Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vighnesh Y , Sr. Consultant – General Medicine

घाव की ड्रेसिंग करते समय लोग अक्‍सर करते हैं ये 7 आम गलतियां, बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा

घाव की ड्रेस‍िंग करते समय अक्‍सर लोग कई गलत‍ियां करते हैं, जिससे घाव में इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं, ऐसी ही कुछ गलत‍ियों के बारे में ज‍िनसे बचना चाह‍िए।

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अक्‍सर लोग घाव की ड्रेस‍िंग के दौरान कई गलत‍ियां करते हैं ज‍िससे समस्‍या दोगुना हो सकती है। चोट लगने के बाद अक्‍सर घाव बन जाता है या सर्जरी के कारण भी घाव के न‍िशान नजर आते हैं। घाव को देखकर सभी को यही लगता है क‍ि जल्‍दी से ड्रेसि‍ंग हो जाए ताक‍ि आराम हो और दर्द से छुटकारा म‍िल जाए। हालांक‍ि, घाव की ड्रेस‍िंग हो जाना ही काफी नहीं है। घाव में इंफेक्‍शन भी हो सकता है। अक्‍सर लोग ड्रेस‍िंग हो जाने के बाद लापरवाही करते हैं, ज‍िससे घाव ठीक होने के बजाय बढ़ जाता है। कुछ दुर्लभ मामले ऐसे भी होते हैं ज‍िसमें घाव का इंफेक्‍शन इतना बढ़ जाता है क‍ि उसे ठीक करने के ल‍िए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं आख‍िर घाव की ड्रेस‍िंग करते समय कौन सी गलत‍ियां हैं ज‍िनसे बचना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Vighnesh Y, Sr. Consultant General Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।

1. पस को नजरअंदाज करना

अगर घाव से पस न‍िकल रहा है और उसे नजरअंदाज कर रहे हैं, तो यह गलती भारी पड़ सकती है। ड्रेस‍िंग के दौरान गौर करें क‍ि घाव से पस, तो नहीं न‍िकल रहा है? पस न‍िकलना बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन का संकेत है। मेड‍िकल जर्नल Wounds International में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, घाव में होने वाले बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन का इलाज न होने पर वह रक्‍त में फैलता है और सेप्‍स‍िस जैसी गंभीर स्‍थ‍िति‍ का कारण बन सकता है। इसके कारण घाव में फोड़ा बन सकता है ज‍िसे जल्‍द से जल्‍द इलाज की जरूरत होती है।

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2. ड्रेस‍िंग में गलत लेयर‍िंग करना

अगर घाव पर पट्टी बांधते समय बहुत कम लेयर‍िंग करेंगे, तो भी घाव भरने में ज्‍यादा समय लग सकता है और इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है। साल 2024 में StatPearls जर्नल में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताबि‍क, अगर ड्रेसिंग, घाव को ठीक से कवर नहीं करती है, तो घाव भरने में देरी हो सकती है। अध‍िक पतली पट्टी के कारण इंफेक्‍शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

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3. ड्रेस‍िंग के दौरान हाथों की सफाई न रखना

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि बहुत से लोग घाव की ड्रेस‍िंग करते समय हाथों की सफाई पर गौर नहीं करते और यही सबसे बड़ी गलती है। क‍िसी भी घाव या इंफेक्‍शन पर दवा लगाते समय व्‍यक्‍त‍ि का हाथ साफ होना चाह‍िए। ड्रेस‍िंग करने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्‍छी तरह से साफ करें। अगर हाथ साफ करने की सुव‍िधा नहीं है, तो साफ ग्‍लब्‍स का इस्‍तेमाल करें।

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4. बार-बार ड्रेस‍िंग को हटाना

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि कई बार लोग घर पर खुद से घाव की ड्रेस‍िंग करते हैं और डॉक्‍टर की सलाह के बगैर घाव से बार-बार ड्रेस‍िंग टेप या पट्टी हटाते हैं। इससे घाव पर या उसके आसपास बैक्‍टीर‍ियल ग्रोथ हो सकती है और हीलि‍ंग की प्रक्र‍िया धीमी हो सकती है। ज‍िस तरह बार-बार ड्रेस‍िंग बदलना या हटाना गलत है, उसी तरह लंबे समय तक ड्रेस‍िंग न बदलना भी बैक्‍टीर‍िया को न्‍यौता दे सकता है। समय-समय पर ड्रेस‍िंग को बदलना भी जरूरी है, लेक‍िन घाव कि‍स प्रक‍ार का है इसे ध्‍यान में रखते हुए डॉक्‍टर से सलाह लेकर ड्रेस‍िंग करें।

5. ड्राई या गीली ड्रेस‍िंग में अंतर न समझना

घाव क‍ितना गहरा है? घाव क‍ितना पुराना है? घाव क‍िस प्रकार का है? इन सभी सवालों के जवाब डॉक्‍टर के पास होते हैं ज‍िनके आधार पर वे ड्राई या गीली ड्रेस‍िंग करने की सलाह देते हैं। अगर ड्राई रखे जाने वाले घाव पर आपने गीली ड्रेस‍िंग कर दी, तो भी इंफेक्‍शन हो सकता है। इसल‍िए क‍िसी भी घाव की ड्रेस‍िंग को मेड‍िकल एडवाइज के मुताब‍िक ही करें।

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6. ड्रेस‍िंग मटेर‍ियल का गलत इस्‍तेमाल करना

  • कई बार इंफेक्‍शन गलत ढंग से ड्रेस‍िंग करने या गंदे हाथ से ड्रेस‍िंग करने से नहीं बल्‍क‍ि ड्रेस‍िंग के ल‍िए इस्‍तेमाल की जाने वाली पट्टी या दवा से भी हो सकता है। दवा या पट्टी की क्वालिटी और एक्‍सपायरी डेट चेक करके ही उसे ड्रेस‍िंग के ल‍िए इस्‍तेमाल करें।
  • एक बार ज‍िस पट्टी को ड्रेसि‍ंग के ल‍िए इस्‍तेमाल कर ल‍िया, उसे दोबारा यूज करने से इंफेक्‍शन हो सकता है इसल‍िए यह गलती न करें।
  • क‍िसी भी दवा को इस्‍तेमाल करने से पहले उसके इंग्रीड‍िएंट्स की ल‍िस्‍ट चेक करें, अगर व्‍यक्‍त‍ि को क‍िसी चीज से इंफेक्‍शन है, तो डॉक्‍टर की सलाह पर दवा चेंज करें।

7. ड्रेस‍िंग को ज्‍यादा टाइट या लूज रखना

लोग अक्‍सर घाव पर दवा लगाकर पट्टी को टाइट बांध देते हैं, ताक‍ि दवा फैले नहीं या घाव के ह‍िस्‍से को सपोर्ट म‍िले, लेक‍िन ऐसा करने से उस ह‍िस्‍से का ब्‍लड फ्लो प्रभाव‍ित हो सकता है। साथ ही ज्‍यादा पसीना आ सकता है ज‍िसके कारण घाव में इंफेक्‍शन का खतरा हो सकता है इसल‍िए ड्रेस‍िंग को न ज्‍यादा टाइट रखें और न ज्‍यादा लूज रखें। लूज ड्रेस‍िंग से घाव को सुरक्षा नहीं म‍िलेगी और उससे भी इंफेक्‍शन का खतरा बना रहेगा।

न्‍यूट्र‍िशन को नजरअंदाज न करें

Dr. Vighnesh Y ने बताया क‍ि अक्‍सर यह देखा गया है क‍ि हेल्‍दी डाइट न लेने से घाव के भरने का समय बढ़ जाता है इसल‍िए घाव होने पर हेल्‍दी डाइट लेना चाह‍िए। सर्जरी के बाद प्रोटीन र‍िच डाइट की भूम‍िका अहम होती है। घाव होने पर फाइबर इंटेक और प्रोटीन फूड्स को डाइट में शाम‍िल करें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • घाव के आसपास रेडनेस बढ़ने लगे।
  • घाव से पस न‍िकले या बदबू आए।
  • घाव में सूजन नजर आए।
  • घाव के ह‍िस्‍से में असहजता महसूस हो और ब‍िल्‍कुल आराम न म‍िले।
  • अगर आप एक डायब‍िट‍िक मरीज हैं, तो घाव भरने में समय लग सकता है इसल‍िए डायब‍िटीज के साथ घाव होने पर डॉक्‍टर से सलाह लेना न भूलें।

न‍िष्‍कर्ष:

घाव की ड्रेस‍िंग करते समय पस को नजरअंदाज न करें, ड्रेस‍िंग करते समय लेयर‍िंग का ख्‍याल रखें क्‍योंक‍ि घाव ठीक से कवर नहीं होगा, तो इंफेक्‍शन हो सकता है। ड्रेस‍िंग के दौरान हैंड हाइजीन जरूरी है, बार-बार ड्रेस‍िंग न हटाएं, ड्राई और गीली ड्रेस‍िंग में अंतर समझें, ड्रेस‍िंग मटेर‍ियल की क्वालिटी चेक करें, एक्‍सपायर्ड हो चुकी दवा घाव पर न लगाएं, घाव को ज्‍यादा टाइट या लूज न रखें। घाव में रेडनेस, सूजन, पस द‍िखने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें। घाव की हील‍िंग के ल‍िए हेल्‍दी डाइट लें, प्रोटीन और फाइबर र‍िच फूड्स खाएं।

FAQ

  • ड्रेस‍िंग से पहले क्‍या करना चाह‍िए?

    ड्रेस‍िंग से पहले हाथों को अच्‍छी तरह से साफ करना चाह‍िए फि‍र साफ ग्‍लब्‍स पहनकर एंटीसेप्‍ट‍िक दवाओं और साफ बैंडेज का इस्‍तेमाल करना चाह‍िए ताकि‍ घाव में इंफेक्‍शन न हो। 
  • घाव भरने के संकेत क्‍या हैं?

    धीरे-धीरे दर्द कम होना, सूजन या रेडनेस घटना, नई त्‍वचा बनना, घाव का ड्राई होना, हल्‍की खुजली महसूस होना, घाव का आकार कम होना, घाव भरने के संकेत माने जाते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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