Tue Oct 6, 2026 | 05:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

डाय‍ब‍िटीज में चीनी की जगह शहद, खजूर और गुड़ खाना वाकई सुरक्षित है? डायटीश‍ियन से जानें

डायब‍िट‍िक मरीजों को र‍िफाइंड चीनी का परहेज करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में क्‍या उनके ल‍िए शहद, खजूर और गुड़ सुरक्ष‍ित व‍िकल्‍प हो सकते हैं? डायटीश‍ियन से जानें सही जवाब।
डाय‍ब‍िटीज में चीनी की जगह शहद, खजूर और गुड़ खाना वाकई सुरक्षित है? डायटीश‍ियन से जानेंडाय‍ब‍िटीज में चीनी की जगह शहद, खजूर और गुड़ खाना वाकई सुरक्षित है? डायटीश‍ियन से जानें

अगर घर में कोई डायब‍िट‍िक मरीज है, तो हमेशा इस बात की च‍िंता लगी रहना लाजमी है क‍ि कहीं ब्‍लड शुगर लेवल न बढ़ जाए। लो ब्‍लड शुगर लेवल से ज्‍यादा डायब‍िटीज में लोग हाई ब्‍लड शुगर लेवल की च‍िंता करते हैं क्‍योंक‍ि हर क‍िसी के ल‍िए इसे कंट्रोल करना इतना आसान नहीं होता है। हाई शुगर लेवल से बचने के ल‍िए डायब‍िट‍िक मरीज चीनी से परहेज करते हैं और इसके हेल्‍दी व‍िकल्‍प ढूंढते रहते हैं। बाजार में चीनी के तीन सबसे हेल्‍दी व‍िकल्‍प के तौर पर ब‍िकने वाले उत्‍पाद हैं शहद, खजूर और गुड़। ये व‍िकल्‍प बेशक र‍िफाइंड चीनी के मुकाबले ज्‍यादा हेल्‍दी हैं, लेक‍िन क्‍या यह डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए सुरक्ष‍ित हैं? क्‍या इनका सेवन करने से शुगर स्‍पाइक नहीं होती? इन सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

शहद को चीनी का व‍िकल्‍प न बनाएं

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कई डायब‍िट‍िक मरीज चाय या दूध में चीनी की जगह शहद का इस्‍तेमाल करने लगते हैं। उन्‍हें यह भ्रम होता है क‍ि शहद, चीनी का हेल्‍दी व‍िकल्‍प है। जबक‍ि सच्‍चाई यह है क‍ि चाहे आप चीनी खाएं या शहद, ब्‍लड शुगर लेवल उतना ही बढ़ेगा। Mayo Clinic के मुताब‍िक, दानेदार चीनी की तुलना में शहद की एक चम्‍मच जि‍तनी मात्रा में अध‍िक कार्ब्स और कैलोरी हो सकती हैं इसल‍िए आप शहद को चीनी का हेल्‍दी व‍िकल्‍प मानकर सेवन नहीं कर सकते। शहद में एंटीऑक्‍सीडेंट्स मौजूद होते हैं। इसमें ग्‍लूकोज और फ्रुक्‍टोज दोनों की मात्रा होती है। शहद का ग्‍लाइसेमि‍क इंडेक्‍स मीड‍ियम होता है यानी यह 50 से 60 के बीच होता है।

Dietitian Smita Singh ने कहा, ''अगर ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में है, तो हफ्ते में एक से दो बार स‍िर्फ एक छोटी चम्‍मच के करीब मात्रा में शहद ले सकते हैं। शहद को खाली पेट न लें। चोट या घाव होने के दौरान भी शहद का सेवन न करें, क्‍योंक‍ि इससे ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है और घाव या चोट को भरने में अध‍िक समय लग सकता है।''

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एक से ज्‍यादा खजूर खाने से परहेज करें

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  • खजूर फाइबर, पोटैश‍ियम और मैग्नीशियम का अच्‍छा स्रोत माना जाता है। डायब‍िट‍िक मरीजों को खजूर से परहेज की सलाह नहीं दी जाती है बल्‍क‍ि इसकी मात्रा को सीम‍ित रखने के ल‍िए कहा जाता है। डायब‍िट‍ीज है, तो एक खजूर से ज्‍यादा का सेवन न करें।
  • साथ ही केवल खजूर न खाएं। इसके साथ अन्‍य नट्स को म‍िक्‍स करें या दही के साथ लें ताक‍ि शुगर स्‍पाइक कम हो सके।
  • एक खजूर में करीब 5 ग्राम शुगर होती है और इसका ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स करीब 55 होता है। डायब‍िट‍िक मरीजों को खजूर ने तैयार पेस्‍ट, शेक, लड्डू का सेवन नहीं करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि इससे ब्‍लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है।

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डायब‍िटीज में रोजाना गुड़ का सेवन हान‍िकारक

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गुड़ में आयरन और जरूरी म‍िनरल्‍स होते हैं और गुड़ को सुक्रोज माना जाता है। इसका ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स शहद और खजूर से ज्‍यादा होता है। गुड़ का जीआई लगभग 84 होता है। कई लोगों को लगता है क‍ि गुड़, चीनी नहीं है और इससे ब्‍लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता, जबक‍ि ऐसा नहीं है। गुड़ का सेवन करके भी शुगर स्‍पाइक हो सकता है। Dietitian Smita Singh ने कहा, ''डायब‍िटीज में गुड़ खाने का मन हो, तो एक से दो मटर के दाने ज‍ितना टुकड़ा खा सकते हैं। हालांक‍ि, डायब‍िट‍िक मरीजों को इसे न‍ियम‍ित रूप से चाय या भोजन में इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए।''

प्रोटीन और फाइबर का सेवन जरूरी है 

डायब‍िटि‍क मरीजों को क‍िसी भी मीठी चीज जैसे नट्स, खजूर, गुड़, शहद या अन्‍य क‍िसी मीठी चीज को प्रोटीन और फाइबर र‍िच फूड्स के साथ पेयर करके खाना चाह‍िए। इस तरह शुगर स्‍पाइक से बच सकते हैं। साथ ही खाने के दो घंटे बाद ब्‍लड शुगर लेवल चेक करें ताक‍ि शरीर पर खाए हुए भोजन का असर पता चल सके। पोर्शन कंट्रोल के ल‍िए चम्‍मच का इस्‍तेमाल करें, अंदाज से चीजों की मात्रा तय न करें। ध्‍यान रखें क‍ि हर व्यक्ति का शुगर रिस्पॉन्स अलग होता है। अपनी दवा और डाइट के हिसाब से डॉक्‍टर या डाइट एक्‍सपर्ट से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

डायबि‍ट‍िक मरीजों को शहद, खजूर या गुड़ से परहेज करने की सलाह नहीं दी जाती है, लेक‍िन इनके न‍ियम‍ित सेवन और अध‍िक मात्रा लेने से बचना चाह‍िए। गुड़ का जीआई शहद और खजूर के मुकाबले ज्‍यादा होता है इसल‍िए डायब‍िट‍िक मरीजों को इसे बहुत कम मात्रा में लेना चाह‍िए। रोजाना गुड़ का सेवन करने से बचें और एक बार में 1 से 2 मटर के टुकड़े ज‍ितनी मात्रा का ही सेवन करें। अगर शहद खा रहे हैं, तो हफ्ते में एक से दो चम्‍मच ज‍ितनी मात्रा ले सकते हैं। डायब‍िट‍िक मरीज एक खजूर का सेवन कर सकते हैं, लेक‍िन इसे रोज खाने की आदत न बनाएं। मीठी चीजों को अकेला खाने के बजाय प्रोटीन और फाइबर र‍िच फूड्स के साथ पेयर करें। इस तरह शुगर स्‍पाइक से बच सकते हैं। खाने के दो घंटे बाद शुगर लेवल चेक करना न भूलें। पोर्शन कंट्रोल पर भी गौर करें।

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FAQ

  • क्‍या डायब‍िट‍िक मरीज को पूरी तरह म‍ीठा छोड़ना जरूरी है?

    नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर आप सीम‍ित मात्रा में कभी-कभी कुछ मीठा खा लें, तो इससे ब्‍लड शुगर लेवल पर कम प्रभाव पड़ेगा। हालांक‍ि, नि‍यम‍ित मीठा खाने की आदत ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ा सकती है।
  • क्‍या डायब‍िटीज में शुगर फ्री म‍िठाई खा सकते हैं?

    शुगर फ्री लेबल देखकर म‍िठाई नहीं खरीदना चाह‍िए क्‍योंक‍ि उसमें कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा कम हो ऐसा जरूरी नहीं है। इसल‍िए शुगर फ्री म‍िठाई को बाजार से न लेकर घर पर तैयार करके खाना ज्‍यादा बेहतर है।

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Aug 20, 2026 18:22 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh