एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट यानी ESR टेस्ट क्या होता है, क्यों किया जाता है, कैसे किया जाता है और इसकी नॉर्मल रेंज क्या होती है, ये सवाल अक्सर लोगों के मन में आते हैं, खासकर तब जब डॉक्टर यह टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। मेडिकल रिपोर्ट में ESR लिखा देखकर कई लोग कंफ्यूज हो जाते हैं और समझ नहीं पाते कि इसका उनके स्वास्थ्य से क्या संबंध है। यही वजह है कि इस विषय को सरल भाषा में समझना जरूरी हो जाता है, ताकि हर कोई अपनी रिपोर्ट को लेकर जागरूक रह सके और अनावश्यक डर या भ्रम से बच सके। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने VNA Hospital के यूरोलॉजी, सेक्सोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. विनीत मल्होत्रा से बात की।
ESR टेस्ट क्या होता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि जब शरीर में सूजन होती है, तो खून में कुछ प्रोटीन बढ़ जाते हैं, जिससे RBCs तेजी से नीचे बैठने लगती हैं। यही गति ESR के रूप में मापी जाती है। ESR का पूरा नाम Erythrocyte Sedimentation Rate है। यह एक साधारण ब्लड टेस्ट है जो यह मापता है कि लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) एक घंटे में कितनी तेजी से टेस्ट ट्यूब के नीचे बैठती हैं। यह टेस्ट संकेत देता है कि शरीर के अंदर कोई इंफ्लेमेटरी प्रोसेस चल रहा है।
डॉ. विनीत मल्होत्रा की सलाह है कि अगर शरीर में लगातार थकान, सूजन या अन्य लक्षण दिखें, तो जांच जरूर कराएं और समय पर इलाज शुरू करें।
ESR टेस्ट क्यों किया जाता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, ''ESR टेस्ट किसी एक बीमारी को कंफर्म नहीं करता, लेकिन यह डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि शरीर में कहीं सूजन है या नहीं और आगे कौन-सी जांच करनी चाहिए।'' ESR टेस्ट मुख्य रूप से शरीर में सूजन और इंफेक्शन का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह कई बीमारियों के शुरुआती संकेत दे सकता है। अगर किसी व्यक्ति में कुछ खास लक्षण नजर आते हैं, जैसे कि लगातार थकान महसूस होना, जोड़ों में दर्द या सूजन, बार-बार बुखार आना, ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण, इंफेक्शन की जांच या क्रॉनिक बीमारियों की मॉनिटरिंग के लिए डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं।
इसे भी पढ़ें: यूरिक एसिड में कौन से सप्लीमेंट लें? एक्सपर्ट से जानें
कौन सी बीमारियों से ESR बढ़ सकता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि ESR का लेवल कई तरह की बीमारियों में बढ़ सकता है, खासकर उन स्थितियों में जहां शरीर में सूजन होती है। आमतौर पर बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन, जैसे टीबी या लंबे समय तक रहने वाले इंफेक्शन ESR को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, रूमेटाइड अर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों में भी ESR का लेवल काफी ज्यादा पाया जाता है। इन बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही टिश्यू पर हमला करने लगता है, जिससे सूजन बढ़ती है। कुछ क्रॉनिक बीमारियां जैसे किडनी डिजीज, डायबिटीज और हाई यूरिक एसिड भी ESR बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं। इसके अलावा, कुछ प्रकार के कैंसर, जैसे ब्लड कैंसर में भी ESR का लेवल बढ़ सकता है।

ESR टेस्ट कैसे किया जाता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि यह एक बेहद सरल और सामान्य ब्लड टेस्ट है, जिसे पैथोलॉजी लैब में आसानी से किया जा सकता है। ESR टेस्ट के लिए सबसे पहले मरीज के हाथ से खून का सैंपल लिया जाता है और फिर इस ब्लड को टेस्ट किया जाता है। ब्लड सैंपल को एक पतली ट्यूब में रखा जाता है और फिर यह मापा जाता है कि RBCs कितनी दूरी तक नीचे बैठी हैं। इस दूरी को mm/hr में मापा जाता है। इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती और न ही खाली पेट रहने की जरूरत होती है।
इसे भी पढ़ें: यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण क्या हैं?
High ESR है तो क्या करें?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि अगर आपकी रिपोर्ट में ESR ज्यादा आता है, तो सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह किसी एक बीमारी का पक्का संकेत नहीं होता, बल्कि शरीर में सूजन या किसी समस्या की ओर इशारा करता है। ऐसे में जरूरी है कि आप डॉक्टर की सलाह लें और अतिरिक्त जांच कराएं, ताकि सही कारण का पता चल सके।
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, हाई ESR को कंट्रोल करने के लिए सबसे पहले उसकी वजह जानना जरूरी होता है। अगर यह किसी इंफेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारी या अन्य समस्या के कारण बढ़ा है, तो उसी के अनुसार इलाज किया जाता है। लाइफस्टाइल में सुधार भी बेहद जरूरी है। बैलेंस डाइट लें, जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और एंटीइंफ्लेमेटरी फूड शामिल हों। पर्याप्त पानी पीना और नियमित एक्सरसाइज करना भी सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी बनाना और तनाव को कंट्रोल रखना भी जरूरी है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें और नियमित रूप से अपनी जांच कराते रहें।
MedlinePlus की रिपोर्ट के अनुसार, ESR एक ऐसा टेस्ट है जो शरीर में सूजन का संकेत देता है, और यह सूजन कई बीमारियों जैसे इंफेक्शन, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, कुछ कैंसर और ब्लड डिजीज में बढ़ सकती है।
इसे भी पढ़ें: हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए फॉलो करें 7 दिन का डाइट चार्ट
ESR की नॉर्मल रेंज क्या होती है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि ESR की नॉर्मल रेंज उम्र, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार थोड़ी बदल सकती है। आमतौर पर ESR की नॉर्मल रेंज इस प्रकार होती है-
पुरुषों में:
- 50 साल से कम: 0-15 mm/hr
- 50 साल से अधिक: 0-20 mm/hr
महिलाओं में:
- 50 साल से कम: 0-20 mm/hr
- 50 साल से अधिक: 0-30 mm/hr
बच्चों में:
- नवजात (Newborn): 0-2 mm/hr
- बच्चे (0-12 साल): 0-10 mm/hr
अगर रिपोर्ट में ESR इस सीमा से ज्यादा होता है, तो यह शरीर में सूजन, इंफेक्शन या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
साल 2025 में StatPearls (NCBI Bookshelf) में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार, ESR टेस्ट सूजन (inflammation) का पता लगाने के लिए एक बेहद किफायती, सरल और प्रभावी तरीका है। हालांकि, यह किसी खास बीमारी के बारे में नहीं बताता, लेकिन यह शरीर में ऑटोइम्यून डिजीज, इंफेक्शन और कुछ प्रकार के कैंसर की उपस्थिति का संकेत देने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको लंबे समय से लगातार थकान महसूस हो रही है, बिना किसी कारण कमजोरी बनी रहती है या बार-बार बुखार आता है, तो इसे हल्के में न लें। इसके अलावा अगर शरीर के किसी हिस्से में सूजन, जोड़ों में दर्द, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो यह भी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को अचानक वजन कम होना, भूख में कमी या बार-बार इंफेक्शन होना जैसी समस्याएं भी होती हैं। ये लक्षण शरीर में सूजन या किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। खासकर अगर ये समस्याएं कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपको पहले से डायबिटीज, हाई यूरिक एसिड या कोई ऑटोइम्यून बीमारी है, तो नियमित जांच कराते रहना और डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष
ESR टेस्ट किसी एक बीमारी की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह डॉक्टर को सही दिशा में आगे की जांच और इलाज तय करने में मदद करता है। आज की बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण शरीर में सूजन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में ESR जैसे टेस्ट का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस टेस्ट की खास बात यह है कि यह आसान और जल्दी होने वाला ब्लड टेस्ट है, जिसके लिए किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। इसलिए अगर डॉक्टर सलाह दें, तो इसे करवाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
FAQ
शरीर में ESR बढ़ने से क्या होता है?
जिस बीमारी के कारण शरीर में ESR बढ़ा है उसके कारण थकान, बुखार, कमजोरी या दर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यह इंफेक्शन या क्रॉनिक डिजीज की ओर इशारा करता है। इसलिए ESR बढ़ने पर डॉक्टर आगे और टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।क्या प्रेग्नेंसी में ईएसआर हाई होता है?
प्रेग्नेंसी में ESR सामान्य रूप से बढ़ सकता है, क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिससे ESR का लेवल बढ़ सकता है। यह आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। डॉक्टर ESR टेस्ट की रिपोर्ट के साथ अन्य टेस्ट देखकर स्थिति को देखते हैं और उचित सलाह देते हैं।ESR बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?
ESR बढ़ना किसी एक बीमारी का नहीं, बल्कि कई बीमारियों का संकेत हो सकता है, जैसे इंफेक्शन, ऑटोइम्यून डिजीज या कुछ क्रॉनिक डिजीज लेकिन केवल ESR के आधार पर बीमारी तय नहीं होती, इसके लिए अन्य टेस्ट और लक्षण भी देखे जाते हैं और फिर डॉक्टर किसी नतीजे पर पहुंचते हैं।बढ़े हुए ESR को कैसे कम करें?
ESR को कम करने के लिए इसके कारण का पता लगना जरूरी है और फिर कारण का इलाज करना जरूरी है। डॉक्टर आपकी रिपोर्ट और लक्षणों को देखकर उचित दवाएं बताते हैं। इसके अलावा बैलेंस्ड डाइट, पर्याप्त पानी, एक्सरसाइज और तनाव कम करना भी सहायक हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें, क्योंकि ESR बढ़ना केवल एक संकेत है, जिसका सही कारण जानना जरूरी होता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Apr 17, 2026 15:46 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 17, 2026 15:46 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra