Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

हार्मोनल असंतुलन के कारण भी हो सकता है वजाइनल इंफेक्शन, डॉक्टर से जानें कारण और बचाव के उपाय

Vaginal Infection: वजाइना में इंफेक्शन का कारण सिर्फ साफ-सफाई नहीं होती, बल्कि इसका कारण हार्मोन्स में होने वाली गड़बड़ी भी हो सकती है। इस लेख में डॉक्टर ने विस्तार से वजाइना में इंफेक्शन होने के कारणों पर बात की है।

Vaginal Infection: वजाइनल इंफेक्शन अक्सर महिलाओं को परेशान करता है और इसे साफ-सफाई न रखने की वजह मानती है, लेकिन वजाइनल इंफेक्शन की हार्मोन बैलेंस न होने की वजह से हो सकता है। दरअसल, वजाइना में सामान्य रूप अच्छे बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस मौजूद होते हैं, जो पीएच बैलेंस बनाए रखते हैं। जब पीएच बैलेंस बिगड़ता है, तो यीस्ट या बैक्टीरिया इंफेक्शन हो सकता है। इसका कारण हार्मोनल बैलेंस न होना भी हो सकता है। क्या वजाइना में इंफेक्शन होने का कारण हार्मोन हो सकता है? इस बारे में हमने गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन (Dr. Chetna Jain Director Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon) से बात की।। डॉ. चेतना ने बताया कि इंफेक्शन की वजह से वजाइना में खुजली, जलन, डिस्चार्ज गाढ़ा, बदबूदार, रंग बदलता है। (symptoms of vaginal infection) पेशाब या इंटरकोर्स के दौरान दर्द होना सामान्य होता है।

क्या वजाइनल इंफेक्शन का कारण हार्मोंस हो सकते हैं?

डॉ. चेतना कहती हैं कि महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन वजाइनल हेल्थ को प्रभावित करते हैं, इसलिए कई मामलों में वजाइनल इंफेक्शन का कारण हार्मोंस होता है।

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पीरियड से पहले और बाद में

महिलाओं में पीरियड के दौरान हार्मोन लेवल बदलता रहता है। कई बार एस्ट्रोजन कम होने पर वजाइना की परत पतली और सूखी हो सकती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। कई बार पीरियड्स के दौरान लंबे समय तक पैड का इस्तेमाल करने से इंफेक्शन को बढ़ा सकता है। इस दौरान वजाइना का पीएच बदल जाता है, जिससे बैक्टीरिया के बढ़ सकते हैं।

प्रेग्नेंसी

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से वजाइना में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इस इंफेक्शन के कारण बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन प्रेग्नेंसी में महिलाओं को दिक्कत न हो, इसलिए डॉक्टर की सलाह तीन से सात दिन तक क्रीम लगाने की सलाह दी जाती है। NCBI रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान वजाइनल इंफेक्शन का चेकअप कराना बहुत महत्वपूर्ण है। स्टडी में पता चला है कि प्रेग्नेंसी के आखिरी ट्राइमेस्टर में वजाइनल इंफेक्शन ज्यादा होने का रिस्क रहता है। इसलिए इस दौरान महिलाओं को खास ध्यान रखना चाहिए।

मेनोपॉज

मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है और वजाइना में पीएच बढ़ जाता है। इससे बैक्टीरियल वेजिनोसिस इंफेक्शन हो सकती है। मेनोपॉज में ड्राइनेस के कारण भी इंफेक्शन हो सकता है।

पीसीओएस या थायराइड 

वजाइनल इंफेक्शन का सीधा रिलेशन थायराइड से होता है। इससे वजाइना के पीएच बैलेंस में बदलाव आ सकता है और फंगस का इंफेक्शन रहता है। पीसीओडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का बैलेंस बिगड़ने से मोटापा, पीरियड रेगुलर न होना और ज्यादा पुरुष हार्मोन होने के कारण वजाइना में इंफेक्शन होना का रिस्क बढ़ सकता है।

वजाइनल इंफेक्शन होने के कारण

डॉ. चेतना कहती हैं कि डायबिटीज, एंटीबायोटिक के बार-बार इस्तेमाल, बहुत ज्यादा टाइट कपड़े, सिंथेटिक कपड़े और अनसेफ इंटरकोर्स करने की वजह से भी वजाइनल इंफेक्शन हो सकती है। अगर किसी महिला को साल में तीन-चार से ज्यादा इंफेक्शन हो रहा है और लक्षण गंभीर हो जाते हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ब्लड टेस्ट, शुगर टेस्ट या हार्मोन प्रोफाइल चेकअप की सलाह दे सकती है।

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वजाइनल इंफेक्शन से बचाव के तरीके

डॉ. चेतना ने महिलाओं को वजाइनल इंफेक्शन से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

  1. पीरियड्स के दौरान वजाइना को साफ और सूखा रखें। पैड को हर चार से पांच घंटे में बदलें। परफ्यूम पैड्स या स्प्रे न करें।
  2. कॉटन अंडरगारमेंट पहनने चाहिए और सूखापन रहता है।
  3. मेनोपॉज में सूखेपन और जलन को राहत देने के लिए वजाइना में मॉइस्चराइजर और लुब्रिकेंट लगाया जाता है।
  4. प्रेग्नेंसी में बिना डॉक्टर की सलाह किसी की तरह की दवाई या घरेलू उपचार न करें।
  5. अगर वजाइना में इंफेक्शन, खुजली या सूखापन हो, तो थायराइड टेस्ट कराना चाहिए।
  6. ब्लड शुगर कंट्रोल में रखना जरूरी है ताकि वजाइना में इंफेक्शन से बचा जा सके।
  7. महिलाओं को बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए और प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए।
  8. बार-बार एंटीबायोटिक दवाइयां डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।

निष्कर्ष

डॉ. चेतना जोर देते हुए कहती हैं कि बार-बार वजाइनल इंफेक्शन होने की वजह हार्मोन में बैलेंस न हो सकता है, इसलिए समय पर चेकअप और इलाज होना जरूरी है। अगर समय रहते इलाज हो जाए, तो वजाइनल इंफेक्शन से बचा जा सकता है। इसके साथ वजाइना की सही देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है अगर लक्षण बार-बार हो रहे हो, तो इसे इग्नोर न करें, बल्कि डॉक्टर से जांच कराएं।

FAQ

  • वजाइना में इंफेक्शन हो तो क्या करें?

    अगर वजाइना में इंफेक्शन हो जाए, तो डॉक्टर से मिलकर सलाह लें। डॉक्टर आमतौर पर एंटीफंगल, एंटीबायोटिक और क्रीम देते हैं। इसके अलावा, गीले कपड़े बहुत ज्यादा समय तक न पहनें।
  • पेशाब के रास्ते में जलन हो तो क्या करना चाहिए?

    पेशाब में जलन होने पर पानी प्रचुर मात्रा में पीना चाहिए। कैफीन, मसालेदार खाने से बचना चाहिए।
  • फंगल इन्फेक्शन में क्या परहेज करना चाहिए?

    फंगल इन्फेक्शन में चीनी, ग्लूटेन, रिफाइंड तेल और प्रोसेस्ड फूड्स से बचना चाहिए। इसके अलावा, सूती कपड़े पहनने चाहिए और खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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