Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

डायबिट‍िक मरीजों में घाव भरने में ज्यादा समय क्यों लगता है? डॉक्‍टर से जानें

क्‍या आपने कभी गौर क‍िया है क‍ि लोगों के घाव या चोट को भरने में सामान्‍य से अध‍िक समय लगता है? ऐसा डायब‍िट‍िक मरीजों में होना कॉमन है। हाई शुगर लेवल, घाव भरने की प्रक्र‍िया को प्रभाव‍ित कर सकती है। डॉक्‍टर से जानें इसका कारण।

इस पेज पर:-


डायब‍िट‍िक मरीजों को कई शारीर‍िक समस्‍याओं से गुजरना पड़ता है ज‍िसमें से एक है घाव का जल्‍दी न भरना। जब एक सामान्‍य व्‍यक्‍त‍ि को चोट लगती है, तो पहले चोट के आसपास मौजूद सूजन कम होती है फ‍िर घाव धीरे-धीरे सूखने लगता है और ठीक हो जाता है, लेक‍िन डायब‍िटीज में यही प्रक्र‍िया धीमी हो जाती है। हाई शुगर लेवल के साथ-साथ और भी कई बदलाव हैं जो डायब‍िटीज में घाव भरने में देरी का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं आख‍िर डायब‍िटीज घाव भरने की प्रक्र‍िया को कैसे प्रभाव‍ित करती है और ऐसे मरीजों में घाव भरने में ज्‍यादा समय क्‍यों लगता है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

घाव भरने की प्रक्र‍िया को कैसे प्रभाव‍ित करती है डायब‍िटीज?

diabetes-and-wound-healing

  • घाव भरने के ल‍िए नई ब्‍लड वेसल्‍स का बनना जरूरी है, लेक‍िन डायब‍िटीज में यह प्रक्र‍िया ठीक से काम नहीं करती।
  • डायब‍िटीज में कोलेजन बनने की प्रक्र‍िया भी धीमी हो सकती है। कोलेजन एक प्रोटीन है जो त्‍वचा को मजबूती देता है।
  • कई मरीजों को डायब‍िटीज में डायब‍िट‍िक न्‍यूरोपैथी कंडीशन व‍िकस‍ित हो जाती है ज‍िसके कारण पैरों की सेंस‍िट‍िव‍िटी कम हो जाती है और कट या छोट लगने पर समय पर पता नहीं चलता है ज‍िससे इलाज में देरी हो जाती है और इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें- घाव में बैक्टीरियल इंफेक्शन क्यों होता है? समय रहते पहचानें, डॉक्‍टर से जानें इलाज

हाई शुगर लेवल से घाव भरने की प्रक‍िया हो जाती है धीमी

जब हमें चोट लगती है, तो पहले खून का थक्‍का बनता है ज‍िससे ब्‍लीड‍िंग रुक जाती है। इसके बाद शरीर की कोश‍िकाएं घाव वाली जगह पर पहुंचकर बैक्‍टीर‍िया और डैमेज ट‍िशूज को हटाते हैं। फ‍िर नए ट‍िशूज बनते हैं और अंतर में घाव पूरी तरह से भर जाता है, लेक‍िन डायब‍िटि‍क मरीजों में यही प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो जाती है। हाई शुगर लेवल घाव र‍िपेयर करने वाली कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंचाता है ज‍िससे घाव भरने की प्रक्र‍िया धीमी हो जाती है।

क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2025 में Arteriosclerosis, Thrombosis And Vascular Biology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, जब लंबे समय तक शुगर लेवल ज्‍यादा रहता है, तो शरीर की कोश‍िकाओं के कार्य करने की क्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है। इससे घाव भरने की प्रक्र‍िया धीमी हो सकती है। स्‍टडी के मुताब‍िक, क‍िसी सामान्‍य व्‍यक्‍त‍ि को जब घाव होता है, तो पहले सूजन होती है और फ‍िर र‍िपेयर होने की प्रक्र‍िया शुरू होती है, लेक‍िन टाइप 2 डायब‍िटीज में बदलाव धीमा होता है और सूजन देर तक बनी रहती है और घाव देर से भरता है।

ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस के कारण घाव भरने में देरी हो सकती है

साल 2022 में International Journal Of Molecular Sciences में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस, इंफेक्‍शन और ब्‍लड वेसल्‍स में होने वाले बदलाव के कारण डायब‍िटीज में घाव भरने में ज्‍यादा समय लग सकता है। स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि डायब‍िटीज के कारण नई त्‍वचा बनने की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो सकती है। हाई शुगर लेवल से कोलेजन बनने की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो सकती है ज‍िससे घाव के बाद नई त्‍वचा तैयार होने में समय लग सकता है।

डायब‍िटीज के कारण घाव में इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा

साल 2021 में Seminars In Plastic Surgery में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, डायबिटीज के मरीजों में घाव में संक्रमण (Wound Infection), टांके खुलना और दाग-धब्‍बे बनने का खतरा ज्‍यादा होता है। स्‍टडी के मुताब‍िक, डायबिटीज में घावों में सूजन लंबे समय तक बनी रहती है।

यह भी पढ़ें- घाव की ड्रेसिंग करते समय लोग अक्‍सर करते हैं ये 7 आम गलतियां, बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा

क‍िन लोगों में घाव भरने में देरी का खतरा होता है?

  • जो डायब‍िटीज के मरीज हों या ज‍िनका शुगर लेवल हाई रहता हो।
  • धूम्रपान करने वाले लोग।
  • मोटापे के मरीज।
  • कि‍डनी या हार्ट ड‍िजीज के मरीज।
  • ज‍िन लोगों के शरीर में पोषण की कमी हो।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • घाव में रेडनेस या सूजन बढ़ना।
  • घाव से मवाद न‍िकलना।
  • घाव से बदबू आना।
  • तेज दर्द होना।
  • बुखार आना।
  • घाव के आसपास की त्‍वचा काली पड़ना।

घाव के जल्‍दी ठीक होने के ल‍िए क्‍या करें?

  • शुगर लेवल को कंट्रोल करें और समय-समय पर शुगर की जांच कराएं। साथ ही शुगर लेवल मॉन‍िटर करना न भूलें।
  • घाव को साफ रखें और समय-समय पर ड्रेस‍िंग को बदलते रहें।
  • डाइट में पर्याप्‍त प्रोटीन, व‍िटाम‍िन सी, ज‍िंक, आयरन जैसे पोषक तत्‍वों से भरपूर फूड्स को शाम‍िल करें। इससे हीलि‍ंग प्रक्र‍िया तेज होगी।
  • घाव या चोट लगने पर धूम्रपान और अल्‍कोहल के सेवन से परहेज करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि इससे ब्‍लड सर्कुलेशन पर बुरा असर पड़ता है और घाव भरने की प्रक्र‍िया धीमी हो सकती है।

निष्कर्ष:

डायब‍िटीज में नई ब्‍लड वेसल्‍स और कोलेजन बनने की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित होती है। हाई शुगर लेवल घाव र‍िपेयर करने वाली कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंचाता है ज‍िससे घाव भरने की प्रक्र‍िया धीमी हो जाती है। ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस, इंफेक्‍शन और ब्‍लड वेसल्‍स में होने वाले बदलाव के कारण भी डायब‍िटीज में घाव भरने में ज्‍यादा समय लग सकता है। डायबिटीज के मरीजों में घाव में संक्रमण, टांके खुलना और दाग-धब्‍बे बनने का भी खतरा हो सकता है। घाव से बदबू आए या मवाद बने, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। घाव होने पर शुगर लेवल को कंट्रोल करें। प्रोटीन, ज‍िंक, व‍िटाम‍िन सी युक्‍त डाइट लें और घाव की सफाई पर गौर करें।

FAQ

  • क्‍या सभी डायब‍िट‍िक मरीजों में घाव देर से भरते हैं?

    नहीं, ज‍िन मरीजों का शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं है या जो घाव की देखभाल ठीक से नहीं करते हैं, उनके घाव भरने में सामान्‍य से ज्‍यादा समय लग सकता है।
  • डायब‍िटीज में कैसे घाव ज्‍यादा होते हैं?

    डायब‍िट‍िक मरीजों में फफोले, कट, अल्‍सर, पैरों में होने वाले घाव ज्‍यादा देखने को म‍िलते हैं।

Read Next

पैरों में दर्द का कारण डायबिटीज तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें शुरुआती संकेत और इलाज 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 06, 2026 17:04 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content