मेनोपॉज एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिससे हर महिला को गुजरना पड़ता है। इसका मतलब है कि 45 से 55 साल की उम्र में मासिक धर्म पूरी तरह बंद हो जाता है। इसके बाद महिला की प्रजनन क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इस वजह से हॉट फ्लैशेज, रात में अत्यधिक पसीना आना, मूड स्विंग्स, नींद न आना, योनि में सूखापन जैसी पेरशानियां होने लगती हैं। ऐसे में कई महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेती हैं। सवाल है, क्या यह सेफ है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
मेनोपॉज के बाद हार्मोन थेरेपी सेफ है या नहींः डाॅक्टर ने दिया जवाब
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मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए हार्मोन थेरेपी लेती हैं। हालांकि, इससे जुड़े हुए कई डर उनके मन में होते हैं, जैसे कहीं इसकी वजह से कैंसर या अन्य समस्याएं तो नहीं हो सकती हैं। इस संबंध में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "हार्मोन थेरेपी को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम और डर गलत जानकारी के कारण है। सही मरीज का चयन, सही दवा, सही मात्रा और सही समय पर शुरू की गई हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कई महिलाओं के लिए सुरक्षित और प्रभावी उपचार हो सकती है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले प्रोफेशनल की राय लेना जरूरी होता है।" NCBI में प्रकाशित एक रिपोर्ट से भी इस बात की पुष्टि होती है कि हार्मोन थेरेपी की मदद से मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
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क्या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कब सेफ नहीं है?
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी सभी महिलाओं के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं होती। ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर महिला की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, परिवार में कैंसर का इतिहास, ब्लड प्रेशर, वजन, लिवर की कंडीशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पूरी जांच करते हैं।
डॉ. शोभा गुप्ता इसे और स्पष्ट तरीके से बताती हैं, "हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी को मरीज की कंडीशन और उसकी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए दी जाती है। जानकारी के लिए बता दें कि हर महिला को एक जैसी दवा या एक जैसे टाइम पीरियड के लिए ट्रीटमेंट यानी उपचार नहीं दिया जाता है। मरीज की जरूरत और उसके स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है।"
हार्मोन थेरेपी क्या होती है?
Cleveland Clinic के अनुसार, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में शरीर में कम हो चुके एस्ट्रोजन और कुछ मामलों में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की पूर्ति की जाती है। इसका उद्देश्य मेनोपॉज के लक्षणों को कम करना और महिला की जीवन गुणवत्ता में सुधार करना होता है। यह दवा टैबलेट, त्वचा पर लगाने वाले पैच, जेल, स्प्रे या योनि क्रीम के रूप में दी जा सकती है। कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा, यह महिला की उम्र, स्वास्थ्य और लक्षणों पर निर्भर करता है।
किन महिलाओं को हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी फायेदमंद है?

- NHS के अनुसार, यदि किसी महिला को बार-बार हॉट फ्लैशेज आते हैं, रात में पसीने के कारण नींद खराब होती है, योनि में सूखापन और दर्द की समस्या है या मेनोपॉज के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर विचार कर सकते हैं।
- कम उम्र में यानी 40 साल से पहले या समय से पहले मेनोपॉज होने वाली महिलाओं के लिए भी हार्मोन थेरेपी कई बार लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि लंबे समय तक हार्मोन की कमी हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
- महिलाओं को पहले ब्रेस्ट कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर, बिना कारण होने वाला योनि से रक्तस्राव, गंभीर लिवर रोग या बार-बार रक्त के थक्के बनने की समस्या रही हो, उनमें हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी देने से पहले विशेष सावधानी बरती जाती है या अन्य विकल्पों पर विचार किया जाता है।
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क्या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है?
- आमतौर पर महिलाओं में सबसे बड़ा डर यही होता है कि क्या इसकी वजह से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है? कई महिलाएं तो इस डर के चलते हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू करने से बचती हैं।
- विशेषज्ञों का कहना है कि इसे नाॅर्मलाइज नहीं किया जा सकता। कुछ प्रकार की हार्मोन थेरेपी, लंबे समय तक उपयोग और कुछ विशेष परिस्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन सभी महिलाओं में ऐसा नहीं होता।
- इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेना या केवल इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी के आधार पर इसे बंद कर देना दोनों ही गलत हो सकते हैं। उपचार के दौरान नियमित फॉलो-अप और समय-समय पर जांच कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
क्या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दिल-हड्डियों को कैसे प्रभावित करता है?
सही समय पर शुरू की गई हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी कई महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने (ऑस्टियोपोरोसिस) के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है। कुछ महिलाओं में यह हृदय स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, विशेषकर जब इसे मेनोपॉज के शुरुआती वर्षों में शुरू किया जाए। हालांकि, यह निर्णय महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है।
निष्कर्ष
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी न तो हर महिला के लिए जरूरी है और न ही हर महिला के लिए असुरक्षित। अगर मेनोपॉज के लक्षण आपकी रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित कर रहे हैं, तो उन्हें सहने करने के बजाय बेहतर है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर सही जानकारी और वैज्ञानिक उपचार से मेनोपॉज का यह दौर अधिक आरामदायक और स्वस्थ बनाया जा सकता है। ध्यान रखें कि मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक चरण है। सही जानकारी, स्वस्थ जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से हर महिला इस बदलाव को आत्मविश्वास और बेहतर स्वास्थ्य के साथ अपना सकती है।
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FAQ
क्या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए केवल दवा ही काफी है?
महिलाओं को दवा के साथ-साथ अच्छी जीवनशैली भी अपनानी चाहिए। इसमें संतुलित आहार, कैल्शियम और विटामिन डी का पर्याप्त सेवन आदि शामिल हैं।
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Jul 24, 2026 20:10 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 24, 2026 20:10 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta