Fri Sep 18, 2026 | 02:14 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

टाइप 2 डायबिटीज में क्या नहीं खाना चाहिए? जानें 7 चीजें, जो अनजाने में बढ़ा सकती हैं ब्लड शुगर 

टाइप 2 डायब‍िटीज में ऐसी चीजों के सेवन से परहेज करना चाह‍िए ज‍िनमें अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड कार्ब्स, सैचुरेटेड फैट्स की ज्‍यादा मात्रा मौजूद हो। एक्‍सपर्ट से जानें ऐसे 7 खराब फूड्स के बारे में।

टाइप 2 डायबि‍टीज में मरीजों की प्राथम‍िकता होती है ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना। अगर डाइट में ऐसी चीजें होंगी जो ब्‍लड शुगर लेवल को बढ़ाती हैं, तो डायब‍िटीज को कंट्रोल करना मुश्‍क‍िल हो जाएगा। टाइप 2 डायब‍िटीज में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट जैसे मैदा, सफेद ब्रेड, पेस्ट्री और रिफाइंड अनाज से बने खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, पैकेज्ड स्नैक्स, कुछ इंस्टेंट फूड्स, मीठे सीरियल्‍स से भी दूरी बनानी चाह‍िए। आइए जानते हैं ऐसे 7 फूड्स के बारे में जो टाइप 2 डायब‍िटीज के मरीजों के ल‍िए नुकसानदायक साब‍ित हो सकते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. ग्रीक फ्लेवर योगर्ट

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अक्‍सर लोग ग्रीक योगर्ट को प्रोटीन का अच्‍छा स्रोत मानकर उसका सेवन करना शुरू कर देते हैं, लेक‍िन बाजार में कई तरह के फ्लेवर्ड ग्रीक योगर्ट म‍िलते हैं ज‍िनमें र‍िफाइंड शुगर मौजूद होती है। इससे ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। जब भी आप ग्रीक योगर्ट खरीदें, तो उसमें एडड शुगर और कार्ब्स की मात्रा को चेक करें। केवल ग्रीक या हाई प्रोटीन जैसे शब्‍दों को पढ़कर योगर्ट न खरीदें।

साल 2019 में Current Developments In Nutrition में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 3724 मिल्क और योगर्ट प्रोडक्ट्स के पोषण संबंधि‍त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। स्टडी में पाया गया कि लगभग 74% प्रोडक्ट्स फ्लेवर्ड थे। फ्लेवर्ड मिल्क और योगर्ट में अनफ्लेवर्ड प्रोडक्ट्स की तुलना में औसतन लगभग दोगुनी टोटल शुगर पाई गई। फ्लेवर्ड योगर्ट में टोटल शुगर 11.5 ग्राम प्रत‍ि 100 ग्राम थी।

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2. र‍िफाइंड कार्ब्स

टाइप 2 डायब‍िटीज के मरीज हैं, तो र‍िफाइंड कार्ब्स से दूरी बनाएं। मैदा, सफेद ब्रेड, सफेद चावल वगैरह र‍िफाइंड कार्ब्स के उदाहरण हैं। इसमें फाइबर कम होता है इसल‍िए ये जल्‍दी पच सकते हैं और ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। हालांक‍ि, टाइप 2 डायबि‍टीज में साबुत अनाज, दाल जैसे कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्स का सेवन कर सकते हैं।

3. फुल फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स

कई फुल फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स जैसे दूध, क्रीम, चीज वगैरह में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्‍यादा हो सकती है। इसल‍िए टाइप 2 डायब‍ि‍टीज के मरीजों को डेयरी प्रोडक्‍ट्स का चुनाव करते समय प्रोडक्‍ट में सैचुरेटेड फैट और कैलोरी पर भी गौर करना चाह‍िए और फुल फैट की जगह लो फैट व‍िकल्‍प चुनना बेहतर हो सकता है।

साल 2020 में Annals Of Pediatric Endocrinology & Metabolism में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, टाइप 2 डायबिटीज से बचाव में सभी डेयरी प्रोडक्ट्स फायदेमंद नहीं होते। कम फैट वाले डेयरी उत्पाद, खासकर योगर्ट, लाभकारी हो सकते हैं।

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4. नाश्‍ते में मूसली खाना सेहतमंद है?

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कई लोग नाश्‍ते में पैकेज्‍ड मूसली खाना पसंद करते हैं, लेक‍िन हर मूसली शुगर फ्री नहीं होती। बाजार में म‍िलने वाली मूसली में म‍िठास के ल‍िए अक्‍सर एडड शुगर डाला जाता है। इसल‍िए इंग्रीड‍िएंट्स ल‍िस्‍ट चेक क‍िए बगैर मूसली का सेवन न करें।

5. अल्‍ट्रा-प्रोसेस्‍ड फूड्स

कई अल्‍ट्रा प्रोसेस्‍ड फूड्स जैसे पैकेज्‍ड स्नैक्स या इंस्‍टेंट फूड्स में र‍िफाइंड कार्ब्स, चीनी, नमक, तेल वगैरह की मात्रा ज्‍यादा होती है। इनमें प्र‍िजर्वेट‍िव्‍स भी मौजूद होते हैं। इन चीजों का सेवन करने से ब्‍लड शुगर लेवल को मेनटेन करना मुश्‍क‍िल हो सकता है। इसल‍िए टाइप 2 डायबि‍टीज में कम प्रोसेस्‍ड, फाइबर और पोषक तत्‍वों से भरपूर फूड्स को प्राथम‍िकता दें।

6. बेकरी आइटम

बेकरी प्रोडक्‍ट्स में मैदा, चीनी, मक्‍खन, क्रीम, फैट या कैलोरी की मात्रा ज्‍यादा होती है। इसे डाइट में शाम‍िल करने से ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। इन चीजों में फाइबर कम होता है इसल‍िए ये ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद नहीं करते हैं। केक, पेस्‍ट्री, डोनट, कुकीज जैसे बेकरी आइटम को डाइट में शाम‍िल करने से बचें।

7. गुड़ और शहद

टाइप 2 डायब‍िटीज के मरीज ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के ल‍िए अक्‍सर चीनी की जगह गुड़ और शहद का सेवन शुरू कर देते हैं, लेक‍िन ये चीनी का स्‍वस्‍थ व‍िकल्‍प नहीं हैं। शहद और गुड़ में भले ही र‍िफाइंड शुगर के मुकाबले ज्‍यादा पोषक तत्‍व मौजूद हों, लेक‍िन ये ब्‍लड शुगर लेवल को बढ़ाते हैं इसल‍िए इनसे दूरी बनाएं।

टाइप 2 डायबि‍टीज में कैसी होनी चाह‍िए डाइट?

  • टाइप 2 डायबि‍टीज में ऐसे फलों को शाम‍िल करें ज‍िनका जीआई और शुगर की मात्रा कम हो। जैसे- बेरीज, सेब, संतरा वगैरह।
  • टाइप 2 डायब‍िटीज में ऑल‍िव ऑयल, बादाम, अखरोट जैसे हेल्‍दी फैट के स्रोत को शाम‍िल करें। इनमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट्स मौजूद होते हैं ज‍िससे कोलेस्‍ट्राॅल और ब्‍लड शुगर लेवल को कंटोल करने में मदद म‍िलती है।
  • डायब‍िटि‍क मरीज फाइबर और प्रोटीन को प्राथम‍िकता दें। फाइबर, शुगर के एब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया को धीमा करता है ज‍िससे ब्‍लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता। वहीं, प्रोटीन मसल र‍िपेयर और ब्‍लड शुगर मैनेजमेंट को सपाेर्ट करता है।
  • डायब‍िटीज में कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्स के स्रोत जैसे होल ग्रेन्‍स या ब्राउन राइस को शाम‍िल कर सकते हैं। इनसे ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

टाइप 2 डायबिटीज में ग्रीक फ्लेवर योगर्ट, र‍िफाइंड कार्ब्स, फुल फैट डेयरी प्रोडक्‍ट्स, मूसली, अल्‍ट्रा-प्रोसेस्‍ड फूड्स, बेकरी आइटम, गुड़ और शहद जैसे चीजों का सेवन करने से बचना चाह‍िए। इन फूड्स में र‍िफाइंड कार्ब्स, शुगर अध‍िक मात्रा में होता है ज‍िससे ब्‍लड शुगर लेवल प्रभाव‍ित हो सकता है। ऐसे में इन चीजों से परहेज करना चाह‍िए। डायब‍िट‍िक मरीज लो जीआई फल, हेल्‍दी फैट्स, प्रोटीन, फाइबर र‍िच फूड्स, कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्स को डाइट में प्राथम‍िकता दें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या डायबिटीज में ओट्स खाना सही है?

    डायब‍िटीज में फ्लेवर्ड इंस्‍टेंट ओट्स खाने के बजाय कम प्रोसेस्‍ड ओट्स को चुनना चाह‍िए। स्टील-कट ओट्स का सीमि‍त मात्रा में सेवन कर सकते हैं।
  • क्या डायबिटीज में ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं?

    डायब‍िटीज में सीम‍ित मात्रा में नट्स जैसे बादाम या अखरोट खा सकते हैं। वहीं ऐसे ड्राई फ्रूट्स शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है जैसे क‍िशम‍िश या खजूर का सेवन ज्‍यादा नहीं करना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 18, 2026 12:23 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Sep 18, 2026 12:23 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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