Thu Oct 15, 2026 | 12:44 AM IST

Medically Reviewed by Dr Jayaditya Ghosh , Consultant Endocrinologist

पतले लोगों को भी क्यों हो जाता है इंसुलिन रेजिस्टेंस? डॉक्टर से जानें

आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या केवल ज्यादा वजन या मोटापे से जूझ रहे लोगों में होती है, लेकिन असल में मोटे और पतले होने से फर्क नहीं पड़ता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पतले लोगों में भी हो सकती है और इसके कई कारण हैं। 
पतले लोगों को भी क्यों हो जाता है इंसुलिन रेजिस्टेंस? डॉक्टर से जानेंपतले लोगों को भी क्यों हो जाता है इंसुलिन रेजिस्टेंस? डॉक्टर से जानें

जब भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह समस्या केवल मोटे या ज्यादा वजन वाले लोगों में होती है, लेकिन हकीकत यह है कि सामान्य वजन या पतले दिखने वाले लोग भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो सकते हैं। कई बार व्यक्ति बाहर से फिट नजर आता है, लेकिन शरीर के अंदर मेटाबोलिक बदलाव हो रहे होते हैं, जो फ्यूचर में डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, शरीर का वजन अकेले यह तय नहीं करता कि कोई व्यक्ति मेटाबोलिक रूप से हेल्दी है या नहीं। कुछ लोगों में जेनेटिक कारणों, गलत खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और शरीर के अंदर जमे फैट की वजह से इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में शरीर को ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है।

पतले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस क्यों होता है?

डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि इंसुलिन हार्मोन शरीर में मौजूद ग्लूकोज को सेल्स तक पहुंचाने में मदद करता है, ताकि शरीर उसे एनर्जी में इस्तेमाल कर सके। जब शरीर की सेल्स इंसुलिन के प्रति कम सेंसिटिव हो जाती हैं, तो ग्लूकोज को कंट्रोल करने के लिए शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। डॉक्टर जयादित्य के अनुसार, पतले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

  • कुछ लोगों में परिवार से मिले जीन के कारण शरीर में इंसुलिन का असर कम हो सकता है। अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो सामान्य वजन वाले लोगों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है।
  • कई बार व्यक्ति बाहर से पतला दिखता है, लेकिन उसके पेट के अंदर विसरल फैट ज्यादा हो सकता है। यह फैट मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करके इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है।
  • ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, पैकेज्ड फूड और कम पोषण वाली डाइट शरीर में इंसुलिन के फंक्शन को प्रभावित कर सकती है, भले ही वजन ज्यादा न हो।
  • नियमित एक्सरसाइज न करने से मांसपेशियां ग्लूकोज का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।

साल 2023 में Journal of the Academy of Medical Sciences of Bosnia and Herzegovina में प्रकाशित इस स्टडी से पता चलता है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस (IR) का खतरा सिर्फ ज्यादा वजन यानी मोटापे वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि कम वजन वाले लोगों को भी होता है। वजन चाहे कम हो या ज्यादा, इंसुलिन रेजिस्टेंस से बचने के लिए सही पोषण और हेल्दी लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है।

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पतले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के संकेत क्या हो सकते हैं?

डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि कई बार इसके लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे बार-बार भूख लगना, खाने के बाद जल्दी थकान महसूस होना, पेट के आस-पास फैट बढ़ना, मीठा खाने की इच्छा ज्यादा होना, एनर्जी की कमी और ब्लड शुगर में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में गर्दन के आस-पास स्किन का काला पड़ना भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, सामान्य वजन वाले लोगों को भी अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए। नियमित फिजिकल एक्टिविटी, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद, तनाव कंट्रोल और बैलेंस डाइट इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

  1. डाइट में फाइबर से भरपूर चीजें, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
  2. वहीं ज्यादा चीनी, शुगर ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए।
  3. अगर परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री है, पेट के आस-पास फैट बढ़ रहा है, ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है या बार-बार थकान और भूख लगने जैसी परेशानी रहती है, तो सामान्य वजन होने के बावजूद डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर और इंसुलिन से जुड़े चेकअप कराने चाहिए।

निष्कर्ष

इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल मोटे लोगों की समस्या नहीं है। पतले लोग भी जेनेटिक्स, अंदरूनी फैट, खराब खान-पान और इनएक्टिव लाइफस्टाइल के कारण इसका शिकार हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ वजन को देखकर अपनी मेटाबोलिक हेल्थ का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और समय-समय पर जांच के जरिए इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।

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FAQ

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे ठीक करें?

    इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या को ठीक करने के लिए सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए और बैलेंस डाइट लेनी चाहिए, इसके साथ ही फिजिकली एक्टिव रहना भी इंसुलिन रेजिस्टेंस को ठीक करने में मदद कर सकता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस टेस्ट क्या होता है?

    इंसुलिन रेजिस्टेंस को मापने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसमें 8-10 घंटे की फास्टिंग के बाद व्यक्ति के ब्लड में ग्लूकोज और इंसुलिन दोनों के लेवल को देखा जाता है। 

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 27, 2026 18:37 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jul 27, 2026 18:37 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh