स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज दोनों ही दिमाग से जुड़ी ऐसी गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। कई बार अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर आना, बोलने में परेशानी या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन लोग इन्हें थकान, कमजोरी या ब्लड प्रेशर की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। World Stroke Day 2026 के मौके पर यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई बाधित हो जाती है या दिमाग की किसी ब्लड वैसल्स के फटने से ब्लीडिंग होने लगती है। वहीं, ब्रेन हैमरेज में दिमाग के अंदर या उसके आस-पास खून बहने लगता है।
स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज में क्या अंतर है?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज दोनों स्थितियों के लक्षणों को पहचानना और समय रहते मेडिकल हेल्प लेना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज में क्या अंतर है, इनके लक्षण कैसे पहचानें और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
| तुलना | स्ट्रोक (Stroke) | ब्रेन हैमरेज (Brain Hemorrhage) |
| क्या होता है? | जब दिमाग के किसी हिस्से तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, तो उसे स्ट्रोक कहते हैं। | यह तब होता है जब दिमाग के अंदर या आस-पास की कोई ब्लड वैसेल्स फट जाती है और खून बहने लगता है। |
| प्रकार | यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- 1. इस्केमिक स्ट्रोक यानी थक्का जमना |
यह खुद 'हेमरेजिक स्ट्रोक' का ही एक और गंभीर प्रकार है। |
| मुख्य कारण |
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| मुख्य लक्षण |
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| मरीज की स्थिति | इसमें सेल्स ऑक्सीजन की कमी से तेजी से डैमेज होने लगती हैं। | इसमें खून सीधे दिमाग के टिश्यू पर दबाव डालता है, जिससे स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ सकती है। |
| जांच और इलाज | डॉक्टर स्थिति का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई करते हैं। तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। | सीटी स्कैन के जरिए जांच होती है। इसमें तुरंत सर्जरी या इमरजेंसी केयर की जरूरत पड़ सकती है। |
साल 2024 में Tropical Medicine and Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, म्यांमार के एक बड़े अस्पताल में स्ट्रोक के मामलों पर की गई स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि विकासशील देशों में स्ट्रोक एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। रिसर्च के अनुसार, हैमरेजिक स्ट्रोक (दिमाग में खून बहना) सबसे आम और खतरनाक प्रकार पाया गया।
इस स्टडी में सामने आया कि अस्पताल में भर्ती होने के समय मरीज की कम GCS रेटिंग, अस्पताल में बुखार आना और हैमरेजिक स्ट्रोक होना मरीजों की स्थिति में सुधार न होने के मुख्य जोखिम कारक (Risk factors) थे। इस निष्कर्ष से यह सीख मिलती है कि स्ट्रोक के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना, बेहतर मेडिकल देखभाल और ब्लड प्रेशर जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं के प्रति जन-जागरुकता बढ़ाना बहुत जरूरी है, ताकि इस जानलेवा बीमारी से बचाव किया जा सके।
stroke vs brain hemorrhage
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किन संकेतों में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का चेहरा अचानक टेढ़ा हो जाए, एक हाथ कमजोर पड़ जाए, बोलने में परेशानी हो या अचानक तेज सिरदर्द के साथ उल्टी अथवा बेहोशी हो, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। लक्षण कुछ मिनट में ठीक हो जाएं, तब भी उन्हें नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह मिनी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए और न ही डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन जैसी दवा देनी चाहिए, क्योंकि ब्रेन हैमरेज होने पर कुछ दवाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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निष्कर्ष
स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज में मुख्य अंतर यह है कि स्ट्रोक खून की सप्लाई रुकने या ब्लीडिंग, दोनों कारणों से हो सकता है, जबकि ब्रेन हैमरेज में ब्लड वैसेल्स से खून निकलता है। दोनों स्थितियों में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है। चेहरे का टेढ़ा होना, अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या तेज सिरदर्द जैसे संकेत दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं। सही समय पर इलाज मिलने से गंभीर समस्याओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
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FAQ
क्या कम उम्र के लोगों को स्ट्रोक हो सकता है?
स्ट्रोक किसी भी उम्र में हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ब्लड वैसेल्स से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में भी स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती हैं।क्या तनाव लेने से ब्रेन हैमरेज हो सकता है?
तनाव के दौरान ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। लंबे समय तक तनाव का संबंध हाई ब्लड प्रेशर से भी हो सकता है। हालांकि, केवल तनाव को ब्रेन हैमरेज का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।क्या ब्रेन हैमरेज के मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं?
कुछ मरीज काफी हद तक या पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, जबकि कुछ लोगों को लंबे समय तक फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है। रिकवरी प्रभावित हिस्से, नुकसान की गंभीरता, इलाज शुरू होने के समय पर निर्भर करती है।
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Oct 29, 2026 12:35 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti
