डायबिटीज के मरीजों को ब्लड शुगर कंट्रोल में रखने के लिए इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो अग्न्याशय (Pancreas) में बनता है। इसका काम है ब्लड में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाना। इससे शरीर को एनर्जी मिलती है और ब्लड शुगर लेवल सामान्य रहता है, लेकिन इंसुलिन को गलत ढंग से इस्तेमाल करने से कई बार हाई शुगर लेवल की समस्या हो सकती है। ऐसे में मरीज को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि इंसुलिन लेने के बाद भी शुगर लेवल क्यों बढ़ रहा है? आइए जानते हैं ऐसी 8 गलतियों के बारे में जिससे हर डायबिटिक मरीज को बचना चाहिए। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad से बात की।
साल 2023 में International Journal Of Pharmaceutical Research And Applications में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के मुताबिक, इंसुलिन कई प्रकार के होते हैं, जैसे रैपिड-एक्टिंग, शॉर्ट-एक्टिंग, इंटरमीडिएट-एक्टिंग और लॉन्ग-एक्टिंग। गलत प्रकार का इंसुलिन लेने से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है। कुछ डायबिटीज के मरीज शॉर्ट-एक्टिंग और लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं। इन दोनों को गलत तरीके से मिलाने या गलत क्रम में इंजेक्शन लगाने से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है।
1. शुगर लेवल चेक न करना
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अगर आप समय-समय पर शुगर लेवल चेक नहीं करेंगे, तो इंसुलिन कैसे काम कर रहा है, शरीर की प्रतिक्रिया उसके प्रति कैसी है, इसके बारे में जानकारी नहीं मिलेगी और शुगर लेवल बढ़ सकता है। खाने से पहले, सोने से पहले और बीमार होने पर ब्लड शुगर की जांच करें। इसकी रीडिंग लिखकर रखें या लगातार ब्लड शुगर की निगरानी करने वाली मशीन (CGM) का इस्तेमाल करें। इससे शुगर के लेवल में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
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2. अधिक मात्रा में कार्ब्स का सेवन
- इंसुलिन लेने के बावजूद अगर आप अधिक मात्रा में कार्ब्स और मीठी चीजें खाते हैं, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
- खाने में मौजूद कार्ब्स की मात्रा का ध्यान रखें। मीठे पेय पदार्थ, मैदा से बनी चीजें और बार-बार कुछ न कुछ खाने से बचें।
3. फिजिकल एक्टिविटी न करना
फिजिकल एक्टिविटी शरीर को इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करती हैं। अगर आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में इंसुलिन लेने के बावजूद ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। 30 मिनट तक मध्यम गति वाली एक्सरसाइज करें। एक्सरसाइज से पहले और बाद में ब्लड शुगर की जांच करें।
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4. एक ही जगह पर इंसुलिन इंजेक्शन लगाना
अगर आप बार-बार पेट या शरीर के किसी एक हिस्से में ही इंसुलिन का इंजेक्शन लगाते हैं, तो उस जगह त्वचा के नीचे गांठ हो सकती है। इंसुलिन का इंजेक्शन पेट, जांघ या बांह की अलग-अलग जगहों पर लगाएं। इससे शरीर में इंसुलिन सही तरीके से एब्जॉर्ब होगी। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर इंजेक्शन लगाने की जगह बदलते रहना चाहिए।
5. बार-बार बीमारी होना और स्ट्रेस में रहना
- अगर आपको बुखार, सर्दी-जुकाम, यूरिन इंफेक्शन या किसी अन्य तरह का इंफेक्शन है, तो ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
- शरीर में पानी की कमी, नींद पूरी न होना और तनाव के कारण भी ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। बीमार होने पर भी डॉक्टर की सलाह के बिना इंसुलिन लेना बंद न करें। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जो ब्लड शुगर का लेवल बढ़ा सकते हैं।
6. इंसुलिन की गलत डोज लेना
अगर किसी व्यक्ति को जरूरत के मुकाबले कम इंसुलिन मिल रहा है, तो शुगर लेवल बढ़ सकता है।कई बार समय के साथ शरीर की इंसुलिन की जरूरत भी बदल जाती है। ऐसे में डॉक्टर से डोज चेक करवाना जरूरी है। अगर ब्लड शुगर लगातार बढ़ी हुई है, तो डॉक्टर इंसुलिन की खुराक, उसे लेने का समय या इंसुलिन का प्रकार बदल सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
7. इंसुलिन लेने का समय सही न होना
इंसुलिन के अलग-अलग प्रकार होते हैं और हर प्रकार के काम करने का समय अलग होता है। कुछ इंसुलिन खाने से पहले लिए जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का काम करते हैं। अगर इंसुलिन सही समय पर नहीं लिया जाता है, तो खाने के बाद ब्लड शुगर बढ़ सकती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताए गए समय का पालन करना जरूरी है।
8. इंसुलिन को गलत तरीके से स्टोर करना
इंसुलिन को सही तापमान पर रखना बहुत जरूरी है। बहुत ज्यादा गर्मी, ठंड या सीधी धूप के संपर्क में आने से इंसुलिन का असर कम हो सकता है। अगर आप इंसुलिन को लंबे समय तक गर्म जगह पर रखते हैं या उसे जमा देते हैं, तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए इंसुलिन को उसके पैक पर दिए गए निर्देशों के अनुसार स्टोर करें।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
- उल्टी आने पर
- भ्रम की स्थिति में
- बहुत ज्यादा नींद आने पर
- तेजी से सांस लेना
शरीर में कीटोन्स की मात्रा ज्यादा होना। ये डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) के संकेत हो सकते हैं। यह डायबिटीज की एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है। इन लक्षणों के नजर आने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
निष्कर्ष:
अगर इंसुलिन लेते हैं और फिर भी ब्लड शुगर लेवल ज्यादा है, तो इसके पीछे कुछ गलतियां हो सकती हैं जैसे शुगर लेवल चेक न करना, अधिक मात्रा में कार्ब्स का सेवन, एक ही जगह पर इंसुलिन इंजेक्शन लगाना, बार-बार बीमारी होना और स्ट्रेस में रहना, इंसुलिन की गलत डोज लेना, इंसुलिन लेने का समय सही न होना, इंसुलिन को गलत तरीके से स्टोर करना वगैरह। इन गलतियों के कारण शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है।
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FAQ
क्या हर डायबिटीज मरीज को इंसुलिन लेना पड़ता है?
नहीं, हर डायबिटीज मरीज को इंसुलिन लेने की जरूरत नहीं होती। टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन लेना जरूरी होता है, जबकि टाइप 2 डायबिटीज में डाइट, एक्सरसाइज और दवाओं से शुगर कंट्रोल कर सकते हैं।टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन की क्या भूमिका है?
टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है या बहुत कम बनाता है। इसलिए मरीज को बाहर से इंसुलिन लेना पड़ता है। टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता।
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Nov 04, 2026 18:35 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Vidya Tickoo
