Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vijay S Dahiphale , Consultant Urologist, Andrologist & Sexologist

7 किस्म के सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन से जुड़े मिथक जिन पर लोग आज भी करते हैं यकीन, डॉक्टर से जानें इनकी सच्चाई

क्या आप जानते हैं कि एसटीआई यानी सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन साथ खाना खाने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता है? इसी तरह के कई मिथक हैं, जिन पर लोग आज भी यकीन करते हैं। यहां हम उन्हीं मिथकों की सच्चाई बता रहे हैं।

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यौन संबंध की बात करें और सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का जिक्र न हो, ऐसा नहीं हो सकता है। असल बात यह है कि जितने भी लोग सेक्शुअली एक्टिव हैं, उन सबको सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन यानी STI होने का जोखिम रहता है। यही कारण है कि इससे बचाव बहुत जरूरी है। हालांकि, STI इतना घातक और कुछ मामलों में जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए इससे जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जो झूठ होते हुए भी लोग उन पर यकीन करते हैं। आइए, मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले जानते हैं उनके बारे में-

1. मिथकः चीजें शेयर करने, साथ खाना खाने और एक ही टॉयलेट सीट यूज करने से STI हो सकता है।

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तथ्यः यह जरूरी नहीं है। इस बारे में डॉक्टर विजय दहिफले साफ कहते हैं, "साथ खाना खाने या बर्तन शेयर करने, कॉमन टॉयलेट सीट का उपयोग करने या साथ में स्विमिंग पूल का इस्तेमाल करने से STI नहीं होता है। यहां तक कि हाथ मिलाने से भी STI नहीं फैलता है।"

डॉ. दहिफले आगे बताते हैं, "STI फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस बहुत नाजुक होते हैं। वे इंसानी शरीर के अंदर यानी खून, शारीरिक तरल पदार्थों या नमी वाली त्वचा में ही जीवित रह सकते हैं। बाहरी सतह के संपर्क में आते ही वे नष्ट और निष्क्रिय हो जाते हैं।"

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2. मिथकः चुंबन से STI फैल सकता है

सच्चाईः चुंबन से STI फैल सकता है, लेकिन साधारण किस करने से ऐसा नहीं होता है। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति के मुंह या गले में सिफलिस, गोनोरिया, क्लैमाइडिया और हर्पीस के रोगाणु मौजूद हैं, तो ऐसे व्यक्ति के साथ गहराई से किस करने के कारण STI हो सकता है। American Sexual Health Association के अनुसार, जब STI और चुंबन की बात आती है, तो इससे ओरल हर्पीस का रिस्क होता है। हर्पीस एक बहुत ही आम संक्रमण है, जिसकी वजह से मुंह, चेहरे, वजाइना, पेनिस (लिंग), स्क्रोटम (अंडकोष) या एनस (गुदा) पर या उनके आसपास दर्दनाक घाव या छाले हो जाते हैं।"

3. मिथकः STI होने पर लक्षण दिखने जरूरी हैं

सच्चाईः आमतौर पर STI होने पर मरीज को इसके लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि हर मरीज को इसके शुरुआती लक्षण नजर आते हैं। StatPearls में प्रकाशित किताब के अंश से पता चलता है कि कई STI बिना लक्षण के होते हैं। डॉ. विजय दहिफले भी इसे स्पष्ट करते हैं कि STI से पीड़ित कई मरीजों में महीनों-महीनों एक भी संकेत नजर नहीं आता है और स्वस्थ नजर आते हैं। बिना लक्षण व्यक्ति अपनी जांच भी नहीं करवाता है। STI की सटीक जानकारी के लिए टेस्ट करवाना जरूरी होता है।

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4. मिथकः ओरल या एनल (गुदा) सेक्स के जरिए STI नहीं होता है

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सच्चाईः किसी भी तरह से यौन संबंध स्थापित करने से STI का जोखिम बना रहता है। इसे सरल शब्दों में समझें कि STI का संक्रमण ओरल, वजाइनल और एनल सेक्स के माध्यम से फैल सकता है। कई बार STI गुप्तांगों की त्वचा से त्वचा के सीधे संपर्क में आने से भी एक-दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर हो सकता है।

International Journal Of Environmental Research and Public Health (IJERPH) में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि आमतौर पर युवा जोड़े यौन संबंध अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए करते हैं। हकीकत बात ये हैं कि किसी भी तरह के STI से बचने के लिए कंडोम का उपयोग करना सबसे प्रभावी तरीका होता है।

5. मिथकः STI आनुवंशिक बीमारी है। अगर माता-पिता को हुआ है, तो बच्चों को भी हो सकता है।

सच्चाईः नहीं, STI एक संक्रमण है, न कि कोई आनुवंशिक बीमारी। हालांकि, अगर किसी गर्भवती महिला को STI है, तो वह गर्भावस्था, प्रसव (डिलीवरी) या स्तनपान के दौरान यह संक्रमण अपने बच्चे तक पहुंचा सकती है। इस तरह के संक्रमण से गर्भवस्थ शिशु को बचाने के लिए संक्रमित गर्भवती महिला का समय पर इलाज किया जाना जरूरी है।

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6. मिथकः STI का इलाज करवाया जाना जरूरी नहीं है। इससे शरीर को गंभीर नुकसान नहीं होता है

सच्चाईः यह पूरी तरह गलत है। जिसको भी STI हो, वे बिना देरी किए अपना इलाज करवाएं। इसकी वजह से बांझपन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ध्यान रखें कि STI के कोई लक्षण दिखाई न दें, तब भी समय पर इलाज जरूरी है। 

डॉ. विजय दहिफले कहते हैं, "अगर समय पर STI का इलाज न किया जाए, तो शरीर को स्थायी नुकसान हो सकते हैं। इसमें पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, तरह-तरह के कैंसर और बांझपन जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं।"

मिथकः गर्भनिरोधक गोलियों की मदद से STI से बचाव संभव है

सच्चाईः STI से बचाव के लिए सिर्फ और सिर्फ कंडोम का ही उपयोग किया जाना चाहिए। ज्यादातर गर्भनिरोधक गोलियां अनचाही गर्भावस्था को रोकती है। ये STI से बचाव की गारंटी नहीं होते हैं। डॉ. विजय दहिफले भी स्पष्ट करते हैं, "गर्भनिरोधक गोलियां किसी भी तरह से STI से बचाव करने के लिए सक्षम नहीं है। STI से बचने लिए कंडोम एकमात्र और प्रभावी तरीका है। इसका उपयोग हर बार सही और सही तरीके से किया जाना चाहिए।"

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निष्कर्ष

STI एक गंभीर संक्रमण है। इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि, कई बार इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं और मरीज महीनों संक्रमण के साथ जीता है। ध्यान रखें कि STI होने पर शरीर को दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं, इसलिए समय-समय पर STI की जांच करवाएं। यही इसका पता लगाने का एकमात्र जरिया है। समय पर जांच करवाने से आप इस समस्या से पूरी तरह बचाव कर सकते हैं, अगर समस्या हो, तो समय पर इलाज किया जा सकता है।

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FAQ

  • नए पार्टनर के साथ संबंध बनाने से पहले STI की स्क्रीनिंग क्यों करानी चाहिए?

    STI जैसे क्लेमाइडिया, गोनोरिया या एचआईवी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण शरीर में मौजूद रह सकते हैं। इसलिए नए पार्टनर के साथ संबंध बनाने से पहले इसकी जांच करवाना जरूरी हो जाता है।
  • क्या HPV वैक्सीन STI से बचाव में मददगार है?

    हां, HPV वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमावायरस से होने वाले इंफेक्शन से सुरक्षा प्रदान करती है। यह वैक्सीन मुख्य रूप से 9 से 26 वर्ष की आयु के किशोरों और युवाओं को यौन रूप से सक्रिय होने से पहले लगवाने की सलाह दी जाती है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 31, 2026 11:10 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale

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