जब हम किसी काम में बहुत ज्यादा वयस्त होते हैं, मीटिंग में बैठे हैं या फिर सफर में साफ शौचालय न मिले, तो अक्सर पेशाब को रोक लेते हैं। ऐसे में कई बार लोग घंटों तक पेशाब रोककर रखते हैं। हालांकि, कभी-कभार ऐसा करना अलग बात है, लेकिन अगर पेशाब रोकना आपकी रोज की आदत बन गई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital कहते हैं कि लंबे समय तक बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर पर असर पड़ सकता है और कुछ मामलों में यूरिनरी रिटेंशन जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
पेशाब रोकने के 5 नुकसान
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि जिन लोगों को बार-बार पेशाब रोकने की आदत है, उनके ब्लैडर पर प्रेशर पड़ सकता है, जिससे कई लोगों को पेशाब लीक होने की समस्या होने लगती है। इसलिए हर बार घंटों तक पेशाब रोकना सेहत को नुकसान पहुंचा संकता है।
1. ब्लैडर पर प्रेशर पड़ना
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “किडनी से आने वाला यूरिन ब्लैडर में जमा होता है। एक सामान्य वयस्क का मूत्राशय लगभग 300 से 500 मिलीलीटर तरल पदार्थ रोक सकता है। जब ब्लैडर भर जाता है, तो शरीर संकेत देता है कि पेशाब करने का समय हो गया है, लेकिन अगर बार-बार पेशाब रोककर रखा जाए, तो ब्लैडर की मांसपेशियां लंबे समय तक खिंची हुई रह सकती है। इससे ब्लैडर की मांसपेशियां (Detrusor Muscles) कमजोर हो सकती है और फिर ब्लैडर को खाली करना मुश्किल हो सकता है।”
2. यूरिनरी रिटेंशन का रिस्क बढ़ना
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि जो लोग लगाातर पेशाब को रोके रखते हैं, उनके ब्लैडर की मांसपेशियां धीरे-धीरे अपनी इलास्टिसिटी खोने लगती है। इस कारण ब्लैडर खाली न होने जैसी समस्या महसूस होने लगती है। इसे यूरिनरी रिटेंशन कहा जाता है। इस कंडीशन में व्यक्ति को पेशाब शुरू करने में परेशानी, बार-बार पेशाब की इच्छा, कम मात्रा में यूरिन निकलना या पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस हो सकता है।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के मुताबिक, पेशाब रोकने के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) होने का रिस्क बढ़ सकता है और इस कारण यूरिनरी रिटेंशन हो सकता है। इस समस्या में पेशाब रुकने या पूरी तरह से बाहर न निकल पाना मुश्किल हो जाता है।
3. UTI का खतरा बढ़ना
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “जब शरीर से पेशाब बाहर निकलता है, तो साथ में यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया भी साथ ही बाहर निकल जाते हैं। जो लोग पेशाब को रोके रखते हैं या ब्लैडर ठीक तरह से खाली नहीं होता, तो पेशाब अंदर जमा रह सकता है और बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं। जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ सकता है।”
BMC Infectious Diseases में प्रकाशित स्टडी पांडिचेरी विश्वविद्यालय की 816 हॉस्टल छात्राओं पर की गई थी। इसमें UTI के कारणों को जानने की कोशिश की गई। इस अध्ययन में पाया गया कि जो लड़कियां पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखती थी, उनमें UTI का खतरा सबसे ज्यादा मिला है। इसका कारण पब्लिक टॉयलेट का साफ न होना, सफर के दौरान या आलस था।
4. किडनी को नुकसान
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “अगर कई सालों से पेशाब रोकने की आदत हो, तो समय के साथ इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है। इसमें किडनी इंफेक्शन होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, क्योंकि जब ब्लैडर पूरी तरह से भर जाता है, तो प्रेशर बढ़ने पर पेशाब वापस ऊपरी किडनी की तरफ जाने लगता है। इसे वेसिकोयूरेटरल रिफ्लक्स' (Vesicoureteral Reflux) कहते हैं। इस संक्रमित यूरिन के ऊपर जाने से किडनी में गंभीर इंफेक्शन हो सकते हैं, लेकिन यह समस्या उन लोगों को हो सकती है, जिन्हें कई सालों से पेशाब रोकने की आदत हो।”
hold your urine for too long
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5. पुरुषों के प्रोस्टेट पर असर पड़ना
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “पुरुषों में पेशाब से जुड़ी परेशानी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रोस्टेट में सूजन भी शामिल है। जब बहुत समय तक लगातार पेशाब रोका जाता है, तो इसका असर प्रोस्टेट पर भी पड़ सकता है।”
NIDDK के मुताबिक, अगर प्रोस्टेट बढ़ा हुआ है, तो पुरुषों को पेशाब बहुत समय तक रोककर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे प्रोस्टेट को गंभीर नुकसान हो सकता है।
6. पेल्विक फ्लोर में दर्द
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि ब्लैडर पर लगातार दबाव बने रहने से पेट के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया की मांसपेशियों में खिंचावऔर ऐंठन शुरू हो सकती है। इस वजह पेशाब करते समय तेज जलन और दर्द हो सकता है। कई बार जलन या दर्द का कारण UTI नहीं होता, बल्कि पेल्विक फ्लोर पर होने वाला दर्द हो सकता है।
पेशाब रोकने की आदत से कैसे करें बचाव?
Dr. Vineet Malhotra सलाह देते हैं कि इसका सबसे आसान तरीका है कि जब भी पेशाब जाने की इच्छा हो, तो उसे बार-बार टालने के बजाय तुरंत चले जाए। इसके अलावा, इन खास बातों का ध्यान रखें, ताकि पेशाब को रोकने की आदत से छुटकारा मिल सके।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- पब्लिक शौचालय में जाने से पहले साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
- महिलाएं पीरियड्स को दौरान पेशाब करते समय हाइजीन का खास ध्यान रखें।
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निष्कर्ष
अगर बार-बार पेशाब करने में परेशानी हो रही है, पेशाब शुरू नहीं हो रहा, ब्लैडर खाली नहीं हो रहा, पेशाब लीक हो रहा है या बार-बार UTI हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें। इसके साथ पेल्विक फ्लोर के दर्द या भारीपन को इग्नोर न करें। Dr. Vineet Malhotra सलाह देते हैं कि इन सभी परेशानियों से बचाव के लिए लोगों को पेशाब रोकने की आदत को खत्म करना होगा। कभी-कभार ऐसा हो सकता है, लेकिन इसे रोजाना की आदत बनाने से किडनी को भी नुकसान हो सकता है।
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FAQ
क्या बहुत देर तक पेशाब रोकने के बाद अचानक खाली करने पर चक्कर या बेहोशी आ सकती है?
इस स्थिति को मिक्चुरिशन सिंड्रोम कहते हैं। जब बहुत देर से भरा हुआ ब्लैडर अचानक खाली होता है, तो पेट का दबाव तेजी से गिरता है और वैगस नस एक्टिवेट हो जाती है। इससे बीपी और हार्ट रेट अचानक घटने से चक्कर या बेहोशी आ सकती है।क्या मूत्राशय में ज्यादा पेशाब रोकने से कभी फट भी सकता है?
हालांकि, सामान्य स्थिति में ऐसा होना दुर्लभ है, क्योंकि शरीर से पेशाब निकलने का मैकेनिज्म होता है। किसी एक्सीडेंट, शराब बहुत ज्यादा पीने या न्यूरोलॉजिकल ब्लॉक की स्थिति में ब्लैडर की दीवार फटने का गंभीर खतरा रहता है।
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Sep 22, 2026 18:41 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra
