Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

डायब‍िटीज रोगियों के लिए मैग्नीशियम क्यों है महत्वपूर्ण? एक्‍सपर्ट से जानें कारण

मैग्नीशियम, इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी को सुधारने में मदद करता है और शुगर स्‍पाइक से बचाता है। कुछ स्‍टडीज यह मानती हैं क‍ि मैग्नीशियम टाइप 2 डायब‍िटीज के खतरे को कम कर सकता है। जानें डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए यह पोषक तत्‍व क्‍यों जरूरी है?

मैग्नीशियम एक जरूरी पोषक तत्‍व है ज‍िसकी जरूरत हर द‍िन शरीर को होती है। मैग्नीशियम का मेंटल हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है, इससे च‍िंता और अन‍िद्रा दूर होती है। साथ ही मैग्नीशियम हड्ड‍ियों को मजबूत करने के ल‍िए भी जाना जाता है। इन फायदों के अलावा कुछ स्‍टडीज और र‍िसर्च में बताया गया है क‍ि डायब‍िटीज मैनेजमेंट में मैग्नीशियम काफी अहम माना जाता है। इससे न स‍िर्फ डायब‍िटीज के र‍िस्‍क से बचने में मदद म‍िलती है बल्‍क‍ि यह शुगर को ब्रेक डाउन करने और इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस को घटाने में भी मदद करता है। एक्‍सपर्ट से समझते हैं क‍ि मैग्नीशियम, डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए क्‍यों जरूरी है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए क्‍यों जरूरी है मैग्नीशियम?

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टाइप 2 डायब‍िटीज में मैग्नीशियम का सेवन करने से शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। मैग्नीशियम ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस घटता है और डायब‍िटीज में सूजन कम करने में मदद म‍िलती है। प्रीडायब‍िटीज की स्‍टेज और इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस से बचने के ल‍िए मैग्नीशियम का सेवन अहम माना जाता है। कुछ स्‍टडीज में मैग्नीशियम के फायदे टाइप 1 डायब‍िटीज से पीड़ि‍त बच्‍चों के शुगर लेवल को कंट्रोल करने के ल‍िए भी देखे गए हैं।

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क्‍या मैग्नीशियम का सेवन करने से वाकई शुगर लेवल घटता है?

Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि मैग्नीशियम शरीर के ग्‍लूकोज को इस्‍तेमाल करने की क्षमता को बढ़ाता है इससे अचानक से शुगर स्‍पाइक नहीं होती और शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि, मैग्नीशियम सीधे तौर पर शुगर लेवल नहीं घटता पर उसे कंट्रोल करने में मदद करता है। ज‍िन लोगों में मैग्नीशियम की कमी होती है, उनमें इंसुल‍िन के ठीक से काम न करने की संभावना बढ़ सकती है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2022 में Health Sciences Review नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, शरीर में मैग्नीशियम की कमी के कारण HbA1c लेवल, इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस और फास्‍ट‍िंग ग्‍लूकोज लेवल बढ़ सकता है। स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि मैग्नीशियम सप्‍लीमेंट्स से कमी को दूर क‍िया जा सकता है।

साल 2011 में Diabetes Care नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक मेटा एनाल‍िस‍िस के मुताब‍िक, पांच लाख से ज्‍यादा लोगों पर हुए शोध से पता चला क‍ि खाने में मैग्नीशियम की मात्रा को बढ़ाने से टाइप 2 डायब‍िटीज का खतरा काफी हद तक कम होता है। शोध के मुताबि‍क, हर द‍िन 100 एमजी मैग्नीशियम लेने से डायब‍िटीज का खतरा 14 प्रत‍िशत तक घट सकता है।

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डायब‍िट‍िक मरीज क‍िन मैग्नीशियम फूड्स का सेवन करें?

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बादाम, कद्दू के बीज, च‍िया सीड्स, काजू, पालक, सोया म‍िल्‍क, मूंगफली, ब्‍लैक बीन्‍स, ब्राउन राइस, लो-फैट दही, केला खा सकते हैं। डायब‍िटीज में ज्‍यादा पका हुआ केला खाने के बजाय हरा केला खाएं और सीमि‍त मात्रा में मूंगफली का सेवन करें।

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क‍ितनी मात्रा में मैग्नीशियम लें?

वयस्‍क पुरुषों को द‍िनभर में 420 एमजी और मह‍िलाओं को 320 एमजी मैग्नीशियम लेने की सलाह दी जाती है।
अगर ज्‍यादा मात्रा में मैग्नीशियम का सेवन करेंगे, तो मांसपेश‍ियों में कमजोरी, लो बीपी और अन‍ियम‍ित द‍िल की धड़कन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

मैग्नीशियम एक खास म‍िनरल है ज‍िससे शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है। हालांक‍ि यह शुगर लेवल घटाने में मदद नहीं करता, लेक‍िन यह इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस को घटाने में मदद करता है ज‍िससे टाइप 2 डाय‍बि‍टीज का खतरा कम होता है। डायब‍िट‍िक मरीजों में शुगर लेवल कंट्रोल के ल‍िए मैग्नीशियम अहम भूम‍िका न‍िभाता है।

FAQ

  • क्‍या डायब‍िटीज में मैग्नीशियम सप्‍लीमेंट ले सकते हैं?

    हां, डायब‍िटीज में डॉक्‍टर की सलाह के साथ मैग्नीशियम सप्‍लीमेंट का सेवन कर सकते हैं। हालांक‍ि, केवल उन्‍हीं मरीजों को इसे लेने की सलाह दी जाती है ज‍िनकी जांच में मैग्नीशियम का लेवल लो आता है।
  • मैग्नीशियम का अध‍िक सेवन भी नुकसानदायक है?

    हां, मैग्नीशियम का अध‍िक सेवन करने से दस्‍त, मतली, पेट में ऐंठन, लो बीपी, कमजोरी, सुस्‍ती जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 02, 2026 17:06 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 02, 2026 17:06 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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