डायबिटीज में अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहती, तो इसका असर हार्ट, किडनी, आंखों और स्किन पर पड़ सकता है। इन्हीं समस्याओं में डायबिटीज के कारण बार-बार होने वाला फंगल इंफेक्शन भी है। आमतौर पर मरीज इसे खुजली या स्किन एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही छोटी-सी परेशानी गंभीर इंफेक्शन बन सकती है। इस बारे में हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के मरीजों में फंगल इंफेक्शन का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है और कई मामलों में फंगल इंफेक्शन बार-बार हो सकता है।
डायबिटीज में फंगल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “अक्सर डायबिटीज के मरीज सोचते हैं कि इस बीमारी का असर सिर्फ ब्लड शुगर से जुड़ा है, लेकिन ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहने से पसीने, पेशाब और शरीर के फ्लूड में भी ग्लूकोज की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे कंडीशन में फंगल इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है। इसके अलावा, भी डायबिटीज में फंगल इंफेक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं।”
कमजोर इम्यूनिटी होना
Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, “ब्लड में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं, जिसे व्हाइट ब्लड सेल्स कहा जाता है, बैक्टीरिया और फंगस से शरीर का बचाव करती है। जो लोग डायबिटीज से पीड़ित होते हैं, उनमें व्हाइट ब्लड सेल्स ज्यादा असरदार नहीं होते और इससे मरीजों की इम्यूनिटी पर भी प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से डायबिटीज मरीजों को इंफेक्शन होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है और एक बार होने के बाद इसे ठीक होने में भी काफी समय लगता है।”

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कैंडिडा फंगस का होना
Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, डायबिटीज न सिर्फ इम्यून सिस्टम को कमजोर करती है, बल्कि कैंडिडा फंगस को भी तेजी से एक्टिव कर देती है। रिसर्च के मुताबिक, जब शरीर में ग्लूकोज का लेवल लगातार बढ़ता रहता है, तो कैंडिडा ऐसे एंजाइम और टॉक्सिन बनाने लगता है जो शरीर के टिश्यू को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे इंफेक्शन स्किन तक ही सीमित नहीं रहता बल्कि शरीर के अंदर भी फैल सकता है।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि हाई ब्लड शुगर के कारण फंगस एक बायोफिल्म भी बना लेता है, जिस वजह से एंटीफंगल दवाओं का असर भी कम हो सकता है। इस वजह से कई मरीजों का इलाज होने के बाद इंफेक्शन दोबारा हो सकता है।
फंगल इंफेक्शन होने का रिस्क किन लोगों को ज्यादा है?
Dr. Karuna Malhotra ने बताया कि डायबिटीज के जिन मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, HbA1c लगातार बढ़ता रहता है, मोटापा, बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं लेा, किडनी की बीमारी, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल और बुजुर्गों को फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है।
फंगल इंफेक्शन शरीर के किन हिस्सों में ज्यादा होता है?
Dr. Karuna Malhotra ने कहा, “डायबिटीज के मरीजों में यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन ज्यादातर नमी और गर्मी वाले भागों में ज्यादा होता है। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों में फंगल इंफेक्शन की शुरुआत हल्की खुजली या लाल चकत्तों से होती है, लेकिन अगर समय पर इलाज न मिले, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसलिए शरीर के इन भागों का खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि इन जगहों पर फंगल इंफेक्शन होने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है।”
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स्किन पर फंगल इंफेक्शन
Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, स्किन पर फंगल इंफेक्शन होना सबसे आम है। स्किन में बगल, गर्दन, ब्रेस्ट के नीचे, कमर, जांघों और उंगलियों के बीच पसीने के कारण फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इसमें लाल या गुलाबी चकत्ते, तेज खुजली होना, जलन या चुभन, स्किन का फटना या छिलना, छोटे-छोटे दाने या फफोले हो सकते हैं।
मुंह में फंगल इंफेक्शन
Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 के मरीजों में फंगस की दर बहुत ज्यादा होती है। सेहतमंद लोगों में 27% के मुकाबले टाइप 1 में 84% और टाइप 2 में 68% ज्यादा होती है। डायबिटीज के मरीजों की लार में ग्लूकोज का स्तर अधिक होने और मुंह सूखने की समस्या के कारण कैंडिडा तेजी से बढ़ता है।
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं कि मुंह के फंगल इंफेक्शन में मरीज के जीभ या गाल के अंदर सफेद परत जमना, मुंह में जलन, स्वाद कम महसूस होना, मुंह का सूखना और खाना निगलने में तकलीफ हो सकती है।
प्राइवेट पार्ट में फंगल इंफेक्शन
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहने से महिलाओं और पुरुषों के जननांगों के आसपास फंगल इंफेक्शन हो सकती है। इसमें महिलाओं को योनि में तेज खुजली, जलन, सफेद, गाढ़ा डिस्चार्ज, पेशाब करते समय दर्द और सेक्शुल संबंध बनाते समय तकलीफ हो सकती है। वहीं, पुरुषों के लिंग के ऊपर लाल चकत्ते, खुजली, जलन, सफेद परत, बदबू या त्वचा में सूजन हो सकती है।
पैरों और नाखूनों का फंगल इंफेक्शन
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “डायबिटीज के मरीजों को पैरों का खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि ब्लड सर्कुलेशन कम होने और नसों के कमजोर पड़ने के कारण गंभीर समस्या भी हो सकती है। फंगल इंफेक्शन होने पर मरीज के पैर की उंगलियों के बीच खुजली होती है, स्किन सफेद होकर गलने लगती है, दुर्गंध आ सकती है, नाखून पीले, भूरे या मोटे हो सकते हैं, नाखून टूटने या उखड़ने लगते हैं। अगर यह समस्या ज्यादा समय तक रहती है, तो डायबिटिक फुट अल्सर का खतरा बढ़ सकता है।”
यूरिनरी ट्रैक्ट में फंगल इंफेक्शन
Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, “ज्यादातर फंगल इंफेक्शन यूरिनरी ट्रैक्ट तक जा सकता है। इसमें फंगल इंफेक्शन पेशाब की नली तक जा सकता है और इस वजह से मरीज को पेशाब करते समय जलन और दर्द हो सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को ऐसे लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।”
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डायबिटीज में फंगल इंफेक्शन से कैसे बचें?
Dr. Karuna Malhotra के अनुसार, फंगल इंफेक्शन से बचने का सबसे असरदार तरीका ब्लड शुगर को कंट्रोल करना है। अगर ब्लड शुगर बढ़ती रहती है, तो दवा का असर भी कम हो जाता है और संक्रमण दोबारा होने की संभावना बनी रहती है।
American Diabetes Association के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए इन आदतों में सुधार करना चाहिए।
- डायबिटीज के मरीजों को नहाने के बाद शरीर की बगल, कमर, जांघों के बीच और पैर की उंगलियों के बीच की स्किन को अच्छी तरह सुखाएं।
- जिन मरीजों को ज्यादा पसीना आता है, तो दिन में एक से दो बार कपड़े बदलना भी फायदेमंद है।
- डायबिटीज के मरीजों को हल्के मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। पैरों की उंगलियों के बाीच क्रीम या लोशन न लगाएं।
- शेविंग, नाखून काटते समय या किसी छोटी चोट के कारण स्किन कटने पर उसे तुरंत साबुन और साफ पानी से धोएं।
- पैरों में आरामदायक जूते पहनें और नंगे पैर बिल्कुल न चलें।
डॉक्टर से कब मिलें?
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं कि अगर डायबिटीज मरीज को कई दिनों तक खुजली बनी रहे, लाल चकत्ते तेजी से फैलने लगे, सफेद परत बन जाए, पैरों में जख्म भरने में समय लगे, एक ही जगह बार-बार इंफेक्शन हो और मुंह, प्राइवेट पार्ट या नाखूनों का संक्रमण दवा लेने के बाद भी ठीक न हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
निष्कर्ष
Dr. Karuna Malhotra बताती है कि फंगल इंफेक्शन में स्किन स्क्रैपिंग और फंगल कल्चर किया जा सकता है, ताकि सही कारण पता चल सके और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया जा सके। कई लोग खुजली या लाल चकत्ते कम होते ही एंटीफंगल क्रीम या दवा बंद कर देते हैं। ऐसा करने से संक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं होता और कुछ समय बाद फिर लौट सकता है। इसलिए फंगल इंफेक्शन का इलाज डॉक्टर द्वारा बताए गए पूरे कोर्स तक करना जरूरी होता है। साथ ही, इलाज के दौरान ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना भी जरूरी है।
FAQ
क्या फंगल इंफेक्शन एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है?
फंगल इंफेक्शन बहुत ज्यादा संक्रामक होता है। अगर डायबिटीज के मरीज के कपड़ों, तौलिये, बेडशीट या साबुन का इस्तेमाल घर का कोई दूसरा सदस्य करता है, तो यह इंफेक्शन उसे भी हो सकता है। इसलिए मरीज को अपने कपड़े और तौलिया हमेशा अलग रखने चाहिए और उन्हें गर्म पानी व एंटीसेप्टिक लिक्विड से धोना चाहिए।नाखूनों के फंगल इंफेक्शन को ठीक होने में कितना समय लगता है?
डायबिटीज के मरीजों में नाखूनों का फंगल इंफेक्शन बहुत जिद्दी होता है। चूंकि पैर और हाथ के नाखूनों के बढ़ने की रफ्तार धीमी होती है, इसलिए सिर्फ ऊपरी क्रीम लगाने से यह ठीक नहीं होता। इसके लिए डॉक्टर को कई महीनों तक खाने वाली एंटीफंगल गोलियां देनी पड़ती हैं।
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Jul 13, 2026 15:14 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra