बारिश के मौसम में आपने देखा होगा कि घाव भरने में ज्यादा समय लगता है। ज्यादातर लोग इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। अगर कोई डायबिटीज का मरीज है, तो उन्हें इस स्थिति को जरा भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। ध्यान रखें कि अगर घाव समय पर नहीं भरता है, तो यह भविष्य में संक्रमण का रूप ले सकता है और आस-पास के हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है, जो कि सही नहीं है। वास्तव में, बारिश के दिनों में हवा में नमी अधिक होती है, जो घाव को समय पर भरने नहीं देती। आइए, राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से जानते हैं इसके अन्य कारणों के बारे में।
बारिश में घाव देरी से क्यों भरते हैं?
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बढ़ती नमीः बारिश के मौसम में हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है। ऐसी स्थिति में अगर किसी को चोट लगती है, तो उसे सूखने में औसत से अधिक समय लगता है, जिससे त्वचा लंबे समय तक गीली और मुलायम बनी रहती है। गीली त्वचा बहुत जल्दी छिलने लगती है और यहां कीटाणु भी आसानी से पनपने लगते हैं, जो रिकवरी को धीमा कर देते हैं।
स्टडी: साल 2013 में Advances in Wound Care में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, सूखे वातावरण की तुलना में नम या नियंत्रित गीले वातावरण में घाव का इलाज करने से त्वचा की नई परत तेजी से बनती है और घाव जल्दी भरता है। सरल शब्दों में इसका अर्थ है कि अधिक नमी वाले वातावरण में घाव को भरने के काफी समय लगता है।
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बैक्टीरिया का पनपनाः जैसा कि यह हम जानते हैं कि मानसून के दिनों में हवा में ज्यादा नमी और गर्मी होती है, जिस कारण त्वचा पर बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। घाव में बैक्टीरिया के बढ़ने की वजह से लंबे समय तक सूजन और जलन रहती है, जिससे त्वचा में बनने वाली नई कोशिकाएं खराब होने लगती हैं। यह स्थिति भी घाव को गंभीर कर सकती है।
दूषित पानीः डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "बारिश का पानी गंदा होता है और अगर पहले से हुए किसी खुले घाव पर पड़ता है, तो कंडीशन खराब होने का जोखिम अधिक होता है। विशेषकर, जमे हुए बारिश के पानी में धूल-मिट्टी, नाले की गंदगी और पैथोजन्स (रोगाणु) होते हैं। इसके संपर्क में आने से ये रोगाणु सीधे त्वचा के अंदर प्रवेश कर सकते हैं, जो कि चोट को ठीक होने से रोकते हैं।"
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मानसून में घाव की देखभाल कैसे करें?
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मानसून में बहुत जरूरी है कि आप घाव की पूरी देखभाल करें। विशेषकर, डायबिटीज के मरीज जरा भी लापरवाही न करें। डॉ. करुणा मल्होत्रा द्वारा यहां बताए गए टिप्स को आप जरूर अपनाएं-
- घाव की सही तरीके से सफाई करें। अगर घाव खुला हुआ है, तो रोजाना उसे साफ पानी से धोएं, ताकि उसमें गंदगी न चिपक सके।
- घाव को अच्छी तरह सुखाना न भूलें। घाव को पानी से धोकर उसे यूं ही खुला न छोड़ें। इससे बैक्टीरिया के पनपने का जोखिम बढ़ जाता है। घाव को साफ कपड़े से थपथपाकर पूरी तरह सुखाएं।
- घाव पर पट्टी लगाते हैं, तो उसे समय-समय पर बदलें। रोजाना एक ही पट्टी लगाने से वह गीली हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- घाव को बारिश के पानी के संपर्क में आने से बचाएं। इसके अलावा, मानसून में घर से बाहर जब भी निकलें, रेनकोट आदि पहनें या छतरी लेकर चलें। इससे भीगने का रिस्क कम हो जाता है।
- संक्रमित हिस्से पर पूरी नजर रखें। ध्यान रखें कि कहीं घाव में रेडनेस या सूजन तो नहीं बढ़ गई है? इसके अलावा, यह भी देखें कि क्या प्रभावित हिस्सा अक्सर गर्म रहता है और क्या उसमें पस जमा गया है? अगर ऐसा है, तो डॉक्टर को दिखाएं।
- घाव का इलाज घर पर करने की कोशिश न करें। खासकर, डायबिटीज के मरीज घाव का तुरंत इलाज शुरू करवा दें। ध्यान रखें कि ब्लड शुगर का स्तर संतुलित नहीं होने के कारण घाव को भरने में सामान्य से अधिक समय लगता है। ऐसे में घाव का सही ट्रीटमेंट होना जरूरी है।
- मानसून में घाव भरने के लिए इम्यूनिटी पर भी जोर दिया जाना चाहिए। कोशिश करें कि इन दिनों हेल्दी फूड्स खाएं और अधपकी चीजें खाने से बचें।
निष्कर्ष
मानसून के दिनों में स्वस्थ लोगों के घाव भी देरी से भरते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हवा में नमी और गर्मी काफी ज्यादा होती है। ऐसे वातावरण में बैक्टीरिया आसानी से पनपने लगते हैं, जो कि घाव को और गहरा तथा गंभीर रूप दे सकते हैं। इससे रिकवरी के लिए जरूरी है कि आप समय पर डॉक्टर से अपना इलाज कराएं और दवा लगाने में लापरवाही न करें।
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FAQ
क्या मानसून में घाव पर एलोवेरा जेल लगाना सुरक्षित है?
नहीं, मानसून के दिनों में घाव पर ऐसी चीजें न लगाएं जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। बेहतर होगा कि आप डॉक्टर की सलाह लें।मानसून में घाव भरने के लिए किस प्रकार की डाइट लें?
घाव जल्दी भरने के लिए प्रोटीन (जैसे दालें, अंडे, पनीर), विटामिन C (संतरा, नींबू, आंवला) और जिंक (कद्दू के बीज, नट्स) जैसी चीजें डाइट में शामिल करें।
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Current Version
Aug 06, 2026 11:00 IST
Modified By : Meera Tagore Aug 06, 2026 11:00 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra