टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को लेकर अक्सर पुरुषों में कई तरह के भ्रम बने रहते हैं। कई पुरुषों को अब तक यह जानकारी नहीं है कि आखिर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी क्यों दी जाती है और किन पुरुषों के लिए यह उपयुक्त होती है। ध्यान रखें कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी कई पुरुषों के लिए जरूरी हो जाती है, जिसका असर उनके समग्र स्वास्थ्य पर पड़ता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी क्या है और इसकी जरूरत कब पड़ती है? इस बारे में जानने के लिए हमने मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से बात की।
क्या है टेस्टोस्टेरोन थेरेपी?
-1785133063919.jpg)
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी, जिसे हम टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी भी कहते हैं। यह एक तरह का ट्रीटमेंट है, जिसे डॉक्टर की सलाह पर दिया जाता है। आपको नाम से भी काफी हद तक स्पष्ट होगा कि जब टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आ जाती है, तब इसका उपयोग किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि टेस्टोस्टेरोन एक तरह का मेल हार्मोन है, जो कि सेक्स ड्राइव, स्पर्म प्रोडक्शन आदि के लिए जिम्मेदार होता है। आमतौर पर टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आने पर पुरुषों में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे थकान, यौन इच्छा में कमी, मांसपेशियों में कमजोरी आदि।
इसे भी पढ़ें: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने के संकेत हैं ये 7 लक्षण, न करें नजरअंदाज
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी कब दी जाती है?
पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन थेरेपी तभी की जाती है, जब उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बहुत ज्यादा गिर जाता है। इसकी जानकारी ब्लड टेस्ट के जरिए होती है। डॉ. विजय दहिफले बताते हैं, "खून की जांच से यह पता चलता है कि टेस्टोस्टेरोन का स्तर असामान्य रूप से कम है यानी 300 ng/dL से नीचे, तो आपके डॉक्टर आपको इलाज की सलाह दे सकते हैं। इस निम्न स्तर को लो टेस्टोस्टेरोन या Hypogonadism माना जाता है।" इस संबंध में डॉ. विजय दहिफले आगे बताते हैं, "शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर पूरे दिन बदलता रहता है (सुबह सबसे ज्यादा और शाम को कम होता है)। इसलिए, सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी नहीं दी जा सकती है। टेस्टोस्टेरोन थेरेपी शुरू करने से पहले कम से कम दो अलग-अलग दिनों में सुबह के समय ब्लड टेस्ट करना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, तनाव, नींद की कमी, बुखार आदि लक्षणों पर भी गौर किया जाता है।"
सेक्सुअल हेल्थ पर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी का असर
-1785133089810.jpg)
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी पुरुषों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है, जैसे-
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन में सुधारः मौजूदा समय काम का बढ़ता और घर की जिम्मेदारियों के कारण पुरुषों में यौन इच्छा में गिरावट देखने को मिलती है और कई पुरुष अस्थायी रूप से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर पुरुष टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले सकते हैं। यह उनके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।
साल 2017 में करंट Current Opinion in Urology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार जिन पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होता है, उनके लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी काफी फायदेमंद साबित होती है। इसकी मदद से पुरुषों की यौन इच्छा को बढ़ाने में मदद मिली है और हल्की इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या में सुधार भी आता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि अगर किसी को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की गंभीर समस्या है, तो इसका प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना चाहिए।
सेक्स ड्राइव में सुधारः आमतौर पर आपने देखा होगा कि अधिक उम्र के पुरुषों में यौन इच्छा काफी कम हो जाती है। इसकी वजह से उनकी सेक्सुअल लाइफ भी प्रभावित हो जाती है। इसका असर उनके निजी जीवन और रिलेशनशिप पर भी पड़ता है। इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कई पुरुष टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लेते हैं, जिससे उन्हें लाभ मिलता है।
इस संबंध में The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism - JCEM में प्रकाशित एक क्लिनिकल रिसर्च पेपर के अनुसार, 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष, जिनमें टेस्टोस्टेरोन की कमी और यौन इच्छा के स्तर में कमी के लक्षण दिखते हैं, उनके लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी काफी प्रभावशाली है। इलाज के दौरान जैसे-जैसे शरीर में टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोडायोल (हार्मोन) का स्तर बढ़ता है, वैसे-वैसे पुरुषों की यौन इच्छा, इरेक्टाइल फंक्शन और यौन गतिविधियों में सुधार होने लगता है।
इसे भी पढ़ें: आपकी रोज की ये 7 आदतें बढ़ा सकती हैं इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या, डॉक्टर से जानें कारण
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के अन्य फायदे
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी सिर्फ सेक्सुअल हेल्थ के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि पुरुषों के जीवन में इसका अहम योगदान है। इससे उन्हें कई तरह के अन्य लाभ भी मिल सकते हैं, जैसे-
मांसपेशियों का विकास
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी की मदद से पुरुषों की मांसपेशियों का आकार और शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए यह प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है। आमतौर पर आपने देखा होगा कि स्ट्रेंथ वर्कआउट करने से मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने लगता है। यह हॉर्मोन प्रोटीन की मदद से उन्हें दोबारा तेजी से जोड़ता है और पहले से ज्यादा मजबूत और चैड़ा बनाता है।
हड्डियों की मजबूती
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, हड्डियां भी अपने आप कमजोर होती जाती हैं। यह प्रक्रिया भी प्राकृतिक है। हालांकि, सही देखरेख और खान-पान के जरिए अपनी हड्डियों को मजबूती प्रदान की जा सकती है। वहीं, अगर शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में कमी आ जाए, तो हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर हो जाती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का जोखिम बना रहता है। टेस्टोस्टेरोन थेरेपी की मदद से हड्डियों को खोखला होने से रोका जा सकता है।
मेडिकल जर्नल Clinical Interventions in Aging में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का घटता स्तर उनकी हड्डियों को कमजोर कर देता है, जिससे गिरकर हड्डियों के फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं, अगर जरूरत अनुसार डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी की मदद लेते हैं, तो इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
चर्बी को कम करना
डॉ. विजय दहिफले बताते हैं कि टेस्टोस्टेरोन मेटाबॉलिज्म (पाचन और ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया) को तेज करता है। जब शरीर में इस टेस्टोस्टेरोन का स्तर सही रहता है, तो शरीर कैलोरी को एनर्जी और मसल्स के रूप में बदलता है। वहीं, अगर टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आती है, तो पेट और शरीर के बाकी हिस्सों में चर्बी जमा होने लगती है, जो कि सही नहीं है।
इसे भी पढ़ें: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile Dysfunction) होने पर नजर आते हैं ये 7 शुरुआती संकेत, न करें अनदेखी
क्या बढ़ती उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होता है?
मेयोक्लिनिक की मानें, तो बढ़ती उम्र के साथ टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आना पूरी तरह स्वाभाविक है। आमतौर पर 30 या 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में हर साल 1 फीसदी तक टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आ जाती है। यही कारण है कि जब पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में तेजी से गिरावट आने लगे, तो उन्हें इस स्थिति को इग्नोर नहीं करना चाहिए। कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे हाइपोगोनाडिज्म। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की यौन ग्रंथियां यानी सेक्स ग्लैंड (पुरुषों में टेस्टिकल्स) पर्याप्त मात्रा में सेक्स हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरोन पैदा नहीं करती हैं।
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के नुकसान
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के कई फायदे होने के बावजूद, इसके कुछ नुकसान भी हैं। इसलिए, इसका इस्तेमाल कब और किन परिस्थितियों में करना है, इसकी जानकारी सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर देते हैं। बहरहाल, टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के किस तरह के नुकसान हो सकते हैं-
- टेस्टोस्टेरोन के कारण त्वचा में बदलाव होने लगता है, जैसे ऑयली स्किन, कील-मुंहासे की समस्या आदि।
- अतिरिक्त टेस्टोस्टेरोन लेने से हाथ-पैरों में सूजन आ सकती है और नींद की समस्या भी होने लगती है।
- टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लेने के कारण कई बार चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना और मूड स्विंग होने जैसी समस्या भी होती है।
- टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लेने से शरीर का प्राकृतिक स्पर्म प्रोडक्शन बंद या कम हो सकता है, जिससे फर्टिलिटी (शुक्राणु उत्पादन) पर असर पड़ता है।
निष्कर्ष
इसमें कोई दो राय नहीं है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आने पर डॉक्टर की सलाह पर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी दी जा सकती है। हालांकि, टेस्टोस्टेरोन का स्तर क्यों कम हो रहा है, इसके क्या कारण है और पुरुष किसी तरह की पुरानी तथा गंभीर बीमारी से तो नहीं जूझ रहा है, इस तरह के तथ्य भी मायने रखते हैं। इसलिए, अगर किसी पुरुष की यौन इच्छा कम हो जाए, तो उन्हें तुरंत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। इस संबंध में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
All Image Credit: Freepik
FAQ
टेस्टोस्टेरोन थेरेपी किस रूप में दी जाती है?
इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन, त्वचा पर लगाने वाले जेल या पैच, ओरल कैप्सूल आदि तरीकों से टेस्टोस्टेरोन थेरेपी दी जा सकती है। डॉक्टर मरीज की जरूरत और सुविधा के अनुसार टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के विकल्प को चुनते हैं।क्या टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लेने से पुरुषों में स्पर्म काउंट पर असर पड़ता है?
बाहर से टेस्टोस्टेरोन लेने पर शरीर का अपना प्राकृतिक टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म बनाने वाला सिग्नल सिस्टम (HPTA axis) धीमा हो जाता है। इससे स्पर्म काउंट में भारी कमी आ सकती है और पुरुषों में इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 27, 2026 18:30 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 27, 2026 18:30 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale