Fri Sep 11, 2026 | 09:01 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

PCOS का इलाज कैसे किया जाता है? जानें डॉक्टर से

अक्सर महिलाओं के दिमाग में यह सवाल आता है कि क्या PCOS को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है? इस लेख में डॉक्टर और एक्सपर्ट ने PCOS को मैनेज करने के कई टिप्स दिए हैं, जिन्हें अपनाकर PCOS के लक्षणों में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में महिलाओं की ओवरी पर छोटे-छोटे तरल सिस्ट बनने लगते हैं। CDC के मुताबिक, अगर PCOS को समय पर मैनेज न किया जाए, तो महिलाओं को प्रेग्नेंसी में दिक्कत होने के अलावा, टाइप 2 डायबिटीज होने का रिस्क बढ़ जाता है। अगर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है, तो PCOS के कारण जेस्टेशनल डायबिटीज, हार्ट से जुड़े रोग, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल की समस्या, स्लीप एपनिया और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए PCOS का समय पर इलाज होना बहुत महत्वपूर्ण है। PCOS के इलाज के लिए हमने गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन (Dr. Chetna Jain, Director, Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon) और सर्वोदय हॉस्पिटल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी और सीनियर डाइटिशियन ऋतिका शर्मा से भी बात की।

क्या PCOS का परमानेंट इलाज है?

WHO ने साफ कहा है कि PCOS का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाइयां लेने और लाइफस्टाइल में बदलाव करके जीवन की क्वालिटी को बेहतर किया जा सकता है। अगर समय पर इलाज किया जाए, तो महिलाओं के लिए प्रेग्नेंट होना काफी आसान हो जाता है। WHO के अनुसार, PCOS का समय पर इलाज होने से यूटरस की परत के मोटे होने (एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया) और एंडोमेट्रियल कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है। PCOS को मैनेज करने से हार्ट से जुड़ी बीमारियों को भी कम किया जा सकता है।

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PCOS मैनेज करने के लिए डाइट में बदलाव

साल 2021 में प्रकाशित Nutrients के अनुसार, PCOS से पीड़ित महिलाओं को अपने खाने में प्रोटीन, फैट या कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में बदलाव करने से उतना फर्क नहीं पड़ता, जितना कैलोरी कम करने से पड़ता है। इसलिए लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) वाली डाइट फायदेमंद साबित हो सकती है। इसके लिए साबुत अनाज जैसे ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन रोटी और दालें अच्छे विकल्प हैं। PCOS में डाइट को लेकर हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की सीनियर डाइटिशियन ऋतिका शर्मा (Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad) से बात की। उन्होंने PCOS से पीड़ित महिलाओं को डाइट में कुछ बदलाव करने की सलाह दी है।

  1. PCOS से पीड़ित महिलाओं को डाइट में प्रोटीन जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि यह ब्लड शुगर को स्टेबल रखने में मदद करता है। दाल, पनीर, दही, अंकुरित अनाज, अंडा, सोया और नट्स अच्छे प्रोटीन स्रोत हैं।
  2. PCOS में महिलाओं के शरीर में सूजन को कम करने के लिए ओमेगा 3 और अलसी का तेल फायदेमंद साबित हो सकता है। अलसी का तेल अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और फैट को कम करने में मदद करता है। अखरोट, चिया सीड्स, बादाम और ऑलिव ऑयल ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्त्रोत हैं, जो सूजन कम करते हैं और हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं।
  3. सूजन कम करने में टमाटर, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, ब्रोकली, लौकी, टिंडा, खीरा, सलाद और ऑलिव ऑयल भी काफी फायदेमंद होते हैं।
  4. दिन में कम-से-कम 5 पोर्शन फल और सब्जियां लेना जरूरी है।
  5. डाइट में साबुत अनाज और ब्राउन राइस लेना फायदेमंद हो सकता है।
  6. नॉन-वेजिटेरियन महिलाएं फिश और चिकन खा सकती हैं।
  7. कद्दू के सीड्स, अखरोट और बादाम भी खाए जा सकते हैं।
  8. शकरकंद PCOS की महिलाओं के लिए काफी अच्छा रहता है।
  9. जिन महिलाओं को मोटापे की समस्या बहुत ज्यादा गंभीर है, वे कीटोजेनिक डाइट भी कर सकती है, लेकिन कीटोजेनिक डाइट करने से पहले डाइटिशियन की सलाह जरूर लें। इसमें कार्बोहाइड्रेट कम खाए जाते हैं और अच्छा फैट लिया जाता है। इससे महिलाओं के वजन में कमी आती है और BMI में भी सुधार होता है।
  10. इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) में PCOS के मुख्य कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस को ठीक करने में मदद मिलती है। खाली पेट रहने की वजह से इंसुलिन और ब्लड ग्लूकोज के लेवल को कम करने में मदद मिलती है। फास्टिंग की वजह से शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के लेवल कम हो सकते हैं।
  11. दिनभर में प्रचुर मात्रा में पानी पीना जरूरी है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

सीनियर डाइटिशियन ऋतिका शर्मा ने PCOS से पीड़ित महिलाओं को सलाह दी है कि उन्हें कुछ फूड्स अपनी डाइट में बिल्कुल भी शामिल नहीं करने चाहिए।

  1. फ्राइड फूड जैसे आलू के चिप्स और तले-भुने फूड आइटम्स से परहेज करना चाहिए।
  2. प्रोसेस्ड फूड जैसे बिस्कुट, केक, टॉफियां और कुकीज को अपनी डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए।
  3. सोडे वाले ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स, फ्लेवर वाले जूस और बहुत ज्यादा चाय पीने से बचना चाहिए।
  4. बाहर के पैकेज्ड फूड में शुगर और नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए पैकेज्ड फूड खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
  5. मैदे से बनी ब्रेड, पिज्जा, पास्ता और सफेद चावल खाने से परहेज करना चाहिए।
  6. शराब, तंबाकू और स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए।

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PCOS मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव

फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी (Ms Meena Kumari, Chief Dietician, Sarvodaya Hospital, Faridabad) ने PCOS की समस्या से परेशान महिलाओं को लाइफस्टाइल में भी बदलाव करने की सलाह दी है, ताकि PCOS को आसानी से मैनेज किया जा सके।

  1. रोजाना कम-से-कम 30 मिनट से लेकर 45 मिनट तक तेज वॉक करना, साइकिलिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है और शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट को कम करने में मदद करता है।
  2. रेगुलर कसरत करने से भी वजन कम होता है और डायबिटीज जैसी बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। रेगुलर कसरत में कार्डियो और हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज (Vigorous intensity) करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बेहतर रहता है।
  3. एक हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट एरोबिक एक्टिविटी करने की सलाह दी जाती है। इसमें वजन उठाने जैसी कसरत करने से इंसुलिन और एंड्रोजन के लेवल में सुधार होता है।
  4. PCOS से पीड़ित महिलाओं को नींद पर पूरा ध्यान देना चाहिए। खराब नींद से कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ सकता है, जिससे वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। इसलिए नींद पूरी करना बहुत जरूरी है।
  5. देर रात तक जागकर मोबाइल या स्क्रीन देखने से शरीर की सर्कैडियन रिद्म प्रभावित होती है। इससे हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है।
  6. महिलाओं को रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए ताकि PCOS को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सके।

दवाइयों से PCOS को मैनेज करना

डॉ. चेतना ने बताया कि दवाइयों से PCOS मैनेज किया जा सकता है, लेकिन यह डॉक्टर, मरीज की मेडिकल कंडीशन देखकर ही सलाह दे सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं में PCOS को कुछ इस तरह मैनेज किया जा सकता है।

  1. PCOS में पीरियड रेगुलर करने के लिए महिलाओं को बर्थ कंट्रोल पिल्स, वजाइनल रिंग या IUD की सलाह दी जाती है। कई बार महिलाओं को हार्मोनल बर्थ कंट्रोल दवाइयों के जरिए PCOS को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। यह इलाज उन महिलाओं के लिए है, जिनका प्रेग्नेंसी का कोई प्लान नहीं है।
  2. महिला की कंडीशन देखकर ही दवाइयां दी जाती हैं, लेकिन कई मामलों में डायबिटीज को मैनेज करने वाली दवाई मेटफॉर्मिन भी दी जा सकती है। इससे इंसुलिन को कंट्रोल किया जा सकता है।
  3. जिन महिलाओं में चेहरे पर बालों की ग्रोथ बहुत ज्यादा होती है, उन्हें कुछ ऐसी दवाइयां दी जाती हैं, जिससे एंड्रोजन हार्मोन के लेवल को कम किया जा सके।
  4. जो महिलाएं प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, उन्हें कुछ दवाइयां ऐसी दी जाती हैं, जिससे ओव्यूलेशन सही तरीके से हो सके। इसके लिए कुछ इंजेक्शन भी दिए जा सकते हैं।

