Wed Oct 7, 2026 | 03:42 AM IST

Medically Reviewed by Dr Hrishikesh D Pai , Reproductive Endocrinologist

क्या कम AMH का मतलब आप कभी मां नहीं बन पाएंगी? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें ऐसे 5 मिथकों की सच्चाई

जो महिलाएं देरी से प्रेग्नेंसी के बारे में सोचती हैं, उन्हें फर्टिलिटी से जुड़े टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। फर्टिलिटी में AMH टेस्ट के बारे में काफी कहा जाता है। कई कपल्स को AMH टेस्ट के बारे में गलतफहमियां भी होती है, तो ऐसे में इस लेख में डॉक्टर ने सभी मिथकों की सच्चाई बताई है।
क्या कम AMH का मतलब आप कभी मां नहीं बन पाएंगी? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें ऐसे 5 मिथकों की सच्चाईक्या कम AMH का मतलब आप कभी मां नहीं बन पाएंगी? फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें ऐसे 5 मिथकों की सच्चाई

आजकल कई महिलाएं देर से प्रेग्नेंसी के बारे में सोचती है, तो ऐसे में डॉक्टर्स फर्टिलिटी से जुड़े टेस्ट कराते हैं, जिसमें AMH (Anti-Müllerian Hormone) टेस्ट काफी सुनने को मिलता है। कई बार देखा गया है कि कम AMH रिपोर्ट आते ही महिलाएं घबरा जाती है और उन्हें लगता है कि मां बनना मुश्किल है। कई ऐसे भी मामले देखे गए हैं, जिसमें ज्यादा AMH आने को फर्टिलिटी का अच्छा संकेत माना जाता है, लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है। AMH से जुड़े मिथकों और उनकी सच्चाई को जानने के लिए हमने Dr. Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist & IVF Specialist, Lilavati Hospital Mumbai and Fortis Hospitals Delhi & Chandigarh से बात की। उन्होंने बताया कि AMH टेस्ट महिलाओं के ओवेरियन रिजर्व यानी ओवरी में मौजूद संभावित अंडों की संख्या का अनुमान लगाने में मदद करता है। हालांकि, यह अकेले किसी महिला की फर्टिलिटी के बारे में नहीं बताता, लेकिन लोगों को लगता है कि इससे ही फर्टिलिटी का पता चलता है।

AMH टेस्ट से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

Cleveland Clinic के अनुसार, अगर AMH टेस्ट का स्तर ज्यादा है, तो महिलाओं के ओवरीज में अंडों की संख्या ज्यादा है, तो ओवेरियन रिजर्व बेहतर होता है। AMH का स्तर कम होने पर अंडों की संख्या कम हो चुकी है और ओवेरियन रिजर्व भी कम है। इससे डॉक्टर्स ओवरीज में मौजूद कोई गांठ है या नहीं और कैंसर के इलाज के असर को देखने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा, फर्टिलिटी और IVF या एग फ्रीजिंग में AMH टेस्ट होता है। इसलिए कई बार कपल्स को इस टेस्ट से जुड़ी गलतफहमियां हो जाती है।

मिथक: AMH का स्तर कम होने का मतलब है कि अब प्रेग्नेंसी नेचुरल नहीं हो सकती है।

सच्चाई: Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “मैंने यह डर आमतौर पर कपल्स में देखा है कि कम AMH होने पर उन्हें लगता है कि अब प्रेग्नेंसी नहीं होगी, लेकिन ऐसा नहीं होता है। दरअसल, कम AMH आने का मतलब है कि ओवरी में अंडों की संख्या पहले के मुकाबले कम हो रही है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि अंडों की क्वालिटी भी खराब है। अगर महिला की उम्र कम है और हर महीने ओव्यूलेशन हो रहा है, तो सिर्फ एक स्वस्थ अंडा भी नेचुरल प्रेग्नेंसी के लिए पर्याप्त हो सकता है। इसलिए सिर्फ कम AMH लेवल आने पर यह कहना कि महिला कभी मां नहीं बन सकती, पूरी तरह गलत है। AMH टेस्ट के अलावा, महिला की उम्र, पीरियड्स का पैटर्न, अल्ट्रासाउंड, हार्मोन प्रोफाइल और पार्टनर की स्पर्म रिपोर्ट जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।”

AMH test myths and factsAMH test myths and facts

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मिथक: AMH का स्तर हाई होने का मतलब फर्टिलिटी बहुत अच्छी है।

सच्चाई: Dr. Hrishikesh Pai के मुताबिक, “मेरे पास कई ऐसे कपल्स भी आते हैं, जो कहते हैं कि AMH का स्तर अच्छा है, तो इस वजह से प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। कई मामलों में हाई AMH वाली महिलाओं में PMOS का भी संकेत हो सकता है। दरअसल, PMOS में ओवरीज में छोटे-छोटे फॉलिकल्स की संख्या ज्यादा होने लगती है, इस वजह से भी AMH बढ़ा हुआ दिख सकता है। हालांकि, इन मामलों में महिलाओं में ओव्यूलेशन रेगुलर नहीं होता। इसका मतलब है कि अंडों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद प्रेग्नेंट होना मुश्किल हो सकता है।”

मिथक: AMH टेस्ट बता देता है कि मां बनने के लिए कितना समय बचा है।

सच्चाई: Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “मेरे पास जब महिलाएं आती हैं, तो कुछ महिलाएं रिपोर्ट में अपना एक अनुमान लगाकर आती हैं कि अब उनके पास प्रेग्नेंसी के लिए कितने साल बाकी हैं या मेनोपॉज कब आएगा, जबकि असलियत यह है कि AMH टेस्ट नहीं बता सकता। सबसे जरूरी बात यह है कि उसी समय ओवेरियन रिजर्व की जानकारी देता है। इससे भविष्य की गारंटी नहीं होती।”

मिथक: दवा, सप्लीमेंट या डाइट से AMH को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

सच्चाई: Dr. Hrishikesh Pai ने बताया, “मैं आजकल देखता हूं कि कपल्स सोशल मीडिया पर कुछ सप्लीमेंट्स या जड़ी-बूटियों के बारे में बताते हैं कि ऐसा करके AMH बढ़ाया जा सकता है। मैं उन्हें भी यही कहता हूं कि इन सभी का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। महिलाएं अपने जीवनभर के एग्स लेकर जन्म लेती हैं और उम्र बढ़ने के साथ संख्या कम होती रहती है। फिलहाल ऐसी कोई दवा नहीं है, जिससे एग्स की संख्या को स्थायी रूप से बढ़ा सकते हैं। इसलिए सोशल मीडिया या किसी भी अनवेरिफाइड सोर्स से दवा या सप्लीमेंट न लें।”

मिथक: फर्टिलिटी की जांच करने के लिए सिर्फ AMH टेस्ट काफी है।

सच्चाई: Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि लोगों में यह बहुत बड़ी गलतफहमी है। फर्टिलिटी को सिर्फ एक हार्मोनल रिपोर्ट से तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए Antral Follicle Count (AFC) अल्ट्रासाउंड, FSH, LH और Estradiol जैसे हार्मोन टेस्ट, फैलोपियन ट्यूब की जांच, गर्भाशय की स्थिति और पार्टनर के सीमन एनालिसिस रिपोर्ट्स को देखा जाता है। इन सभी रिपोर्ट्स को देखकर तय किया जाता है कि आगे क्या इलाज करना चाहिए।

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किन महिलाओं को AMH टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है?

Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “यह टेस्ट हर महिला को कराने की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन जो महिलाएं लगातार कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंट नहीं हो रही, महिला 35 साल की उम्र के बाद फैमिली प्लानिंग कर रही है, आईवीएफ या एग फ्रीजिंग कराते समय, PMOS होने पर या समय से पहले मेनोपॉज की आशंका होने पर ही किया जाता है।”

निष्कर्ष
Dr. Hrishikesh Pai कपल्स को सलाह देते हैं कि AMH रिपोर्ट आने पर घबराने की जरूरत नहीं है और न ही एग्स बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की दवा या सप्लीमेंट्स लें। घरेलू या हर्बल इलाज न करें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें। इसके साथ यह भी समझना जरूरी है कि महिलाओं की फर्टिलिटी को जानने का तरीका सिर्फ AMH टेस्ट नहीं है। हाई या लो AMH टेस्ट आने पर भी नेचुरल प्रेग्नेंसी की संभावना हो सकती है। अगर किसी भी तरह की समस्या होती है, तो डॉक्टर अलग-अलग टेस्ट करके ही इलाज कराने की सलाह दे सकते हैं।

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FAQ

  • क्या पीरियड्स का रेगुलर आना इस बात की गारंटी है कि AMH नॉर्मल ही होगा?

    नहीं, यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। कई महिलाओं के पीरियड्स हर महीने बिल्कुल सही तारीख पर आते हैं, लेकिन फिर भी उनका AMH स्तर काफी कम हो सकता है। रेगुलर पीरियड्स का मतलब सिर्फ यह है कि शरीर में हर महीने एक अंडा रिलीज हो रहा है, लेकिन वह ओवरी में बचे हुए कुल रिजर्व अंडों की सही संख्या नहीं बताता। इसलिए कंसीव करने में दिक्कत आने पर डॉक्टर यह टेस्ट जरूर लिखते हैं।
  •  क्या एक बार AMH कम आने पर हर महीने उसकी जांच कराना जरूरी है?

    बिल्कुल नहीं। AMH का लेवल अन्य हार्मोंस जैसे FSH या LH की तरह हर महीने तेजी से ऊपर-नीचे नहीं बदलता। यह ओवरी के घटते स्टॉक को धीरे-धीरे दिखाता है। इसलिए बार-बार हर महीने AMH टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं होती।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 15, 2026 19:53 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Hrishikesh D Pai