आज के समय में व्यक्ति का लाइफस्टाइल और डाइट काफी बदल चुका है। समय की कमी, तनाव और खराब लाइफस्टाइल का असर सीधे हमारी सेहत पर पड़ता है। ऐसे में लोगों में लिवर से जुड़ी समस्याएं भी काफी ज्यादा बढ़ गई हैं, जो उनके संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। Cleveland Clinic के अनुसार, लिवर हमारे शरीर में 500 से ज्यादा तरीकों से काम करता है। ऐसे में लिवर की नियमित रूप से जांच आपको इससे जुड़ी किसी भी समस्या के बारे में समय रहते पहचानने में मदद कर सकती है और उसे ठीक कर सकती है। लिवर ब्लड टेस्ट के जरिए लिवर में SGOT के स्तर की जांच की जाती है, जिसका लगातार बढ़ना लिवर को नुकसान पहुंचने का संकेत होता है। ऐसे में आइए इस लेख में Dr. Sarada Pasangulapati, Consultant Medical Gastroenterologist and Hepatologist , Yashoda Hospitals, Hyderabad से जानते हैं कि SGOT क्या है और इसकी नॉर्मल रेंज क्या होनी चाहिए?
SGOT टेस्ट से क्या पता चलता है?
Dr. Sarada Pasangulapati बताती हैं कि SGOT, जिसे AST (Aspartate Aminotransferase) भी कहा जाता है, एक ऐसा एंजाइम है, जो आमतौर पर लिवर, दिल, मांसपेशियों, किडनी और दिमाग के सेल्स के अंदर मौजूद होता है। आमतौर पर इस एंजाइम की बहुत थोड़ी मात्रा ही खून में घूमती है। हालांकि, जब इन सेल्स को चोट लगती है या उनमें सूजन आ जाती है, जो ज्यादातर लिवर में होता है तो खून में SGOT का स्तर बढ़ सकता है। इसी कारण डॉक्टर SGOT टेस्ट का उपयोग खासकर लिवर की सेहत जांचने के लिए करते हैं।
SGOT टेस्ट क्यों किया जाता है?
डॉ. सारदा पासंगुलपति ने बताया कि लिवर में SGOT का लेवल बढ़ने के कारण, लिवर के हेल्दी होने या लिवर को नुकसान पहुंचने के बारे में पता लगाने में मदद के लिए SGOT टेस्ट किया जाता है। SGOT टेस्ट एक ब्लड टेस्ट होता है, जो शरीर में एक खास तरह के एंजाइम के लेवल को मापता है। इस टेस्ट को मेडिकल की भाषा में AST Test भी कहा जाता है। इसी कारण लिवर के हेल्दी होने और लिवर को नुकसान के बारे में पता लगाने में मदद के लिए SGOT टेस्ट को अक्सर लिवर फंक्शन टेस्ट में शामिल किया जाता है। डॉक्टर SGOT टेस्ट का इस्तेमाल लिवर की सेहत जांचने के लिए करते हैं।
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SGOT की नॉर्मल रेंज क्या होनी चाहिए?
SGOT की नॉर्मल रेंज के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सारदा पासंगुलपति ने बताया कि, "SGOT की सामान्य सीमा आमतौर पर लगभग 10 से 40 यूनिट प्रति लीटर के बीच होती है, हालांकि लैब के आधार पर इसकी सही सीमा थोड़ी अलग हो सकती है।" बता दें कि महिला और पुरुषों के लिए इसकी नॉर्मल रेंज में थोड़ा फर्क होता है। पुरुषों में यह रेंज 10 से 40 U/L होती है, जबकि महिलाओं में 9 से 32 U/L रेंज होती है।
SGOT और SGPT का रेशियो और बीमारी
लिवर की सेहत जांचने के लिए SGOT और SGPT दो सबसे जरूरी एंजाइम हैं। इनके लेवल और रेशियो से लिवर की बीमारी की गंभीरता का सही पता लगाया जा सकता है। SGPT मुख्य रूप से लिवर में ही पाया जाता है। इसलिए, अगर इसका लेवल ज्यादा होता है तो यह सीधे तौर पर लिवर के डैमेज होने का संकेत हो सकता है। जबकि SGOT लिवर के अलावा आपके दिल, मांसपेशियों और किडनी में पाया जाता है, जिसका बढ़ना हमेशा सिर्फ लिवर की समस्या नहीं, बल्कि शरीर के अन्य अंगों में भी खराबी का संकेत हो सकता है। Springer Nature Link के रिसर्च के अनुसार, "लिवर की सूजन और सिरोसिस के मरीजों में SGOT या SGPT का रेशियो काफी बढ़ा हुआ पाया जाता है। इन मरीजों में यह अनुपात लगभग 2.85 होता है, जबकि अन्य बीमारियों में यह काफी कम रहता है। जैसे पोस्टनेक्रोटिक सिरोसिस में 1.74, क्रोनिक हेपेटाइटिस में 1.3, पित्त की रुकावट में 0.81 और वायरल हेपेटाइटिस में मात्र 0.74 होता है।"
SGOT लेवल बढ़ने के कारण
डॉ. सारदा पासंगुलपति का कहना है कि, "SGOT के लेवल में 10 से 20% तक की मामूली बढ़ोतरी जैसे 45-50 U/L तक नॉर्मल होती है, जो परेशानी का कारण नहीं है। हालांकि, अगर इसका लेवल नॉर्मल रेंज से 2 से 3 गुना यानी 80-120 U/L से ऊपर बढ़ जाए, तो यह लिवर की सूजन या डैमेज होने का संकेत होता है। SGOT का लेवल काफी ज्यादा बढ़ने पर यह लिवर से जुड़ी समस्याओं जैसे फैटी लिवर डिजीज, वायरल हेपेटाइटिस, शराब के कारण लिवर का डैमेज होना या दवाओं के कारण लिवर को नुकसान पहुंचने का संकेत हो सकता है। SGOT मांसपेशियों और दिल में भी मौजूद होता है, इसलिए मांसपेशियों में चोट लगने, बहुत ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करने या दिल से जुड़ी किसी खास स्थिति में इसका स्तर बढ़ सकता है।"
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SGOT लेवल बढ़ने के लक्षण
डॉ. सारदा पासंगुलपति ने जानकारी देते हुए बताया कि, "जिन मरीजों में SGOT का स्तर बढ़ा हुआ होता है, उन्हें कभी-कभी थकान, जी मिचलाना, भूख न लगना, पेट में गड़बड़ी, गहरे रंग का पेशाब आना या स्किन और आंखों का पीला पड़ने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं, खासकर तब जब लिवर पर इसका असर काफी ज्यादा हो। हालांकि, कई मामलों में, खासकर फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज में मरीजों में कोई भी साफ लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और लिवर में होने वाली समस्याओं के बारे में सिर्फ नियमित ब्लड टेस्ट से ही पता चल सकता है।"

प्रेग्नेंसी में हाई SGOT या SGPT के कारण
प्रेग्नेंसी में SGOT और SGPT का लेवल आमतौर पर नॉर्मल रहता है। इतना ही नहीं, ब्लड वॉल्यूम बढ़ने के कारण यह नॉर्मल से थोड़ा कम ही रहता है। बता दें कि प्रेग्नेंसी के कारण शरीर में SGOT और SGPT एंजाइम्स खुद नहीं बढ़ते हैं, बल्कि इनका स्तर बढ़ना शरीर के किसी अंदरूनी समस्या का संकेत होता है।अगर रिपोर्ट में इन एंजाइम्स का लेवल बढ़ा हुआ है तो यह सामान्य नहीं होता है और इसके पीछे कई गंभीर स्थितियां हो सकती हैं, जिनमें-
- हाई ब्लड प्रेशर के कारण प्री-एक्लेम्पसिया (Preeclampsia) की स्थिति लिवर सेल्स को नुकसान पहुंचा सकता हैं, जिससे एंजाइम बढ़ जाते हैं।
- HELLP सिंड्रोम एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें लिवर एंजाइम्स तेजी से बढ़ने लगते हैं और प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। यह मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
- एक्यूट फैटी लिवर ऑफ प्रेग्नेंसी (AFLP) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ्तों में लिवर में अचानक फैट जमा होने लगता है।
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SGOT लेवल को कम कैसे करें?
डॉ. सारदा पासंगुलपति का कहना है कि, "SGOT के लेवल को कम करने के लिए सबसे पहले इसके होने के कारण की पहचान करना और उसका समाधान करना जरूरी है। लाइफस्टाइल से जुड़े उपाय भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं, जिसमें हेल्दी वजन बनाए रखना, शराब का सेवन सीमित मात्रा में करना, बैलेंस डाइट लेना और रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करना शामिल हैं। इसके अलावा डायबिटीज, मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों को सही तरह से मैनेज करना बहुत जरूरी है। ऐसे में समय पर जांच और लाइफस्टाइल में सही बदलाव करके SGOT के स्तर को नॉर्मल करने में मदद मिलती है और लिवर को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।"
डॉक्टर से सलाह कब लें?
कुछ लोगों में तेज एक्सरसाइज करने के कारण भी SGOT का लेवल कुछ समय के लिए के लिए बढ़ सकता है, लेकिन ये कुछ समय में अपने आप नॉर्मल हो जाता है, जिसके कारण आपको घबराने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, SGOT लेवल की जांच कराने के दौरान अगर जांच में लगातार SGOT का स्तर बढ़ रहा हो, पीलिया के लक्षण नजर आ रहे हों, लगातार शरीर में थकान या कमजोरी महसूस हो रही हो, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द हो रहा हो, उल्टी और भूख से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है, ताकि इससे जुड़ी समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सके। आपकी स्थिति और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर जरूरत पड़ने पर अन्य कई तरह की जांच कर सकते हैं, जिनमें ALT टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, लिवर बायोप्सी आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष
SGOT हमारे लिवर में मिलने वाला एक अहम एंजाइम होता है, जिसका स्तर लगातार बढ़ना लिवर या अन्य अंगों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। हालांकि, सिर्फ SGOT बढ़ने से हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होती, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी आपकी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता है। इसलिए, समय पर जांच, सही खानपान और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर आप अपने लिवर को हेल्दी रख सकती हैं।
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FAQ
लिवर फंक्शन में SGOT का क्या अर्थ है?
SGOT हमारे शरीर में मौजूद एक एंजाइम है, जो लिवर के सेल्स में पाया जाता है। अगर आपके लिवर में किसी तरह की समस्या होती है तो यह एंजाइम ब्लड में बढ़ने लगता है।कौन सा खाना SGOT कम करता है?
कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन आपके लिवर के लिए फायदेमंद होता है, जिससे खाने से शरीर में SGOT के लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है। इन फूड्स में लहसुन, हल्दी, हरी पत्तेदार सब्जियां, नींबू आदि चीजें शामिल हैं। ये सभी चीजें आपके लिवर को डिटॉक्स करने और एंजाइम्स को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।लिवर खराब होने पर कहां दर्द होता है?
लिवर में खराबी होने पर आमतौर पर आपके पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। कई बार यह दर्द पीठ के ऊपरी हिस्से में भी महसूस हो सकता है या फिर खिंचाव का कारण बन सकता है।SGOT बढ़ने पर क्या खाना चाहिए?
SGOT बढ़ने पर कुछ चीजों का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, जिसमें हरी सब्जियां, फल, ओट्स, दालें, ग्रीन टी और हल्दी का सेवन शामिल है।SGOT अधिक होने से क्या होता है?
शरीर में SGOT ज्यादा होना आपके शरीर के कई अंगों में किसी तरह की समस्या होने का संकेत हो सकता है, जिसमें लिवर, मांसपेशियों या दिल के सेल्स का डैमेज होना शामिल है।
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Apr 04, 2026 19:54 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Apr 04, 2026 19:54 IST
Modified By : Katyayani TiwariApr 04, 2026 19:54 IST
Published By : Katyayani Tiwari