मेनोपाॅज के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे हाॅट फ्लैशेज, थकान, कमजोरी, हड्डियों में दर्द आदि। ज्यादातर महिलाएं अपनी स्थिति को हल्के में लेती हैं और इसे नजरअंदाज कर देती हैं। महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें अपने स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए। जरूरी हो, तो डाॅक्टर के पास जाना चाहिए और कुछ आवश्यक सवाल भी पूछने चाहिए। अगर आप जानना चाहते हैं कि वे सवाल कौन-से हो सकते हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। इस बारे में जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
मेनोपॉज के बाद डाॅक्टर से क्या-क्या पूछें?
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1. क्या मेनोपॉज के बाद हार्मोन थेरेपी लेना सही है?
अक्सर महिलाओं को मेनोपाॅज के दौरान या इसके बाद बहुत ज्यादा हाॅट फ्लैशेज, मूड स्विंग होते हैं और भी कई समस्याएं होती हैं। कुछ महिलाओं के लिए स्थिति असहनीय हो जाती है और इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित होती है। इससे बचने के लिए कई महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के बारे में डाॅक्टर से पूछ सकती हैं। डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जरिए महिला के शरीर में हार्मोन्स को संतुलित किया जाता है। इससे उनकी समस्याओं में कमी आती है।"
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2. मेनोपाॅज के बाद बहुत ज्यादा हाॅट फ्लैशेज होते हैं, क्या ऐसा सबके साथ होता है?
मेनोपाॅज होने की अवस्था में महिलाओं में हॉट फ्लैशेज होते हैं। StatPearls में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है कि पोस्ट-मेनोपाॅज हाॅट फ्लैशे होते हैं और यह कई बार रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि हर महिला को मेनोपाॅज के बाद हाॅट फ्लैशेज होते हैं। हर महिला के लक्षण अलग होते हैं। अगर किसी महिला को यह समस्या है, तो उन्हें इस बारे में डाॅक्टर से संपूर्ण जानकारी लेनी चाहिए।
3. क्या मेनोपाॅज के बाद बढ़ते वजन को जीवनशैली से नियंत्रित किया जा सकता है?
मेनोपाॅज के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ जाता है। खासकर, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर घट जाता है और मेल हार्मोन एंड्रोजन के स्तर में बढ़ोतरी होती है। इसके प्रभाव उनके मेटाबाॅलिज्म पर भी पड़ता है और पेट के आसपास काफी ज्यादा मात्रा में चर्बी जमा होने लगती है, जिसे कम करना मुश्किल हो जाता है। Harvard Health Publishing से भी इस बात की पुष्टि होती है कि मेटाबोलिज्म स्लो होने पर कैलोरी कम बर्न होती है। बहरहाल, अगर आपका वजन बढ़ रहा है, तो आप डाॅक्टर से पूछ सकते हैं कि इसे कम करने के लिए क्या किया जा सकता है? जानकारी के लिए बता दें कि नियमित रूप से वर्कआउट, सही खान-पान की आदतें अपनाकर आप मेनोपाॅज के दौरान वजन कम करने में मदद मिल सकती है।
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4. मेनोपाॅज के बाद नींद कम आती है या नहीं आती है। ऐसे में क्या करूं?
Sleep Foundation की मानें, तो मेनोपाॅज होने के बाद अक्सर महिलाओं की नींद बाधित हो जाती है और कई महिलाओं को रात-रात भर नींद नहीं आती है। यही कारण है कि हर महिला को मेनोपाॅज के बाद डाॅक्टर से मिलने पर यह सवाल पूछना चाहिए कि नींद न आने पर क्या कर सकते हैं? हालांकि, आप नींद की समस्या से निपटने के लिए अपनी रोजमर्रा की कुछ आदतों में सुधार कर सकते हैं, जैसे सोने से तीन घंटे पहले डिनर कर लें, रात को सोने से पहले कमरे की बत्ती बुझा दें, मोबाइल को अपने पास न रखें और रोजाना सोने का निश्चित समय तय करें।
5. मेनोपाॅज के बाद यौन इच्छा कम हो गई है। इसमें सुधार कैसे करें?
मेनोपाॅज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे में वजाइनल ड्राईनेस जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं। नतीजतन, महिलाओं की यौन संबंध के प्रति इच्छा भी कम होने लगती है। ऐसे में आपको डाॅक्टर से जरूर पूछना चाहिए कि यौन इच्छा या लिबिडो में सुधार के लिए क्या किया जा सकता है? PubMed Central के अनुसार मेनोपाॅज के बाद प्राकृतिक रूप से महिलाओं में लिबिडो का स्तर कम हो जाता है। हालांकि, कई दवाएं हैं, जिनकी मदद से लिबिडो में सुधार किया जा सकता है।
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6. मेनोपाॅज के बाद यौन संबंध बनाते हुए तकलीफ हो, तो क्या करें?
मेनोपॅज के बाद कई महिलाओं को यौन संबंध बनाते हुए दर्द होता है। इसे सामान्य न समझें और जितना जल्दी संभव हो, डाॅक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवाएं। यह सच है कि मेनोपाॅज के बाद लिबिडो और योनि के प्राकृतिक लुब्रिकेशन में कमी आने लगती है, जिससे यौन संबंध बनना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, कई बार ऐसा किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से भी होता है। इसलिए, इस संबंध में डाॅक्टर से तुरंत मिलना जरूरी होता है।
7. क्या मेनोपाॅज के बाद डाइट में बदलाव करना जरूरी होता है?
मेनोपाॅज के बाद कई महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जाने-अनजाने उनकी डाइट में कई तरह के परिवर्तन होने लगते हैं और हमारे यहां अक्सर महिलाएं वर्कआउट नहीं करती हैं। इसके अलावा, मेटाबाॅलिज्म रेट भी धीमा हो जाता है, जिससे उनके खाने का पोर्शन साइज कम हो जाता है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि महिलाओं को पता हो कि वे मेनोपाॅज के बाद किस तरह के डाइट को फाॅलो कर सकती हैं। इस संबंध में डाॅक्टर से पूछना न भूलें।
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निष्कर्ष
मेनोपाॅज के बाद कई महिलाएं अपने जीवन को लेकर उदासीन हो जाती हैं और उन्हें लगता है कि ये तो जीवन का अंत है। महिलाओं को ऐसा नहीं सोचना चाहिए। सही जीवनशैली, खान-पान की अच्छी आदतें अपनाकर और डाॅक्टर की सही गाइडेंस की मदद से मेनोपाॅज के बाद अपनी सेहत में सुधार कर सकते हैं।
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FAQ
मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस न हो, इसके लिए क्या करें?
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर आपको कुछ जरूरी दवा और जीवनशैली में सुधार के लिए कह सकते हैं।क्या मेनोपॉज के बाद हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है?
डॉक्टर्स की मानें, तो यह सच है कि मेनोपॉज के बाद हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं की रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखने और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को नियंत्रित करने में मदद करता है। जैसे ही शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर घटता है, हाई बीपी का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।
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Current Version
Jul 31, 2026 18:38 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 31, 2026 18:38 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta