Sun Oct 18, 2026 | 03:25 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

HbA1c नॉर्मल होने पर भी डायबिटीज का खतरा क्यों बना रहता है? डॉक्‍टर से जानें

HbA1c जैसे एक टेस्ट के आधार पर डायब‍िटीज की पूरी तस्वीर साफ नहीं होती। डायबिटीज का खतरा कई बार धीरे-धीरे बढ़ता है और इसके शुरुआती संकेत पहचानने के ल‍िए केवल एक जांचं काफी नहीं होती है।
HbA1c नॉर्मल होने पर भी डायबिटीज का खतरा क्यों बना रहता है? डॉक्‍टर से जानेंHbA1c नॉर्मल होने पर भी डायबिटीज का खतरा क्यों बना रहता है? डॉक्‍टर से जानें

आजकल लोग अपनी हेल्थ को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो गए हैं और डायबिटीज की जांच के लिए HbA1c टेस्ट को काफी भरोसेमंद मानते हैं। जब रिपोर्ट में HbA1c का लेवल नॉर्मल आता है, तो लोग यह मान लेते हैं कि उन्हें डायबिटीज का कोई खतरा नहीं है। लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग हो सकती है। कई बार शरीर के अंदर ब्लड शुगर से जुड़े बदलाव धीरे-धीरे शुरू हो जाते हैं, जबकि HbA1c टेस्ट उन्हें तुरंत पकड़ नहीं पाता। यही कारण है कि कुछ लोग सामान्य रिपोर्ट होने के बावजूद भी शारीर‍िक समस्याओं का सामना करते रहते हैं। HbA1c नॉर्मल होने पर भी डायबिटीज का खतरा बने रहने के कारण जानने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals से बात की।

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नॉर्मल HbA1c में भी डाय‍ब‍िटीज का खतरा बना रहता है

सिर्फ नॉर्मल HbA1c होने का मतलब यह नहीं है कि आपको डायबिटीज का खतरा नहीं है। HbA1c टेस्ट पिछले दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल को दिखाता है, लेकिन यह कई बार शुरुआती शुगर स्पाइक्स, खासकर खाने के बाद बढ़ने वाले ग्लूकोज लेवल को पकड़ नहीं पाता। कुछ लोगों में HbA1c नॉर्मल होने के बावजूद इम्पेयर्ड ग्लूकोज टॉलरेंस (Impaired Glucose Tolerance) या फास्टिंग शुगर असामान्यताएं (Fasting Sugar Abnormalities) हो सकती हैं। यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जा सकती है जिनकी फैमिली हिस्ट्री में डायबिटीज हो, मोटापा हो, शारीरिक गतिविधि कम हो, PMOS ( पूर्व नाम PCOS) हो, ज्यादा स्‍ट्रेस रहता हो या फैटी ल‍िवर की समस्या हो।

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कुछ मेडिकल कंडीशन में HbA1c के परिणाम सटीक नहीं होते

कुछ मेडिकल कंडीशन में HbA1c के परिणाम उतने सटीक नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए एनीमिया, प्रेग्नेंसी, किडनी रोग, हाल में ज्यादा ब्लड लॉस या रेड ब्लड सेल्स से जुड़ी बीमारियों में यह टेस्ट गलत तरीके से कम या ज्यादा वैल्यू दिखा सकता है। इसलिए डॉक्टर केवल HbA1c के आधार पर ही डायबिटीज का फैसला नहीं करते हैं।

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HbA1c के अलावा ये टेस्‍ट भी हैं जरूरी

अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, लगातार थकान या बिना वजह वजन में बदलाव जैसे लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर फास्‍ट‍िंग ब्‍लड शुगर, पोस्‍ट मील शुगर या ओरल ग्‍लूकोज टॉलरेंस टेस्‍ट कराने की सलाह दे सकते हैं। ये टेस्ट उन समस्याओं को पकड़ सकते हैं जो HbA1c टेस्ट में सामने नहीं आती हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

नॉर्मल HbA1c को सेहत का अच्छा संकेत माना जा सकता है, लेकिन इसके सामान्‍य होने से डायबिटीज से बचाव होगा ऐसा जरूरी नहींं है। डायब‍िटीज से बचाव के ल‍िए नियमित जांच, हेल्दी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी और वजन को कंट्रोल में रखना जरूरी है।

FAQ

  • HbA1c टेस्ट क्‍या होता है?

    HbA1c एक ब्लड टेस्ट है, जो पिछले दो से तीन महीनों के ब्लड शुगर लेवल को मापता है। इसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहा जाता है और यह डायबिटीज की जांच में मदद करता है।
  • HbA1c टेस्ट से क्‍या पता चलता है?

    इस टेस्ट से यह पता चलता है कि व्यक्ति का ब्लड शुगर लंबे समय से कितना कंट्रोल में है? यह प्री-डायबिटीज, डायबिटीज और डायबिटीज मैनेजमेंट की स्थिति समझने में मदद करता है।

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  • Current Version

    May 20, 2026 20:23 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 20, 2026 20:23 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo