Fri Sep 11, 2026 | 09:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

भर चुका घाव फिर से दर्द क्यों होने लगता है? जानें इसके पीछे की मेडिकल वजह

Why Do Old Wounds Hurt: कई लोगों ने यह अनुभव किया होगा कि कोई चोट या घाव जो सालों पहले ठीक हो चुका होता है, वह दर्द अचानक ठंड, मौसम बदलने या थकान के समय फिर से क्यों होने लगता है। यहां जानिए इसके पीछे क्या है वजह?

Why Do Old Wounds Hurt: कभी आपने महसूस किया है कि बचपन में लगी कोई चोट या सालों पुराना घाव अचानक ठंड के मौसम में, थकान के बाद या बिना किसी खास वजह के दर्द करने लगता है? कई बार यह दर्द हल्की-सी चुभन के रूप में होता है तो कभी गहरी टीस की तरह परेशान करता है। ऐसे में मन में यही सवाल उठता है कि जब वह घाव कब का भर चुका है, निशान भी लगभग मिट चुका है, तो फिर दर्द क्यों महसूस होता है? क्या यह सिर्फ हमारा वहम है या इसके पीछे कोई मेडिकल वजह छिपी है? यह समस्या इतनी आम है कि लगभग हर दूसरा व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी इसका अनुभव करता है। फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं या इसे सामान्य मानकर चुपचाप सहते रहते हैं लेकिन क्या पुराने घावों का दर्द हमेशा सामान्य होता है? क्या यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है? इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए हमने, एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल, बेंगलुरु की कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, डॉ. पूजा पिल्लई (Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangalore) से बात की-

पुराना घाव अभी भी क्यों दुखता है? - Why Do Old Wounds Hurt

जब शरीर को चोट लगती है, तो उस जगह की नसें (nerves) ब्रेन को दर्द का सिग्नल भेजती हैं। डॉ. पूजा पिल्लई के अनुसार, ''चोट के समय नसों को जो झटका लगता है, उसकी याद शरीर लंबे समय तक बनाए रख सकता है। भले ही घाव ऊपर से भर जाए, लेकिन नसों की संवेदनशीलता बनी रह सकती है।'' इसी कारण जब उस हिस्से पर दबाव पड़ता है या मौसम में बदलाव होता है, तो नसें दोबारा एक्टिव होकर दर्द का संकेत भेजने लगती हैं।

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  • घाव भरने की प्रक्रिया में शरीर वहां स्कार टिश्यू (scar tissue) बनाता है। यह सामान्य त्वचा की तुलना में ज्यादा सख्त और कम लचीला होता है।
  • स्कार टिश्यू के कारण उस हिस्से में खिंचाव, जकड़न और कभी-कभी दर्द महसूस हो सकता है।
  • खासतौर पर जब घाव जोड़ (joint) के पास हो, तो चलने-फिरने पर पुराना दर्द उभर सकता है।

बदलते मौसम से क्यों बढ़ जाता है दर्द - Why Does Pain Increase In Changing Weather

कई लोग बताते हैं कि ठंड, बारिश या मौसम बदलते ही पुराने घाव में दर्द होने लगता है। डॉक्टर के मुताबिक, मौसम में बदलाव से हवा का दबाव (barometric pressure) बदलता है, जिसका असर स्कार टिश्यू और आसपास की नसों पर पड़ता है। इससे नसें ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं और दर्द महसूस होने लगता है।

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Why do old wounds hurt

मानसिक और भावनात्मक यादें भी बढ़ा सकती हैं दर्द

पुराने घावों का दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं होता। अगर चोट के समय व्यक्ति ने ज्यादा डर, तनाव या मानसिक पीड़ा झेली हो, तो दिमाग उस अनुभव को याद रखता है। ऐसी स्थिति में हल्का-सा संकेत भी दिमाग को पुराने दर्द की याद दिला देता है, जिससे दर्द ज्यादा महसूस होता है।

डॉक्टर की सलाह

अगर पुराने घाव का दर्द लगातार बढ़ रहा हो, सूजन, लालिमा, सुन्नपन या चलने-फिरने में परेशानी हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किसी अंदरूनी समस्या या नर्व डैमेज का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है।

निष्कर्ष

पुराने घावों का सालों बाद भी दर्द करने के पीछे नसों की संवेदनशीलता, स्कार टिश्यू, मौसम का असर, इम्यून सिस्टम और मानसिक यादें हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव इस दर्द को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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FAQ

  • क्या पुराने घाव दोबारा खुल सकते हैं?

    आमतौर पर पूरी तरह भरे घाव दोबारा नहीं खुलते, लेकिन अगर उस जगह पर बार-बार दबाव पड़े, त्वचा बहुत पतली हो जाए या इंफेक्शन हो जाए, तो परेशानी हो सकती है।
  • क्या तनाव से पुराना दर्द शुरू हो सकता है?

    तनाव और भावनात्मक यादें दिमाग को ज्यादा संवेदनशील बना देती हैं, जिससे पुराने दर्द ज्यादा महसूस हो सकते हैं।
  • पुराने घावों में मौसम बदलते ही दर्द क्यों होता है?

    मौसम बदलने से हवा का दबाव और तापमान बदलता है, जिससे नसें और स्कार टिश्यू ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं और दर्द महसूस हो सकता है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 23, 2025 17:39 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Dec 23, 2025 17:39 IST

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