को देखा जाए, तो साल 1990 में 1.03 लाख थी, जो साल 2021 में बढ़कर 3 लाख हो गई। मृत्यु के आंकड़ों में करीब 190 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस स्टडी में बताया गया है कि महिलाओं में UTI के मामले पुरुषों की तुलना में चार गुना ज्यादा हैं। महिलाओं में 30 से 49 साल की उम्र में यह मामले ज्यादा देखने को मिले हैं, जबकि पुरुषों में यह समस्या 80 साल के बाद ज्यादा मिली है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि UTI के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी है। इसलिए UTI के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director, गायनेकोलॉजिस्ट and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

यूरिनरी ट्रैक्ट क्या है?

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “यूरिनरी ट्रैक्ट शरीर से पेशाब निकालने का काम करती है और इसमें मुख्य रूप से किडनी, यूरेटर, ब्लैडर और यूरेथ्रा शामिल होती है। किडनी ब्लड में पानी और वेस्ट प्रोडक्ट्स को फिल्टर करती है, जो पेशाब बनता है। इसमें यूरिया और क्रिएटिनिन होता है। फिर ये पेशाब दो पतली नलियों (यूरेटर) के जरिए ब्लैडर में पहुंचता है। ब्लैडर गुब्बारे जैसा अंग है, जो पेशाब को पहले स्टोर करता है। फिर ब्लैडर से होकर एक नली (यूरेथ्रा) जाती है, जो पेशाब को शरीर से बाहर निकालती है। अगर इस नली में बैक्टीरिया या वायरस चले जाते हैं, तो इसमें इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है।”

UTI कितनी तरह का होता है?

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन आमतौर पर ब्लैडर और किडनी में होता है। ब्लैडर में ई.कोलाई बैक्टीरिया पेशाब की नली के जरिए अंदर जाता है और पेशाब करते समय जलन महसूस हो सकती है। कई मामलों में मरीज को पेट के निचले हिस्से में प्रेशर या ऐंठन महसूस हो सकता है। दूसरा, किडनी में इंफेक्शन हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में पायलोनेफ्राइटिस (Pyelonephritis) कहते हैं। हालांकि, यह इंफेक्शन कम होता है, लेकिन बहुत गंभीर हो सकता है। इसमें इंफेक्शन ब्लैडर से निकलकर दोनों किडनियों में चला जाता है। इसमें मरीज को बहुत तेज बुखार और कंपकंपी होने लगती है। कई बार उल्टी या जी मिचलाने लगता है। अगर समय पर इसका इलाज न हो, तो मरीज की दोनों किडनियों को नुकसान पहुंच सकता है। यह कंडीशन जानलेवा तक हो सकती है। इसलिए UTI के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।"

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UTI के लक्षण क्या है?

CDC के अनुसार, UTI के लक्षण किस यूरिनरी सिस्टम तक पहुंच गए हैं। हालांकि, UTI होने पर मरीजों को ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  1. पेशाब करते समय जलन होना
  2. बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना
  3. ऐसा महसूस होना कि पेशाब आ रहा है
  4. पेशाब में खून आना
  5. पेट के निचले हिस्से या कमर के निचले भाग में प्रेशर या ऐंठन महसूस होना

अगर इंफेक्शन किडनी में हो जाए, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं

  1. बुखार आना
  2. कंपकंपी या ठंड लगना
  3. पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना
  4. मतली या उल्टी होना

UTI के क्या कारण है?

Cleveland Clinic के अनुसार, UTI में बैक्टीरिया आमतौर पर पेशाब की नली (Urethra) से ही शरीर में जाते हैं। UTI में 90 फीसदी से ज्यादा ई.कोलाई के कारण इंफेक्शन होता है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर बड़ी आंत में होता है। इसके अलावा, UTI होने का कारण हाथों में बैक्टीरिया होना भी हो सकता है। हाथों में बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं और जब शौचालय जाते हैं, तो हाथ के जरिए बैक्टीरिया पेशाब की नली तक जा सकते हैं। कई मामलों में सेक्शुअल एक्टिविटी के दौरान भी बैक्टीरिया पेशाब की नली में जा सकते हैं। इसलिए हाथों की साफ-सफाई बहुत जरूरी है।

UTI का रिस्क किन लोगों को ज्यादा हो सकता है?

NHS के अनुसार, UTI होने के कई कारण हैं, जिसमें आमतौर पर स्टूल में पाया जाने वाला बैक्टीरिया पेशाब की नली में जा सकता है। जो लोग शौचालय में स्टूल को पीछे से आगे की ओर पोंछते हैं।

  1. प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव और यूटेरस में प्रेशर के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरिया होने का खतरा बढ़ सकता है।
  2. जिन लोगों को किडनी स्टोन की दिक्कत है, उन्हें UTI का रिस्क बढ़ सकता है।
  3. पुरुषों में बढ़े प्रोस्टेट के कारण ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं होता, उन्हें UTI का रिस्क बढ़ सकता है।
  4. जिन बच्चों को कब्ज की शिकायत होती है, उन्हें UTI का खतरा हो सकता है।
  5. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनके लिए UTI होना कॉमन हो सकता है।
  6. मेनोपॉज के बाद शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
  7. जो महिलाएं गर्भनिरोधक दवा लेती हैं, उनमें UTI का रिस्क बढ़ सकता है।
  8. कई मामलों में पेशाब निकालने के लिए ब्लैडर में यूरिनरी कैथेटर डाला जाता है, इससे UTI का खतरा बढ़ सकता है।

UTI महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है?

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “आमतौर पर, ज्यादातर महिलाओं में UTI होने के मामले देखने को मिलते हैं, क्योंकि महिलाओं के पेशाब की नली पुरुषों के मुकाबले काफी छोटी होती है। इसलिए बैक्टीरिया बहुत जल्दी ब्लैडर या किडनी तक पहुंच जाते हैं और इंफेक्शन बढ़ाते हैं। प्रेग्नेंसी में भी यूटेरस के प्रेशर के चलते महिलाओं को UTI होने का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।" Menopause Review 2021 के अनुसार, महिलाओं में UTI होने के कई कारण है, जिसमें पेशाब की नली का छोटी होने के अलावा, पेशाब की नली, योनि और एनस (Anus) का पास होने के कारण डाइजेस्टिव सिस्टम के बैक्टीरिया आसानी से यूरिनरी सिस्टम में जा सकते हैं। कुछ मामलों में साफ-सफाई न रखने या ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से योनि के नेचुरल माइक्रोबायोम बिगड़ सकते हैं। यौन एक्टिविटीज भी महिलाओं में UTI के रिस्क को बढ़ा सकती है। जिन महिलाओं को डायबिटीज है, उनमें शुगर लेवल बढ़ने से पेशाब में ग्लूकोज आने लगता है। यह बैक्टीरिया बढ़ने का कारण हो सकता है।

बच्चों में UTI होना

ICMR के अनुसार, नवजात और एक साल से कम उम्र के बच्चों में UTI होने पर बुखार, पीलिया, उल्टी या दस्त के लक्षण दिखने लगते हैं। आमतौर पर शिशुओं को कब्ज से बचाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह UTI होने का एक कारण हो सकता है। तीन महीने से कम उम्र के शिशुओं में इसे अपर UTI का मामला माना जाता है, इसलिए इतने छोटे शिशुओं को नसों (IV) के जरिए एंटीबायोटिक्स दी जाती है।

UTI को कैसे डायग्नोज करते हैं?

डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, “UTI के लक्षण महसूस होने पर जब महिलाएं मेरे पास आती हैं, तो UTI का टेस्ट कराने की सलाह देती हूं। इसमें यूरिनलिसिस होता है, जिसमें पेशाब का सैंपल लैब में चेक होता है। इसमें नाइट्राइट्स, ल्यूकोसाइट एस्टरेज और वाइट ब्लड सेल्स चेक किए जाते हैं। अगर ये सभी मौजूद हैं, तो इंफेक्शन हो सकता है। इसके अलावा, यूरिन कल्चर के जरिेए भी बैक्टीरिया की पहचान की जाती है। इसमें भी लैब में पेशाब के सैंपल से बैक्टीरिया को लेकर उसे ग्रो किया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि कौन-सा खास बैक्टीरिया इंफेक्शन फैला रहा है। अगर मरीज को बार-बार इंफेक्शन हो रही है, तो अल्ट्रासाउंड से किडनी और ब्लैडर की कंडीशन देखी जाती है। इसके अलावा, गंभीर कंडीशन में सीटी स्कैन और सिस्टोस्कोपी भी की जा सकती है। सिस्टोस्कोपी में एक पतले डिवाइस को पेशाब की नली में डालकर ब्लैडर के अंदरूनी हिस्से को चेक किया जा सकता है।"

UTI का इलाज क्या है?

डॉ. शोभा ने कहा, “आमतौर पर UTI के इलाज का पहला तरीका एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। इंफेक्शन के प्रकार और पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया के प्रकार के आधार पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा सकती है। इसे कितने दिन तक देना है, यह भी UTI की गंभीरता पर निर्भर करता है। सामान्य इंफेक्शन होने पर इन एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें Fosfomycin, Trimethoprim और sulfamethoxazole, Cephalexin और Ceftriaxone शामिल है। इलाज शुरू होने पर लक्षणों में सुधार कुछ दिनों में नजर आने लगता है। हालांकि, जलन और सूजन में थोड़ा समय लग सकता है। मरीज को एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा करना जरूरी होता है ताकि इंफेक्शन दोबारा न हो।”

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UTI से बचाव के लिए क्या करें?

NHS के अनुसार, UTI से बचाव के लिए लोगों को अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत जरूरी है।

  1. शौचालय जाने के बाद हमेशा सफाई आगे से पीछे की ओर पोंछें।
  2. वजाइना को साफ और सूखा रखें।
  3. प्रचुर मात्रा में पानी पिएं।
  4. सेक्शुअल एक्टिविटी के बाद योनि की साफ-सफाई जरूर करें।
  5. सेक्स करने के बाद पेशाब करना चाहिए ताकि पेशाब की नली में अगर कोई बैक्टीरिया हो, तो बाहर निकल जाए।
  6. बच्चों के नैपी समय-समय पर बदलने चाहिए।
  7. पीरियड्स में पैड्स जरूर बदलने चाहिए।
  8. महिलाओं को लूज और सूती कपड़े पहनने चाहिए।
  9. पेशाब को रोकना नहीं चाहिए।
  10. खुशबू वाले साबुन या परफ्यूम इस्तेमाल नहीं करने चाहिेए।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर पेशाब में खून आने लगे, पेशाब में झाग या बदबू लगे, पेशाब करते समय पेल्विक के निचले हिस्से में प्रेशर महसूस हो, पेशाब करते समय दर्द महसूस हो और बुखार आने लगे, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

निष्कर्ष

अगर पेशाब करते समय या योनि में जलन हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि समय पर UTI का इलाज हो सके। अगर बच्चों को कब्ज की शिकायत बहुत ज्यादा रहे, तो चेकअप जरूर कराना चाहिए। महिलाओं को खासतौर पर योनि की साफ-सफाई जरूर रखनी चाहिए। इसके साथ, UTI से बचने के लिए प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए और संतुलित डाइट लेनी चाहिए।

FAQ

  • क्या पानी पीने से UTI ठीक हो सकता है?

    अगर UTI शुरुआत में ही है, तो प्रचुर मात्रा में पानी पीने से बैक्टीरिया पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकते हैं, लेकिन UTI के हल्के लक्षणों में भी डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।
  • क्या बार-बार UTI होना गंभीर है?

    अगर बार-बार UTI हो रहा है, तो इसका कारण किडनी में खराबी, डायबिटीज या यूरिनरी सिस्टम में स्टोन हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या सिस्टोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं।
  • क्या टॉयलेट सीट से UTI फैल सकता है?

    वैसे तो टॉयलेट सीट पर बैक्टीरिया बहुत देर तक नहीं रहते, लेकिन पब्लिक टॉयलेट में साफ-सफाई की कमी होती है और गलत तरीके से सफाई करने से बैक्टीरिया शरीर में जा सकते हैं।
  • UTI कितने दिन में ठीक हो जाता है?

    आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। अगर इंफेक्शन हल्का हो, तो इलाज के 24-48 घंटों के भीतर ठीक होने लगता है। गंभीर इंफेक्शन को ठीक होने में एक से दो हफ्ते या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 01, 2026 22:07 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • May 01, 2026 22:07 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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