Sat Oct 10, 2026 | 01:28 AM IST

Medically Reviewed by Dr Himika Chawla , Senior Consultant – Endocrinology & Diabetology

डायबिटीज में शुगर बढ़ने पर पैरों में इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? डॉक्टर से समझें बचाव के उपाय

हाल ही में एक्टर राजेश शर्मा ने बताया कि हाई ब्लड शुगर को लंबे समय तक नजरअंदाज करने की वजह से पैरों में इंफेक्शन गंभीर हो गया। इस वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। क्या डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने पर पैरों का इंफेक्शन गंभीर हो सकता है? यह जानने के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें।
डायबिटीज में शुगर बढ़ने पर पैरों में इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? डॉक्टर से समझें बचाव के उपाय
डायबिटीज में शुगर बढ़ने पर पैरों में इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है? डॉक्टर से समझें बचाव के उपाय

डायबिटीज में हाई ब्लड शुगर को लंबे समय तक कंट्रोल न करने पर शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसमें पैरों की त्वचा भी शामिल है और कुछ ऐसा ही जुलाई में अभिनेता राजेश शर्मा के साथ हुआ था। उन्होंने बताया कि दाहिने पैर में पुरानी त्वचा की समस्या और ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ी, जिसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने कीड़े के काटने की खबरों को खारिज किया। इससे पता चलता है कि हाई ब्लड शुगर में पैरों का छोटा घाव या पुरानी त्वचा संबंधी समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है। इस बारे में जानने के लिए हमने दिल्ली स्थित PSRI Hospital में Senior Consultant, Endocrinology and Diabetology डॉ. हिमिका चावला से बात की।

हाई ब्लड शुगर से इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ता है?

Dr. Himika Chawla कहती हैं, “डायबिटीज में जब ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ी रहती है, तो शरीर की इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हाई ब्लड शुगर इम्यून सिस्टम पर असर डाल सकता है और कुछ मामलों में सफेद रक्त कोशिकाओं पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में शरीर के लिए बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमणों से लड़ना मुश्किल हो सकता है। इस वजह से डायबिटीज के मरीजों को स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। अगर पहले से इंफेक्शन हो, तो बीमारी के दौरान ब्लड शुगर भी बढ़ सकती है।”

डायबिटीज में पैर का इंफेक्शन क्यों गंभीर होता है?

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों के पैर दो तरीकों से प्रभावित हो सकते हैं।

  • हाई ब्लड शुगर के कारण पैरों की नसें कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाती है और इस वजह से पैरों में झनझनाहट, दर्द या पूरी तरह से सुन्नपन आ सकता है। अगर उन्हें कंकड़ या पत्थर चुभ जाए, तो उन्हें अहसास नहीं होता। इस वजह से यह बढ़कर बड़ा घाव या इंफेक्शन हो सकता है।
  • डायबिटीज में पैरों में ब्लड फ्लो कम हो जाता है। पर्याप्त ब्लड फ्लो न होने के कारण पैरों के छालों, कट या घाव को ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।

त्वचा से जुड़ी पुरानी समस्या क्यों हो जाती है गंभीर?

Dr. Himika Chawla कहती हैं, “अगर पैर की त्वचा पर पहले से कोई समस्या है और इसी दौरान ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो उस जगह को ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। डायबिटीज को कंट्रोल में रखना त्वचा और पैरों से जुड़ी समस्याओं को संभालने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाई ब्लड शुगर के साथ अगर किसी पुराने स्किन से जुड़े घाव में अचानक बदलाव आने लगे, तो इसे केवल सामान्य स्किन समस्याएं मानकर छोड़ना सही नहीं है। खासतौर पर अगर पुरानी समस्या वाली जगह पर लालिमा, सूजन, दर्द, गर्माहट, डिस्चार्ज या घाव बढ़ने लगे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।”

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डायबिटीज में पैरों में किन लक्षणों पर रखें नजर?

Dr. Himika Chawla सलाह देती हैं कि अगर किसी को डायबिटीज की समस्या है, तो उन्हें पैरों के इन लक्षणों को नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

  • पैर या उंगलियों पर कट या घाव
  • लालिमा या ज्यादा गर्म महसूस होना
  • पैर में अचानक सूजन
  • छाले बनना
  • जख्म से पानी या पस निकलना
  • स्किन का रंग बदलना
  • घाव को भरने में समय लगे
  • पैरों में सुन्नपन होने लगे
  • स्किन या नाखूनों में बदलाव होना
  • घाव के आसपास दर्द बढ़ना

डायबिटीज में पैरों की देखभाल कैसे करें?

Cleveland Clinic के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को सबसे पहले ब्लड शुगर को कंट्रोल करना जरूरी है, ताकि नर्व डैमेज और ब्लड सर्कुलेशन की समस्याओं से बचा जा सके। इसके साथ हाई ब्लड शुगर में मरीजों को पैरों की देखभाल कुछ ऐसे करना महत्वपूर्ण है।

  • पैरों की स्किन, तलवों और उंगलियों के बीच किसी भी बदलाव, कट या छाले को देखना चाहिए।
  • नाखूनों को हमेशा सीधा ही काटें और किनारों को फाइलर से साफ करें ताकि वे त्वचा में न चुभें।
  • जुराबें ऐसी पहनें, जो टाइट न हों और आरामदायक जूते चुनें।
  • पैरों को ठंडे और गर्म से बचाएं।
  • बैठते समय पैरों को थोड़ा ऊपर रखें और बीच-बीच में पैर की उंगलियों को हिलाते रहें।
  • पैरों को ऊपर और नीचे मॉइश्चराइजर या लोशन लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच में लोशन न लगाएं।
  • रोजाना गुनगुने पानी में पैर धोएं और अच्छी तरह सुखाएं।

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डॉक्टर से कब मिलें?

Dr. Himika Chawla कहती हैं कि अगर पैर के घाव के साथ बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, बहुत ज्यादा कमजोरी, कंफ्यूजन, तेजी से बढ़ती सूजन या लालिमा, पस या त्वचा का काला पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। अगर पैर में जख्म हो जाए, तो घरेलू नुस्खे न अपनाएं क्योंकि इससे स्थिति गंभीर हो सकती है।

निष्कर्ष
अगर लंबे समय तक डायबिटीज मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे, तो इसका नुकसान पैरों पर भी दिख सकता है। कुछ ऐसा ही अभिनेता राजेश शर्मा के साथ हुआ था। इसलिए शुरुआत में ही पैरों से जुड़े किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें, बल्कि समय रहते डॉक्टर को दिखाएं।

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FAQ

  • क्या गर्म पानी से पैर धोने या हीटिंग पैड इस्तेमाल करने से डायबिटिक मरीज के पैर झुलस सकते हैं?

    नसों के सुन्न होने के कारण मरीज को पानी या हीटिंग पैड के तापमान का सही अंदाजा नहीं होता। इसलिए पानी का तापमान हमेशा हाथ या कोहनी से चेक करने के बाद ही पैर धोएं और कभी भी हीटिंग पैड का सीधा इस्तेमाल पैरों पर न करें।
  • डायबिटिक मरीजों को घर के अंदर भी नंगे पैर चलने से मना क्यों किया जाता है?

    सुन्नपन की वजह से फर्श पर पड़ी छोटी सी आलपिन, कांच का टुकड़ा या कठोर चीज चुभने पर भी दर्द महसूस नहीं होता। यह छोटी सी चोट अनजाने में बड़ा डायबिटिक अल्सर और फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन बन सकती है। हमेशा मुलायम चप्पल या डायबिटिक फुटवेयर पहनें।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 10, 2026 13:38 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Himika Chawla