Thu Nov 5, 2026 | 11:19 AM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

पानी की कमी ही नहीं, इन कारणों से भी हो सकता है UTI

मूत्र पथ संक्रमण (UTI) सिर्फ पानी की कमी से नहीं होता, बल्कि खराब स्वच्छता, पेशाब रोकना, यौन संबंध और हार्मोनल बदलाव जैसे कई अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में-
पानी की कमी ही नहीं, इन कारणों से भी हो सकता है UTIपानी की कमी ही नहीं, इन कारणों से भी हो सकता है UTI

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) एक आम स्वास्थ्य समस्या है, जो मुख्य रूप से बैक्टीरिया के मूत्राशय या मूत्र नली में जाने के कारण होती है। आमतौर पर कम पानी पीना या डिहाइड्रेशन को UTI होने का एक बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि, कई महिलाएं पानी ज्यादा पीती हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें यूरिन इंफेक्शन का सामना करना पड़ता है। Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant- Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida कहती हैं कि पानी की कमी UTI का एक बड़ा कारण है, लेकिन इसके पीछे अन्य कारण और ट्रिगर्स भी हो सकते हैं, जो UTI का कारण बन सकते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

पानी की कमी के अलावा UTI होने के अन्य कारण

साल 2023 में Pathogens जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, महिलाओं की शारीरिक संरचना, यूरिनरी कैथेटर का इस्तेमाल, यूरिन के रास्ते में रुकावट या पथरी, डायबिटीज, एस्ट्रोजन का कम लेवल और यौन गतिविधि जैसे जोखिम कारक इसके होने की संभावना को काफी बढ़ा देते हैं।

Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार, जब बैक्टीरिया यूरिन के रास्ते के जरिए ब्लैडर या किडनी तक पहुंच जाते हैं तो इंफेक्शन यानी UTI होता है। कम पानी पीने से पेशाब पतला नहीं होता है और ब्लैडर नियमित रूप से पूरी तरह खाली नहीं हो पाता है। इससे बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिल जाता है, लेकिन इसके अलावा कई कारण हो सकते हैं-

1. पर्सनल हाइजीन से जुड़ी आदतें

महिलाओं में शारीरिक रचना के कारण एनस और यूरेथ्रा के बीच की दूरी कम होती है, जिससे बैक्टीरिया का इंफेक्शन बहुत आसानी से फैल सकता है। वॉशरूम जाने के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर सफाई करनी चाहिए। अगर आप पीछे से आगे की तरफ साफ करती हैं तो एनस के बैक्टीरिया यूरेथ्रा तक पहुंच सकते हैं। गंदे सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करने या लंबे समय तक गीले अंडरगारमेंट्स पहने रहने से भी बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।

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2. पेशाब को रोककर रखना

काम में बिजी रहने के कारण कई लोग लंबे समय तक पेशाब रोककर रखते हैं। जब आप ब्लैडर को लंबे समय तक खाली नहीं करतीं तो यूरिन में मौजूद बैक्टीरिया को ज्यादा बढ़ने का पूरा समय मिल जाता है, जिससे इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3. यौन संबंध

शादीशुदा जीवन में हनीमून सिस्टाइटिस बहुत आम होता है। यौन संबंध के दौरान घर्षण के कारण गुप्तांगों के आस-पास के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट के अंदर जा सकते हैं। शारीरिक संबंध बनाने के तुरंत बाद पेशाब करना एक बहुत असरदार तरीका है, जिससे इस रास्ते में पहुंचे बैक्टीरिया पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।

4. हार्मोनल बदलाव

महिलाओं के जीवन में कुछ पड़ाव ऐसे होते हैं, जब हार्मोनल असंतुलन के कारण UTI का खतरा बढ़ जाता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है, जिससे वजाइना के गुड बैक्टीरिया कम होने लगते हैं और इंफेक्शन से लड़ने की शरीर की प्राकृतिक क्षमता कमजोर हो जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय का प्रेशर ब्लैडर पर पड़ता है, जिससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता है और UTI का जोखिम बढ़ जाता है।

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5. कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियां

अगर ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल में नहीं रहता है, तो बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए एकदम अनुकूल माहौल मिलता है। किडनी की पथरी या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को बार-बार UTI होने की शिकायत रहती है।

किन बातों का रखें ध्यान?

Dr. Anju Suryapani का कहना है कि अगर आप बार-बार होने वाले UTI से परेशान हैं तो सिर्फ पानी पीने की आदत के साथ-साथ इन बातों का ध्यान रखें-

  • सूती अंडरगारमेंट्स पहनें- टाइट या सिंथेटिक कपड़े नमी और गर्मी पैदा करने का कारण बन सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं। हमेशा ढीले और सूती कपड़े पहनें।
  • क्रैनबेरी जूस या सप्लीमेंट्स- क्रैनबेरी में ऐसे तत्व होते हैं, जो बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवारों से चिपकने से रोकते हैं।
  • लक्षणों को नजरअंदाज न करें- अगर पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द या धुंधला ब्लड मिला पेशाब दिखना तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन नहीं करना चाहिए।

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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यूरिन इंफेक्शन होने के साथ तेज बुखार, ठंड लगना, पीठ या कमर में तेज दर्द, पेशाब में खून आना या लगातार उल्टी और मतली जैसी समस्या महसूस होने पर इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर नॉर्मल लक्षणों में भी 24 से 48 घंटों के अंदर सुधार न हो तो बिना देर किए डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

निष्कर्ष
UTI से बचाव के लिए सिर्फ पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के साथ पर्सनल हाइजीन और लाइफस्टाइल की अच्छी आदतें अपनाना भी उतना ही जरूरी है। समय पर पेशाब करना, सूती और ढीले कपड़े पहनना और हेल्थ से जुड़े अन्य जोखिम कारकों को कंट्रोल करना फायदेमंद हो सकता है। अगर UTI के लक्षण बार-बार दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें।
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FAQ

  • यूरिन इंफेक्शन कितने दिनों तक रहता है?

    यूरिन इंफेक्शन आमतौर पर एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट शुरू होने के 3 से 5 दिनों के अंदर ठीक हो जाता है, बशर्ते डॉक्टर द्वारा दिए गए कोर्स को पूरा करना जरूरी है।
  • यूरिन इंफेक्शन में क्या परहेज करना चाहिए?

    यूरिन इंफेक्शन होने पर खट्टे फल, ज्यादा मसालेदार भोजन, कैफीन, अल्कोहल और आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले फूड्स खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये मूत्राशय में जलन पैदा कर सकते हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 05, 2026 10:57 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani