लिवर शरीर के अहम अंगों में से एक है। जब भी लिवर से जुड़ी बीमारियों की बात आती है, तो अक्सर लोगों के मन में फैटी लिवर, सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी समस्याएं आती हैं, लेकिन लिवर से जुड़ी एक ऐसी गंभीर समस्या है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं और यह नजरअंदाज हो जाती है। यह समस्या शरीर की मांसपेशियों से जुड़ी होती है, जिसे सार्कोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। अगर इन पर ध्यान न दिया जाए तो मरीज के स्वास्थ्य पर बुरा असर हो सकता है। ऐसे में आइए Dr. Sharad Malhotra, Senior Consultant & Director Gastroenterology, Hepatology & Therapeutic Endoscopy, Aakash Health Care और Dr. Kunal Das, Director - Gastroenterology, Hepatology & Endoscopy, Yashoda Medicity से जानें लिवर मरीजों को सार्कोपेनिया का खतरा क्यों होता है?
क्या है सार्कोपेनिया?
डॉ. कुणाल दास के अनुसार, "सार्कोपेनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और उनका मास (Muscle Mass) कम हो जाता है। आमतौर पर इसे बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन लिवर रोगियों में यह समस्या बीमारी को और गंभीर बना सकती है, साथ ही अस्पताल में भर्ती होने, इंफेक्शन, गिरने, सर्जरी के बाद कॉम्लीकेशन और मृत्यु के खतरे को भी बढ़ा सकती है।"
लिवर की बीमारी में मांसपेशियां कमजोर क्यों होती हैं?
डॉ. कुणाल दास का कहना है, "लंबे समय तक लिवर की बीमारी रहने पर शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। लिवर, प्रोटीन बनाने में अहम भूमिका निभाता है, जिसके कारण शरीर में प्रोटीन का निर्माण प्रभावित होता है और शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पाता है, जिससे मांसपेशियों पर असर पड़ने लगता है।"
डॉ. कुणाल आगे बताते हैं, "इसके कारण कई मरीजों में भूख कम लगने, पोषण की कमी, शरीर में सूजन, हार्मोनल बदलाव और लगातार रहने वाली सूजन (इंफ्लेमेशन) जैसी स्थितियां भी मांसपेशियों को तेजी से कमजोर करती हैं। इसी वजह से कुछ मरीजों का वजन नॉर्मल होने के बाद भी उनकी मांसपेशियां लगातार कम होती रहती हैं।"
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साल 2014 में World Journal Of Gastroenterology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, लिवर के मरीजों (खासकर सिरोसिस से पीड़ित लोगों) के लिए मांसपेशियों का नुकसान यानी सार्कोपेनिया, एक छुपा हुआ और गंभीर खतरा है। यह किसी भी वजन या बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले व्यक्ति को हो सकता है। अक्सर शरीर में पानी जमा होने के कारण मरीज का वजन नॉर्मल या ज्यादा दिखता है, जिससे मांसपेशियों की इस कमी का पता नहीं चल पाता, लेकिन CT स्कैन या MRI के जरिए इसे आसानी से पकड़ा जा सकता है।
किन मरीजों में अधिक रहता है खतरा?
डॉ. शरद के अनुसार, "सार्कोपेनिया सिर्फ उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या नहीं है। जिन लोगों को लंबे समय से लिवर की बीमारी है, उनमें सार्कोपेनिया होने की संभावना ज्यादा हो सकती है, खासकर फैटी लिवर, सिरोसिस, हेपेटाइटिस या अन्य लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों के लिए सिर्फ लिवर की जांच ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों की स्थिति की नियमित जांच करना भी जरूरी माना जाता है। अगर समय पर इसकी पहचान नहीं होती है, तो मरीज की रिकवरी प्रभावित हो सकती है और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे इलाज के बाद भी स्वास्थ्य खराब हो सकता है।"
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इन शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉ. शरद बताते हैं, सार्कोपेनिया की शुरुआत अक्सर नॉर्मल कमजोरी जैसी लगती है। यही कारण है कि कई लोग इसे उम्र बढ़ने या थकान का असर समझकर अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है और अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
- लगातार कमजोरी और थकान महसूस होना
- सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना
- हाथों की पकड़ कमजोर होना
- बार-बार संतुलन बिगड़ना या गिर जाना
- चलने की स्पीड पहले से धीमी होना
- रोज के नॉर्मल काम करने में परेशानी महसूस होना
मांसपेशियों को हेल्दी रखने के लिए पोषण है जरूरी
डॉ. कुणाल का कहना है, "लिवर रोगियों के लिए सिर्फ दवाइयां पर्याप्त नहीं होती हैं। इसके लिए सही पोषण और नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटीज भी इलाज का अहम हिस्सा हैं। शरीर की मांसपेशियों को हेल्दी बनाए रखने के लिए बैलेंस डाइट, पर्याप्त प्रोटीन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) जरूरी हो सकता है। हालांकि, हर मरीज की जरूरत अलग होती है, इसलिए खानपान में बदलाव या कोई भी एक्सरसाइज बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करनी चाहिए।"
डॉ. कुणाल आगे बताते हैं, "कुछ मरीज यह सोचकर प्रोटीन कम कर देते हैं कि इससे लिवर पर दबाव बढ़ेगा, जबकि ज्यादातर मामलों में ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए मरीज को अपनी डाइट का फैसला हेपेटोलॉजिस्ट और क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।"
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कैसे करें सार्कोपेनिया की पहचान?
डॉ. कुणाल बताते हैं, सार्कोपेनिया की पहचान सिर्फ वजन देखकर नहीं की जा सकती है। इसके लिए डॉक्टर मरीज की मांसपेशियों की ताकत, चलने की क्षमता, पोषण की स्थिति और जरूरत पड़ने पर खास टेस्ट का सहारा लेते हैं। लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को नियमित फॉलो-अप के दौरान मांसपेशियों की स्थिति का पता लगाना भी इलाज का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसा करने से समय रहते समस्या का पता लगाया जा सकता है, जिससे इसका इलाज किया जा सकता है।
लिवर रोगियों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
डॉ. कुणाल आगे कहते हैं, अगर किसी व्यक्ति को फैटी लिवर, सिरोसिस, हेपेटाइटिस या लंबे समय से लिवर की बीमारी है, तो उसे अपने इलाज के साथ-साथ पोषण और मांसपेशियों की सेहत पर भी खास ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, शराब से दूरी बनाए रखना, बैलेंस डाइट लेना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन, समय-समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार, फिजिकल एक्टिविटीज बनाए रखना बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है, साथ ही मांसपेशियों की कमजोरी को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लिवर की बीमारी का इलाज सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं है। अगर मांसपेशियों की कमजोरी को समय रहते पहचान कर उसका इलाज किया जाए, तो गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा भी कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
लिवर की बीमारी का असर केवल लिवर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर की मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकता है। सार्कोपेनिया ऐसी स्थिति है, जिसकी समय पर पहचान और उचित देखभाल मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सही पोषण, डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त प्रोटीन, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर जांच के माध्यम से इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए यदि लिवर की बीमारी के साथ लगातार कमजोरी, मांसपेशियों की ताकत में कमी या रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई महसूस हो रही हो, तो इसे सामान्य मानकर टालने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सही कदम है।
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FAQ
लिवर खराब होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
लिवर खराब होने पर व्यक्ति को लगातार थकान होने, बिना किसी कारण के वजन कम होने, स्किन और आंखों का पीला पड़ना, पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या सूजन आने, भूख न लगने और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।सार्कोपेनिया के क्या लक्षण हैं?
सार्कोपेनिया में मांसपेशियों के कमजोर होने, थकान होने, एनर्जी की कमी, चलने की स्पीड के स्लो होने और बैलेंस बिगड़ने की समस्या हो सकती है।
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Current Version
Jul 16, 2026 16:01 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jul 16, 2026 16:01 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra