Wed Nov 4, 2026 | 05:24 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhinav Gupta , Consultant Neurologist & Director - Neurology Bhav Neuro Centre, Ghaziabad

स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले क्या करें और किन गलतियों से बचें?

अक्सर स्ट्रोक के मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जैसे पानी पीना, कुछ देर आराम करना आदि। ये सही नहीं है। कुछ ऐसी मिस्टेक्स हैं, जो मरीज की स्थिति को बिगाड़ सकती है। जानें, इसी तरह की अन्य गलतियों के बारे में।
स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले क्या करें और किन गलतियों से बचें?
स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले क्या करें और किन गलतियों से बचें?

स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है और इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। अगर किसी को स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, तो उन्हें जल्द से जल्दी डॉक्टर के पास जाना चाहिए। हालांकि, ज्यादातर लोग स्ट्रोक के संबंध में इतने जागरूक नहीं हैं, जितना कि उन्हें होना चाहिए। इसलिए, अक्सर स्ट्रोक के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से पहले कुछ बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जो कि मरीज के लिए जानलेवा भी हो सकती हैं।

सवाल है, स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले लोग किस तरह की गलतियां करते हैं और उन्हें तुरंत क्या करना चाहिए? इस बारे में ग्रेटर नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Director-Neurology डॉ. अभिनव गुप्ता बताते हैं, "आमतौर पर लोग स्ट्रोक के लक्षणों को अधिक महत्व नहीं देते हैं, जबकि आपको इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषकर, अगर चेहरा एक तरफ झुक रहा है, तो बैठकर इंतजार न करें कि चेहरा अपने आप ठीक हो जाएगा। यह स्थिति बता रही है कि यह एक मेडिकल कंडीशन है और तुरंत डाूक्टर के पास जाएं।"

स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले किन गलतियों से बचें?

Common Mistakes To Avoid During A Stroke EmergencyCommon Mistakes To Avoid During A Stroke Emergency

लक्षणों में सुधार का इंतजार

यह एक बड़ी गलती है, जो अक्सर लोग करते हैं। स्ट्रोक एक मेडिकल कंडीशन है। जब किसी को स्ट्रोक आता है, तो मरीज को जल्द से जल्दी डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत होती है। विशेषकर, जब चेहरा एक ओर झुकने लगे या मिनी स्ट्रोक आ जाए, तो इसमें अपने आप सुधार नहीं हो सकता है। इसलिए इसमें सुधार होने का इंतजार न करें।

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गोल्डन ऑवर मिस करना

Annals of Indian Academy of Neurology में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है, स्ट्रोक के मरीजों के अस्पताल पहुंचने में काफी लंबा समय लगता है। केवल 25.3% मरीज ही गोल्डन ऑवर यानी स्ट्रोक शुरू होने के 4 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच पाते हैं। कहने का मतलब ये है कि मरीजों को इसे मिस नहीं करना चाहिए। 

अकेले डॉक्टर के पास जाना

स्ट्रोक के मरीजों को यह समझना चाहिए कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है। स्ट्रोक आने पर खुद से डॉक्टर के पास जाना संभव नहीं होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी करीबी की मदद लें और उनके साथ अस्पताल पहुंचे। इसके अलावा, मरीज को निजी वाहन से ले जाने के बजाय तुरंत इमरजेंसी एम्बुलेंस में ले जाएं, ताकि रास्ते में भी ऑक्सीजन व मेडिकल सपोर्ट मिले।

खुद से दवा-पानी लेना

स्ट्रोक के मरीजों को खास हिदायत दी जाती है कि वे स्ट्रोक आने पर खुद से दवा, पानी या कुछ भी खाने की चीज न लें। असल में, स्ट्रोक के कारण निगलने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। ऐसे में अगर आप मरीज को कुछ भी खाने-पीने के लिए देते हैं, तो वह गले में फंस सकती है, जिससे मरीज की कंडीशन बिगड़ सकती है। इसी तरह, खुद से दी गई दवाएं स्ट्रोक के मरीज के लिए जानलेवा तक हो सकती है।

सोने की कोशिश करना

स्ट्रोक आने पर खुद से रेस्ट करने की कोशिश करना भी एक बड़ी गलती है। आप ऐसा कभी न करें। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्ट्रोक आने पर सोने की कोशिश करने से उनकी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन बिगड़ सकती है, जो कि सही नहीं है।

कंडीशन को बीपी समझना

हाई बीपी के कारण थकान, कमजोरी और कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होने लगती हैं। यही कारण है कि जिन लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों की जानकारी नहीं है, वे इनका बीपी से जोड़कर देखने लगते हैं। आप ऐसा न करें। स्ट्रोक और हाई बीपी दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। स्ट्रोक का जोखिम महसूस होने पर बीपी की जांच करने, रेस्ट करने आदि में समय न बिताएं और तुरंत अस्पताल पहुंचे।

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स्ट्रोक आने पर तुरंत क्या करें?

Mistakes To Avoid During A Stroke EmergencyMistakes To Avoid During A Stroke Emergency

स्ट्रोक आने पर आपको जरा भी लापरवाही नहीं करनी है। सबसे पहले मरीज को एक करवट लिटाएं (रिकवरी पोजीशन), उसके कपड़े ढीले करें और लक्षण दिखने का सटीक समय नोट करें। अगर लक्षण समझ नहीं आएं, तो  किसी करीबी के साथ अस्पताल पहुंचें। अक्सर लोग अपने लक्षणों को देखते हुए लंबे समय के लिए घर में ही रेस्ट करने लगते हैं, जिससे उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। कई बार ऐसा करने से देर हो जाती है और मरीज की स्थिति हाथ से निकल जाती है।

निष्कर्ष

स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो तब होती है जब ब्रेन के किसी हिस्से में ब्लड की आपूर्ति रुक जाती है या कम हो जाती है, जिससे ब्रेन के टिश्यूज को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में कुछ ही मिनटों के अंदर ब्रेन सेल्स मरने लगती हैं, जिससे ब्रेन डैमेज होने लगता है और मरीज को दीर्घकालिक दिव्यांगता हो सकती है या मृत्यु तक हो सकती है। इसलिए, इस स्थिति लेकर लापरवाही न करें और तुरंत अस्पताल पहुंचे।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • स्ट्रोक के मरीज को अस्पताल ले जाते समय किस पोजीशन में लिटाना चाहिए?

    मरीज को एक करवट (रिकवरी पोजीशन) में लिटाना चाहिए और सिर को लगभग 15-30 डिग्री थोड़ा ऊपर रखना चाहिए ताकि उल्टी होने के बावजूद सांस की नली बंद न हो।
  • अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को मरीज के बारे में सबसे पहली और महत्वपूर्ण जानकारी क्या देनी चाहिए?

    डॉक्टर को सबसे पहले लक्षण सबसे पहले किस सटीक समय (Time of Onset) पर शुरू हुए थे, इसकी जानकारी देनी है। इसी के आधार पर मरीज को सटीक इलाज दिया जाता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 04, 2026 17:08 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Nov 04, 2026 17:08 IST

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