Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kamalesh A , Senior Consultant Physician - Internal Medicine

यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण क्‍या हैं?

यूर‍िक एस‍िड हमारे शरीर में बनने वाला एक वेस्‍ट प्रोडक्‍ट है जो बढ़ने लगे या जमा हो जाए, तो शरीर में कई समस्‍याएं हो सकती हैं। शरीर में यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर UTI, क‍िडनी स्‍टोन, थकान जैसे लक्षण नजर आते हैं। अन्‍य लक्षणों के बारे में आगे जानते हैं।

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यूर‍िक एस‍िड को साइलेंट समस्‍या भी कहा जाता है क्‍योंक‍ि इसके लक्षण अक्‍सर जल्‍दी महसूस नहीं होते। इसके बढ़ने से जोड़ों में दर्द महसूस होता है, क‍िडनी में स्‍टोन हो सकते हैं इसल‍िए यूर‍िक एस‍िड के लेवल को नॉर्मल रखना जरूरी है। यूर‍िक एस‍िड लगातार बढ़ा होगा, तो हाई बीपी, मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम, टाइप 2 डायबि‍टीज या क‍िडनी से संबंध‍ित बीमारि‍यों का खतरा बढ़ जाता है। यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने पर जो लक्षण नजर आते हैं उन्‍हें अक्‍सर लोग समझ नहीं पाते हैं ज‍िसके कारण शारीर‍िक समस्‍या बड़ा रूप ले लेती है। इसल‍िए यह जरूरी है क‍ि यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने के लक्षणों को समय पर पहचानकर इलाज क‍िया जाए। यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने के लक्षण और उससे संंबंंध‍ित जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kamalesh A, Consultant Physician, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

यूर‍िक एस‍िड क्‍या होता है?

MedlinePlus के मुता‍ब‍िक, यूर‍िक एस‍िड एक ऐसा केम‍िकल है जो शरीर का वेस्‍ट प्रोडक्‍ट कहलाता है। ज्‍यादातर यूरिक एसिड ब्‍लड में घुल जाता है और किडनी तक पहुंचता है। क‍िडनी से यह पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर शरीर बहुत ज्‍यादा यूरिक एसिड बनाता है या उसे ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता है, तो व्‍यक्‍त‍ि बीमार पड़ सकता है। खून में यूरिक एसिड का लेवल ज्‍यादा होने की स्‍थि‍त‍ि को मेड‍िकल भाषा में हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) कहते हैं।

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यूर‍िक एस‍िड बढ़ने के लक्षण क्‍या हैं?

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गाउट

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर सबसे कॉमन लक्षण नजर आता है जोड़ों में दर्द होना। यह दर्द घुटने के जोड़, ए़ड़ियों या तलवों में, टखनों या हाथ-पैर की उंगल‍ियों में हो सकता है। यूर‍िक एस‍िड के क्र‍िसटल्‍स अक्‍सर जोड़ों में जमा हो जाते हैं ज‍िसके कारण इर‍िटेशन होती है और जोड़ों में सूजन भी आ सकती है। इस कंडीशन को गाउट कहते हैं।

क‍िडनी स्‍टोन

अगर क‍िडनी स्‍टोन बार-बार हो रहे हैं, तो यूर‍िक एस‍िड की जांच करानी चाह‍िए। क‍िडनी स्‍टोन होने पर पेट के साइड में तेज दर्द, पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना और पेशाब में ब्‍लड जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

थकान

यूर‍िक एस‍िड के बढ़ने से कुछ लोगों को असामान्‍य थकान होती है ज‍िसका कारण कई बार समझ नहीं आता है।

सूजन

हाई यूर‍िक एस‍िड के कारण जोड़ों में सूजन आ सकती है। जोड़ों को छूने पर दर्द महसूस हो सकता है और सूजन कई द‍िनों तक रह सकती है। गाउट के कारण जोड़ों की त्‍वचा लाल और गर्म हो जाती है। यह सूजन का संकेत है और ऐसे लक्षण गाउट अटैक के दौरान नजर आते हैं।

हाथ-पैर में झनझनाहट

हाई यूर‍िक एस‍िड की वजह से हाथ और पैरों में झनझनाहट (Tingling Sensation) या सुन्नपन (Numbness) महसूस हो सकता है। नसों में दबाव की वजह से ऐसा होता है। जो लोग लंबे समय तक बैठते हैं उनमें भी ऐसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

चलने में द‍िक्‍कत होना

हाई यूर‍िक एस‍िड में जोड़ों में दर्द के कारण चलने में मुश्‍क‍िल हो सकती है। पैर पर वजन डालने पर भी परेशानी होती है। ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में लंबे समय तक खड़े रहने में द‍िक्‍कत होती है और लोग लंगड़ाकर चलने लगते हैं।

हर व्‍यक्‍त‍ि में हाई यूर‍िक एस‍िड के लक्षण अलग हो सकते हैं। कई बार पहले से कोई बड़ा लक्षण नजर नहीं आता है। इसल‍िए अगर बार-बार जोड़ों में दर्द, सूजन या किडनी से जुड़ी समस्या हो रही है, तो जांच कराएं।

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महिलाओं में Uric Acid के लक्षण अलग क्यों होते हैं?

महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन किडनी के जरिए यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है, यही कारण है क‍ि प्रजनन आयु में महिलाओं में यूरिक एसिड का लेवल आमतौर पर कम रहता है। वहीं मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है ज‍िससे यूरिक एसिड बढ़ने लगता है। मह‍िलाओं में ये लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • जोड़ों में दर्द
  • थकान और कमजोरी
  • बार-बार पेशाब आना
  • जकड़न
  • चलने-फिरने में परेशानी

महिलाओं में ये लक्षण अक्सर ज्‍यादा स्पष्ट नहीं होते हैं इसलिए इसे सामान्य जोड़ों का दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। अगर बार-बार जोड़ों में दर्द या सूजन हो, तो यूरिक एसिड की जांच कराएं।

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लो यूर‍िक एस‍िड क्‍या है?

हाइपोयूरिसीमिया (Hypouricemia) या लो यूर‍िक एस‍िड कॉमन समस्‍या नहीं है। यह स्‍थ‍िति‍ बहुत दुर्लभ मामलों में देखी जाती है। इस स्‍थ‍ित‍ि में यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर सामान्‍य से कम हो जाता है। लो यूर‍िक एस‍िड का इलाज कारण पर न‍िर्भर करता है। अगर यह समस्‍या क‍िसी दवा के कारण है, तो डॉक्‍टर दवा बदल सकते हैं। क‍िडनी या ल‍िवर की समस्‍या में इलाज की जरूरत होती है। सामान्‍य मामलों में संंतुलि‍त आहार और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करके लक्षणों को कंट्रोल क‍िया जा सकता है।

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लो यूर‍िक एस‍िड के लक्षण

  • थकान
  • तंत्रिका संबंधी समस्याएं
  • दवाओं या दुर्लभ बीमारियों के कारण किडनी की कार्यक्षमता में गड़बड़ी

लो यूर‍िक एस‍िड के कारण

  • आनुवंशिक
  • किडनी की समस्याएं
  • डायबिटीज
  • लिवर की बीमारी
  • कम प्रोटीन या लो प्यूरीन वाला आहार

हाई यूर‍िक एस‍िड और जोड़ों की समस्‍या के लक्षणों में अंतर कैसे करें?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि हाई यूर‍िक एस‍िड और जोड़ों की समस्‍या के लक्षण अक्‍सर एक जैसे ही लगते हैं, लेक‍िन इनमें थोड़ा अंतर होता है जैसे-

दर्द

हाई यूर‍िक एस‍िड में दर्द अचानक बहुत तेज होता है वहीं अर्थराइट‍िस या अन्‍य जोड़ों की समस्‍या में दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है और लंबे समय तक बना रहता है।

दर्द की अवध‍ि

हाई यूर‍िक एस‍िड में गाउट अटैक बीच-बीच में आ सकते हैं ज‍िसके कारण कुछ द‍िन दर्द रहता है और फ‍िर ठीक हो जाता है और फ‍िर अचानक दोबारा होता है। वहीं दूसरी ओर अर्थराइट‍िस का दर्द स्‍थायी होता है और धीरे-धीरे बढ़ता है।

सूजन

हाई यूर‍िक एस‍िड में जोड़ों की सूजन अध‍िक नजर आती है और छूने पर जोड़ गर्म महसूस होते हैं। सामान्‍य जोड़ों की समस्‍या में रेडनेस और गर्माहट नजर आती है, लेक‍िन तीव्रता हल्‍की होती है।

हाई यूर‍िक एस‍िड का पता कैसे करें?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि अगर व्‍यक्‍त‍ि को शरीर में हाई यूर‍िक एस‍िड के लक्षण महसूस हों, तो पुष्‍ट‍ि के ल‍िए आसान ब्‍लड टेस्‍ट क‍राया जा सकता है। कुछ मामलों में यूर‍िन टेस्‍ट, जॉइंंट फ्लूइड टेस्‍ट और अल्‍ट्रासाउंड की जरूरत भी पड़ सकती है। अगर व्‍यक्‍त‍ि डायबि‍टीज, हाई बीपी, मोटापा या क‍िडनी का मरीज है, तो न‍ियम‍ित जांच करवाएं।

हाई यूर‍िक एस‍िड क‍िन लोगों को ज्‍यादा प्रभाव‍ित करता है?

  • Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि क‍िसी को भी हाई यूर‍िक एस‍िड की समस्‍या हो सकती है, लेक‍िन यह समस्‍या मह‍िलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्‍यादा देखने को म‍िलती है। 2025 में PLOS ONE नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, हाई यूर‍िक एस‍िड होने की दर पुरुषों में 21.1 और मह‍िलाओं में 17.1 प्रत‍िशत पाई गई।
  • ज्‍यादा उम्र में हाई यूर‍िक एस‍िड की आशंका बढ़ सकती है। 2018 में Scientific Reports नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 45 से 49 साल में लगभग 3.5 फीसदी और वहीं 70 से ज्‍यादा उम्र में हाई यूर‍िक एस‍िड की संभावना 10.3 प्रत‍िशत देखी गई।
  • हाई यूर‍िक एस‍िड का खतरा उन लोगों में भी ज्‍यादा देखा जा सकता है जो अल्‍कोहल का सेवन करते हैं। 2025 में Frontiers In Nutrition में प्रकाश‍ित के मुताब‍िक, अल्‍कोहल पीने वाले लोगों में हाई यूर‍िक एस‍िड और गाउट का खतरा 69 प्रत‍िशत पाया गया। स्‍टडी ने बताया क‍ि ज‍ितना ज्‍यादा अल्‍कोहल का सेवन करेंगे, हाई यूर‍िक एस‍िड का खतरा उतना ज्‍यादा हो सकता है।
  • ज‍िन लोगों को क‍िडनी की बीमारी है, जो लोग हाई बीपी के मरीज हैं या ज‍ो मोटापे का श‍िकार हैं, उन्‍हें भी हाई यूर‍िक एस‍िड का खतरा हो सकता है।

यूर‍िक एस‍िड बढ़ने का इलाज कैसे क‍िया जाता है?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि यूर‍िक एस‍िड बढ़ने का इलाज हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और डाइट के साथ क‍िया जाता है। अगर यूर‍िक एस‍िड की मात्रा ज्‍यादा है या गाउट हो चुका है, तो डॉक्‍टर दवाएं दे सकते हैं। जब जोड़ों में दर्द या सूजन हो या यूर‍िक एस‍िड ज्‍यादा हो या क‍िडनी में स्‍टोन या समस्‍या हो, तो तुरंत इलाज कराना जरूरी हो जाता है। इलाज के ल‍िए सीरम यूर‍िक एस‍िड, क‍िडनी फंक्‍शन टेस्‍ट और कुछ मामलों में जॉइंंट फ्लूइड टेस्‍ट (Joint Fluid Test) क‍िया जा सकता है।

डॉक्‍टर के पास कब जाएं?

  • अचानक जोड़ों में तेज दर्द हो, सूजन, रेडनेस या गर्माहट महसूस हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • बुखार के साथ जोड़ों में दर्द होने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • बार-बार गाउट अटैक आ रहे हों।
  • यूर‍िक एस‍िड लगातार बढ़ा हुआ हो।
  • क‍िडनी स्‍टोन या क‍िडनी की समस्‍या हो।

न‍िष्‍कर्ष:

Consultant Physician Dr. Kamalesh A के साथ हुई बातचीत और स्‍टडीज के आधार पर हमें पता चलता है क‍ि यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर गाउट, UTI, क‍िडनी स्‍टोन, थकान, सूजन, हाथ-पैर में झनझनाहट, चलने में द‍िक्‍कत जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। समय पर जांंच, दवाएं और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के साथ हाई यूर‍िक एस‍िड को कंट्रोल क‍िया जा सकता है।

FAQ

  • क्या यूरिक एसिड बढ़ने पर हमेशा लक्षण दिखते हैं?

    यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर हमेशा लक्षण नजर आए, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों में हाई यूर‍िक एस‍िड होने पर भी दर्द या सूजन नजर नहीं आती है। अक्‍सर ऐसे मरीजों को लक्षण तब द‍िखते हैं जब जोड़ों में क्र‍िस्‍टल जमा होकर गाउट बनता है। 
  • क्‍या हाई यूर‍िक एस‍िड हार्ट को प्रभाव‍ित करता है?

    हाई यूर‍िक एस‍िड का संबंध हाई बीपी, मोटापा जैसी समस्‍याओं से है। यह सीधे तौर पर हार्ट रोग का कारण नहीं बनता, लेक‍िन लंबे समय तक हाई यूर‍िक एस‍िड की स्‍थि‍त‍ि में हार्ट को नुकसान हो सकता है।
  • हाई यूर‍िक एस‍िड के खतरे क्‍या हैं?

    हाई बीपी, गाउट ड‍िजीज हो सकता है, क‍िडनी स्‍टोन या क्रॉन‍िक क‍िडन‍ी ड‍िजीज की समस्‍या हो सकती है। 
  • हाई यूर‍िक एस‍िड में क्‍या खाएंं?

    हरी सब्‍ज‍ियां, फल, अखरोट, अजवाइन का पानी, हाई फाइबर फूड्स जैसे दल‍िया, ओट्स, क्विनोआ, बीन्‍स का सेवन कर सकते हैं। पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍ीने से यूर‍िक एस‍िड को कम करने में मदद म‍िल सकती है।
  • यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर क्‍या न खाएं?

    यूर‍िक एस‍िड बढ़ने पर बाहर का खाना, जंक फूड, प्रोसेस्‍ड फूड्स, रेड मीट, फ‍िश, अल्‍कोहल का सेवन करने से बचें। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 16, 2026 12:04 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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