Sat Sep 19, 2026 | 07:01 AM IST

Medically Reviewed by Dr Rajasekara C Madarasu , Senior Consultant Nephrologist | Clinical Director & Head of Department - Nephrology & Transplant Services

मानसून में UTI से रहें सावधान, महिलाओं में इन 5 खराब आदतों से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा 

मानसून के द‍िनों में ह्यूम‍िड‍िटी ज्‍यादा होती है, वॉटर इंटेक अक्‍सर कम होता है और हाइजीन का ख्‍याल न रखने से बैक्‍टीर‍ियल ग्रोथ बढ़ सकती है और मह‍िलाओं को यूटीआई हो सकता है। जानें कौन सी खराब आदतें बन सकती हैं कारण?
मानसून में UTI से रहें सावधान, महिलाओं में इन 5 खराब आदतों से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा 
मानसून में UTI से रहें सावधान, महिलाओं में इन 5 खराब आदतों से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा 

इस पेज पर:-


मानसून, गर्मी से भले ही राहत देता है, लेक‍िन इस दौरान कई इंफेक्‍शन और बीमार‍ियों का प्रकोप बढ़ जाता है ज‍िसमें से एक है यूटीआई यानी यूर‍िनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन (UTI)। वैमसे तो यह इंफेक्‍शन पुरुष और मह‍िलाएं दोनों को ही प्रभाव‍ित कर सकता है, लेक‍िन मह‍िलाओं में यूटीआई होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। यूटीआई एक तरह का बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन है। इसका खतरा मानसून सीजन में ज्‍यादा बढ़ जाता है। यूटीआई को नजरअंदाज करने से क‍िडनी इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। मानसून के दौरान मह‍िलाओं में यूटीआई का खतरा बढ़ने के पीछे कई गलत आदतें हो सकती हैं ज‍िनके बारे में आगे बात करेंगे। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Senior Consultant Nephrologist, Clinical director & HOD Of Nephrology And Transplant services at Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

1. पीर‍ियड्स में गीले पैड का इस्‍तेमाल करना

UTI-in-women-during-monsoonUTI-in-women-during-monsoon

Nephrologist Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने बताया क‍ि मानसून के दौरान मह‍िलाएं अगर लंबे समय तक गीले पैड का इस्‍तेमाल करेंगी, तो बैक्‍टीर‍ियल ग्रोथ का खतरा बढ़ सकता है। पीर‍ियड्स के दौरान सैन‍िटरी पैड, कप या टैम्‍पोन का सही ढंग से इस्‍तेमाल करना जरूरी है। पैड को हर 4 से 5 घंटे में कम से कम एक बार जरूर बदलें। साल 2021 में Menopause Review में प्रकाश‍ित एक र‍िव्‍यू आर्टि‍कल के मुताब‍िक, मह‍िलाओं में यूटीआई का खतरा प्रेग्‍नेंसी और मेनोपॉज के बाद ज्‍यादा हो सकता है। इसमें यूटीआई के ज्‍यादातर मामलों के पीछे बैक्‍टीर‍िया और कुछ में वजाइनल इंफेक्‍शन को ज‍िम्‍मेदार बताया गया है।

यह भी पढ़ें- यूटीआई vs क‍िडनी इंफेक्‍शन: दोनों में क्‍या अंतर है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण और इलाज

2. योन‍ि की सफाई में लापरवाही करना

जब मह‍िलाएं योन‍ि की सफाई के दौरान लापरवाई करती हैं, तो बैक्‍टीर‍िया और फंगस दोनों के पनपने का खतरा बढ़ सकता है। योन‍ि की सफाई के ल‍िए हार्श केमिकल वाले प्रोडक्‍ट्स का इस्‍तेमाल करने से बचें। इससे पीएच बैलेंस ब‍िगड़ सकता है और इंफेक्‍शन का खतरा हो सकता है।

3. वजाइना को ड्राई न रखना

जब वजाइना में नमी रहती है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर ज्‍यादा पसीना आता है, तो समय-समय पर अंडरगारमेंट्स को बदलें। साथ ही, कॉटन अंडरगारमेंट्स का इस्‍तेमाल करें। बिना धोए या पूरी तरह ड्राई न क‍िए हुए अंडरगारमेंट्स पहनने से भी बैक्टीरियल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है।वजाइना में नमी ज्‍यादा रहती है और बदबू आती है, तो यह इंफेक्‍शन का लक्षण हो सकता है। ऐसे में डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

4. मेंस्ट्रुअल कप के इस्‍तेमाल में लापरवाही

अगर मेंस्ट्रुअल कप को साफ हाथों से न लगाया या ठीक से साफ न किया जाए, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसका खतरा मानसून में ज्‍यादा होता है क्‍योंक‍ि यह नमी वाली मौसम है और बैक्‍टीर‍िया तेजी से ग्रो करते हैं। हालांक‍ि, इससे सीधे तौर पर यूटीआई नहीं बल्‍क‍ि वजाइनल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है। वजाइनल इंफेक्‍शन होने पर यूटीआई की संभावना बढ़ सकती है इसल‍िए सावधानी बरतें।

5. प्रेग्‍नेंसी में भी हो सकता है यूटीआई

प्रेग्‍नेंसी में भी मह‍िलाओं को यूटीआई की समस्‍या हो सकती है। प्रेग्‍नेंसी में बार-बार यूर‍िन पास करने की इच्‍छा होना आम बात है, ऐसे में अगर जरा भी लापरवाही बरती, तो यूटीआई हो सकता है। यह समस्‍या मानसून में ज्‍यादा बढ़ सकती है। कई बार मह‍िलाएं असुव‍िधा से बचने के ल‍िए यूर‍िन को होल्‍ड करती हैं। इससे इंफेक्‍शन का खतरा रहता है। जब आप टॉयलेट के इस्‍तेमाल करें, तो ध्‍यान रखें क‍ि वह ड्राई और साफ हो।

यह भी पढ़ें- ब्लैडर इंफेक्शन और UTI के लक्षणों में अंतर कैसे पहचानें? जानें डॉक्टर से

यूर‍िन पास करने की तीव्र इच्‍छा या जलन होने पर गौर करें

Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने कहा ''शुरुआती संकेत जैसे यूरि‍न पास करते समय जलन या बहुत जल्‍दी यूर‍िन पास करने की तीव्र इच्‍छा को नजरअंदाज न करें। ये यूटीआई के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें। अगर बार-बार यूटीआई हो रहा है, तो अपनी आदतों पर गौर करें और उसे बदलें। बार-बार यूटीआई होने से आगे चलकर इंफेक्‍शन क‍िडनी तक पहुंचकर गंभीर रूप ले सकता है।''

ई.कोलाई और क्‍लेबस‍िएला न्‍यूमोन‍िया जैसे बैक्‍टीर‍िया हैं ज‍िम्‍मेदार

साल 2021 में International Journal Of Scientific Research में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी में 500 यूर‍िन सैंपल की जांच हुई ज‍िसमें 301 यानी 61 % मरीजों में यूटीआई पाया गया। स्‍टडी में यह भी बताया गया क‍ि यूटीआई वाले सैंपल में ई.कोलाई सबसे प्रमुख बैक्‍टीर‍िया पाया गया। इसके बाद क्लेबसिएला न्यूमोनिया (Klebsiella Pneumoniae) और अन्य बैक्टीरिया पाए गए। स्‍टडी में यूटीआई की दर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्‍यादा देखी गई।

मानसून में यूटीआई से बचने के ट‍िप्‍स

यूटीआई का इलाज करने के ल‍िए डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक का सेवन करने की सलाह देते हैं। यूटीआई से बचने के ल‍िए इन उपायों की मदद ले सकते हैं-

  • मानसून में पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें।
  • अगर पीर‍ियड्स के दौरान पैड ज्‍यादा गीला हो जाए, तो उसे बदल लें।
  • गीले कपड़े पहनने से बचें।
  • ह्यूम‍िड‍िटी वाले वातावरण में ज्‍यादा देर तक रहने से बचें।
  • पर्सनल हाइजीन पर गौर करें। कई बार मानसून में मह‍िलाएं रोज स्‍नान नहीं लेती हैं ज‍िससे गंदगी शरीर से लंबे समय तक च‍िपकी रहती है और इंफेक्‍शन का कारण बनती है इसल‍िए रोज स्‍नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • लंबे समय तक यूर‍िन रोकने से बचें।
  • गंदे वॉशरूम का इस्‍तेमाल करने से बचें।
  • टाइट और स‍िंथेट‍िक मटेर‍ियल के कपड़े पहनने से बचें।
  • वॉशरूम के इस्‍तेमाल के बाद और भोजन से पहले और बाद में हैंड वॉश करना न भूलें।

क‍िन मह‍िलाओं को यूटीआई का खतरा ज्‍यादा होता है?

  • जो मह‍िलाएं गर्भवती हैं।
  • ज‍िन मह‍िलाओं को डायब‍िटीज है।
  • ज‍िन मह‍िलाओं की इम्‍यून‍िटी अध‍िक कमजोर है।
  • पीर‍ियड्स के दौरान भी हाइजीन की कमी से मह‍िलाओं में यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है।

National Kidney Foundation के मुताबि‍क, डायब‍िट‍िक मरीज, क‍िडनी स्‍टोन के मरीज या ज‍िन मरीजों के ब्‍लैडर में लंबे समय से कैथेटर लगा हो, उनमें भी यूटीआई होने का खतरा ज्‍यादा होता है।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, पेर‍िमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्‍ट्रोजन का लेवल कम होता है। एस्ट्रोजन की कमी से यूरिनरी ट्रैक्ट और योनि क्षेत्र में कई बदलाव होते हैं, जो यूटीआई का खतरा बढ़ा सकते हैं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • यूर‍िन पास करते समय तेज जलन होना।
  • यूर‍िन में ब्‍लड आना।
  • बुखार होना।
  • लोअर एब्‍डॉम‍िन एर‍िया में तेज दर्द होना।
  • पीठ के न‍िचले ह‍िस्‍से में दर्द (क‍िडनी इंफेक्‍शन के मामलों में)।
  • उल्‍टी आना या जी म‍िचलाना।

न‍िष्‍कर्ष:

मानसून में मह‍िलाओं को यूटीआई का खतरा ज्‍यादा हो सकता है। इस दौरान पीर‍ियड्स में गीले पैड का इस्‍तेमाल, योन‍ि की सफाई में लापरवाही, वजाइना को ड्राई न रखना, मेंस्ट्रुअल कप के इस्‍तेमाल में लापरवाही और प्रेग्‍नेंसी के दौरान हाइजीन न रखने या यूरि‍न को लंबे समय तक होल्‍ड करने के कारण यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है। यूर‍िन पास करने में जलन हो या ब्‍लड आए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। यूटीआई के इलाज के ल‍िए डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक्‍स का इस्‍तेमाल करते हैं।

FAQ

  • यूटीआई से बचने के ल‍िए मानसून में क‍िन चीजों का सेवन करें?

    यूटीआई से बचने के ल‍िए व‍िटाम‍िन सी और प्रोटीन र‍िच फूड्स खाएं, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, प्रोबायोट‍िक्‍स के ल‍िए दही खाएं और ताजा कोकोनट वॉटर प‍ी सकती हैं।
  • यूटीआई के अलावा पेशाब में जलन क्‍यों होती है?

    अगर पेशाब में जलन हो रही है और यूटीआई नहीं है, तो वजाइनल यीस्‍ट इंफेक्‍शन, बैक्‍टीर‍ियल वेज‍िनोस‍िस, सुगंधित साबुन या इंटीमेट वॉश से एलर्जी या क‍िडनी में पथरी के कारण भी पेशाब में जलन हो सकती है।

Read Next

PMOS में क्यों झड़ने लगते हैं बाल? डॉक्टर से जानें इससे राहत के उपाय

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 04, 2026 16:34 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content