महिलाओं में वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन होना आम बात है और महिलाएं ऐसा होने पर एंटीफंगल दवाएं या एंटी बायोटिक दवाएं ले लेती है। अगर वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन बार-बार हो रही हो, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शरीर में किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसके कारणों को जानने के लिए टेस्ट कराना बहुत जरूरी है ताकि समय पर सही इलाज हो सके। इस बारे में हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट Dr. Shobha Gupta से बात की। उन्होंने बताया कि अगर किसी महिला को एक साल में चार या उसेस ज्यादा बार यीस्ट इंफेक्शन हो, तो इसे रिकरेंट वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन (Recurrent Vulvovaginal Candidiasis) कहा जाता है। ऐसे मामलों में एंटीफंगल दवा लेने से इलाज पूरा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे की वजह पता लगाना भी जरूरी होता है।
वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन बार-बार होने के कारण
Dr. Shobha Gupta कहती हैं, “यीस्ट इंफेक्शन होने का कारण केंडिडा फंगस होता है, जो जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकता है। अगर महिलाओं को योनि के आसपास तेज खुजली, जलन, चुभन, सफेद, गाढ़ा और पनीर जैसा डिस्चार्ज, सेक्स के दौरान दर्द और पेशाब करते समय जलन हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। हालांकि ये लक्षण कई दूसरी वजाइनल समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बिना चेक कराए इसे यीस्ट इंफेक्शन मानना सही नहीं है। वैसे यीस्ट इंफेक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं।”
डायबिटीज का कंट्रोल में न रहना
Dr. Shobha Gupta के मुताबिक, “बार-बार यीस्ट इंफेक्शन होने का सबसे बड़ा कारण डायबिटीज का कंट्रोल न होना। जब शरीर में ब्लड शुगर लगातार ज्यादा रहती है, तो केंडिडा फंगस के बढ़ने का रिस्क बढ़ जाता है और इस वजह से डायबिटीज पीड़ित महिलाओं में यह इंफेक्शन ज्यादा देखने को मिलता है।”
बार-बार एंटीबायोटिक लेना
Dr. Shobha Gupta के अनुसार, “एंटीबायोटिक दवाएं केवल खराब बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को भी खत्म कर देती हैं। इससे दोनों के बीच का बैलेंस बिगड़ सकता है और इस वजह से केंडिडा फंगस तेजी से बढ़ सकता है।”

कमजोर इम्यून सिस्टम
जिन महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें भी फंगल इंफेक्शन आसानी से हो सकता है। जो महिलाएं लंबे समय से स्टेरॉयड ले रही हैं, उनकी इम्यूनिटी कम होने का खतरा बढ़ सकता है।
हार्मोनल बदलाव
Dr. Shobha Gupta ने बताया कि जो महिलाएं गर्भनिरोधक दवाएं लेती हैं या फिर पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं, तो ऐसे में हार्मोनल अंसुतलित हो सकते हैं। ये कारण भी यीस्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकते हैं।
टाइट कपड़े पहनना
Dr. Shobha Gupta के अनुसार, अगर महिलाएं लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रखती है या फिर पसीना जमा होने लगता है, तो भी यीस्ट इंफेक्शन का कारण बन सकता है। कई महिलाएं टाइट सिंथेटिक के अंडरगारमेंट्स पहनती हैं, जिससे हवा न मिलने के कारण फंगस की ग्रोथ बढ़ सकती है।
बार-बार यीस्ट इंफेक्शन होने पर कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए?
Dr. Shobha Gupta ने कहा, “अगर बार-बार इंफेक्शन हो रहा हो, तो डॉक्टर सिर्फ लक्षणों के आधार पर दवाएं नहीं देते, बल्कि इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश करते हैं और इसके लिए महिलाओं को कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।”
- ब्लड शुगर टेस्ट - फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रांडियल शुगर और HbA1c कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे पता चलता है कि कहीं डायबिटीज या प्रीडायबिटीज तो इसकी वजह नहीं है।
- वजाइनल डिस्चार्ज की जांच - कई बार योनि से निकलने वाले डिस्चार्ज को लैब में भेजकर इंफेक्शन का पता लगाया जा सकता है कि इंफेक्शन केंडिडा या किसी बैक्टीरिया की वजह से हुआ है।
- फंगल कल्चर - अगर बार-बार इंफेक्शन हो रहा है या दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर फंगल कल्चर कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे केंडिडा की सही जानकारी मिल जाती है और यह भी पता चल जाता है कि उस पर कौन सी दवा उस पर सबसे ज्यादा असर करेगी।
- पेल्विक एग्जाम - पेल्विक एग्जाम के जरिए योनि और गर्भाशय ग्रीवा को चेक किया जाता है। इससे पता चलता है कि संक्रमण कहां तक फैला हुआ है।
निष्कर्ष
Dr. Shobha Gupta कहती हैं कि यीस्ट इंफेक्शन का इलाज उसकी गंभीरता और बार-बार होने की वजह पर निर्भर करता है। अगर यीस्ट इंफेक्शन शुरुआती स्टेज पर है, तो एंटीफंगल दवाएं दी जा सकती हैं, लेकिन अगर बीमारी बार-बरा हो रही है, तो दवा लंबे समय तक लेने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, यीस्ट इंफेक्शन की पहचान के लिए टेस्ट कराने से इसके सही कारणों की जानकारी मिल सकती है। इसलिए अगर किसी महिला को योनि से जुड़ी समस्या हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सबसे जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह लिए बिना खुद से दवाई न लें, क्योंकि गलत दवा लेने से असली बीमारी का इलाज नहीं हो पाता और समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
FAQ
पीरियड्स के ठीक पहले या बाद में ही यह इंफेक्शन क्यों उभरता है?
पीरियड्स की साइकिल में महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स तेजी से बदलते हैं। पीरियड्स के ठीक पहले वजाइना का pH Level बदल जाता है और वह कम एसिडिक रह जाता है। एसिडिटी कम होते ही वहां मौजूद अच्छे बैक्टीरिया कमजोर पड़ जाते हैं और यीस्ट को अचानक बढ़ने का मौका मिल जाता है।क्या स्ट्रेस (Mental Stress) भी वजाइनल इंफेक्शन का कारण बन सकता है?
अगर कोई बहुत ज्यादा मानसिक या शारीरिक तनाव में होता है, तो शरीर में कोर्टिसोल स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है। कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण शरीर वजाइना में मौजूद यीस्ट की सामान्य संख्या को नियंत्रित नहीं रख पाता।
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Jul 03, 2026 15:27 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 03, 2026 15:27 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 03, 2026 15:27 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 03, 2026 15:27 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Shobha Gupta