मेनोपॉज के बाद अचानक वजन बढ़ना कई महिलाओं की सबसे आम शिकायतों में से एक है। अक्सर महिलाएं कहती हैं कि पहले जैसी डाइट और लाइफस्टाइल होने के बावजूद वजन कम नहीं होता, खासकर पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होने लगती है, लेकिन क्या इसकी वजह सिर्फ उम्र बढ़ना है? इस सवाल का जवाब जानकर अपने वजन को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है। आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
मेनोपॉज के बाद मोटापे के कारण
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1. हार्मोनल बदलाव होना
Mayo Clinic के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से गिरता है। यह हार्मोन केवल प्रजनन क्षमता को ही कम नहीं करता है, बल्कि शरीर में फैट के डिस्ट्रिब्यूशन यानी वितरण और ऊर्जा संतुलन को भी प्रभावित करता है। एस्ट्रोजन कम होने पर शरीर में फैट पेट के आसपास अधिक जमा होने लगता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
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2. मेटाबोलिज्म का धीमा होना
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता भी कम होने लगती है। इसका मतलब है कि महिला का शरीर मेनोपॉज से पहले की तरह नहीं रह जाता है और अब वह पहले जितनी कैलोरी आसानी से बर्न नहीं कर पाता है। अगर खानपान पहले जैसा ही रहे और शारीरिक गतिविधि कम हो जाए तो अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है।
3. मांसपेशियों में कमी
मेनोपॉज के बाद धीरे-धीरे मसल मास के स्तर में भी गिरावट आने लगती है। दरअसल, मांसपेशियां शरीर में सबसे ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं, इसलिए इनके कम होने से मेटाबॉलिज्म और धीमा हो जाता है। यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद वजन घटाना पहले की तुलना में काफी मुश्किल भरा हो जाता है।
इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "अक्सर महिलाएं मेनोपॉज के बाद अपने बॉडी वेट को लेकर परेशान हो जाती हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्हें अपनी डाइट में जरूरी बदलाव और नियमित रूप से वर्कआउट करना चाहिए।"
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4. नींद की कमी और बढ़ता तनाव
मेनोपॉज के दौरान हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना और नींद न आने की समस्या होना जैसी कई परेशानियां होने लगती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि निरंतर हार्मोनल बदलाव के कारण मेनोपॉज के बाद महिलाओं को मीठा और हाई-कैलोरी खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इसके अलावा, इस उम्र में महिलाओं को अक्सर नींद कम आती है, जो कि उनके तनाव के स्तर को बढ़ाता है। तनाव बढ़ने की वजह से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो पेट के आसपास फैट स्टोर करने को बढ़ावा देता है।
साल 2006 American Journal of Epidemiology में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कि मेनोपॉज का नींद की कमी और वजन बढ़ने का आपस में गहरा संबंध है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को नींद की समस्या हो जाती है। जब रात को नींद बार-बार टूटती है, तो उनका शरीर फैट को ऊर्जा के रूप में कम बर्न कर पाता है, जो कि वजन बढ़ने में अहम भूमिका अदा करता है।
5. इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या
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साल 2004 में International Journal of Obesity में प्रकाशित शोध पत्र के निष्कर्ष से पता चलता है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस वजन बढ़ने का एक मुख्य कारण हो सकता है। दरअसल, इंसुलिन रेजिस्टेंस का असर विशेष रूप से उन महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है, जिनका बॉडी मास इंडेक्स कम या सामान्य था यानी दुबली या कम वजन वाली महिलाएं। हैरानी की बात यह है कि मेनोपॉज के बाद इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पतली महिलाओं का वजन तेजी से बढ़ता है।
इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ने के पीछे इंसुलिन रेजिस्टेंस (इंसुलिन प्रतिरोध) एक बहुत बड़ा कारण है। मेनोपॉज के दौरान जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरता है, तो सेल्स अक्सर इंसुलिन हार्मोन के प्रति कम संवेदनशील (Sensitive) हो जाती हैं। इसके कारण शरीर कैलोरी को बर्न करने के बजाय उसे फैट के रूप में स्टोर करने लगता है। यही नहीं, इस स्थिति में वजन कम करना भी काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।"
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मेनोपॉज के बाद वजन कम करने के उपाय
- हर भोजन में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें।
- सप्ताह में कम से कम 150 मिनट नियमित व्यायाम करें।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
- रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश जरूर करें।
- किसी भी तरह के क्रैश डाइट से बचें, इससे त्वचा ढीली हो सकती है।
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निष्कर्ष
मेनोपॉज के बाद महिलाओं को केवल वजन कम करने पर नहीं, बल्कि अपने समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव को मैनेज करने से न केवल वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है, बल्कि इम्यूनिटी बूस्ट होती है, जिससे बीमार होने का जोखिम भी कम होता है। यही नहीं, अपनी जीवनशैली को संतुलित रखकर मेटाबॉलिज्म में भी सुधार किया जा सकता है।
All Image Credit: Maginific
FAQ
मेनोपॉज के बाद वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग कितनी सेफ है?
मेनोपॉज के बाद आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग करनी चाहिए या नहीं, इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि, महिलाओं के लिए 12 से 14 घंटे की हल्की इंटरमिटेंट फास्टिंग इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में काफी असरदार मानी जाती है।क्या मेनोपोज के हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने की मदद से वजन कम हो सकता है?
हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी वजन घटने के लिए नहीं होती है। यह हार्मोन को संतुलित कर मेनापॉज के लक्षणों को कम करने के लिए दी जाती है।
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Jul 30, 2026 10:27 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta