भारत में तेजी से हाई बीपी (हाइपरटेंशन) के मामलों में इजाफा हो रहा है। आमतौर पर हाई बीपी का कारण खराब लाइफस्टाइल, डाइट और फैमिली हिस्ट्री हो सकता है। JAMA Network 2023 में प्रकाशित स्टडी में भारत के 1,691,036 वयस्कों को शामिल किया गया, जिसमें 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेश थे। इस स्टडी को 2019 से 2021 के बीच दो चरणों में किया गया। इसमें 28.1% लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित पाए गए और हाई बीपी से कुल लोगों में से केवल 36.9% लोगों को ही अपनी बीमारी की जानकारी थी। इसमें दिलचस्प बात यह है कि कुल मरीजों की संख्या में से सिर्फ 8.5% मरीजों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल में था। इस स्टडी से पता चलता है कि जिन लोगों को अपनी बीमारी की ही जानकारी नहीं है, वे इसका इलाज भी नहीं करा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय से जूझ रहे हाई बीपी के मरीजों के शरीर में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल सकती हैं। इसमें हार्ट, आंखें, किडनी और दिमाग की बीमारियां प्रमुख हैं। हाई बीपी से होने वाली बीमारियों के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।
हाई ब्लड प्रेशर कैसे मापा जाता है?
CDC के अनुसार, जब ब्लड धमनियों की दीवारों पर प्रेशर डालता है, तो उसे ब्लड प्रेशर कहा जाता है। जब यह बहुत ज्यादा प्रेशर डालना शुरू करता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है। इससे हार्ट को ब्लड पंप करने में दिक्कत होने लगती है। एक सेहतमंद व्यक्ति का सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होता है। बीपी को मापने के लिए सिस्टोलिक (ऊपर वाला नंबर) और डायस्टोलिक (नीचे वाला नंबर) रीडिंग ली जाती है। अगर ब्लड प्रेशर लगातार 130/80 mm Hg या उससे ऊपर बना रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
हाई बीपी होने के क्या कारण हैं?
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हाई बीपी होने का कोई एक कारण नहीं हो सकता। आमतौर पर लोग इसका कारण खराब लाइफस्टाइल और डाइट को मानते हैं, लेकिन इसके कई कारण हो सकते हैं।"
- 55 साल से ज्यादा उम्र होने पर धमनियां सख्त होने लगती हैं।
- अगर फैमिली में किसी को हाई बीपी की समस्या है, तो इससे रिस्क बढ़ सकता है।
- जो लोग बहुत ज्यादा स्मोक या तंबाकू खाते हैं, उनके ब्लड वेसल्स को नुकसान हो सकता है।
- जो लोग बहुत ज्यादा मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हें हाई बीपी की समस्या हो सकती है।
- फिजिकल एक्टिव न होना आर्टरी को कमजोर कर सकता है।
- जो लोग बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड या पैकेज्ड फूड खाते हैं, तो वे नमक बहुत ज्यादा ले लेते हैं। ज्यादा सोडियम की मात्रा सीधे ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है।
- बहुत ज्यादा शराब पीना बीपी को असंतुलित कर सकता है।
- कई मामलों में दवाएं, सूजन या ऑटोइम्यून बीमारियां भी हाई बीपी का कारण हो सकती हैं।

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हार्ट पर हाई ब्लड प्रेशर का असर
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक रहने पर ब्लड वेसल्स की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है। आर्टरीज में प्लाक बन जाता है और जैसे-जैसे प्लाक धीरे-धीरे जमा होता है, इससे धमनियों के अंदरूनी रास्ते सिकुड़ जाते हैं। यह रुकावट ब्लड फ्लो को रोकती है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है।" American Heart Associationके मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट में ये नुकसान हो सकते हैं।
- हार्ट अटैक - हार्ट की धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं, जिससे हार्ट की मांसपेशियों तक ब्लड फ्लो रुक जाता है।
- हार्ट फेलियर - हाई बीपी के कारण हार्ट को बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जिस वजह से हार्ट का आकार बढ़ जाता है और शरीर को ठीक से ब्लड पंप नहीं कर पाता।
- हार्ट की बीमारियां और एंजाइना - जिन लोगों को लंबे समय तक हाई बीपी रहता है, उन्हें हार्ट की बीमारियां हो सकती हैं और सीने में दर्द हो सकता है।
- एथेरोस्क्लेरोसिस - हाई बीपी के कारण आर्टरी में प्लाक जमने का प्रोसेस तेज हो जाता है, जो आर्टरी को नुकसान पहुंचाता है।
हार्ट की बीमारियों से जुड़े लक्षण
अगर किसी का बीपी 180/120 mm Hg से लगातार ज्यादा रहता है और मरीज को ये लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
- सीने में दर्द
- सांस लेने में दिक्कत
- सुन्नता
- कमजोरी
- आंखों की रोशनी कम होना
- बोलने में दिक्कत होना
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किडनी पर हाई ब्लड प्रेशर का असर
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases के अनुसार, एक सेहतमंद किडनी हर मिनट लगभग आधा कप ब्लड फिल्टर करती है। यूरिन हर किडनी से यूरेटर पतली नलियों के जरिए ब्लैडर में स्टोर होता है। हाई ब्लड प्रेशर ब्लड वेसल्स को सिकोड़ सकता है, जिससे शरीर की ब्लड वेसल्स कमजोर और क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसमें किडनी भी शामिल है और हाई बीपी के कारण किडनी की ब्लड वेसल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो किडनी ठीक से काम करना बंद कर सकती है। ऐसी कंडीशन में किडनी शरीर के वेस्ट प्रोडक्ट्स को निकाल नहीं पाती। वेस्ट प्रोडक्ट्स ब्लड प्रेशर को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं, जिससे यह एक साइकिल बन जाता है। इस प्रोसेस में किडनी को और ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जिससे किडनी फेलियर का रिस्क बढ़ सकता है।
किडनी की बीमारी से जुड़े लक्षण
एडवांस स्टेज में किडनी की बीमारी होने पर मरीज को ये लक्षण दिखाई देते हैं।
- भूख कम लगना, मतली या बार-बार उल्टी होना
- हर समय नींद आना
- बार-बार सिरदर्द होना
- काम में फोकस न होना
- पेशाब ज्यादा या बिल्कुल कम आना
- पूरे शरीर में खुजली होना
- स्किन का बहुत ड्राई होना
- बिना वजह वजन कम होना
- मांसपेशियों में ऐंठन महसूस होना
दिमाग पर हाई ब्लड प्रेशर का असर
डॉ. दिबांशु कहते हैं, “हाइपरटेंशन दिमाग में जाने वाली ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इससे दिमाग में खून के थक्के जमने लगते हैं, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर ब्लड वेसल्स को संकरा और सख्त बना देता है। अगर ऐसे थक्के दिमाग की ओर चले जाते हैं, तो दिमाग के ब्लड फ्लो को रोक देता है। इससे ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) या मिनी स्ट्रोक हो सकता है। इसके साथ ही, लगातार बढ़ता प्रेशर दिमाग के अंदर की नाजुक ब्लड वेसल्स को कमजोर कर सकता है। इस प्रेशर से दिमाग में खून बहने लगता है, जिस वजह से हेमोरेजिक स्ट्रोक हो सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर दिमाग के गहरे हिस्सों में मौजूद बहुत ही छोटी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है।”

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दिमागी बीमारियों से जुड़े लक्षण
ब्रेन से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों को इग्नोर करना मरीज के लिए जानलेवा हो सकता है।
- बार-बार सिरदर्द होना
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- बार-बार उल्टी होना
- बातों को समझने या याद रखने में मुश्किल होना
- बेहोश होना
- बहुत ज्यादा घबराहट या बेचैनी होना
आंखों पर हाई ब्लड प्रेशर का असर
Cleveland Clinic के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर आंखों के रेटिना तक होने वाले ब्लड फ्लो में रुकावट पैदा कर सकता है। रेटिना को काम करने के लिए लगातार ब्लड की जरूरत होती है, ऐसे में हाई बीपी के कारण ब्लड फ्लो सही तरीके से न होने के कारण रेटिना के हिस्से को क्षतिग्रस्त कर सकता है। इससे गंभीर मामलों में आंखों की रोशनी भी जा सकती है। इसे हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहते हैं, जो न सिर्फ आंखों की बीमारी है, बल्कि यह शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाले ब्लड फ्लो में कमी का एक कारण हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई ब्लड प्रेशर से होने वाले नुकसान के लक्षण तुरंत नहीं दिखते लेकिन भविष्य में यह कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
आंखों से जुड़े लक्षण
वैसे तो आंखों से जुड़े लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन गंभीर मामलों में लोगों की आंखों की रोशनी कम होने लगती है। अगर आंखों की रोशनी कम होने लगे, तो ब्लड प्रेशर चेक कराना जरूरी है।
हाई बीपी को कैसे कंट्रोल करें?
डॉ. दिबांशु कहते हैं कि हाई बीपी को समय रहते कंट्रोल करना जरूरी है ताकि शरीर के अंगों को नुकसान न हो।
- अगर किसी को डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर रेगुलर होना जरूरी है।
- अगर किसी को मोटापा है, तो वजन कम करना जरूरी है।
- स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए योगा या मेडिटेशन जरूरी है।
- स्मोकिंग बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
- शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
- संतुलित भोजन करना चाहिए।
- प्रचुर मात्रा में पानी पिएं।
- ताजे फल और सब्जियां खानी चाहिए।
- रेगुलर बीपी चेक करना चाहिए।
- डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें।
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डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. दिबांशु कहते हैं कि अगर बहुत ज्यादा सिरदर्द, बार-बार बीपी बढ़ रहा हो, बार-बार उल्टी हो, पूरे शरीर में खुजली हो, बिना वजह वजन कम होना और सीने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें।
निष्कर्ष
हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक रहने के कारण किडनी, हार्ट, दिमाग और आंखों को नुकसान हो सकता है। भारत में हाई बीपी के प्रति जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसके कारण लोग हाई बीपी चेक ही नहीं कराते और न ही दवा लेते हैं। इस वजह से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए हाई बीपी के लोगों को समय पर दवा के साथ लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने चाहिए। इससे भविष्य में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
FAQ
क्या 130/80 mmHg की रीडिंग चिंताजनक है?
मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार 130/80 mmHg या उससे ऊपर की लगातार रीडिंग को स्टेज 1 हाइपरटेंशन माना जाता है। ऐसी कंडीशन में डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।क्या नमक कम करने से वाकई ब्लड प्रेशर कम होता है?
नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी को रोकता है, जिससे ब्लड की मात्रा बढ़ जाती है और धमनियों पर प्रेशर पड़ता है। नमक कम करने से यह प्रेशर सीधे तौर पर कम होता है।क्या तनाव कम करने से बीपी की दवा बंद हो सकती है?
स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए योग और मेडिटेशन किया जा सकता है। इससे बीपी को कंट्रोल करने में बहुत मदद मिलती है, लेकिन दवा बंद करने का फैसला सिर्फ डॉक्टर ही मरीज की कंडीशन देखकर ले सकते हैं।क्या कॉफी या चाय पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है?
कैफीन लेने से ब्लड प्रेशर थोड़े समय के लिए बढ़ सकता है। अगर किसी को पहले से हाई बीपी है, तो कैफीन से अचानक बढ़ सकता है। डॉक्टर से सलाह लें कि दिन में कितनी कप चाय या कॉफी ले सकते हैं।
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Current Version
May 01, 2026 21:41 IST
Modified By : Aneesh Rawat May 01, 2026 21:41 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta