Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

मेनोपॉज से जुड़े 7 मिथक जिन पर लोग अब भी करते हैं यकीन, जानें उनकी सच्चाई

Menopause Myths And Facts: मेनोपॉज से जुड़े कई मिथकों पर लोग आज भी यकीन करते हैं। जैसे मेनोपॉज के बाद वजन का बढ़ना तय है और इसके लक्षणों को कम करने का कोई इलाज नहीं है। अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। यहां हम कुछ मिथकों और उनकी सच्चाई का खुलासा कर रहे हैं।

इस पेज पर:-


मेनोपॉज हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है, लेकिन इसको लेकर आज भी समाज में कई तरह की गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण कई महिलाएं मेनोपॉज को बीमारी, कमजोरी या जीवन के अंत की शुरुआत मानने लगती हैं। यहां हम आपको कुछ ऐसे मिथकों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर लोग आज भी यकीन करते हैं। साथ ही, उनकी सच्चाई भी जानेंगे। इस संबंध में हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की है।

मिथक 1ः मेनोपॉज केवल 50 साल की उम्र के बाद ही होता है

menopause myths people still believe 021

सच्चाईः हर महिला में मेनोपॉज की उम्र अलग हो सकती है। WHO की मानें, तो महिलाओं में यह 45 से 55 वर्ष के बीच होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह इससे पहले या बाद में भी हो सकता है। कुछ मामलों में समय से पहले मेनोपॉज भी हो सकता है। ऐसा कई बार किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण होता है, जिसका ट्रीटमेंट किया जाना जरूरी होता है।

मिथक 2ः पीरियड्स बंद होने का मतलब है कि अब कोई बीमारी नहीं होगी

सच्चाईः डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "मेनोपॉज स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। बढ़ती उम्र अपने आप में कई बीमारियों का कारण बन सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि 40 साल की उम्र के बाद ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है। यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद भी महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए। इस दौरान हड्डियों का कमजोर होना, हृदय रोग, यूरिनरी समस्याएं और योनि स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श, बोन हेल्थ, ब्लड प्रेशर और अन्य जरूरी जांच करवाना लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।"

इसे भी पढ़ें: मेनोपॉज होने पर नजर आ सकते हैं ये 4 अजीब लक्षण, जानें इनके बारे में

मिथक 3ः हर महिला को मेनोपॉज में एक जैसे लक्षण होते हैं

सच्चाईः यह पूरी तरह गलत धारणा है। Journal of Primary Care & Community Health के अनुसार, हर महिला के लिए मेनोपॉज के दौरान अलग-अलग लक्षण नजर आते हैं।  किसी महिला को केवल हल्के हॉट फ्लैशेज हो सकते हैं, तो किसी को नींद की समस्या, मूड स्विंग्स, जोड़ों में दर्द, योनि में सूखापन या अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं में लक्षण बहुत कम या लगभग न के बराबर भी होते हैं। इसलिए दूसरों के अनुभव से अपनी स्थिति की तुलना या उसका आकलन नहीं करना सही नहीं है।

मिथक 4ः मेनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी हर महिला के लिए खतरनाक होती है

सच्चाईः मेनोपॉज के बाद कई महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेती हैं, तो कई महिलाएं इससे डरती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसको लेकर महिलाओं के बीच सबसे ज्यादा भ्रम मौजूद हैं। वास्तव में, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी हर महिला के लिए जरूरी भी नहीं होती, लेकिन जिन महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण गंभीर हों, उनके लिए डॉक्टर की सलाह पर यह सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो सकती है। उपचार शुरू करने से पहले महिला की मेडिकल हिस्ट्री और स्वास्थ्य स्थिति की सटीक जानकारी होनी चाहिए।

मिथक 5ः मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ना तय है

सच्चाईः मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से घट जाता है। ऐसे में हार्मोनल असंतुलन होना तय है। हार्मोनल बदलाव के कारण मेटाबॉलिज्म कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है, लेकिन केवल मेनोपॉज ही वजन बढ़ने का एकमात्र कारण नहीं होता। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधि कम होना, असंतुलित खान-पान और नींद की कमी भी वजन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से वजन को नियंत्रित रखा जा सकता है। इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम केवल वजन ही नियंत्रित नहीं करता, बल्कि हड्डियों को भी मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।"

इसे भी पढ़ें: मेनोपॉज से पहले शरीर में नजर आते हैं ये 5 लक्षण, महिलाएं न करें नजरअंदाज

मिथक 6ः मेनोपॉज के बाद यौन इच्छा पूरी तरह खत्म हो जाती है

सच्चाईः यह भी एक आम लेकिन गलत धारणा है। मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं को योनि में सूखापन या असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन इसका इलाज संभव है। सही सलाह, उपचार और पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत से मेनोपॉज के बाद भी महिलाएं स्वस्थ और संतोषजनक वैवाहिक जीवन जी सकती हैं। मेनोपॉज का मतलब रिश्तों या अंतरंगता का अंत नहीं है।

मिथक 7ः मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने का कोई तरीका नहीं है

सच्चाईः कई महिलाएं सोचती हैं कि मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉट फ्लैशेज, मूड स्विंग्स, नींद की कमी या बार-बार पसीना आना उम्र का हिस्सा है और इसका कोई इलाज नहीं है। जबकि, यह पूरी तरह गलत सोच है। इन लक्षणों को नियंत्रित करने के कई प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं। जीवनशैली में बदलाव, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर दवाइयों या हार्मोन थेरेपी की मदद से काफी राहत मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें: मेनोपॉज की शुरुआत कब होती है? उम्र के हिसाब से जानें इसके लक्षण

निष्कर्ष

मेनोपॉज जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। जितनी जल्दी महिलाएं इससे जुड़े मिथकों से बाहर निकलेंगी, उतनी ही आसानी से इस बदलाव को स्वीकार कर पाएंगी। सही जानकारी, समय पर डॉक्टर से परामर्श और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मेनोपॉज के बाद भी सक्रिय, आत्मविश्वासी और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या मेनोपॉज के दौरान हड्डियों के नुकसान को रोकने के लिए कैल्शियम के साथ विटामिन D3 लेना जरूरी होता है?

    केवल कैल्शियम का सेवन करना पर्याप्त नहीं होता है। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी है। कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए विटामिन D3 का शरीर में पर्याप्त स्तर होना आवश्यक होता है।
  • क्या मेनोपॉज के बाद शरीर में नजर आ रहे लक्षणों को ठीक किया जा सकता है?

    हां, यह पूरी तरह संभव है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को सही जीवनशैली, संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह से ली जाने वाली दवाओं का समय पर सेवन करना चाहिए। इसके अलावा थेरेपी की मदद से भी लक्षणों को ठीक किया जा सकता है।

Read Next

क्या मेनोपॉज के बाद संबंध बनाते समय दर्द होना सामान्य है? जानें इसके कारण और इलाज

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 28, 2026 12:16 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content