Thu Oct 15, 2026 | 01:40 AM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

Silent Stroke क्या है? इसके कारण, शुरुआती लक्षण, जांच और इलाज डॉक्टर से जानें

Silent Stroke एक ऐसा स्ट्रोक होता है जिसमें साफ-साफ लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। यहां जानें यह क्यों होता है, किन लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है, इसकी पहचान कैसे की जाती है और इलाज क्या है।
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स्ट्रोक एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग तब जानते हैं जब इसके साफ-साफ लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी या अचानक चक्कर आना लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्ट्रोक का एक ऐसा प्रकार भी होता है, जिसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या कई बार बिल्कुल दिखाई नहीं देते? इसे साइलेंट स्ट्रोक (Silent Stroke) कहा जाता है। यह धीरे-धीरे मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसकी जानकारी भी नहीं होती। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से जानिए, साइलेंट स्ट्रोक क्या होता है, इसके कारण, शुरुआती लक्षण, जांच के तरीके और बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

साइलेंट स्ट्रोक क्या है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि साइलेंट स्ट्रोक (Silent Stroke) के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। इसमें दिमाग की छोटी ब्लड वैसेल्स में रुकावट या डैमेज हो सकता है, जिससे दिमाग के किसी हिस्से में नुकसान पहुंचता है, लेकिन व्यक्ति को तुरंत इसका पता नहीं चलता। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, साइलेंट स्ट्रोक कई बार सामान्य थकान, उम्र बढ़ने या छोटी-मोटी भूलने की समस्या जैसा लग सकता है। हालांकि समय के साथ बार-बार होने वाले साइलेंट स्ट्रोक याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और शरीर के बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं।

साइलेंट स्ट्रोक होने के कारण क्या हैं?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि साइलेंट स्ट्रोक का कारण दिमाग तक ब्लड पहुंचाने वाली छोटी नसों में रुकावट आना या उनका डैमेज होना होता है। इसके पीछे कई स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर साइलेंट स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारक माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिमाग की छोटी ब्लड वैसेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा, हार्ट से जुड़ी बीमारियां और बढ़ती उम्र भी इसके खतरे को बढ़ा सकती हैं। जिन लोगों में ब्लड का क्लॉट बनने की संभावना ज्यादा होती है, उनमें भी साइलेंट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा हो सकता है।

साइलेंट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत क्या होते हैं?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, साइलेंट स्ट्रोक में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, इसलिए लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इसके शुरुआती संकेतों में याददाश्त कमजोर होना, फोकस करने में परेशानी, सोचने की स्पीड धीमी होना, अचानक बैलेंस बिगड़ना या चलने में हल्की परेशानी शामिल हो सकती है। कुछ लोगों में चेहरे, हाथ या पैर के किसी हिस्से में हल्की कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो सकता है। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, अगर ऐसे बदलाव अचानक या लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

साल 2016 में American Heart Association Journal में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, जिन बुजुर्गों को कभी स्ट्रोक नहीं आया है, उनमें से लगभग 5 में से 1 व्यक्ति (यानी 18%) के दिमाग में 'साइलेंट ब्रेन इन्फार्क्शन' (SBI) पाया जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां दिमाग में अंदरूनी नुकसान या छोटा स्ट्रोक तो होता है, लेकिन बाहर से कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।

एमआरआई (MRI) के जरिए पता चलने वाला यह साइलेंट इन्फार्क्शन फ्यूचर के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। रिसर्च से सामने आया है कि जिन लोगों में यह पाया जाता है, उन्हें आगे चलकर गंभीर या लक्षण वाले स्ट्रोक (symptomatic stroke) होने का खतरा आम लोगों के मुकाबले दोगुना बढ़ जाता है। भले ही कोई व्यक्ति पूरी तरह ठीक दिख रहा हो, लेकिन अगर एमआरआई में यह समस्या दिखती है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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साइलेंट स्ट्रोक की जांच कैसे की जाती है?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, दिमाग की स्थिति जानने के लिए MRI ब्रेन और CT स्कैन जैसी जांचों की मदद ली जा सकती है। इन जांचों से दिमाग में हुआ छोटा डैमेज या ब्लड फ्लो से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल और हार्ट की जांच भी कर सकते हैं ताकि स्ट्रोक के जोखिम को समझा जा सके।

साइलेंट स्ट्रोक का इलाज और बचाव कैसे करें?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी की सलाह के अनुसार, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखना जरूरी है। कुछ मरीजों को ब्लड के थक्के बनने से रोकने वाली दवाएं दी जा सकती हैं। इसके अलावा हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। नियमित एक्सरसाइज, बैलेंस डाइट, धूम्रपान से दूरी, पर्याप्त नींद और तनाव को कंट्रोल करना स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

साइलेंट स्ट्रोक दिमाग को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और खराब लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। याददाश्त में बदलाव, बैलेंस की समस्या या सोचने-समझने की क्षमता में कमी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर साइलेंट स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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FAQ

  • क्या साइलेंट स्ट्रोक खतरनाक होता है?

    बार-बार होने वाले साइलेंट स्ट्रोक याददाश्त, सोचने की क्षमता और फ्यूचर में बड़े स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
  • क्या कम उम्र में स्ट्रोक संभव है?

    उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य कारकों के कारण युवाओं में भी यह हो सकता है।
  • साइलेंट स्ट्रोक की जांच कैसे होती है?

    डॉक्टर MRI ब्रेन या CT स्कैन जैसी जांचों की मदद से इसकी जांच करते हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 18:38 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti