अनहेल्दी खानपान और बढ़ते तनाव के कारण महिलाओं में हार्मोनल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, इन्हीं में से एक प्रमुख समस्या है पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), जो न केवल महिलाओं में फर्टिलिटी को प्रभावित करता है बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी असर डालता है। PCOS में महिलाओं का वजन बढ़ना आम बात है। इसे अक्सर सिर्फ ज्यादा खाने या कम एक्टिव रहने से जोड़ा जाता है, जबकि असल कारण इससे कहीं ज्यादा जटिल हैं। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, PCOS में वजन बढ़ने को रोकने के लिए बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना सबसे जरूरी उपाय हैं।
PCOS में वजन क्यों बढ़ता है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना कहती हैं कि पीसीओएस में वजन कम करने के उपाय जानने से पहले महिलाओं को यह जानना चाहिए कि आखिर PCOS में वजन बढ़ता क्यों है। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं, ''PCOS में वजन बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है। जब शरीर में ज्यादा इंसुलिन बनने लगता है तो यह अतिरिक्त इंसुलिन शरीर में फैट स्टोरेज को बढ़ाता है, खासतौर से पेट के आसपास। इसके अलावा, एंड्रोजन का बढ़ा हुआ लेवल भी वजन बढ़ने का कारण हो सकता है।'' महिलाओं के शरीर में होने वाला ये हार्मोनल असंतुलन मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है और शरीर में फैट जमा होने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। साथ ही, भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन जैसे लेप्टिन और घ्रेलिन भी प्रभावित होते हैं, जिससे बार-बार भूख लगती है और ज्यादा खाने की आदत बन जाती है। ऐसे में भूख लगने पर अक्सर महिलाएं जंक फूड खाती हैं और ये वजन बढ़ने का कारण बनता है।
Cureus Journal of Medical Science में 2022 में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच गहरा संबंध है, जो महिलाओं की फर्टिलिटी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। निष्कर्ष यह है कि इंसुलिन न केवल मेटाबॉलिज्म के लिए, बल्कि ओव्यूलेशन के लिए भी एक जरूरी हार्मोन है। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण अंडों के प्रोडक्शन में देरी या उनकी क्वालिटी में कमी आती है।
स्टडी बताती है कि PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस चयनात्मक (selective) होता है, जो एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन के लेवल को बढ़ाकर मुंहासे और इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं पैदा करता है। दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए यह टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ाता है।
PCOS में वजन बढ़ने से रोकने के उपाय
1. मेडिकल ट्रीटमेंट
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि लाइफस्टाइल में बदलाव PCOS के इलाज का पहला कदम है, लेकिन कुछ मामलों में दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर महिला की स्थिति को देखकर इंसुलिन सेंसिटाइजर दवाएं, हार्मोनल थेरेपी, वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम की सलाह दे सकते हैं, हर मरीज का इलाज अलग होता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार लेना चाहिए।
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2. इंसुलिन संतुलन के लिए सही डाइट
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि PCOS में वजन कंट्रोल करने के लिए सही खानपान सबसे जरूरी है। एक लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) डाइट अपनाएं, इसका मतलब है ऐसे फूड्स को डाइट में शामिल करें जो धीरे-धीरे ब्लड शुगर बढ़ाते हैं। साबुत अनाज जैसे, ओट्स, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स, हरी सब्जियां, नट्स और बीज को डाइट में शामिल करें। वहीं मैदा, शुगर ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। प्रोटीन का पर्याप्त सेवन भी जरूरी है क्योंकि यह भूख को कंट्रोल करता है और मसल्स को बनाए रखने में मदद करता है। हर मील में प्रोटीन शामिल करने से ब्लड शुगर स्थिर रहने में मदद मिल सकती है। महिलाएं हेल्दी फैट के लिए अलसी, अखरोट को भी डाइट में शामिल करें, ये सूजन को कम करते हैं और हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं।
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3. नींद और तनाव
नींद और मेंटल हेल्थ का सीधा असर PCOS पर पड़ता है, अगर नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ जाता है। इसके अलावा कम नींद के कारण भूख बढ़ती है, मीठा खाने की इच्छा बढ़ती है, वजन तेजी से बढ़ता है।
American Physiological Society के Physiology जर्नल में साल 2025 में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, किशोरावस्था की शुरुआत में, यानी पीरियड्स शुरू होने के पहले कुछ वर्षों में, सोने के तरीके और शरीर की जैविक घड़ी का सीधा संबंध 'पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम' (PCOS) के खतरे से हो सकता है। इस स्टडी में पाया गया कि जिन लड़कियों को नींद में परेशानी होती है या जिनकी सोने-जागने की प्राथमिकताएं (सुबह जल्दी जागना या देर रात तक जागना) अलग होती हैं, उनमें टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल प्रभावित हो सकता है, जो भविष्य में PCOS का कारण बनता है। इसमें पाया गया कि नींद की खराब आदतें मोटापे और इंसुलिन की समस्या को बढ़ाती हैं, जो PCOS के मुख्य लक्षण हैं। निष्कर्ष यह निकलता है कि यदि कम उम्र में ही लड़कियों की नींद की आदतों में सुधार किया जाए, तो भविष्य में PCOS होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। हालांकि, इस दावे को पूरी तरह पुख्ता करने के लिए अभी और बड़े लेवल पर रिसर्च की जरूरत है।
ऐसे में महिलाओं को रोजाना 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेनी चाहिए, यह न केवल हार्मोनल हेल्थ के लिए बल्कि स्किन के लिए भी बहुत जरूरी है। वहीं तनाव भी PCOS को बढ़ावा देता है क्योंकि तनाव हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ाता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन बढ़ने में योगदान करता है। इसे कम करने के लिए योग, प्राणायाम, मेडिटेशन बहुत फायदेमंद हैं। मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए नियमित जर्नलिंग, दोस्तों या परिवार से बातचीत, एक्सरसाइज और हॉबीज अपनाई जा सकती हैं। रोजाना 7-9 घंटे की अच्छी नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट और बैलेंस डाइट अपनाकर हार्मोनल और मेंटल हेल्थ दोनों बेहतर रखी जा सकती हैं।
4. रोजाना एक्सरसाइज
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि एक्सरसाइज PCOS में केवल वजन घटाने के लिए नहीं बल्कि हार्मोन संतुलन के लिए भी जरूरी है। महिलाओं को रोजाना एरोबिक एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सप्ताह में कम से कम 5 दिन और 20-30 मिनट जरूर करनी चाहिए। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह मसल मास बढ़ाती है और मेटाबॉलिज्म को तेज करती है। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना सलाह देती हैं कि महिलाओं को दिनभर एक्टिव रहना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक बैठे रहना PCOS को और खराब कर सकता है।
WHO की गाइडलाइंस के अनुसार, 18 से 64 वर्ष की आयु के वयस्कों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मीडियम इंटेंसिटी वाली फिजिकल एक्टिविटी (जैसे तेज चलना) या 75 मिनट हाई इंटेंसिटी वाली एक्टिविटी करनी चाहिए, अथवा दोनों का उचित तालमेल अपनाना चाहिए।
क्या वजन घटाने के बाद पीसीओएस ठीक हो जाता है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जो पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन इसे सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है। वजन घटाने से पीसीओएस के लक्षणों में काफी सुधार जरूर आता है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ वजन कम करने से यह पूरी तरह खत्म हो जाता है। वजन घटाने से चेहरे पर मुंहासे, बालों का झड़ना और अनचाहे बालों की समस्या में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा, यह टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज के खतरे को भी कम करता है लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि पीसीओएस एक लाइफस्टाइल और हार्मोनल कंडीशन है, इसलिए अगर आप वजन कम करने के बाद फिर से पुरानी अनहेल्दी आदतों को अपनाने लग जाते हैं, तो लक्षण दोबारा आ सकते हैं। इसलिए केवल वजन घटाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे लंबे समय तक बनाए रखना भी जरूरी है।
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PCOS में कितना वजन कम करना चाहिए?
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में लगातार वजन कम करना बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि एक बार में बहुत ज्यादा वजन घटाया जाए। Science Direct के Journal of Gynecology Obstetrics and Human Reproduction में साल 2021 में प्रकाशित हुए रिव्यू के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिलाओं के लिए वजन कम करना उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए बहुत जरूरी है। इस रिसर्च के अनुसार, यदि वजन में केवल 5% से 10% की भी कमी आती है, तो इससे फर्टिलिटी, हार्मोनल संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य में बड़े पॉजिटिव बदलाव देखे जा सकते हैं। हालांकि, वजन घटाने के लिए कोई एक निश्चित तरीका सबसे बेहतर साबित नहीं हुआ है।
डॉक्टर से कब मिलें?
PCOS एक गंभीर हार्मोनल समस्या है, इसलिए इसके लक्षण दिखने पर समय रहते डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी है। अगर आपके पीरियड्स अनियमित हैं, जैसे महीनों तक न आना, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होना तो यह एक संकेत हो सकता है। इसके अलावा चेहरे पर ज्यादा मुंहासे, ठुड्डी या शरीर के अन्य हिस्सों पर अनचाहे बाल बढ़ना या अचानक वजन बढ़ना भी PCOS की ओर इशारा कर सकता है। यदि आप लंबे समय से प्रेग्नेंसी की कोशिश कर रही हैं लेकिन सफल नहीं हो पा रही हैं, तो भी देरी न करें और डॉक्टर से परामर्श लें। साथ ही अगर आपको पहले से ही डायबिटीज, थायराइड या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, तो PCOS के लक्षणों को नजरअंदाज करना और ज्यादा गंभीर हो सकता है।
ध्यान रखें, खुद से दवाइयां लेना या इंटरनेट के आधार पर इलाज करना नुकसानदायक हो सकता है। सही समय पर डॉक्टर से मिलना न केवल लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद करता है, बल्कि फ्यूचर में होने वाली गंभीर समस्याओं जैसे डायबिटीज, हार्ट डिजीज या इनफर्टिलिटी से भी बचाव करता है।
निष्कर्ष
PCOS आज के समय में गंभीर समस्या बन चुकी है, जो केवल फर्टिलिटी ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। वजन बढ़ना इसका एक प्रमुख लक्षण है, लेकिन इसे केवल ज्यादा खाने या कम एक्टिव रहने का रिजल्ट मानना सही नहीं है। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे कारण होते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर ध्यान देकर और कुछ जरूरी बदलाव अपनाकर PCOS को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे रोजाना वॉक करना, जंक फूड से दूरी बनाना भी बड़ा फर्क ला सकते हैं। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए PCOS का इलाज भी एक जैसा नहीं होता। कुछ मामलों में दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है, तो कुछ में केवल लाइफस्टाइल सुधार से ही अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना और नियमित फॉलो-अप करना जरूरी है।
FAQ
पीसीओएस होने से क्या होता है?
पीसीओएस में महिलाओं के अंडाशय यानी ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं और कई बार बिना सिस्ट के भी PCOS हो सकता है। इससे शरीर में एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है। जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, वजन बढ़ सकता है, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आ सकते हैं और मुंहासे हो सकते हैं। कई मामलों में कंसीव करने में भी समस्या होती है।पीसीओएस के लक्षण कब शुरू होते हैं?
पीसीओएस के लक्षण आमतौर पर टीनएज में दिखाई देने लगते हैं। कई लड़कियों में शुरुआत में हल्के लक्षण होते हैं, जैसे अनियमित पीरियड्स या मुंहासे, जिन्हें सामान्य समझ लिया जाता है लेकिन समय के साथ ये लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ महिलाओं में यह समस्या 20-24 साल की उम्र में स्पष्ट रूप से सामने आती है, खासकर जब उन्हें कंसीव करने में कठिनाई होती है।क्या पीसीओएस को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?
पीसीओएस को पूरी तरह से ठीक करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एक क्रॉनिक स्थिति है लेकिन इसे सही लाइफस्टाइल और इलाज से कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए घबराने की बजाय इसे मैनेज करने पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।पीसीओएस किस उम्र में होता है?
पीसीओएस आमतौर पर 15 से 30 साल की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है। यह समस्या टीनएज में ही शुरू हो सकती है, खासकर जब हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं। हालांकि, कई बार इसका पता देर से चलता है।पीसीओएस बढ़ने के क्या लक्षण हैं?
जब पीसीओएस बढ़ता है, तो इसके लक्षण शरीर में और ज्यादा दिखने लगते हैं, जैसे पीरियड्स का लंबे समय तक न आना या अनियमित होना, तेजी से वजन बढ़ना, चेहरे, छाती या पीठ पर बाल आना, बालों का झड़ना या हेयर थिनिंग होना और लगातार मुंहासे बने रहना। इसके अलावा, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने से भूख ज्यादा लगना और डार्क स्किन पैच भी दिख सकते हैं।
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Apr 09, 2026 17:13 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 09, 2026 17:13 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 09, 2026 17:13 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr M V Jyothsna