PIB के अनुसार, दुनियाभर में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। पांच से 19 साल के बच्चों और युवाओं में साल 1990 से लेकर 2022 के बीच मोटापे का प्रतिशत चार गुना बढ़ा है। साल 1990 में सिर्फ दो प्रतिशत बच्चे ही मोटापे के शिकार थे, जो 2022 में बढ़कर आठ फीसदी हो गए हैं। वहीं 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में 1999 से लेकर 2022 के दौरान मोटे वयस्कों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है, जो 7% से बढ़कर 16% पर पहुंच गई है। अगर NHFS 5 के आंकड़ें देखे, तो भारत में यह समस्या महामारी का रूप ले चुकी है। मोटापे से करीब 24% महिलाएं और 23% पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इसका मतलब है कि लगभग हर चार में से एक भारतीय वयस्क इस समस्या से जूझ रहा है। मोटापे से जूझ रहे लोगों को लगता है कि खाने के कारण मोटापा बढ़ता है, लेकिन इसकी वजह हार्मोनल बदलाव हो सकता है। इस बारे में Dr. Himika Chawla, Senior Consultant, Endocrinology and Diabetology, PSRI Hospital, Delhi और Dr. Anshu Alok, Senior Consultant, Endocrinology & Diabetes, Max Healthcare, Delhi से बात की।
मोटापे का कारण हार्मोनल बदलाव
Dr. Himika Chawla कहती हैं, “आमतौर पर लोग मोटापे को सिर्फ खाने से ही जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका कारण जेनेटिक, मेटाबोलिक और हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं। हालांकि हार्मोनल कारणों से होने वाले मोटापे के मामले काफी कम होते हैं। अगर हार्मोनल बीमारियों की वजह से मोटापा बढ़ रहा है, तो इसकी सही समय पर पहचान जरूरी है।”
गंभीर हाइपोथायरॉयडिज्म
Dr. Himika Chawla के मुताबिक, “अक्सर लोग मान लेते हैं कि हाइपोथायरॉयडिज्म की वजह से ही लगातार मोटापा बढ़ता रहता है, लेकिन सिर्फ गंभीर हाइपोथायरॉयडिज्म मे ही सीमित मात्रा में वजन बढ़ सकता है। अगर तेजी से वजन बढ़ रहा है और साथ में मरीज को हमेशा थकान, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, चेहरे या शरीर में सूजन और बाल झड़ने लगे, तो डॉक्टर से जरूर चेक कराएं।”

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कुशिंग सिंड्रोम
Dr. Anshu Alok का कहना है, “कुशिंग सिंड्रोम में शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है। यह नॉर्मल स्ट्रेस के दौरान बढ़ने वाले कॉर्टिसोल से बिल्कुल अलग स्थिति होती है। इस बीमारी में सिर्फ वजन ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसमें पेट के आसपास तेजी से फैट जमा होना, गर्दन और ऊपरी पीठ पर फैट बढ़ना, स्किन पर बैंगनी रंग के स्ट्रेच मार्क्स, शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी और हाई ब्लड प्रेशर हो, तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।”
ग्रोथ हार्मोन की कमी
Dr. Anshu Alok ने बताया कि बच्चों में ग्रोथ हार्मोन की कमी होने पर उनकी हाइट नहीं बढ़ती, वहीं वयस्कों में इससे शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती है और शरीर में फैट का प्रतिशत बढ़ सकता है। हालांकि, यह समस्या बहुत आम नहीं होती।
हाइपोगोनाडिज्म होना
Dr. Anshu Alok ने बताया कि इस कंडीशन में शरीर में पर्याप्त मात्रा में सेक्स हार्मोन नहीं बन पाते। इस वजह से पुरुषों में सेक्शुअल ड्राइव कम हो सकती है और शरीर में फैट बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। महिलाओं में इस हार्मोनल बदलाव की वजह से शरीर की संरचना और वजन पर भी असर पड़ सकता है।
क्या हार्मोनल मोटापा अलग है?
Dr. Himika Chawla कहती हैं, “हार्मोनल कारणों से बढ़ने वाला वजन कई बार सामान्य मोटापे से अलग दिखाई देता है। अगर किसी का अचानक वजन बढ़ने लगे, शरीर के किसी खास हिस्से में ज्यादा फैट जमा होने लगे और डाइट व एक्सरसाइज के बावजूद वजन कम न हो, तो इसका कारण हार्मोनल बदलाव हो सकता है।”
क्या हर मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को हार्मोन टेस्ट करवाना चाहिए?
Dr. Anshu Alok के अनुसार, नहीं, हर किसी को वजन बढ़ने पर हार्मोनल चेक कराना जरूरी नहीं होता। अगर वजन बढ़ने के साथ थायराइड, स्ट्रेस, हार्मोनल ग्रोथ या मांसपेशियां कमजोर होने लगे, तो डॉक्टर से चेक कराना चाहिए। वह मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
वजन कम करने के उपाय
Dr. Himika Chawla ने लोगों को वजन को कंट्रोल करने के लिए अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी है।
- लोगों को बैलेंस्ड और सीमित मात्रा में कैलोरी वाली डाइट लेनी चाहिए।
- रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए।
- पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए।
- स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए योग या मेडिटेशन की जा सकती है।
- रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए।
निष्कर्ष
अगर किसी हार्मोनल बीमारी का पता चल जाए, तो उसका इलाज कराना चाहिए ताकि बीमारी को कंट्रोल करके वजन कम किया जा सके। हार्मोनल असंतुलन से बढ़ने वाले मोटापे के अलावा, लोगों का फिजिकल एक्टिविटी कम करना, जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने जैसी आदतों के कारण भी मोटापा बढ़ सकता है। इसलिए अगर मोटापे पर कंट्रोल न हो रहा हो, तो इसके लिए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
FAQ
क्या डायबिटीज की दवाएं या अन्य हार्मोनल पिल्स वजन बढ़ा सकती हैं?
कुछ दवाएं इसका कारण हो सकती हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस या टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं शरीर में फैट स्टोरेज को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा, गंभीर सूजन या एलर्जी के लिए ली जाने वाली स्टेरॉयड दवाएं जैसे प्रेडनिसोन शरीर में वाटर रिटेंशन और फैट जमा करती हैं। यदि आपको ऐसा लगे, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें, बल्कि उनसे बात करें।पेट के कीड़ों या आंतों के हार्मोंस का मोटापे से क्या कनेक्शन है?
हमारी आंतें कई तरह के पाचक हार्मोंस जैसे GLP-1, PYY रिलीज करती हैं, जो भूख और शुगर के स्तर को नियंत्रित करते हैं। जब हमारी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है, तो ये हार्मोंस ठीक से काम नहीं कर पाते। इससे न सिर्फ मीठा खाने की इच्छा बढ़ती है, बल्कि शरीर भोजन से मिलने वाली कैलोरी को ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे फैट के रूप में स्टोर करने लगता है।
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Jul 03, 2026 16:00 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 03, 2026 16:00 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 03, 2026 16:00 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Himika Chawla