जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो जाती है, तो इस स्थिति को हाइपोगोनाडिज्म (Hypogonadism) कहा जा सकता है। लोग इसे डायबिटीज का एक कारण समझते हैं और हाई ब्लड शुगर लेवल के साथ अक्सर जोड़कर देखते हैं। टेस्टोस्टेरोन एक हार्मोन है जो पुरुषा में मांसपेशियों, हड्डियों की मजबूती और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। कई एक्सपर्ट्स ऐसा मानते हैं कि जब लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल का स्तर असामान्य रहता है, तो वह प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। American Diabetes Association के मुताबिक, अगर मरीज को टाइप 2 डायबिटीज है, तो उसे सामान्य पुरुष की तुलना में लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या का खतरा दोगुना हो सकता है। आइए जानते हैं डायबिटीज और लो टेस्टोस्टेरोन के बीच का संबंध। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।
डायबिटीज से हो सकती है लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या?
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Internal Medicine Specialist Dr. Rajeev Chowdry ने बताया कि डायबिटीज के रोगियों को लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या हो सकती है। खासकर टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस और अनियंत्रित शुगर लेवल के कारण टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो सकती है। साल 2014 में Diabetes, Metabolic Syndrome And Obesity में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जिन पुरुषों को डायबिटीज था, उनमें सामान्य पुरुषों के मुकाबले टेस्टोस्टेरोन का स्तर लगभग 76.6 ng/dL कम पाया गया। साथ ही अधिक टेस्टोस्टेरोन वाले पुरुषों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा, डायबिटिक पुरुषों के मुकाबले 42% कम पाया गया। स्टडी में लो टेस्टोस्टेरोन का संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और मोटापे के साथ देखा गया।
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लो टेस्टोस्टेरोन और डायबिटीज का दोतरफा कनेक्शन
साल 2011 में The Journal Of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित एक स्टडी रिव्यू के मुताबिक, लो टेस्टोस्टेरोन और डायबिटीज का कनेक्शन दो तरफा या बायोडायरेक्शन हो सकता है। यानी अगर लो टेस्टोस्टेरोन है, तो शरीर में फैट बढ़ सकता है जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा होता है। वहीं दूसरी ओर टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस और विसरल फैट के कारण लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या हो सकती है।
डायबिटीज में कौन से फैक्टर्स हैं लो टेस्टोस्टेरोन के लिए जिम्मेदार?
टाइप 2 डायबिटीज के कारण अक्सर लोगों का वजन बढ़ जाता है खासतौर पर पेट के आसपास की चर्बी। एब्डॉमिनल फैट अक्सर हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है। फैट टिशू में मौजूद कुछ एंजाइस टेस्टोस्टेरोन के लेवल को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस हार्मोनल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है और लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या हो सकती है।
मेटफॉर्मिन का असर और लो टेस्टोस्टेरोन
साल 2024 में Clinical Traditional Medicine And Pharmacology में प्रकाशित एक स्टडी में पुरुषों के ग्रुप को दो हिस्सों में बांटा। एक ग्रुप टाइप 2 डायबिटीज का शिकार था और शुगर कंट्रोल करने के लिए मेटफॉर्मिन दवा ले रहा था और दूसरे ग्रुप के लोगों को डायबिटीज नहीं थी और वे मेटफॉर्मिन नहीं ले रहे थे। मेटाफॉर्मिन लेने वाले टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या अधिक देखी गई।
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लो टेस्टोस्टेरोन से बचने के लिए क्या करें?
- लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या 40 या उससे अधिक उम्र के पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है। दवाएं, इंजेक्शन की मदद से लो टेस्टोस्टेरोन का इलाज किया जाता है। इससे बचाव के लिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करें।
- वेट लिफ्टिंग एक्सरसाइज, एरोबिक्स करें। इससे मसल स्ट्रेंथ बढ़ेगी और टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- हेल्दी डाइट लें। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को डाइट में शामिल करें।
- शरीर में जिंक और विटामिन डी की कमी नहीं होनी चाहिए, इससे भी टेस्टेस्टेरोन का स्तर प्रभावित हो सकता है।
- अश्वगंधा, पंपकिन सीड्स को डाइट में शामिल कर सकते हैं।
- अधिक शुगर, कैफीन, प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचें।
- लो टेस्टोस्टेरोन से बचने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट तकनीक और पर्याप्त नींद जरूरी है।
- अल्काेहल, धूम्रपान से बचें। इससे टेस्टोस्टेरोन लेवल को मेनटेन करने में परेशानी हो सकती है इसलिए परहेज करें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर प्रजनन क्षमता को लेकर परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- अगर जांच रिपोर्ट में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो।
- बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार थकान या कमजोरी महसूस हो।
- ब्लड शुगर लेवल ज्यादा हो।
निष्कर्ष:
डायबिटीज में विसरल फैट, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई शुगर लेवल वगैरह लो टेस्टोस्टेरोन का कारण बन सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज में लो टेस्टोस्टेरोन का खतरा अधिक देखा गया है। 40 या उससे अधिक वर्ष की उम्र के पुरुषों में लो टेस्टोस्टेरोन की समस्या ज्यादा देखी जाती है। लो टेस्टोस्टेरोन से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करें। ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करें, मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने वाली एक्सरसाइज करें, स्ट्रेस से बचें, जिंक और विटामिन डी की कमी से बचें, कैफीन, अल्कोहल और अधिक धूम्रपान का सेवन न करें।
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FAQ
लो टेस्टोस्टेरोन के लक्षण क्या हैं?
लो टेस्टोस्टेरोन में थकान, कमजोरी, मांसपेशियों की ताकत में कमी, इरेक्शन में तकलीफ, सेक्स ड्राइव कम होना, वजन बढ़ने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।क्या लो टेस्टोस्टेरोन का इलाज संभव है?
हां, हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से लो टेस्टोस्टेरोन लेवल को बेहतर कर सकते हैं। इसके लिए वेट मैनेटमेंट, हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद, फिजिकल एक्टिविटी करने से मदद मिल सकती है।
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Current Version
Aug 19, 2026 18:17 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Aug 19, 2026 18:17 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry
