Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

यूरिक एसिड और डायबिटीज का क्या है कनेक्शन? डॉक्टर से जानिए

यूरिक एसिड और डायबिटीज के बीच गहरा संबंध पाया जाता है। शरीर में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, डायबिटीज होने पर किडनी फंक्शन प्रभावित होता है, जिससे यूरिक एसिड बाहर निकलने में दिक्कत होती है।

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आज के समय में खराब लाइफस्टाइल, अनियमित डेली रूटीन, तनाव और फिजिकली एक्टिव न रहने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म गंभीर रूप से प्रभावित होता है, जिससे डायबिटीज और हाई यूरिक एसिड जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। यही कारण है कि अब ये बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अक्सर लोग इन दोनों समस्याओं को अलग-अलग समझते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार इनका गहरा संबंध है। दरअसल, दोनों ही स्थितियां शरीर की मेटाबॉलिक गड़बड़ी से जुड़ी होती हैं। जब शरीर में ब्लड शुगर का लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इंसुलिन का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिसे Insulin Resistance कहा जाता है। यही स्थिति यूरिक एसिड के लेवल को भी प्रभावित करती है। इस लेख में VNA Hospital के यूरोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. विनीत मल्होत्रा से जानिए, यूरिक एसिड और डायबिटीज का संबंध क्या है?

यूरिक एसिड और डायबिटीज का संबंध क्या है?

डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, ये दोनों बीमारियां अलग-अलग नहीं बल्कि आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। एक बीमारी का बढ़ना दूसरी के खतरे को भी बढ़ा सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। 

1. मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की समस्या

यूरिक एसिड और डायबिटीज दोनों को मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की कैटेगरी में रखा जाता है, जिसमें शरीर की एनर्जी बनाने और उपयोग करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है। साल 2017 में Reproductive Toxicology जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आज के समय में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों का बढ़ना केवल खराब डाइट, कम एक्सरसाइज या बढ़ती उम्र की वजह से ही नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय कारण भी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। खासतौर पर Endocrine Disrupting Chemicals ऐसे केमिकल्स हैं जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकते हैं। इस रिसर्च से यह भी पता चलता है कि अगर जीवन के शुरुआती दौर में इन केमिकल्स का संपर्क होता है, तो आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ये प्रभाव कभी-कभी अगली पीढ़ियों तक भी जा सकते हैं। इसलिए, इन बीमारियों से बचाव के लिए सिर्फ लाइफस्टाइल सुधार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण में मौजूद हानिकारक केमिकल्स के संपर्क को कम करना भी बहुत जरूरी है।

2. इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या

इंसुलिन रेजिस्टेंस वह स्थिति है जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से रिएक्ट नहीं करतीं। यह डायबिटीज का मुख्य कारण है, लेकिन इसका प्रभाव यूरिक एसिड पर भी पड़ता है। MDPI के Journal of Clinical Medicine में साल 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यूरिक एसिड और टाइप 2 डायबिटीज के बीच एक गहरा संबंध है। स्टडी से पता चलता है कि ब्लड में यूरिक एसिड का हाई लेवल (Hyperuricemia) न केवल शरीर में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' को बढ़ाता है, बल्कि यह भविष्य में डायबिटीज होने के खतरे को भी काफी ज्यादा बढ़ा देता है। 

दरअसल, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड शरीर में सूजन और 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' पैदा करता है, जो अग्न्याशय यानी पैंक्रियास की उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है जो इंसुलिन बनाती हैं।

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The American Journal of Medicine की साल 2010 में प्रकाशित क्लिनिकल रिसर्च स्टडी के अनुसार, ब्लड में यूरिक एसिड (Uric Acid) का हाई लेवल भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को काफी बढ़ा देता है। यह स्टडी दो पीढ़ियों (फ्रामिंघम हार्ट स्टडी) के डेटा पर आधारित है, जो स्पष्ट करती है कि यह खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में भी समान रूप से देखा गया है।

दिलचस्प बात यह है कि यूरिक एसिड का बढ़ना अन्य कारकों जैसे कि मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर भी डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है। सरल शब्दों में, यदि किसी व्यक्ति के खून में यूरिक एसिड ज्यादा है, तो उसे भविष्य में डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए, समय रहते यूरिक एसिड की जांच और इसे कंट्रोल करना डायबिटीज से बचने के लिए एक जरूरी कदम साबित हो सकता है।

यूरिक एसिड और डायबिटीज का मैकेनिज्म कैसे काम करता है?

यूरिक एसिड और डायबिटीज दोनों का संबंध शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बैलेंस से जुड़ा होता है। जब शरीर में ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति बनती है। इस स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे यूरिक एसिड का लेवल खून में बढ़ने लगता है।

दूसरी ओर, जब यूरिक एसिड बढ़ता है, तो यह शरीर में इंफ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाता है। इससे पैंक्रियाज की सेल्स प्रभावित होती हैं, जो इंसुलिन बनाती हैं। इसके कारण इंसुलिन का प्रोडक्शन और फंक्शन दोनों प्रभावित होते हैं और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इस प्रकार डायबिटीज यूरिक एसिड को बढ़ाती है और बढ़ा हुआ यूरिक एसिड डायबिटीज को और गंभीर बना देता है।

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यूरिक एसिड और डायबिटीज कैसे जुड़े हैं और आपको क्या करना चाहिए?

यूरिक एसिड और डायबिटीज के बीच संबंध मुख्य रूप से इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के जरिए बनता है। जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर बढ़ता है और साथ ही यूरिक एसिड का एक्सक्रिशन कम हो जाता है। अगर किसी व्यक्ति में हाई यूरिक एसिड है, तो उसे भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा होता है। वहीं, डायबिटीज के मरीजों में गाउट और जोड़ों की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

आपको क्या करना चाहिए-

  • नियमित रूप से ब्लड शुगर और यूरिक एसिड की जांच कराएं
  • वजन को कंट्रोल में रखें
  • हाई प्रोटीन और हाई शुगर डाइट से बचें
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें
  • डॉक्टर की सलाह से दवाइयों का सेवन करें

यूरिक एसिड और डायबिटीज को एक साथ कैसे मैनेज करें?

यूरिक एसिड और डायबिटीज दोनों स्थितियों को मैनेज करने के लिए सबसे पहले ब्लड शुगर और यूरिक एसिड दोनों की नियमित मॉनिटरिंग करें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों का सेवन करें और किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें। डाइट में लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स जैसे साबुत अनाज, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त चीजें शामिल करें। साथ ही, हाई प्यूरीन फूड्स जैसे रेड मीट और शराब से दूरी बनाएं। हाइड्रेशन भी बहुत जरूरी है, पर्याप्त पानी पीने से यूरिक एसिड शरीर से बाहर निकलने में मदद मिलती है। इसके अलावा, नियमित एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, योग ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

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The Connection Between Uric Acid and Diabetes

डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव

  • सबसे पहले, रोजाना फिजिकली एक्टिव रहना जरूरी है। कम से कम 30-45 मिनट की वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करें।
  • नींद का भी खास ध्यान रखें। 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद न मिलने पर हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे ब्लड शुगर और यूरिक एसिड दोनों बढ़ सकते हैं।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह से बंद करना चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही मेटाबॉलिज्म को खराब करते हैं। साथ ही, स्ट्रेस को मैनेज करना भी जरूरी है, इसके लिए ध्यान, प्राणायाम का अभ्यास करें।
  • डाइट में फ्रेश फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें। जंक फूड, शुगर ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं।

कब दोनों स्थितियां खतरनाक हो जाती हैं?

जब यूरिक एसिड और डायबिटीज दोनों ही अनियंत्रित हो जाते हैं, तो ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी, आंखों और नसों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड गाउट, किडनी स्टोन और जोड़ों में गंभीर सूजन का कारण बन सकता है। अगर दोनों स्थितियां साथ में बिगड़ती हैं, तो किडनी फंक्शन पर डबल प्रभाव पड़ता है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, हार्ट डिजीज का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, अगर बार-बार जोड़ों में दर्द, ज्यादा थकान, धुंधला दिखना या पेशाब से जुड़ी समस्याएं दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

The Connection Between Uric Acid and Diabetes

कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए?

कई लोग छोटी-छोटी गलतियों के कारण इन दोनों बीमारियों को और गंभीर बना लेते हैं।

  • सबसे बड़ी गलती है लक्षणों को नजरअंदाज करना और समय पर जांच न कराना।
  • दूसरी आम गलती है सेल्फ-मेडिकेशन यानी बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना या बंद कर देना। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
  • डाइट में लापरवाही भी एक बड़ा कारण है, ज्यादा मीठा, प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट और शराब का सेवन यूरिक एसिड और ब्लड शुगर दोनों को बढ़ाता है।
  • कई लोग एक्सरसाइज को नजरअंदाज करते हैं या बहुत ज्यादा क्रैश डाइटिंग करते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को और खराब कर सकता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

यूरिक एसिड और डायबिटीज दोनों ही ऐसी समस्याएं हैं, जो शुरुआत में हल्की लग सकती हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए शरीर में कुछ असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपको बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना, तेजी से वजन कम होना या लगातार थकान महसूस होना जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो यह डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। वहीं, जोड़ों में दर्द, खासकर पैर के अंगूठे में तेज दर्द, सूजन या चलने-फिरने में दिक्कत होना हाई यूरिक एसिड के लक्षण हो सकते हैं।

इसके अलावा, अगर आपको पहले से डायबिटीज है और साथ में जोड़ों में दर्द की समस्या महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह संकेत हो सकता है कि यूरिक एसिड का लेवल भी बढ़ रहा है। अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री में डायबिटीज या गाउट की समस्या रही है, तो आपको और भी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही, अगर आपकी रिपोर्ट में बार-बार यूरिक एसिड या ब्लड शुगर का लेवल बढ़ा हुआ आ रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। सही समय पर इलाज से इन दोनों बीमारियों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

यूरिक एसिड और डायबिटीज भले ही अलग-अलग बीमारियां लगती हों, लेकिन वास्तव में इनका गहरा संबंध है। दोनों ही शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं हैं, जो खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं। जब शरीर में ब्लड शुगर का लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता और इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति बन जाती है। यही स्थिति यूरिक एसिड के लेवल को भी प्रभावित करती है, जिससे यह शरीर में जमा होने लगता है। इसके अलावा, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड भी शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर डायबिटीज के खतरे को और बढ़ा सकता है। इसका मतलब साफ है कि अगर आप इन दोनों में से किसी एक समस्या से जूझ रहे हैं, तो दूसरी समस्या का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए और किसी भी तरह के लक्षण नजर आने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

FAQ

  • यूरिक एसिड क्यों बढ़ता है?

    यूरिक एसिड एक केमिकल है जो शरीर में प्यूरीन (Purine) के टूटने से बनता है। यह सामान्य रूप से पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है। मोटापा, जंक फूड, ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना, शराब और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण हाई यूरिक एसिड की समस्या हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
  • क्या डायबिटीज ठीक हो सकती है?

    बिगड़ी लाइफस्टाइल के कारण आजकल डायबिटीज की समस्या बढ़ चुकी है, डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होना मुश्किल होता है।
  • यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में क्या दिक्कत आती है?

    यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में दर्द खासकर पैर के अंगूठे में दर्द, सूजन, लालिमा और चलने में परेशानी जैसे लक्षण सबसे पहले नजर आते हैं।
  • यूरिक एसिड को कैसे कंट्रोल करें?

    यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए ज्यादा पानी पिएं, हेल्दी डाइट लें, वजन कंट्रोल रखें और डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा लें। कभी भी यूरिक एसिड बढ़ने पर बिना डॉक्टर की सलाह से दवाएं नहीं लेनी चाहिए।
  • यूरिक एसिड में क्या नहीं खाना चाहिए?

    अगर किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड बढ़ गया है तो रेड मीट, सी-फूड, कुछ तरह की दालों, तली-भुनी चीजें और शराब से बचना चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 11, 2026 19:58 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 11, 2026 19:58 IST

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