दिल हमारे शरीर के अहम अंगों में से एक है। यह पूरे शरीरे में अंगों को ब्लड सप्लाई करने का काम करता है। नॉर्मल स्थिति में हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों मिलकर शरीर के अंगों तक पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करते हैं, लेकिन कई बार व्यक्ति का हार्ट रेट (दिल के धड़कने की गति) नॉर्मल स्थिति से कम हो जाती है या ब्लड प्रेशर कम रहने लगता है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या हार्ट रेट के कारण ब्लड प्रेशर भी कम हो सकता है। आइए इस बारे में Dr. Deebanshu Gupta, Cardiologist at Sarvodaya Hospital, Jalandhar से जानें।
लो हार्ट रेट क्या है?
Dr. Deebanshu Gupta के अनुसार, आराम की स्थिति में ज्यादातर व्यस्कों का नॉर्मल हार्ट रेट 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट के बीच होती है। जब हार्ट रेट 60 धड़कन प्रति मिनट से कम होती है, तो इसे ब्रैडीकार्डिया (Bradycardia) या लो हार्ट रेट कहा जाता है, लेकिन हर व्यक्ति में 60 से कम हार्ट रेट किसी बीमारी का संकेत नहीं होती है। बता दें, 90/60 mmHg से कम ब्लड प्रेशर को लो बीपी माना जाता है।
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क्या लो हार्ट रेट के कारण ब्लड प्रेशर लो हो सकता है?
Dr. Deebanshu Gupta के अनुसार, कुछ स्थितियों में लो हार्ट रेट के कारण ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। अगर दिल बहुत धीरे धड़क रहा है, तो वह शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में ब्लड पंप नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर गिर सकता है और शरीर के अन्य अंगों तक ब्लज की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि लो हार्ट रेट के साथ लो ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो। कई लोगों के हार्ट रेट के लो होने के बाद भी ब्लड प्रेशर पूरी तरह नॉर्मल रहता है।
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क्यों होती है लो हार्ट रेट की समस्या?
व्यक्ति को हार्ट रेट के कम होने की समस्या उम्र बढ़ने, हार्ट से जुड़ी बीमारी होने, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलित होने, थायराइड हार्मोन में कमी होने और कुछ दवाइयों के प्रभावों जैसे कई कारणों से हो सकती है। ऐसे में लो हार्ट रेट जैसी कोई भी स्वास्थ्य समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
लो हार्ट रेट की समस्या के क्या लक्षण हैं?
हार्ट रेट का स्तर कम होने पर शरीर में पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है, जिसके कारण व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने, चक्कर आने, बहुत ज्यादा थकान, सांस लेने में पेशानी होने, काम पर फोकस करने में परेशानी होने, बेहोशी आने या सीने में बैचेनी महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को ऐसे लक्षण बार-बार दिखते हैं या अचानक शुरु हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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हेल्दी हार्ट के लिए क्या करें?
हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से बैलेंस डाइट लें, नियमित एक्सरसाइज करें, स्मोकिंग का सेवन करने से बचें, पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस को नियंत्रित करें। इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट की बीमारी, ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां है, तो स्वास्थ्य की नियमित जांच कराते रहें।
सावधानियां
लो हार्ट की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें, ताकि अगर ऐसा किसी मेडिकल कंडीशन के कारण होता है, तो इसकी जांच समय रहते की जा सके। अगर ऐसा किसी दवा के कारण होते है, तो डॉक्टर इस दवा को बदल सकते हैं और अन्य कारणों से होने पर समय रहते इसका इलाज किया जा सकता है।
निष्कर्ष
हार्ट रेट कम होने यानी ब्रैडीकार्डिया से शरीर में ब्लड पंप होने की क्षमता पर असर होता है, जिससे कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, लेकिन यह हर बार जरूरी नहीं है। कमजोरी, चक्कर और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं। दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बैलेंस डाइट लें, नियमित एक्सरसाइज करें और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहना बेहद जरूरी है।
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FAQ
लो ब्लड प्रेशर के लक्षण क्या हैं?
लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर व्यक्ति को ज्यादा थकान होने, चक्कर आने, कमजोरी, जी मिचलाने, धुंधला दिखने, बेहोशी आने, ठंड लगने, सांस फूलने और हाथों-पैरों के ठंडा पड़ने की समस्या हो सकती है।लो हार्ट रेट होने पर क्या होता है?
हार्ट रेट का स्तर कम होने पर व्यक्ति को सिर घूमने, सीने में दर्द होने, बेचैनी होने, बेहोशी, काम पर फोकस करने में परेशानी, चक्कर आने, थकान और कमजोरी होने जैसी समस्याएं हो सकती है।
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Jul 02, 2026 20:16 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jul 02, 2026 20:16 IST
Modified By : Priyanka SharmaJul 02, 2026 20:16 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta