ब्लड ग्लूकोज या शुगर टेस्ट डायबिटीज का लेवल जानने के लिए जरूरी टेस्ट है। आजकल जिस तरह से डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि टाइप-2 डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर बन चुकी है। WHO के अनुसार, 1990 में दुनियाभर में डायबिटीज के 20 करोड़ मरीज थे, जो 2022 में बढ़कर 83 करोड़ हो गए। इसमें दिलचस्प बात यह है कि 2022 में डायबिटीज से पीड़ित आधे से ज्यादा लोगों ने कोई दवा ही नहीं ली। इससे यह पता चलता है कि लोगों में डायबिटीज के टेस्ट के प्रति जागरूकता कम है। डायबिटीज की रोकथाम और इलाज के लिए ब्लड शुगर टेस्ट कराना जरूरी है। इस टेस्ट से जुड़े हर पहलू को जानने के लिए हमने दिल्ली के PSRI Hospital की Senior Consultant, Endocrinology and Diabetology डॉ. हिमिका चावला से बात की।
ब्लड शुगर टेस्ट क्या है?
डॉ. हिमिका कहती हैं, "ग्लूकोज शरीर को एनर्जी देता है। एनर्जी के लिए शरीर को कार्बोहाइड्रेट चाहिए, जो अनाज, फल और मीठी खाने की चीजों से मिलते हैं। इसके अलावा, लिवर भी जरूरत पड़ने पर ग्लूकोज रिलीज करता है और ब्लड के जरिए ये ग्लूकोज शरीर के हर टिश्यू तक पहुंचता है। इसमें इंसुलिन हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल, इंसुलिन एक चाबी की तरह काम करता है जो टिश्यू के दरवाजे खोलता है ताकि ब्लड से ग्लूकोज टिश्यू के अंदर जा सके। अगर ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो डायबिटीज होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। पैनक्रियाज इंसुलिन बिल्कुल नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ऐसे मामलों में मरीज में ब्लड शुगर चेक किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से चेक किया जाता है कि शरीर शुगर को सही तरीके से प्रोसेस कर रहा है या नहीं।"
ब्लड शुगर टेस्ट क्यों कराना चाहिए?
CDC के अनुसार, अगर किसी को मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी में दिक्कत और डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री हो, तो स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए। ब्लड शुगर टेस्ट के जरिए मरीज को पता चलता है कि वह प्री-डायबिटीक है या फिर टाइप 2 डायबिटीज है। टाइप 1 डायबिटीज में ऑटो-एंटीबॉडीज चेक किया जाता है। टाइप 1 डायबिटीज ऑटोइम्यून बीमारी है। इसके अलावा, अगर कोई महिला प्रेग्नेंट है, तो उसे जेस्टेशनल डायबिटीज हो सकती है। प्रेग्नेंसी में आमतौर पर 24वें हफ्ते के आसपास डायबिटीज होने का रिस्क रहता है। इसलिए ब्लड शुगर टेस्ट कराना जरूरी हो जाता है। अगर डायबिटीज हो, तो इसका इलाज कराना जरूरी है।

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ब्लड शुगर टेस्ट कितने होते हैं?
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, डायबिटीज की जांच कई तरह के टेस्ट से की जा सकती है।
फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG) टेस्ट
इस टेस्ट में ब्लड में ग्लूकोज के लेवल को चेक किया जाता है। आमतौर पर इस टेस्ट को सुबह करने की सलाह दी जाती है। टेस्ट कराने से पहले कम से कम 8 घंटे तक फास्टिंग जरूरी है। इसमें पानी का घूंट पिया जा सकता है, लेकिन खाना बिल्कुल नहीं खाना है। इस टेस्ट में अगर फास्टिंग शुगर ज्यादा आती है, तो डायबिटीज होने का रिस्क हो सकता है।
Cleveland Clinic के मुताबिक फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज के रिजल्ट को ऐसे पढ़ा जा सकता है।
| कंडीशन | mg/dL |
नॉर्मल |
100 से कम |
प्री-डायबिटीज |
100 से 125 |
डायबिटीज |
126 या ज्यादा |
पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर टेस्ट (Postprandial Blood Sugar Test)
डॉ. हिमिका ने कहा, "कई बार खाली पेट ब्लड शुगर सामान्य आता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों में खाना खाने के बाद शरीर को शुगर संभालने में दिक्कत होती है। इस कंडीशन को जानने के लिए Post-Prandial Blood Sugar टेस्ट किया जाता है। डायबिटीज के मरीजों में यह टेस्ट बताता है कि उनकी दवाएं, इंसुलिन और डाइट, खाने के बाद बढ़ने वाली शुगर को कितना कंट्रोल कर पा रहे हैं। नीचे दी गई रेंज खाने के 2 घंटे बाद की हैं।"
कंडीशन |
PPBS स्तर (mg/dL) |
नॉर्मल |
140 से कम |
प्री-डायबिटीज |
140 से 199 |
डायबिटीज |
200 या उससे अधिक |
रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट (Random Plasma Glucose Test)
NIDDK में बताया गया है कि इस टेस्ट को किसी भी समय किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए फास्टिंग की जरूरत नहीं होती। इस टेस्ट को तब किया जाता है, जब मरीज में डायबिटीज के लक्षण साफ दिखाई दे रहे हों, तो 8 घंटे की फास्टिंग का इंतजार नहीं करते। इसे दिन में कभी भी किया जा सकता है।
CDC के अनुसार, रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट को ऐसे पढ़ा जा सकता है। RPG टेस्ट में नॉर्मल और प्री-डायबिटीज लिए कोई स्टैंडर्ड कटऑफ पॉइंट नहीं होता क्योंकि यह डायबिटीज को कंफर्म करने के लिए किया जाता है।
कंडीशन |
RPG स्तर (mg/dL) |
नॉर्मल |
NA |
प्री-डायबिटीज |
NA |
डायबिटीज |
200 या उससे अधिक |
HbA1c टेस्ट (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन)
डॉ. हिमिका के अनुसार, "यह काफी महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट होता है। इससे पिछले तीन महीनों का औसत ब्लड शुगर लेवल पता चलता है। इसे हीमोग्लोबिन A1C, HbA1C या ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहते हैं। इस टेस्ट में खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती और इसके रिजल्ट प्रतिशत में आते हैं। जितना ज्यादा प्रतिशत होगा, उतना ही औसत ब्लड शुगर लेवल अधिक माना जाएगा। हालांकि, प्रेग्नेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में, एनीमिया या हीमोग्लोबिन में कुछ असामान्य होने पर इस टेस्ट को नहीं कराने की सलाह दी जा सकती है।"
Medline Plus के अनुसार, HbA1c टेस्ट की रीडिंग चेक करने के लिए टेबल को रेफर किया जा सकता है।
| कंडीशन | A1C स्तर (प्रतिशत में) |
नॉर्मल |
5.7% से कम |
प्री-डायबिटीज |
5.7% से 6.4% |
डायबिटीज |
6.5% या अधिक |
ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट Oral Glucose Tolerance Test
CDC के अनुसार, इस टेस्ट में मापा जाता है कि शरीर शुगर को कितने अच्छे तरीके से प्रोसेस कर सकता है। इस टेस्ट में पहले रातभर की फास्टिंग करनी होती है। इसमें पहले फास्टिंग सैंपल लिया जाता है, फिर एक मीठा घोल पिलाया जाता है। इसके ठीक एक या दो घंटे बाद ब्लड शुगर की जांच की जाती है। इस टेस्ट को अक्सर टाइप 2 डायबिटीज और प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज चेक करने के लिए किया जाता है।
कंडीशन |
शुगर का स्तर (mg/dL) |
नॉर्मल |
140 या उससे कम |
प्री-डायबिटीज |
140 से 199 |
डायबिटीज |
200 या उससे अधिक |
कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर (Continuous Glucose Monitoring)
NIDDK के मुताबिक, इस आधुनिक तकनीक के जरिए हर कुछ मिनट में ग्लूकोज का लेवल मापा जा सकता है और यह एक छोटा सा डिवाइस होता है, जो स्किन के नीचे लगता है। आमतौर पर पेट या हाथ पर लगाया जाता है। इसे एक स्टिकी पैच की मदद से लगाया जाता है। इसमें डिस्पोजेबल सेंसर होता है, जिसे कुछ हफ्तों में बदलना पड़ता है। यह डिवाइस शरीर की कोशिकाओं के बीच मौजूद तरल पदार्थ, जिसे Interstitial fluid कहते हैं, में ग्लूकोज के लेवल को मापता है। इस डिवाइस का फायदा है कि ये मरीज के 24 घंटे की शुगर को ग्राफ में भी दिखा सकता है। अगर शुगर का लेवल बहुत कम या बहुत ज्यादा होता है, तो अलार्म के जरिए मैसेज देता है।

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ऑटो-एंटीबॉडी टेस्ट (Autoantibody Test)
डॉ. हिमिका ने बताया, "यह टेस्ट टाइप 1 डायबिटीज की पहचान करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए पता चलता है कि शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से खुद के पैंक्रियाज पर हमला कर रहा है। टाइप 1 डायबिटीज में इम्यून सिस्टम ऑटो-एंटीबॉडीज बनाना शुरू कर देता है। ये पैंक्रियाज के बीटा-सेल्स को नष्ट करने लगते हैं, जो इंसुलिन बनाते हैं। ब्लड टेस्ट के जरिए ऑटो-एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है।"
CDC के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज के तीन स्टेज होते हैं।
स्टेज |
ऑटो-एंटीबॉडीज की स्थिति |
ब्लड शुगर का स्तर |
स्टेज 1 |
2 या अधिक ऑटो-एंटीबॉडीज मौजूद |
सामान्य |
स्टेज 2 |
2 या अधिक ऑटो-एंटीबॉडीज मौजूद |
असामान्य (बढ़ा हुआ) |
स्टेज 3 |
ऑटो-एंटीबॉडीज मौजूद |
काफी अधिक |
किसे ब्लड शुगर टेस्ट कराना चाहिए?
Mayo Clinic के अनुसार, ब्लड शुगर टेस्ट इन लोगों को कराना बहुत जरूरी है।
- अगर किसी का BMI 23 से ज्यादा है और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ या PCOS है, तो ब्लड शुगर टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
- अगर किसी की हार्ट की बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री है, तो उनके लिए ब्लड शुगर स्क्रीनिंग जरूरी है।
- डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री होने पर नियमित चेकअप कराना बहुत जरूरी है।
- 35 साल की उम्र पार कर चुके हर व्यक्ति को अपना शुरुआती ब्लड शुगर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
- जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान शुगर की समस्या रही है, उन्हें हर तीन साल में अपना चेकअप कराना चाहिए।
- अगर पहले से प्री-डायबिटीज है, तो रेगुलर चेकअप की सलाह दी जाती है।
- जिन लोगों को HIV है, उन्हें भी नियमित रूप से डायबिटीज की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. हिमिका ने इन लोगों को डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलने की सलाह दी है।
- अगर सामान्य से ज्यादा प्यास लगे या बार-बार भूख लगे।
- रात को बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता है।
- बिना वजह अचानक से वजन कम होने लगे।
- अचानक आंखों से धुंधलापन महसूस होने लगे।
- हर समय कमजोरी और थकान महसूस हो।
- कोई भी चोट लगने पर जख्म को भरने में समय लगे।
- हाथों और पैरों में झुनझुनी जैसा महसूस होने लगे।
निष्कर्ष
डायबिटीज के इलाज के लिए ब्लड शुगर टेस्ट कराना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर समय रहते डायबिटीज की पहचान और इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए 35 साल के बाद लोगों को रेगुलर ब्लड शुगर टेस्ट कराना चाहिए। यह बहुत ही सिंपल टेस्ट है, जिसमें खून का सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है। इसके साथ, डायबिटीज के मरीज अपने लाइफस्टाइल और डाइट को हेल्दी बनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।
FAQ
अगर मेरा फास्टिंग शुगर 110 है, तो क्या मुझे डायबिटीज है?
100 से 125 के बीच की फास्टिंग शुगर 'प्री-डायबिटीज' कहलाती है। इसका मतलब है कि आपको भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा है, लेकिन अभी इसे डाइट से कंट्रोल किया जा सकता है।कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर (CGM) और साधारण ग्लूकोमीटर में क्या अंतर है?
साधारण मीटर केवल एक पल की शुगर बताता है, जबकि CGM 24 घंटे का ग्राफ दिखाता है और शुगर कम या ज्यादा होने पर अलर्ट भी करता है।टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के टेस्ट में क्या अंतर है?
टाइप 2 के लिए सामान्य शुगर टेस्ट होते हैं, जबकि टाइप 1 को चेक करने के लिए ऑटो-एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है ताकि इम्यून सिस्टम के हमले का पता चल सके।मेरा रैंडम शुगर 180 आया है, क्या यह चिंता की बात है?
अगर यह रीडिंग खाने के 1-2 घंटे के भीतर ली गई है, तो 140–180 mg/dL के बीच की शुगर बॉर्डरलाइन या प्री‑डायबिटिक रेंज मानी जा सकती है। सही स्थिति जानने के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट कराना बेहतर है। अगर 180 mg/dL की रीडिंग खाने से कई घंटे बाद भी आ रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।क्या स्ट्रेस से ब्लड शुगर बढ़ सकता है?
बहुत ज्यादा स्ट्रेस के समय शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है।
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Current Version
May 01, 2026 21:19 IST
Modified By : Aneesh Rawat May 01, 2026 21:19 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Himika Chawla