Tue Oct 13, 2026 | 09:21 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

किडनी में खराबी होने पर पेशाब में दिख सकते हैं ये 6 बदलाव, डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच?

पेशाब में बदलाव होने का कारण किडनी में परेशानी भी हो सकती है। अगर किसी को पेशाब में बदलाव दिखें, तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। समय पर इलाज कराने से किडनी की बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
किडनी में खराबी होने पर पेशाब में दिख सकते हैं ये 6 बदलाव, डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच?किडनी में खराबी होने पर पेशाब में दिख सकते हैं ये 6 बदलाव, डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच?

किडनी शरीर में मिनरल्स का बैलेंस बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है। किडनी का सबसे जरूरी काम पेशाब के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालना है और जब किडनी में खराबी होती है, तो इसका सबसे पहले असर पेशाब में दिखाई दे सकता है। कई बार लोग पेशाब के बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे किडनी से जुड़ी समस्याओं का देरी से पता चलता है। इस बारे में Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi कहते हैं कि कई बार किडनी में परेशानी होने के बाद भी लक्षण साफ दिखाई नहीं देते, लेकिन अगर पेशाब में बदलाव नजर आते हैं, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

किडनी की बीमारी में पेशाब में आने वाले 6 बदलाव

American Kidney Fund के अनुसार, अगर किडनी में समस्या होती है, तो पेशाब में झाग आना, उसके रंग में बदलाव होना और पेशाब में तेज बदबू आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आमतौर पर पेशाब में झाग नहीं होता या पेशाब का रंग थोड़ा पीला या साफ होता है, लेकिन किडनी की समस्या में झाग बहुत ज्यादा होने लगती हैं और रंग में भी बदलाव आ सकता है।

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “हालांकि, कई बार पेशाब में बदलावों का कारण सिर्फ किडनी की बीमारी होना ही नहीं होता, लेकिन अगर लगातार ये बदलाव बने रहे, तो उसका चेकअप कराना जरूरी है।”

1. पेशाब में बार-बार ज्यादा झाग बनना

Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “किडनी खून को फिल्टर करते समय शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन को आमतौर पर ब्लड में ही बनाए रखती है। अगर किडनी में किसी तरह की खराबी होती है, तो प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है, इसे प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है। इस कंडीशन में पेशाब में झाग बनने लगता है। पेशाब करते हुए कभी-कभार झाग बनना तो सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर बार-बार बहुत ज्यादा झाग बन रहा है और फ्लश करने के बाद भी झाग रह जाए, तो इस पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, सिर्फ पेशाब में झाग देखकर किडनी की समस्या नहीं माना जा सकता है।”

2. पेशाब में खून आना

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “अगर पेशाब गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई दे, तो इसे इग्नोर न करें। अगर पेशाब में खून आने लगे, तो इसे हेमैचूरिया कहते हैं। किडनी की कुछ बीमारियों के अलावा पथरी, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) और पेशाब से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अगर पेशाब का रंग कुछ समय के लिए ही बदला हो, तो यह खान-पान या दवाओं के कारण भी हो सकता है। इसलिए पेशाब में खून आना या कुछ समय के लिए पेशाब का रंग बदलना, इन बातों पर ध्यान देना चाहिए। अगर लगातार पेशाब में खून आए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।”

3. पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा होना

Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, अगर पेशाब पहले से ज्यादा या कम आने लगे, तो इसका कारण शरीर में पानी की कमी, पेशाब के रास्ते में रुकावट और किडनी फंक्शन कम करना हो सकता है। कुछ गंभीर कंडीशन में पेशाब कुछ समय के लिए बंद भी हो सकता है। वहीं, सामान्य से ज्यादा पेशाब आने का कारण डायबिटीज और कुछ दवाएं भी हो सकता है। इसलिए अगर पेशाब की मात्रा में अचानक या लगातार बदलाव आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

Urine changes that signal kidney diseaseUrine changes that signal kidney disease

यह भी पढ़ें- शरीर में खुजली और पेशाब में जलन को न करें नजरअंदाज, क्रिएटिनिन बढ़ने पर दिख सकते हैं ये 5 संकेत

4. पेशाब का रंग गहरा होना

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “आमतौर पर पेशाब का रंग हल्के पीले से गहरे पीले तक हो सकता है। अगर शरीर में पानी की कमी है, तो कुछ समय के लिए पेशाब ज्यादा गहरा हो सकता है। ऐसे में अगर व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में पानी पी ले, तो पेशाब का रंग सामान्य हो सकता है। अगर पेशाब का लगातार चाय या कोला जैसा भूरा दिखाई देता है, तो इसे सिर्फ पानी की कमी न मानें। कुछ मामलों में इसका कारण खून की समस्या, किडनी में सूजन या लिवर से जुड़ी समस्या हो सकती है। अगर पेशाब के रंग के बदलाव के साथ दर्द, बुखार या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।”

5. पेशाब करते समय जलन या दर्द होना

Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, पेशाब करते समय जलन, दर्द या बार-बार पेशाब आने की शिकायत वैसे तो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) से जुड़ी हो सकती है। अगर UTI इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाए, तो मरीज को बुखार, ठंड लगना, पीठ या कमर के एक तरफ दर्द और उल्टी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी कंडीशन में घरेलू नुस्खे न अपनाकर तुरंत इलाज कराएं।

6. रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “रात के समय अगर पेशाब आने के कारण बार-बार नींद टूट रही है या सोने में परेशानी हो रही है, तो इसका कारण सोने से पहले ज्यादा पानी पीना, डायबिटीज, पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या या कुछ दवाएं हो सकती हैं। किडनी की कुछ समस्याओं में भी बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में पेशाब गाढ़ा भी आ सकता है। इसलिए अगर रात में पेशाब करने की समस्या से परेशान है, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।”

किडनी की जांच कब करानी चाहिए?

Dr. Vineet Malhotra ने कहा कि अगर पेशाब में लगातार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर किडनी से जुड़े टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है।

  • यूरिन रूटीन टेस्ट- इसमें पेशाब में खून, प्रोटीन और इंफेक्शन का पता चल सकता है।
  • UACR (यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो) - पेशाब में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की मात्रा को चेक किया जाता है।
  • क्रिएटिनिन और eGFR- खून की जांच के आधार पर किडनी की फिल्टर करने की क्षमता की जांच की जाती है।
  • अल्ट्रासाउंड - अगर डॉक्टर को लगता है, तो किडनी और पेशाब के रास्ते की बनावट देखने के लिए अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जा सकती है।

यह भी पढ़ें- क्या आप भी काम के चक्कर में घंटों रोके रखते हैं पेशाब? डॉक्टर से जानें शरीर को इससे होने वाले 6 नुकसान

निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra सलाह देते हैं कि जिन लोगों को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है और जिनकी किडनी की बीमारी से जुड़ी फैमिली हिस्ट्री है, अगर उन्हें पेशाब से जुड़ी समस्याएं दिखाई देती है, तो उन्हें डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। हालांकि, पेशाब के रंग या झाग से किडनी की बीमारी का पता नहीं चल सकता। इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर टेस्ट कराने जरूरी होते हैं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को बिना लक्षण भी यूरिन टेस्ट कराना चाहिए?

    डायबिटीज और बीपी किडनी खराब होने के दो सबसे बड़े कारण हैं। इन मरीजों में किडनी डैमेज के लक्षण देर से दिखते हैं, इसलिए उन्हें साल में कम से कम एक बार Urine Microalbumin (ACR) टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
  • क्या पेनकिलर्स खाने से पेशाब में बदलाव और किडनी डैमेज हो सकता है?

    बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक पेनकिलर्स लेने से किडनी की फिल्टरिंग क्षमता घटती है, जिससे पेशाब की मात्रा कम हो सकती है और क्रिएटिनिन बढ़ सकता है।

Read Next

→ ब‍िल्‍ली के काटने या पंजा मारने पर क्‍या करें? डॉक्‍टर से जानें सही इलाज

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 13, 2026 19:50 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineet Malhotra