Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

फैटी ल‍िवर में अल्‍कोहल पीने से क्‍या होता है? जानें र‍िसर्च और एक्‍सपर्ट की राय

फैटी ल‍िवर में अल्‍कोहल का सेवन करने से ल‍िवर की कार्यक्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है। इससे ल‍िवर में सूजन की आशंका बढ़ सकती है और फैटी ल‍िवर की समस्‍या आगे चलकर स‍िरोस‍िस जैसी गंभीर बीमारी में भी बदल सकती है। जानें फैटी ल‍िवर में अल्‍कोहल पीने से सेहत पर क्‍या असर पड़ता है?

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ल‍िवर की कोश‍िकाओं में सामान्‍य से ज्‍यादा फैट जमा होने की स्‍थ‍ित‍ि फैटी ल‍िवर कहलाती है। आजकल यह समस्‍या आम होती जा रही है और इसका एक कारण अल्‍कोहल का अध‍िक सेवन भी समझा जाता है। मुख्‍य रूप से फैटी ल‍िवर की समस्‍या के दो प्रकार होते हैं। पहला नॉन-अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर (NAFLD या MASLD) और दूसरा अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर। नॉन-अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर के पीछे ज्‍यादातर मामलों में मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं होती हैं जबक‍ि अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर में अल्‍कोहल का ज्‍यादा सेवन एक कारण माना जाता है। चाहे नॉन-अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर हो या अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर हो, डॉक्‍टर दोनों की स्‍थ‍िति‍यों में अल्‍कोहल के सेवन से बचने की सलाह देते हैं। इसका कारण है अल्‍कोहल का ल‍िवर पर बुरा असर।

ल‍िवर भोजन को पचाने में मदद करता है, शरीर से व‍िषाक्‍त पदार्थों को बाहर न‍िकालता है और कई प्रक्र‍ियाओं को न‍ियंत्र‍ित करता है। जब कोई व्‍यक्‍त‍ि बार-बार अल्‍कोहल का सेवन करता है, तो ल‍िवर पर अत‍िर‍िक्‍त दबाव पड़ स‍कता है। अल्‍कोहल का लंबे समय तक सेवन करने से ल‍िवर की कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और ल‍िवर में सूजन भी आ सकती है। अगर पहले से ल‍िवर में ज्‍यादा फैट जमा हो और व्‍यक्‍त‍ि अल्‍कोहल का सेवन कर ले, तो यह स्‍थ‍िति‍ और गंभीर हो सकती है। इस लेख में हम एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च की मदद से समझेंगे क‍ि फैटी ल‍िवर में अल्‍कोहल पीने से क्‍या होता है? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

फैटी लिवर होने पर अल्‍कोहल पीने से क्या होता है?

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Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि ल‍िवर भोजन को पचाने में मदद करता है, शरीर से वि‍षाक्‍त पदार्थों को बाहर न‍िकालने में मदद करता है और शरीर की अन्‍य जरूरी प्रक्र‍ियाओं को न‍ियंत्र‍ित करता है। जब कोई व्‍यक्‍त‍ि अल्‍कोहल का सेवन करता है, तो ल‍िवर उसे बाहर न‍िकालने का प्रयास करता है। अगर व्‍यक्‍त‍ि बार-बार अल्‍कोहल का सेवन करेगा, तो ल‍िवर पर दबाव बन सकता है और ल‍िवर की कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इस कारण ल‍िवर में सूजन भी आ सकती है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर ल‍िवर में पहले से फैट जमा है, तो अल्‍कोहल से स्‍थ‍ित‍ि और खराब हो सकती है। अल्‍कोहल ल‍िवर में फैट जमा होने की प्रक्र‍िया को तेज कर सकता है। यह स्‍थ‍ित‍ि आगे चलकर अल्‍कोहोल‍िक हेपेटाइट‍िस या स‍िरोस‍िस में बदल सकती है।
Clinical Nutrition जर्नल की एक र‍िव्‍यू स्‍टडी के मुताब‍िक, लगभग 4579 वयस्‍काें के डेटा से पता चलता है क‍ि अल्‍कोहल के सेवन और फैटी ल‍िवर के बीच संबंध‍ पाया गया है।

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कम मात्रा में अल्‍कोहल पीना सुरक्षित है?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि ''फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍िति‍ में मरीजों के ल‍िए कम मात्रा में अल्‍कोहल का सेवन भी हान‍िकारक होता है। अल्‍काेहल पीने से शरीर में फैट तेजी से जमा हो सकता है। रोजाना चार यून‍िट से ज्‍यादा अल्‍कोहल का सेवन करने से कम समय में ही फैटी ल‍िवर की समस्‍या हो सकती है जो आगे चलकर स्टीटोहेपेटाइटिस (Steatohepatitis) में बदल सकती है।''
PeerJ Journal की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, करीब 76 हजार लोगों के साथ 16 अध्‍ययन क‍िए ज‍िसमें अल्‍कोहल के सेवन और फैटी लि‍वर के खतरे पर व‍िश्‍लेषण क‍िया गया। स्‍टडी के मुताब‍िक, कम मात्रा में अल्‍कोहल का सेवन करने वाले कुछ लोगों में भी फैटी ल‍िवर की संभावना देखी गई।
American Association For The Study Of Liver Disease की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, फैटी ल‍िवर से पीड़ि‍त मरीजों में कम मात्रा में अल्‍कोहल पीने की आदत से भी एडवांस्‍ड ल‍िवर ड‍िजीज का खतरा बढ़ सकता है।

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ल‍िवर फैटी होने पर कौन सी समस्‍याएं होती हैं?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि फैटी ल‍िवर मेटाबॉल‍िज्‍म को भी प्रभाव‍ित करता है। इससे वजन बढ़ने, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस या अन्‍य मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं हो सकती हैं। अगर क‍िसी को फैटी ल‍िवर की समस्‍या है, तो ल‍िवर को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए संतुल‍ित आहार लें, न‍ियम‍ित एक्‍सरसाइज करें और स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनाएं।

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अल्‍कोहल पीने से फैटी लिवर कितनी तेजी से बढ़ सकता है?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि ''लगातार अल्‍कोहल पीने पर कुछ हफ्तों से महीनों के भीतर ही लिवर में फैट जमा होना शुरू हो सकता है। फैटी लि‍वर, ल‍िवर की कोश‍िकाओं में अत‍िर‍िक्‍त फैट जमा होने की समस्‍या है, जो अक्‍सर अल्‍कोहल के सेवन से और ज्‍यादा गंभीर हो सकती है। फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍िति‍ में अगर अल्‍कोहल का सेवन करेंगे, तो लि‍प‍िड मेटाबॉलि‍ज्‍म में रुकावट आएगी, सूजन बढ़ेगी ज‍िससे ल‍िवर डैमेज तेजी से हो सकता है। इससे ल‍िवर फाइब्रोस‍िस का खतरा भी बढ़ सकता है।''

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क्या अल्‍कोहल छोड़ने से फैटी लिवर ठीक हो सकता है?

अल्‍कोहल छोड़ना फैटी ल‍िवर की स्‍थि‍त‍ि को कंट्रोल करने के ल‍िए काफी नहीं है। इसके ल‍िए लाइफस्‍टाइल में कई बदलाव जैसे हेल्‍दी डाइट, वजन कंट्रोल करना वगैरह भी शाम‍िल हैं। फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍िति‍ में अगर वजन कंट्रोल करेंगे, तो फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍िति‍ से जल्‍दी न‍िकलने में मदद म‍िलेगी क्‍योंक‍ि इससे सूजन कम करने में भी मदद म‍िल सकती है और ल‍िवर पर दबाव भी कम हो सकता है।

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अल्‍कोहलि‍क फैटी ल‍िवर में कौन सी समस्‍याएं हो सकती हैं?

  • स‍िरोस‍िस
  • ल‍िवर कैंसर
  • पोर्टल हाइपरटेंशन (Portal Hypertension)
  • एसाइटिस (Ascites)
  • हेपेटिक एन्सेफेलोपैथी (Hepatic Encephalopathy)
  • अल्‍कोहलि‍क फैटी ल‍िवर के कारण इन बीमार‍ियों की आशंका बढ़ जाती है।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर व्‍यक्‍त‍ि को पील‍िया के लक्षण जैसे पीली त्‍वचा या आंखों में पीलापन नजर आए, तो डॉक्‍टर से सलाह लें।
  • पेट में दर्द या सूजन में भी च‍िक‍ित्‍सा सलाह लें।
  • थकान या वजन कम होना।
  • गहरे रंग का पेशाब होने पर डॉक्‍टर से सलाह लें।

इसके अलावा आसानी से चोट लगना, भ्रम की स्‍थि‍त‍ि, पैरों में सूजन नजर आने पर भी तुरंत डॉक्‍टर से सलाह लें।
LFT, Ultrasound या Fibroscan जैसे रूटीन टेस्‍ट की मदद से फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍ित‍ि का पता लगाने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

Gastroenterologist & Hepatologist Dr. K. S. Somasekhar Rao से हुई बातचीत के आधार पर हमें पता चलता है क‍ि फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍ित‍ि में पूरी तरह से अल्‍कोहल से परहेज करना चाह‍िए। संतुल‍ित आहार और फॉलो अप से इस स्‍थि‍त‍ि को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। American Association For The Study Of Liver Disease की स्‍टडी और अन्‍य स्‍टडी र‍िव्‍यू के आधार पर पता चलता है क‍ि अल्‍कोहल की कम मात्रा भी फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍ित‍ि को गंभीर बना सकती है इसल‍िए मरीज के ल‍िए परहेज जरूरी है।

FAQ

  • अल्‍कोहल लिवर को कैसे प्रभावित करती है?

    अल्‍कोहल ल‍िवर की कोश‍िकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। अल्‍कोहल के ज्‍यादा सेवन से ल‍िवर में फैट जमा हो सकता है और सूजन बढ़ सकती है। लंबे समय तक अल्‍कोहल का सेवन करने से ल‍िवर की कार्यक्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है।
  • अल्‍कोहल‍िक फैटी लिवर क्या है?

    अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर में लंबे समय तक ज्‍यादा अल्‍कोहल के सेवन से ल‍िवर की कोश‍िकाओं में फैट जमा होने लगता है। यह अल्‍कोहल से संबंध‍ित ल‍िवर ड‍िजीज का शुरुआती चरण माना जाता है।
  • अल्‍कोहल‍िक हेपेटाइटिस क्या है?

    अल्‍कोहल‍िक हेपेटाइट‍िस एक गंभीर स्‍थ‍ित‍ि है ज‍िसमें ज्‍यादा अल्‍कोहल के कारण ल‍िवर में सूजन हो सकती है। अल्‍कोहल‍िक हेपेटाइट‍िस का इलाज न होने पर स्‍थि‍त‍ि गंभीर हो सकती है।
  • अल्‍कोहल‍िक सिरोसिस क्या है?

    अल्‍कोहल‍िक स‍िरोस‍िस ल‍िवर रोग का एक स्‍टेज है ज‍िसमें ल‍िवर की कोश‍िकाएं डैमेज होने के कारण स्‍कार ट‍िशूज बन जाते हैं। इससे ल‍िवर की कार्यक्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है और अन्‍य गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं। 
  • अल्‍कोहल‍िक लिवर रोग की जांच कैसे होती है?

    अल्‍कोहल‍िक ल‍िवर रोग का इलाज डॉक्‍टर मरीज के लक्षण, शारीर‍िक जांच के आधार पर करते हैं। ब्‍लड टेस्‍ट, ल‍िवर फंक्‍शन टेस्‍ट, अल्‍ट्रासाउंड, गंभीर मामलों में बायोप्‍सी की मदद से बीमारी की पुष्टि की जाती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 04, 2026 13:15 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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