अक्सर लोग पेशाब में जलन या बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर इन्हें ठीक करने के लिए घरेलू उपायों पर निर्भर रहने लगते हैं। मगर यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अगर एक आम से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का सही समय पर सही तरह से इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है। दरअसल, जब UTI का बैक्टीरिया किडनी से होता हुआ आपके ब्लड फ्लो यानी खून में फैल जाता है, तो यह यूरोसेप्सिस (Urosepsis) नाम की गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। यह एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शरीर का अपना ही इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने के चक्कर में हेल्दी अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। आसान भाषा में समझें तो यूरोसेप्सिस तब होता है जब मूत्र मार्ग का इंफेक्शन शरीर के ब्लड फ्लो में फैल जाता है और इससे पूरे शरीर में गंभीर सूजन पैदा होने लगती है। Dr. Pooja Pillai, Consultant- Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore से जानते हैं कि यह स्थिति कब जानलेवा बनती है और इससे बचाव के लिए क्या कर सकते हैं?
UTI कब जानलेवा या यूरोसेप्सिस बन जाता है?
डॉ. पूजा पिल्लई ने बताया कि यूरोसेप्सिस एक गंभीर स्थिति है जो तब होती है जब यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन खून में फैल जाता है और पूरे शरीर में एक गंभीर इंफेक्शन पैदा कर देता है। अगर इसका तुरंत इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। आमतौर पर UTI एक हल्की बीमारी मानी जाती है और इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है और वहां से बैक्टीरिया ब्लड फ्लो में चले जाते हैं। जब हमारा शरीर इस इंफेक्शन से लड़ने के लिए ज्यादा रिएक्ट करता है, तो सूजन पूरे शरीर में फैल जाती है। इससे हमारे शरीर का ब्लड प्रेशर गिर सकता है, ऑक्सीजन में कमी हो सकती है और शरीर के जरूरी अंग जैसे किडनी, लिवर और दिल प्रभावित हो सकते हैं।
2026 में StatPearls Publishing में प्रकाशित सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर में होने वाली सूजन वाली प्रतिक्रिया है, जिसके कारण शरीर के कई अंग ठीक से काम करना बंद कर सकते हैं, फेल हो सकते हैं और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। यूरोसेप्सिस एक तरह का सेप्सिस है, जो यूरिन के रास्ते में होने वाले इंफेक्शन के कारण होता है। इनमें सिस्टाइटिस (मूत्र मार्ग के निचले हिस्से और मूत्राशय का इंफेक्शन) और पाइलोनेफ्राइटिस (मूत्र मार्ग के ऊपरी हिस्से और किडनी का इंफेक्शन) शामिल हैं।
इसे भी पढ़ें: किडनी से ब्लैडर तक यूरिनरी सिस्टम का हर अंंग रहेगा स्वस्थ, बस सुधार लें ये 5 चीजें
यूरोसेप्सिस के लक्षण क्या हैं?
डॉ. पूजा पिल्लई का कहना है कि यूरोसेप्सिस आमतौर पर एक साधारण UTI के रूप में शुरू होता है, जिसमें पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, बुखार या पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन, अगर बैक्टीरिया किडनी तक पहुंच जाते हैं और फिर खून में मिल जाते हैं, तो इससे सेप्सिस हो सकता है, जिसके लक्षण अलग हो सकते हैं। Cleveland Clinic के अनुसार, इंफेक्शन की गंभीरता के आधार पर इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। एक बार जब इंफेक्शन सेप्सिस की स्थिति तक पहुंच जाता है, तो आपको ये लक्षण महसूस हो सकते हैं-
- लो ब्लड प्रेशर- ब्लड प्रेशर रीडिंग में ऊपर वाला नंबर 100 mmHg से कम हो सकता है, जो लो ब्लड प्रेशर का संकेत है।
- तेज सांस लेना- यह समस्या होने पर पीड़ित व्यक्ति एक मिनट में 22 बार से ज्यादा तेजी से सांस लेता है।
- सांस लेने में मुश्किल होना- इस समस्या के होने पर आपको सांस लेने में मुश्किल हो सकती है, जिसके कारण आपको सांस फूलना या दम घुटने जैसा महसूस हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना- यूरोसेप्सिस होने पर मरीज की दिल की धड़कनें सामान्य से बहुत तेज हो सकती है।
इसे भी पढ़ें: क्या यूरिन इंफेक्शन में खून आना नॉर्मल है? जानें डॉक्टर से
यूरोसेप्सिस के कारण और जोखिम कारक क्या हैं?
डॉ. पूजा पिल्लई का कहना है कि यूरोसेप्सिस होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया होता है, जो मूत्र मार्ग से होकर शरीर में फैल जाता है। सबसे सामान्य बैक्टीरिया है E. coli, जो आंतों में पाया जाता है। इसके साथ ही अगर इसके जोखिम कारकों की बात करें तो Cleveland Clinic के मुताबिक यूरोसेप्सिस का मुख्य जोखिम कारक UTI होना है। यूरोसेप्सिस के अन्य जोखिम कारकों में शामिल हैं-
- मूत्र मार्ग से जुड़ी कोई अन्य समस्या या इंफेक्शन होना है।
- बार-बार UTI होना या हाल ही में UTI का पता चलना।
- कोई ऐसी सर्जरी हुई हो जिसमें कैथेटर की जरूरत पड़ी हो।
- डायबिटीज होना।
- इम्यून सिस्टम से जुड़ा कोई डिसऑर्डर होना।
- कीमोथेरेपी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट या किसी अन्य मेडिकल कंडीशन के कारण इम्यून सिस्टम का कमजोर होना।
- अपने ब्लैडर को पूरी तरह से खाली न कर पाना।
इसे भी पढ़ें: अगर UTI का इलाज नहीं कराया जाए तो क्या हो सकता है? बता रहे हैं डॉक्टर
यूरोसेप्सिस की जांच कैसे की जाती है?
2015 में Deutsches Arzteblatt International में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, यूरोसेप्सिस का समय पर पता चल जाने से मरीज की जान बच सकती है। डॉक्टर आमतौर पर इसकी पहचान के लिए ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, बायोमार्कर और इमेजिंग टेस्ट की सलाह देते हैं।
- ब्लड टेस्ट- इससे शरीर में इंफेक्शन की मौजूदगी और सूजन के लेवल का पता लगाने में मदद मिलती है।
- यूरिन टेस्ट- इस जांच के जरिए मूत्र मार्ग में मौजूद बैक्टीरिया और मवाद की जांच की जाती है।
- बायोमार्कर- यह टेस्ट CRP की तुलना में बैक्टीरियल इंफेक्शन की सही पहचान करने में बेहतर होता है।
- इमेजिंग टेस्ट- अल्ट्रासाउंड या CT स्कैन के जरिए यह देखा जाता है कि कहीं किडनी में कोई रुकावट, पथरी या सूजन तो नहीं है जो इंफेक्शन का कारण बन रही हो।
यूरोसेप्सिस का इलाज क्या है?
2015 में American Society For Microbiology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, यूरोसेप्सिस के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की बढ़ती रेजिस्टेंस क्षमता है, खासकर उन बैक्टीरिया के मामले में जो दवाओं को बेअसर करने वाले एंजाइम बनाते हैं। इसके इलाज के लिए डॉक्टर मुख्य रूप से चार रणनीतियों पर काम करते हैं-
- पहला, सपोर्टिव थेरेपी, जिसमें ब्लड प्रेशर को स्थिर रखा जाता है।
- दूसरा, एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी ताकि इंफेक्शन को जड़ से खत्म किया जा सके।
- तीसरा, जटिलताओं पर कंट्रोल करना, जिसकी मदद से इंफेक्शन के कारण को हटाया जाता है।
- चौथा, खास सेप्सिस थेरेपी, जो शरीर पर सेप्सिस के प्रभावों को कम करने के लिए दी जाती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको UTI के लक्षण जैसे पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना, बार-बार पेशाब आने जैसा महसूस होना, पेशाब से बदबू आना और पेट के निचले हिस्से में दर्द आदि समस्याएं होती हैं तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अगर आपकी समस्या 1 से 2 दिन में ठीक नहीं होती है तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लेकिन अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, बुजुर्ग हैं या आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है, तो पहला लक्षण दिखने पर ही डॉक्टर से तुरंत मिलें। खासकर अगर इंफेक्शन के साथ तेज बुखार, पेशाब से खून आना, पीठ और किडनी के आसपास तेज दर्द महसूस हो तो ये गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही, अगर आपको अचानक ब्रेन फॉग, चक्कर आना या सांस लेने में मुश्किल होती है तो ये यूरोसेप्सिस का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में बिना देर किए आपको डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए और सही इलाज लेना चाहिए।
निष्कर्ष
यूरोसेप्सिस एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसे होने या बढ़ने से रोका जा सकता है। यह अक्सर एक साधारण UTI से शुरू होती है, लेकिन समय पर इलाज न होने के कारण यह जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए, जरूरी है कि UTI के शुरुआती लक्षणों को पहचानें, सही समय पर इलाज करवाएं और शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज किए बिना डॉक्टर से सलाह लें और इलाज को कभी भी बीच में न छोड़ें। ध्यान रहे, आपकी छोटी सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।
Image Credit: Freepik
FAQ
यूरिन इंफेक्शन को ठीक करने का सबसे तेज तरीका क्या है?
यूरिन इंफेक्शन को ठीक करने का सबसे तेज और प्रभावी तरीका डॉक्टर से कंसल्ट करके एंटीबायोटिक्स लेना है, जो 1 से 5 दिनों में राहत दे सकते हैं। इसके साथ ही खूब पानी पीना और पेशाब न रोकना इसको ठीक करने में मदद कर सकता है।यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का मुख्य कारण क्या है?
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का मुख्य कारण ई-कोलाई नाम का बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर आंतों में पाया जाता है और यूरिन के रास्ते ब्लैडर में जाकर इंफेक्शन फैलाता है।यूरिन इंफेक्शन में क्या नहीं खाना चाहिए?
यूरिन इंफेक्शन में मसालेदार, तली-भुनी, कैफीन वाली चीजें, शराब, खट्टे फल और प्रोसेस्ड फूड के सेवन से बचना चाहिए। ये फूड्स ब्लैडर में जलन का कारण बन सकते हैं और इंफेक्शन को गंभीर बना सकते हैं।क्या कम पानी पीने से यूरिन इंफेक्शन होता है?
हां, कम पानी पीने से यूरिन इंफेक्शन का जोखिम बहुत बढ़ जाता है। जब आप कम पानी पीते हैं तो शरीर में यूरिन गाढ़ा हो जाता है और बैक्टीरिया को मूत्राशय में पनपने का मौका मिलता है।लंबे समय तक यूरिन इंफेक्शन होने का क्या कारण है?
लंबे समय तक यूरिन इंफेक्शन के प्रमुख कारणों में सही ट्रीटमेंट न मिलना, बैक्टीरिया का बार-बार संपर्क, कमजोर इम्यून सिस्टम यूरिनरी ट्रैक में रुकावट या मेनोपॉज के कारण हार्मोन में बदलाव हो सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Apr 22, 2026 20:05 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Apr 22, 2026 20:05 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr. Pooja Pillai