Wed Oct 7, 2026 | 02:20 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

eGFR टेस्ट से किडनी की सेहत का पता कैसे चलता है? जानें डॉक्टर से

किडनी फंक्शन को जानने के लिए eGFR टेस्ट सबसे सटीक तरीकों में से एक है। इससे किडनी की पूरी जानकारी मिल सकती है। इस लेख में eGFR की पूरी जानकारी दी गई है। इसमें eGFR की नॉर्मल रेंज, टेस्ट की प्रक्रिया और eGFR स्कोर को बेहतर करने के तरीकों को शामिल किया गया है। 
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किडनी का मुख्य काम यूरिक एसिड, क्रिएटिनिन और अन्य वेस्ट प्रोडक्ट्स को छानना है। जब किडनी यूरिक एसिड को छान नहीं पाती, तो शरीर में सूजन, जोड़ों में दर्द से लेकर पेशाब में झाग आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे में किडनी की कार्यक्षमता को मापने के लिए डॉक्टर आमतौर पर eGFR टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। eGFR की पूरी जानकारी लेने के लिए हमने VNA Hospital के यूरोलॉजी, सेक्सोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. विनीत मल्होत्रा से बात की। उन्होंने बताया कि अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा हो जाए, तो किडनी पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ सकता है, इसलिए eGFR टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।

eGFR टेस्ट क्या है?

डॉ. विनीत कहते हैं, "eGFR टेस्ट को estimated Glomerular Filtration Rate कहा जाता है और इस टेस्ट के जरिए पता चलता है कि किडनी कितने अच्छे तरीके से काम कर रही है। eGFR टेस्ट कैलकुलेशन पर बेस्ड होता है, जो बताता है कि किडनी ब्लड को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है। किडनी में छोटे-छोटे फिल्टर होते हैं, जिन्हें ग्लोमेरुली कहते हैं। ग्लोमेरुली किडनी के बहुत ही छोटे फिल्टरिंग यूनिट्स होते हैं, जिनमें बहुत ही छोटे ब्लड वेसल्स होते हैं। ये शरीर से टॉक्सिन्स को निकालने में मदद करती हैं। eGFR टेस्ट के जरिए मापा जाता है कि एक मिनट में किडनी कितना ब्लड साफ कर रही है।"

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eGFR टेस्ट क्यों किया जाता है?

साल 2024 में IMR Press में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, eGFR न सिर्फ मरीजों के इलाज में, बल्कि क्लिनिकल रिसर्च में भी बहुत महत्वपूर्ण बायोमार्कर की भूमिका निभाता है। जर्नल के मुताबिक अगर eGFR में कमी आती है, तो मरीज को भविष्य में हार्ट से जुड़ी समस्याएं, स्ट्रोक का रिस्क और किडनी फेल होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस टेस्ट के जरिए रिसर्चर्स को यह जानने में मदद मिलती है कि किसी विशेष दवाई का परीक्षण शुरुआती क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों पर करना है या एडवांस्ड क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों पर करना है। इस रिसर्च से बताया गया है कि eGFR की स्क्रीनिंग और क्रोनिक किडनी डिजीज के बारे में लोगों को जागरूक करना जरूरी है।

डॉक्टर eGFR टेस्ट की सलाह कब देते हैं?

डॉ. विनीत कहते हैं कि eGFR का टेस्ट कराने की सलाह उन मरीजों को दी जाती है जो हाई रिस्क फैक्टर्स की कैटेगरी में आते हैं।

  1. डायबिटीज में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल किडनी के फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा सकता है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर किडनी के ब्लड वेसल्स पर प्रेशर डालता है।
  3. मोटापे से ग्रस्त लोगों की किडनी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
  4. 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में किडनी फंक्शन धीरे-धीरे कम हो सकता है।
  5. जिन लोगों में किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर की फैमिली हिस्ट्री होती है, उन लोगों को eGFR कराने की सलाह दी जाती है।
  6. जिन लोगों को पेशाब नॉर्मल से ज्यादा आता है या फिर बहुत कम आता है।
  7. हाथों, पैरों या टखनों में पानी भरने के कारण सूजन आ जाती है।
  8. पेट खराब और भूख न लगने के कारण जी मिचलाना या उल्टी हो सकती है।

eGFR की नॉर्मल रेंज क्या है?

Cleveland Clinic के अनुसार, eGFR टेस्ट की नॉर्मल रेंज आमतौर पर 90 ml/min/1.73m² या उससे अधिक मानी जाती है। अगर किसी का स्कोर 60 से 89 ml/min/1.73m² के बीच है, तो हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए अन्य टेस्ट कराए जा सकते हैं।

eGFR टेस्ट के जरिए किडनी की हेल्थ जानें 

Kidney Disease Improving Global Outcomes गाइडलाइंस के अनुसार, eGFR टेस्ट के परिणामों को ग्रेड में बांटा गया है। 

CKD के स्टेज

eGFR का रिजल्ट (ml/min/1.73m²)

इसका अर्थ

स्टेज 1

90 या उससे अधिक

किडनी को मामूली नुकसान और किडनियों का सामान्य रूप से काम करना

स्टेज 2

60 - 89

किडनी को मामूली नुकसान और किडनी अभी भी काम कर रही हैं

स्टेज 3A

45 - 59

किडनी को हल्का से मध्यम नुकसान और किडनी अच्छे से काम नहीं कर रही

स्टेज 3B

30 - 44

किडनी को मध्यम से गंभीर नुकसान और किडनी बेहतर तरीके से काम नहीं कर रही है

स्टेज 4

15 - 29

किडनी को गंभीर नुकसान और किडनी लगभग काम करना बंद करने के करीब

स्टेज 5

15 से कम

किडनी को सबसे गंभीर नुकसान और किडनी ने काम करना बंद कर चुकी है

मरीज को डायलिसिस की जरूरत कब पड़ती है?

American Kidney Fund के अनुसार, क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) की स्टेज 5 बहुत ही गंभीर कंडीशन मानी जाती है। इसका मतलब है कि किडनी अब खराब हो चुकी है। इस स्टेज में eGFR 15 से कम होता है, ऐसे में किडनियां ब्लड से वेस्ट को फिल्टर करना बंद कर देती है। अगर शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर न निकाला जाए, तो शरीर के अन्य अंग जैसे हार्ट और फेफड़ों पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति में मरीज के शरीर के ब्लड को साफ करने के लिए डायलिसिस की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें मशीनों को जरिए ब्लड को साफ किया जाता है। इसके अलावा, किडनी ट्रांसप्लांट के जरिए शरीर में स्वस्थ किडनी को प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

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टेस्ट कराने से पहले मरीज को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Cleveland Clinic के अनुसार, जिन मरीजों को eGFR टेस्ट कराना होता है, उन्हें टेस्ट के कुछ घंटे पहले तक सिर्फ पानी पीने की ही सलाह दी जा सकती है, लेकिन ठोस आहार लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

  • दवाइयां क्रिएटिनिन के लेवल पर असर डाल सकती हैं, इसलिए टेस्ट से पहले डॉक्टर को दवाइयों के बारे में जरूर बताएं।
  • टेस्ट कराने से एक या दो दिन पहले तक रेड मीट या बहुत ज्यादा प्रोटीन खाने से बचें।
  • टेस्ट से ठीक पहले भारी एक्सरसाइज या जिम जाने से बचें।

eGFR टेस्ट के बाद मरीज क्या करें?

डॉ. विनीत कहते हैं, "eGFR टेस्ट नॉर्मल ब्लड टेस्ट की तरह ही होता है। मरीज की बांह की नस से ब्लड लिया जाता है और उसे लैब में टेस्ट के लिए भेजा जाता है। ब्लड लेने के बाद इंजेक्शन वाली जगह पर छोटी पट्टी या बैंड-एड लगाया जाता है। अगर कोई मरीज पैनिक करता है, तो उसे कुछ समय के लिए आराम करने की सलाह दी जाती है। कुछ देर आराम करने के बाद डॉक्टर मरीज को खड़े होने की सलाह देते हैं। जब मरीज नॉर्मल महसूस करता है, तो उसे घर जाने की सलाह दी जाती है।”

यूरिक एसिड और eGFR के बीच क्या कनेक्शन है?

Journal of Clinical Medicine Research ने चीन के उन मरीजों पर रिसर्च किया, जिन्हें स्टेबल कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) और टाइप 2 डायबिटीज (T2DM) दोनों थे, उनमें eGFR के संबंध को समझने की कोशिश की गई। इस रिसर्च में मरीजों के यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन के लेवल को मापा गया, जिससे eGFR निकाला गया। जिन मरीजों का eGFR स्कोर 60 से कम था, उन्हें क्रोनिक किडनी डिजीज में रखा गया और 6 महीने बाद फिर से चेक किया गया। इन मरीजों में पाया गया कि जिन मरीजों का यूरिक एसिड बढ़ा, उनका eGFR कम होता गया। 6 महीने के बाद भी जब फॉलो-अप लिया गया, तब भी स्थिति जस की तस बनी हुई थी। इस रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों का यूरिक एसिड बहुत ज्यादा था, उनमें किडनी खराब होने का रिस्क 9.18 गुना ज्यादा पाया गया है।

eGFR स्कोर को बेहतर बनाने के तरीके

डॉ. विनीत कहते हैं कि दरअसल क्रोनिक किडनी डिजीज को पूरी तरह से रिवर्स करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन अगर शुरुआती स्टेज में इसका पता चल जाए, तो लाइफस्टाइल में निम्न बदलाव करके इसके बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है।

  1. स्मोकिंग और शराब का सेवन बिल्कुल छोड़ दें।
  2. नमक की मात्रा कम कर दें। दिनभर में एक चम्मच से भी कम नमक लें।
  3. रोजाना पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें।
  4. हफ्ते में कम से कम 150 मिनट कसरत जरूर करें।
  5. अगर मोटापा है, तो वजन कम करने की कोशिश करें।
  6. पेनकिलर दवाइयों का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर मरीज के जोड़ों में लगातार दर्द रहे और पैरों व टखनों में सूजन हो, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। इसके अलावा, अगर मरीज की किडनी की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है, तो भी डॉक्टर से रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए।

निष्कर्ष

eGFR टेस्ट कराना किडनी के मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दरअसल, किडनी की बीमारियों में शुरुआती दौर में लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए eGFR टेस्ट के जरिए क्रोनिक किडनी डिजीज की स्टेज का पता चलता है। टेस्ट के जरिए समय रहते किडनी को फेल होने से बचाया जा सकता है। इसके साथ यह जानना भी जरूरी है कि eGFR सिर्फ एक टेस्ट है। इससे किडनी की बीमारी को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन eGFR टेस्ट कम आने पर यह संकेत मिल सकता है कि भविष्य में न सिर्फ किडनी फेलियर, बल्कि हार्ट और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ सकता है, इसलिए समय रहते इलाज कराना बहुत जरूरी है।

FAQ

  • यूरिक एसिड बढ़ने से कौन सा अंग खराब होता है?

    आमतौर पर, यूरिक एसिड बढ़ने पर किडनी का फिल्टर प्रोसेस धीमा हो जाता है। अगर किडनी काम करना कम हो जाता है, तो इसका असर हार्ट और जोड़ों पर भी पड़ता है।
  • यूरिक एसिड किसकी कमी से बढ़ता है?

    अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, खराब लाइफस्टाइल हो और प्यूरिन से भरपूर फूड्स खाए जाएं, तो यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
  • बॉडी में यूरिक एसिड कितना होना चाहिए?

    शरीर में यूरिक एसिड का पुरुषों में नॉर्मल लेवल 3.4 से 7.0 mg/dL और महिलाओं में 2.4 से 6.0 mg/dL के बीच होना चाहिए। बच्चों में यह 2.0-5.5 mg/dL सामान्य है।
  • क्या eGFR और क्रिएटिनिन टेस्ट एक ही हैं?

    दोनों टेस्ट एक नहीं हैं, लेकिन ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। क्रिएटिनिन ब्लड में मौजूद एक वेस्ट प्रोडक्ट है, जबकि eGFR टेस्ट में कैलकुलेशन के जरिए क्रिएटिनिन के स्तर, उम्र, वजन और लिंग के आधार पर यह बताया जाता है कि किडनी कितनी क्षमता से काम कर रही है। किडनी खराब होने पर क्रिएटिनिन बढ़ता है और eGFR कम होता है।
  • क्या पानी ज्यादा पीने से eGFR स्कोर सुधर सकता है?

    पानी की कमी से eGFR स्कोर खराब दिख सकता है। इसलिए मरीजों को पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन अगर किडनी पहले से ही डैमेज है, तो बहुत ज्यादा पानी पीना भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से पानी की सही मात्रा के बारे में जरूर पूछना चाहिए।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 11, 2026 18:23 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
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    Reviewed By : Dr Vineet Malhotra