PCOS में सर्जरी

डॉ. चेतना जैन ने कहा, “PCOS के कुछ मामलों में ओव्यूलेशन को बेहतर बनाने के लिए सर्जरी के जरिए सिस्ट हटा दिए जाते हैं। इस प्रोसेस को लैप्रोस्कोपिक ओवेरियन ड्रिलिंग कहते हैं। सर्जरी तभी की जाती है, जब दवाइयां बेहतर तरीके से काम नहीं करती हैं। इस प्रोसीजर में लैप्रोस्कोपिक प्रोसेस के जरिए लेजर की मदद से एंड्रोजन बनाने वाले टिश्यू को हटा दिया जाता है। इससे ओवरी नॉर्मल काम करने लगती है। अगर PCOS में दवाइयां कारगर नहीं होतीं और महिला को प्रेग्नेंट होना है, तो IVF की भी सलाह दी जा सकती है।”

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PCOS में मेंटल हेल्थ की देखभाल

साल 2021 में प्रकाशित Human Reproduction के अनुसार, PCOS से पीड़ित महिलाओं को डिप्रेशन होने का रिस्क आम महिलाओं के मुकाबले 50% ज्यादा होता है। इस स्टडी में यह भी कहा गया है कि महिला को चाहे पता हो या न हो कि उसे PCOS है, फिर भी उसे डिप्रेशन का रिस्क हो सकता है। डिप्रेशन का कारण हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। डिप्रेशन से बचाव के लिए महिलाओं को मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है। चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं, “PCOS से पीड़ित महिलाओं को हार्मोन बैलेंस के लिए रोजाना मेडिटेशन, योग और प्राणायाम करना चाहिए। इससे स्ट्रेस मैनेज करने में मदद मिलती है।”

डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर वजन तेजी से बढ़ने लगे, पीरियड रेगुलर न आ रहे हों, पीरियड के दौरान दर्द या भारीपन महसूस हो और प्रेग्नेंट होने में दिक्कत होने लगे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए क्योंकि वह मरीज के ब्लड टेस्ट, पेल्विक अल्ट्रासाउंड, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और इंसुलिन टेस्ट से PCOS डायग्नोज कर सकते हैं।

निष्कर्ष

PCOS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके सुधारा जा सकता है। PCOS से पीड़ित महिलाओं को हार्मोनल बदलाव की वजह से एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है। इसलिए अगर महिलाओं को लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर PCOS को सही तरीके से मैनेज न किया जाए, तो मेनोपॉज के बाद भी इसका असर रह सकता है। इससे महिलाओं को लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा बढ़ सकता है।

FAQ

  • क्या PCOS वाली महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं?

    PCOS से पीड़ित महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं। हालांकि, PCOS बांझपन का एक आम कारण है, लेकिन सही इलाज, वजन नियंत्रण और कभी-कभी ओव्यूलेशन की दवाओं की मदद से ज्यादातर महिलाएं सफलतापूर्वक गर्भधारण कर सकती हैं।
  • क्या मुझे दवाएं लेनी ही पड़ेंगी?

    PCOS के लक्षणों पर निर्भर करता है कि महिलाओं को कौन सी दवाएं लेनी पड़ेंगी। कुछ लक्षणों में सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से आराम मिल सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस के लिए या हार्मोनल संतुलन के लिए दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
  • मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा पीसीओएस ठीक हो गया है?

    वैसे तो PCOS को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे मैनेज करने से पीरियड्स रेगुलर होने लगते हैं, वजन कंट्रोल में रहता है, स्किन और बालों की समस्याओं में कमी आ जाती है।
  • क्या पीसीओएस में वजन घटाना मुश्किल है?

    PCOS में वजन कम करना मुश्किल होता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कम नहीं किया जा सकता। महिलाएं अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करें, तो यह संभव है। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह पर PCOS को मैनेज करने की दवाई समय पर लें।
  • अगर मेरे पीरियड्स नियमित हैं, तो क्या फिर भी मुझे पीसीओएस हो सकता है?

    हालांकि, PCOS में पीरियड रेगुलर नहीं होते, लेकिन कई महिलाओं में पीरियड रेगुलर होने पर PCOS हो सकता है। अगर अल्ट्रासाउंड में ओवरी पर छोटे सिस्ट दिखते हैं या पुरुष हार्मोन एंड्रोजन बढ़ने के कारण चेहरे पर बाल या मुंहासे हो जाएं, तो भी PCOS की समस्या हो सकती है।

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Aneesh Rawat

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Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 07, 2026 11:35 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
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