इंसुलिन रेजिस्टेंस वह कंडीशन है, जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। ऐसे में पैनक्रियाज अधिक मात्रा में इंसुलिन बनाने लगता है, जिससे खून में शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है। ऐसे में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। बहरहाल, ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या मोटे लोगों में अधिक होती है। क्या आप जानते हैं कि यह सच नहीं है? कई ऐसी पतली महिलाएं भी होती हैं, जिन्हें इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है। इस लेख में हम विशेषकर दुबली-पतली महिलाओं की बात करेंगे और जानेंगे कि आखिर उन्हें यह समस्या क्यों हो जाती है और इसके क्या कारण हो सकते हैं? इस बारे में जानने के लिए हमने डॉ. हिमिका चावला, Senior Consultant, Endocrinology and Diabetology, PSRI Hospital से बात की।
क्या दुबली महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होती है?
-1784185648531.jpg)
यह पूरी तरह मिथक है कि सिर्फ मोटी महिलाओं को ही इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत हो सकती है। हकीकत यह है कि दुबली-पतली महिलाओं में भी यह समस्या देखी जाती है। साल 2025 में American Journal Of Case Reports में एक स्टडी पब्लिश हुई, जिसका विषय था पतली महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस और पीसीओएस की समस्या। इस शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि पतली महिलाओं को भी वो पीसीओएस और इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कतें हो सकती हैं।
इसे भी पढ़ें: एक्सरसाइज के बावजूद लंबे समय तक बैठने से हार्मोनल हेल्थ पर कैसे असर पड़ता है? बता रहे हैं डॉक्टर
दुबली महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस होने के कारण
दुबली महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे-
विसरल फैट
डॉ. हिमिका चावला बताती हैं, "विसरल फैट का मतलब है कि अंदरूनी अंगों के आसपास अतिरिक्त फैट का जमा होना। इससे भले बाहरी तौर पर वजन अधिक महसूस न हो, लेकिन लिवर या मांसपेशियों में जमा फैट मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है, जिससे सेल्स इंसुलिन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं।"
मांसपेशियों की कमी
साल 2016 में Diabetes & Metabolism Journal में प्रकाशित शोध पत्र की मानें, तो शरीर में मांसपेशियों की कमी होने से इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बहुत तेजी से बढ़ जाता है। असल में ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि मांसपेशियां ही हमारे शरीर में खून से ग्लूकोज को सोखने और उसका इस्तेमाल करने का काम करती हैं। ऐसे में शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत होने लगती है।
पारिवारिक इतिहास
साल 2013 में European Journal of Endocrinology में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, अगर किसी के परिवार में टाइप 2 डायबिटीज का इतिहास है यानी माता-पिता या नजदीकी रिश्तेदारों में से किसी को यह इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या है, तो दुबली-पतली होने के बावजूद महिला को यह समस्या हो सकती है। ऐसा जीन्स में खराबी के कारण होता है।
इसे भी पढ़ें: क्या मोटापा सिर्फ ज्यादा खाने से बढ़ता है? जानें किन हार्मोनल बीमारियों की वजह से तेजी से बढ़ सकता है वजन
पीसीओएस
-1784185661496.jpg)
इसका जिक्र हमने पहले भी किया है कि कम या स्वस्थ वजन होने के बावजूद महिला को पीसीओएस हो सकता है। इस तरह की समस्या में हार्मोनल बदलाव होना आम बात है, जो कि इंसुलिन रेजिस्टेंस को ट्रिगर कर सकता है। असल में, इस समस्या के कारण शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन बहुत ज्यादा होने लगता है, जिससे वजन सामान्य होने पर भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या पैदा हो जाती है।
हार्मोनल बदलाव
महिलाओं में अलग-अलग चरणों में हार्मोनल बदलाव अधिक होने लगते हैं। इसमें विशेषकर, पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज शामिल हैं। पेरिमेनोपॉज में पीरियड्स कम हो जाते हैं और मेनोपॉज के बाद मासिक धर्म पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इस स्थिति में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में कमी आने लगती है, जिससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है, जो कि इंसुलिन रेजिस्टेंस ट्रिगर का कारण बनता है।
क्रोनिक स्ट्रेस
महिलाओं में क्रॉनिक स्ट्रेस भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या खड़ी करता है। ऐसा पतली महिलाओं के साथ भी हो सकता है। असल में, जब महिला लंबे समय से तनाव में रहती है, तो इसकी वजह से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर लगातार बढ़ने लगता है। इससे शरीर को संकेत मिलता है और जमा हुआ ग्लूकोज खून में रिलीज होने लगता है। इससे शरीर में इंसुलिन की मांग बहुत बढ़ जाती है। साल 2022 में Cureus Journal Of Medical Science में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, गंभीर मानसिक या शारीरिक तनाव सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है और स्वस्थ तथा पतले लोगों को डायबिटीज का मरीज बना सकता है। ऐसा महिला या पुरुष किसी के भी साथ हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: थायराइड स्टॉर्म क्या है? डॉक्टर से जानें कारण, लक्षण और इलाज
नींद की कमी
-1784185673445.jpg)
अगर कोई महिला लंबे समय से अच्छी नींद नहीं ले रही है या वह स्लीप एपनिया जैसी समस्या का शिकार हैं, तो ऐसे में उनके शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगता है। National Institutes Of Health (NIH) के अनुसार 6 हफ्ते तक रोजाना 6.2 घंटे या उससे कम सोने से महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा औसतन 14.8 फीसदी तक बढ़ जाता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या से बचने के लिए महिलाएं क्या करें?
जैसा कि आप यह समझ गए होंगे कि पतली-दुबली होने के बावजूद महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या ट्रिगर हो सकती है। इससे बचने के लिए आप यहां दिए गए टिप्स को अपना सकते हैं-
- रोजाना स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। शारीरिक रूप से इनएक्टिव रहने से बचें।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या से बचने के लिए डाइट में कटौती न करें यानी ज्यादा देर तक भूखा न रहें।
- अपने ब्लड शुगर के स्तर पर तीव्र नजर रखें। अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड आदि का सेवन पूरी तरह बंद कर दें। इसके बजाय, फाइबर के विकल्पों जैसे दाल आदि को चुनें।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत न हो, इसके लिए खाने का समय सुनिश्चित करें। रोजाना एक ही समय पर खाएं।
- खाना खाने के तुरंत बाद सोएं नहीं। इसके बजाय 10-15 मिनट के लिए वॉक करें।
- अगर डेस्क जॉब करती हैं, तो घंटों एक ही सीट पर बैठने से बचें। कुछ-कुछ समय के गैप में उठें और स्ट्रेचिंग करें।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्या से बचने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। तनाव के बढ़ने से ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है। तनाव कम करने के लिए योगा या मेडिटेशन करें।
- रोजाना 8-10 घंटे की गहरी नींद जरूर लें। जब आप अच्छी नींद नहीं लेते हैं, तो ऐसे में इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है।
इसे भी पढ़ें: हार्मोन कैसे बनते हैं और उम्र के साथ कैसे बदलते हैं? डॉक्टर से जानें
निष्कर्ष
आप चाहें दुबली-पतली महिला ही क्यों न हों, असल बात यह है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या किसी को भी हो सकती है। हालांकि, इसके पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हैं, जैसे नींद पूरी न होना, लंबे समय से तनाव में रहना, हार्मोनल परिवर्तन होना। अगर किसी को उपरोक्त बताई गई कोई भी समस्या है, तो बेहतर है कि आप जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें और डायबिटीज की जांच जरूर करवाएं।
All Image Credit: Freepik
FAQ
इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
HOMA-IR (होमियोस्टैसिस मॉडल असेसमेंट) टेस्ट किया जाता है, जो फास्टिंग इंसुलिन और फास्टिंग ग्लूकोज के अनुपात को मापता है। इसके अलावा ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) भी किया जाता है।क्या केवल लो-कार्ब डाइट लेने से पतली महिलाओं का इंसुलिन रेजिस्टेंस ठीक हो सकता है?
नहीं, केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना इस समस्या का इलाज नहीं है। अगर पतली महिलाएं लंबे समय से तनाव में हैं, या उनकी नींद पूरी नहीं हो रही है, तो लो-कार्ब डाइट के बावजूद कोर्टिसोल हार्मोन इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता रहेगा।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 16, 2026 18:03 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Himika Chawla